सतना। जिले के सुरांगी गांव में गंभीर कुपोषण से पीड़ित एक मासूम बच्ची की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। राज्य स्तरीय जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) ने जिला एवं ब्लॉक स्तर के छह अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर जवाब तलब किया है।
एनएचएम की अपर मिशन संचालक दिशा प्रणय नागवंशी द्वारा जारी नोटिस में जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) राकेश कर्ष, मझगवां बीएमओ डॉ. रूपेश सोनी, डीसीएम डॉ. ज्ञानेश मिश्रा, बीसीएम देवमुनी पटेल सहित संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
अप्रैल में गंभीर कुपोषित पाए गए थे दोनों बच्चे
जानकारी के अनुसार सुरांगी गांव निवासी विमला प्रजापति के दो बच्चे सुप्रांशी और नैतिक अप्रैल माह में गंभीर कुपोषण (एसएएम) की श्रेणी में चिन्हित किए गए थे। दोनों बच्चों को उपचार के लिए पहले मझगवां अस्पताल और बाद में जिला अस्पताल के पीडियाट्रिक आईसीयू में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान सुप्रांशी की मौत हो गई, जिसके बाद मामला प्रदेश स्तर तक पहुंच गया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए भोपाल से विशेष जांच दल को मौके पर भेजा गया। जांच में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी, उपचार व्यवस्था और कुपोषित बच्चों के फॉलोअप में कई कमियां सामने आईं, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।
जिला अस्पताल के लेबर रूम में मिलीं गंभीर अनियमितताएं
राज्य स्तरीय जांच दल ने 29 और 30 अप्रैल को जिला अस्पताल का भी औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान लेबर रूम में कई गंभीर खामियां सामने आईं। टीम ने पाया कि लेबर रूम में लगे एयर कंडीशनर बंद थे तथा नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए स्थापित न्यूबॉर्न केयर कॉर्नर भी प्रभावी रूप से संचालित नहीं हो रहे थे।
जांच में यह भी सामने आया कि नर्सिंग स्टाफ रेडियंट वॉर्मर जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों के संचालन में पर्याप्त दक्षता नहीं रखता था। कई चिकित्सा उपकरणों तथा वार्ड की दीवारों पर धूल जमी मिली, जिससे साफ-सफाई एवं संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए।
प्रभारी नर्सिंग ऑफिसर को भी नोटिस
जांच रिपोर्ट में दर्ज गंभीर कमियों को देखते हुए जिला अस्पताल के लेबर रूम की प्रभारी नर्सिंग ऑफिसर को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उन्हें 15 दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच दल ने एक ऐसे मामले का भी उल्लेख किया है, जिसमें एक प्रसूता को प्रसव के बाद निर्धारित अवधि से अधिक समय तक, लगभग 48 घंटे, लेबर रूम में रखा गया था। इसे स्वास्थ्य विभाग के निर्धारित प्रोटोकॉल के विपरीत माना गया है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
सुरांगी गांव में कुपोषण से मासूम की मौत और उसके बाद जांच में सामने आई स्वास्थ्य सेवाओं की खामियों ने जिले की चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। अब सभी की निगाहें नोटिस प्राप्त अधिकारियों और कर्मचारियों के जवाब तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा आगे की जाने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कुपोषण जैसे संवेदनशील मामलों में समय पर पहचान, उपचार और नियमित निगरानी अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में जांच में सामने आई लापरवाहियां स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं।