धार स्थित भोजशाला मामले में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान जैन समाज की ओर से सलेकचंद जैन की याचिका पर महत्वपूर्ण बहस हुई। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में दावा किया कि वर्तमान भोजशाला परिसर मूल रूप से एक प्राचीन गुरुकुल और जैन मंदिर था, जिसे मुस्लिम शासकों के काल में ध्वस्त कर दिया गया था।
सुनवाई के दौरान वकील ने कहा कि जिस प्रतिमा को हिंदू समाज “वागदेवी” की प्रतिमा मानता है, वह वास्तव में जैन धर्म की देवी अंबिका की प्रतिमा है। उन्होंने तर्क दिया कि जिस प्रकार हिंदू समाज अपने देवी-देवताओं की पूजा करता है, उसी प्रकार जैन धर्मावलंबी अपने 24 तीर्थंकरों की आराधना करते हैं।
वकील ने कोर्ट को बताया कि प्रत्येक जैन तीर्थंकर की अलग पहचान और चिह्न होते हैं। उदाहरण के तौर पर प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ का प्रतीक बैल तथा भगवान महावीर का प्रतीक शेर माना जाता है। उन्होंने कहा कि तीर्थंकरों की पहचान उनकी मुद्रा और प्रतीकों से की जाती है तथा एएसआई की सर्वे रिपोर्ट में वर्णित चिह्न जैन तीर्थंकरों से संबंधित होने की ओर संकेत करते हैं।
2003 के आदेश को भी दी चुनौती
याचिकाकर्ता पक्ष ने 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी चुनौती दी, जिसमें मंगलवार को हिंदुओं को पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय को नमाज की अनुमति दी गई थी। वकील ने दलील दी कि यह व्यवस्था भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25, 26 और 29 के तहत जैन समुदाय को प्राप्त धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन करती है।
कोर्ट को यह भी बताया गया कि संस्कृत विद्वान राजा भोज ने वर्ष 1034 ईस्वी में धार में जैन देवी अंबिका की प्रतिमा स्थापित करवाई थी। बताया गया कि यह प्रतिमा वर्ष 1875 में ब्रिटिश शासन को प्राप्त हुई थी और वर्तमान में ब्रिटिश म्यूजियम में सुरक्षित रखी गई है।
इतिहास और दस्तावेजों का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान माइकल विलेज तथा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मूर्ति प्रसाद तिवारी द्वारा लिखित पुस्तकों का भी उल्लेख किया गया। याचिकाकर्ता पक्ष ने 1881-82 की सरकारी रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि उस रिपोर्ट में यह स्वीकार किया गया था कि धार की कई मस्जिदें जैन अवशेषों और स्तंभों पर निर्मित की गई थीं।
वर्तमान भोजशाला संरचना में मौजूद जैन शैली की वास्तुकला, स्तंभों और जैन क्षेत्रपाल (भैरव) की आकृतियों को भी जैन मंदिर होने के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया गया।
कोर्ट से की यह मांग
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि ब्रिटिश म्यूजियम में रखी जैन देवी अंबिका की प्रतिमा को भारत वापस लाकर भोजशाला में स्थापित किया जाए। साथ ही भोजशाला के वास्तविक स्वरूप को जैन मंदिर के रूप में बहाल कर जैन धर्मावलंबियों को वहां नियमित पूजा-अर्चना की अनुमति प्रदान की जाए।