ई-अटेंडेंस पर शिक्षक संघ का सरकार से टकराव, वेतन कटौती और निलंबन के आदेश वापस लेने की मांग

भोपाल। मध्यप्रदेश में ई-अटेंडेंस को लेकर शिक्षकों और सरकार के बीच विवाद गहराता जा रहा है। मध्यप्रदेश शिक्षक संघ ने लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी उस आदेश का कड़ा विरोध किया है, जिसमें ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं होने पर शिक्षकों के वेतन में कटौती और संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDO) के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई तथा निलंबन का प्रावधान किया गया है।
संघ ने इस संबंध में स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को ज्ञापन सौंपते हुए 1 जुलाई 2026 को जारी आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।


‘तकनीकी खामी की सजा शिक्षकों को क्यों?’


मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. क्षत्रवीर सिंह राठौर, प्रदेश महामंत्री राकेश गुप्ता और प्रांतीय कोषाध्यक्ष विनोद कुमार पुनी ने कहा कि विभाग स्वयं स्वीकार कर चुका है कि प्रदेश के 90 प्रतिशत से अधिक विद्यालयों में ई-अटेंडेंस सफलतापूर्वक दर्ज हो रही है, जबकि अधिकांश जिलों में इसकी सफलता 94 से 95 प्रतिशत तक है।
संघ का कहना है कि शेष मामलों में समस्या तकनीकी कारणों, नेटवर्क बाधा और पोर्टल की दिक्कतों के कारण आती है। ऐसे में तकनीकी खामियों के लिए शिक्षकों का वेतन काटना या अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई करना पूरी तरह अनुचित है।


आदेश वापस लेने की मांग


शिक्षक संघ ने सरकार से मांग की है कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था में आने वाली तकनीकी समस्याओं का पहले समाधान किया जाए और जब तक व्यवस्था पूरी तरह सुचारु नहीं हो जाती, तब तक वेतन कटौती और अनुशासनात्मक कार्रवाई संबंधी आदेशों को तत्काल वापस लिया जाए।


संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षकों की जायज मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा सकती है।


सरकार की नजरें अगले फैसले पर
ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर सरकार पहले ही इसे पारदर्शिता और नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने का माध्यम बता चुकी है। वहीं शिक्षक संगठन का कहना है कि वे ई-अटेंडेंस के विरोध में नहीं हैं, बल्कि तकनीकी त्रुटियों के कारण होने वाली दंडात्मक कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं।


अब इस पूरे मामले में सरकार का अगला कदम प्रदेश के करीब तीन लाख शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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