इंदौर में भीषण गर्मी के साथ जल संकट लगातार गहराता जा रहा है। स्थिति यह है कि नर्मदा जल की सप्लाई अब कम दबाव से हो रही है, जबकि शहर के करीब 30 से 40 प्रतिशत इलाकों में बोरिंग पूरी तरह सूख चुके हैं। बढ़ती पानी की किल्लत को देखते हुए इंदौर नगर निगम ने भूजल स्तर सुधारने और वर्षा जल संरक्षण के लिए सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
नगर निगम ने अब शहर के सभी आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य कर दिया है। अभियान के पहले चरण में 600 से अधिक बहुमंजिला इमारतों और बड़े भवनों को चिह्नित कर नोटिस जारी किए गए हैं। निगम ने आगामी दो महीनों में 15 हजार भवनों में यह सिस्टम स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है और नागरिकों से इसे स्वेच्छा से अपनाने की अपील की है।
तेजी से गिर रहा भूजल स्तर
शहर की बढ़ती आबादी और पानी की बढ़ती मांग को देखते हुए नर्मदा परियोजना के चौथे चरण का कार्य शुरू किया गया है, लेकिन पानी की वास्तविक उपलब्धता अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। जिम्मेदार अधिकारी भले ही पानी की टंकियां पहले की तरह भरने का दावा कर रहे हों, लेकिन जमीनी हालात इसके विपरीत नजर आ रहे हैं।
शहरी क्षेत्रों में लगातार गिरते भूजल स्तर को रोकने के उद्देश्य से इंदौर नगर निगम ने रेन वाटर हार्वेस्टिंग और वॉटर रिचार्जिंग की व्यापक पहल शुरू की है।
भूजल बोर्ड की रिपोर्ट में दिखा सुधार
भूजल बोर्ड की हालिया रिपोर्ट में निगम के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। आंकड़ों के अनुसार, पानी के दोहन का प्रतिशत 119 से घटकर 117 पर पहुंच गया है। भविष्य में जल संकट के स्थायी समाधान के लिए निगम ने दीर्घकालिक योजना पर काम शुरू कर दिया है।
निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के अनुसार, बड़ी इमारतों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। वर्तमान में करीब 800 भवन मालिकों और मल्टी संचालकों ने सिस्टम लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। निगम ने इस कार्य को पूरा करने के लिए 30 जून तक की समय-सीमा तय की है।
पानी के दुरुपयोग पर सख्ती
गर्मी बढ़ने के साथ घरेलू उपयोग के अलावा निर्माण कार्यों और ऑटोमोबाइल गैरेज में भी पानी का अत्यधिक उपयोग किया जा रहा है। इसे नियंत्रित करने के लिए नगर निगम ने निर्माण कार्यों और सर्विस स्टेशनों पर बोरिंग अथवा नर्मदा जल के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है।
इसके विकल्प के रूप में शहर के 35 स्थानों पर ट्रीटेड वॉटर के हाईडेंट पॉइंट बनाए गए हैं, जहां से व्यावसायिक कार्यों के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा कार धोने या पानी का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ चालानी कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए गए हैं।