भोपाल। मध्यप्रदेश में जनगणना-2027 के पहले चरण के तहत मकानसूचीकरण एवं मकान गणना (एचएलओ) का फील्ड वर्क निर्धारित समय सीमा में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। एक मई से 30 मई 2026 तक चले इस व्यापक अभियान में प्रदेशभर के 2.40 करोड़ से अधिक मकानों का डिजिटल सर्वेक्षण किया गया। विशेष बात यह रही कि निर्धारित लक्ष्य से अधिक मकानों को कवर करते हुए प्रदेश ने 100.99 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की है।
जनगणना संचालनालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में 1.37 लाख से अधिक हाउस लिस्टिंग ब्लॉकों में 1.24 लाख से ज्यादा प्रगणकों ने घर-घर पहुंचकर जानकारी एकत्र की। सर्वेक्षण के लिए 2 करोड़ 38 लाख 33 हजार मकानों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जबकि वास्तविक रूप से 2 करोड़ 40 लाख 69 हजार से अधिक मकानों की गणना की गई।
जबलपुर में सबसे अधिक घरों में मिले ताले
सर्वेक्षण के दौरान जबलपुर जिले में सबसे अधिक बंद मकान पाए गए। यहां 4 हजार से अधिक घरों में ताले लगे मिले। इसके अलावा इंदौर, भोपाल और छतरपुर में भी बड़ी संख्या में मकान सर्वेक्षण के समय बंद पाए गए।
वहीं, सिंगरौली जिले ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 105.46 प्रतिशत मकानों का सर्वे पूरा किया। इसके बाद इंदौर नगर निगम क्षेत्र ने 104.28 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की। राजगढ़, ग्वालियर, इंदौर और गुना जैसे जिलों ने भी लक्ष्य से अधिक मकानों का सर्वे कर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। राजधानी भोपाल में 7.57 लाख से अधिक मकानों का सर्वेक्षण किया गया।
पूरी तरह डिजिटल रही जनगणना प्रक्रिया
इस बार जनगणना का पहला चरण पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संपन्न कराया गया। प्रगणकों ने मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से मकानों, परिवारों, उपलब्ध सुविधाओं तथा परिसंपत्तियों से संबंधित जानकारी दर्ज की। भारत सरकार द्वारा निर्धारित 33 बिंदुओं पर आंकड़े एकत्र किए गए।
पूरी प्रक्रिया की निगरानी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से की गई, जिससे कार्य की गुणवत्ता, पारदर्शिता और डेटा की सटीकता सुनिश्चित की जा सकी। यह अभियान प्रदेशभर में घर-घर पहुंचकर संचालित किया गया।
15 हजार कर्मचारी रिजर्व में रखे गए
राज्य के 55 जिलों, 449 तहसीलों, 425 नगरीय निकायों और 54,923 गांवों में यह अभियान संचालित किया गया। इसके लिए 1.37 लाख से अधिक मकानसूचीकरण ब्लॉक बनाए गए थे। अभियान में 1.44 लाख से अधिक प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों की तैनाती की गई थी, जबकि लगभग 15 हजार कर्मचारियों को रिजर्व के रूप में रखा गया था।
जनगणना अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों द्वारा दी गई सभी व्यक्तिगत जानकारियां जनगणना अधिनियम-1948 तथा जनगणना नियमावली-1990 के तहत पूरी तरह गोपनीय रखी जाएंगी। इन आंकड़ों का उपयोग केवल नीति निर्माण, विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए किया जाएगा।
फरवरी 2027 में होगा दूसरा चरण
पहले चरण से पहले 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक स्व-गणना अभियान भी संचालित किया गया था। इस दौरान प्रदेश के 7 लाख से अधिक परिवारों ने ऑनलाइन माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कराई।
अब जनगणना-2027 का दूसरा चरण फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा। इस चरण में जनसंख्या गणना का कार्य किया जाएगा, जिसके तहत प्रत्येक परिवार के सदस्यों से विस्तृत सामाजिक, आर्थिक एवं जनसांख्यिकीय जानकारी एकत्र की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि जनगणना के दोनों चरणों से प्राप्त आंकड़े भविष्य की विकास योजनाओं, आधारभूत संरचना निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा अन्य जनकल्याणकारी नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।