
माखननगर | इसे कहते हैं आंखों से काजल चुराना—ना ताला टूटा, ना दरवाज़ा खुला, ना कैमरे ने कुछ देखा… और फिर भी चीलाचौंन स्थित एकलव्य एग्रो केयर एवं वेयरहाउस से करीब 10 हजार बोरी मूंग ऐसे गायब हो गई, मानो मूंग नहीं, कोई अदृश्य वस्तु हो। सवाल यह नहीं कि मूंग गई कहाँ, सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा आखिर गई कैसे?
यह कोई जादू का खेल है, कोई प्रशासनिक चमत्कार है या फिर “सिस्टम” नाम की उस अदृश्य मशीन का कमाल
तालों में मूंग असुरक्षित
चीलाचौंन का यह वेयरहाउस कागज़ों में पूरी तरह सुरक्षित बताया जाता है। ताले लगे हैं, रिकॉर्ड दर्ज हैं, जिम्मेदार तय हैं—फिर भी जब विभागीय टीम ने भौतिक सत्यापन किया तो मूंग कागज़ से उड़कर हवा में घुल चुकी थी।
सूत्र बताते हैं कि जब बोरियों की गिनती हुई तो हज़ारों बोरी कम मिलीं। अब सवाल उठता है—
क्या मूंग ने आत्मनिर्णय लेकर पलायन कर लिया?
क्या उसने बेहतर MSP की तलाश में वेयरहाउस छोड़ दिया?
या फिर किसी ने उसे यह भरोसा दिलाया कि “यहां सुरक्षित नहीं हो”?

पंचनामा पहले, नोटिस बाद में
इस पूरे प्रकरण में प्रशासनिक टाइमिंग भी कम दिलचस्प नहीं है।
बताया जाता है कि नोटिस जारी होने से पहले विभागीय अमले ने वेयरहाउस का पंचनामा तैयार कर लिया था। यानी पहले फैसला, फिर प्रक्रिया—जिसे आम भाषा में “पहले सजा, फिर सुनवाई” कहा जाता है।
इसके बाद 13 फरवरी 2026 को एमपी वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉरपोरेशन, शाखा माखननगर ने वेयरहाउस संचालक आरती तोमर को नोटिस जारी कर दिया।
नोटिस में साफ कहा गया—14 फरवरी 2026 तक जवाब दीजिए।
यानी 10 हजार बोरी मूंग गायब है, लेकिन जवाब देने के लिए सिर्फ 24 घंटे।
शायद मूंग जितनी तेजी से गायब हुई, उतनी ही तेजी से जवाब भी आ जाना चाहिए।
वेयरहाउस संचालक का पलटवार
मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब वेयरहाउस संचालक आरती तोमर ने खुद माखननगर थाने में शिकायत दर्ज करा दी।
उनका आरोप है कि:
बिना पूर्व सूचना वेयरहाउस में जांच की गई
पंचनामा बनाकर व्हाट्सएप पर नोटिस भेज दिया गया
पहले ही उन्हें दोषी मान लिया गया
और उनके खिलाफ षड्यंत्र रचा जा रहा है।
यहां सवाल यह नहीं कि आरोप सही हैं या गलत, सवाल यह है कि अगर सब कुछ नियमों के तहत था, तो फिर गोपनीयता क्यों? और अगर नियमों से हटकर हुआ, तो जवाबदेही किसकी?
व्हाट्सएप शासन और डिजिटल पंचनामा
इस पूरे मामले में एक और आधुनिक पहलू सामने आया—
व्हाट्सएप नोटिस संस्कृति।
कभी सरकारी आदेश रजिस्टर्ड डाक से आते थे, फिर ईमेल का दौर आया, और अब…
पंचनामा भी व्हाट्सएप, नोटिस भी व्हाट्सएप।
अगर कल को FIR का स्क्रीनशॉट भेज दिया जाए, तो शायद हैरानी नहीं होनी चाहिए।
“जवाब आएगा, फिर तय होगी कार्रवाई”
मामले पर वासुदेव डावंडे, जिला प्रबंधक, एमपी वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉरपोरेशन ने कहा कि—
“वेयरहाउस संचालक के सामने पुनः गिनती की जाएगी। यदि मूंग कम पाई जाती हैं तो नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई, एफआईआर या अनुबंध निरस्त करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।”
यह बयान सुनकर एक पुराना सवाल फिर उठता है—
जब मूंग गायब हो चुकी है, तो पुनः गिनती क्यों?