महू। गंभीर नदी के संरक्षण, पुनर्जीवन और भू-जल स्तर में वृद्धि के उद्देश्य से प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। नदी के प्रमुख जलागम क्षेत्र मानी जाने वाली भमती और रिछा पहाड़ियों के सीमांकन का कार्य आधिकारिक रूप से प्रारंभ कर दिया गया है। इस अभियान के तहत प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम ने क्षेत्र का निरीक्षण कर प्रस्तावित कार्यों की रूपरेखा को अंतिम रूप देने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) महू राकेश परमार, जनपद पंचायत डॉ. अंबेडकर नगर महू के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गिरीराज दुबे तथा तहसीलदार महू विवेक सोनी ने भमती एवं रिछा पहाड़ी क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण किया। अधिकारियों ने गंभीर नदी के जलागम क्षेत्र में मिट्टी एवं जल संरक्षण संबंधी प्रस्तावित कार्ययोजना पर चर्चा करते हुए क्षेत्र में लगभग 10 हजार सतत कंटूर ट्रेंच (सीसीटी) निर्माण की योजना बनाई है।
अधिकारियों के अनुसार सतत कंटूर ट्रेंच निर्माण से वर्षा जल का अधिकतम संचयन संभव होगा, जिससे पानी का बहाव कम होकर भू-जल पुनर्भरण में मदद मिलेगी। इसके साथ ही पूरे क्षेत्र में व्यापक स्तर पर पौधारोपण किया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मिट्टी के कटाव को भी रोका जा सकेगा।
प्रशासन का मानना है कि भमती और रिछा पहाड़ियां गंभीर नदी के लिए प्रमुख जल स्रोत का कार्य करती हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में किए जाने वाले संरक्षण कार्य नदी के प्राकृतिक प्रवाह को मजबूत करने और उसके पुनर्जीवन में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
यह अभियान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के जल संरक्षण और जल संवर्धन संबंधी संकल्पों के अनुरूप संचालित किया जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य गंभीर नदी को पुनः अविरल, निर्मल और जीवनदायिनी स्वरूप प्रदान करना है।
जनपद पंचायत डॉ. अंबेडकर नगर महू ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्राम पंचायतों, सामाजिक संगठनों तथा आम नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय सहभागिता की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि जनभागीदारी के बिना जल संरक्षण का यह महाअभियान पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं कर सकता। सामूहिक प्रयासों से ही गंभीर नदी को पुनर्जीवित कर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सकेगा।