माखननगर में ‘अमानक’ मूंग का खेल, क्या सिर्फ संचालकों पर कार्रवाई कर पल्ला झाड़ लेगा MPWLC प्रशासन?

माखननगर : सवाल यह नहीं है कि माखननगर के कनकधारा वेयरहाउस में अमानक (सब-स्टैंडर्ड) मूंग मिली। सवाल यह भी नहीं है कि शिकायत के बाद प्रशासन ने आनन-फानन में वेयरहाउस को सील कर दिया। असली सवाल यह है कि मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन (MPWLC) के वे जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी कहाँ हैं, जिनकी छत्रछाया और सीधी देखरेख में यह पूरा खेल फल-फूल रहा है? जब ताला MPWLC का, चाबी MPWLC के पास, शाखा प्रबंधक और कर्मचारी MPWLC के, तो फिर हर बार घोटाला उजागर होने पर गाज सिर्फ वेयरहाउस संचालकों पर ही क्यों गिरती है? क्या विभागीय कर्मचारियों की जवाबदेही तय नहीं की जानी चाहिए? आखिर अब तक किसी भी जिम्मेदार विभागीय अधिकारी के खिलाफ ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

कनकधारा में ‘मिट्टी वाली मूंग’: खरीदी के वक्त क्यों आँखें मूंदे रहा प्रशासन?

हाल ही में नर्मदापुरम कलेक्टर सोमेश मिश्रा को माखननगर स्थित कनकधारा वेयरहाउस में भंडारित मूंग की गुणवत्ता से जुड़ी गंभीर शिकायतें प्राप्त हुई थीं। शिकायत को संज्ञान में लेते हुए कलेक्टर ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) नर्मदापुरम की अध्यक्षता में जिला आपूर्ति अधिकारी, उप संचालक कृषि और जिला विपणन अधिकारी की एक संयुक्त जांच टीम का गठन किया।

जब इस संयुक्त जांच दल ने कनकधारा वेयरहाउस पर औचक छापा मारा, तो वहाँ का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। वेयरहाउस में भंडारित मूंग के लॉट की जांच के दौरान गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं। एफएक्यू (FAQ) मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए मूंग में निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक मिट्टी पाई गई। हद तो तब हो गई जब निरीक्षण के दौरान कई बोरियां अनाज की जगह पूरी तरह मिट्टी से भरी हुई पाई गईं।

प्रशासनिक टीम ने तत्काल प्रभाव से कनकधारा वेयरहाउस को सील कर दिया और मूंग के नमूने जांच प्रयोगशाला भेज दिए। निरीक्षण के वक्त डिप्टी कलेक्टर सरोज परिहार, एसडीएम देवेंद्र सिंह, उप संचालक कृषि, जिला विपणन अधिकारी, MPWLC के शाखा प्रबंधक, NAFED (नेफेड) के प्रतिनिधि और माखननगर तहसीलदार मौजूद थे। कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने चेतावनी दी है कि किसानों के हितों से खिलवाड़ और शासकीय योजनाओं में लापरवाही करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ एक ‘दिखावा’ बनकर रह जाएगी या फिर भ्रष्ट तंत्र की जड़ों पर प्रहार होगा?

खरीदी के वक्त जो मूंग ‘मानक’ थी, वह गोदाम में जाकर ‘मिट्टी’ कैसे बनी?

सूत्रों की मानें तो कनकधारा वेयरहाउस में रखी मूंग वर्ष 2023-24 के उपार्जन सीजन की बताई जा रही है। अब यहाँ कई तकनीकी और बुनियादी सवाल खड़े होते हैं:

  1. खरीदी समितियों की भूमिका: जब किसानों से मूंग खरीदी जा रही थी, तब प्राथमिक साख सहकारी समितियों और सर्वेयरों ने इस माल को ‘मानक’ घोषित करके पास किया था। उस वक्त मिट्टी से भरी बोरियां जांच टीम को क्यों नहीं दिखीं?
  2. निरीक्षण टीमों का ढोल: उपार्जन के दौरान समय-समय पर जिला स्तर और संभागीय स्तर की जांच टीमें केंद्रों का दौरा करती हैं। क्या उन टीमों की रिपोर्ट सिर्फ कागजी खानापूर्ति थी?
  3. दो साल में अनाज का कायाकल्प? क्या दो साल गोदाम में रखे रहने से साबुत मूंग अपने आप मिट्टी में तब्दील हो जाती है? साफ जाहिर है कि उपार्जन के समय ही मिलीभगत करके घटिया माल गोदामों में डंप किया गया, या फिर बाद में रातों-रात असली मूंग बदलकर मिट्टी भरी बोरियां अंदर कर दी गईं।

इन दोनों ही स्थितियों में MPWLC (मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन) के स्थानीय अमले और शाखा प्रबंधक की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संलिप्तता के बिना ऐसा होना नामुमकिन है।

‘एकलव्य वेयरहाउस’ का जिन्न: जब सील बंद गोदाम से गायब हो गई 4 करोड़ की मूंग!

माखननगर में वेयरहाउसिंग घोटालों की यह कोई पहली कड़ी नहीं है। इससे पहले ‘एकलव्य वेयरहाउस’ का बहुचर्चित मामला पूरे प्रदेश में गूंज चुका है, जिसकी रिपोर्टिंग ‘देनवापोस्ट’ (Denva Post) ने प्रमुखता से की थी।

एकलव्य वेयरहाउस मामले में तो हद ही हो गई थी—सरकारी रिकॉर्ड में ताला बंद था, MPWLC का पहरा था, लेकिन जब जांच हुई तो पता चला कि गोदाम के अंदर से लगभग चार करोड़ रुपये की मूंग गायब हो चुकी थी! सोचने वाली बात है कि कई क्विंटल वजनी अनाज की बोरियां रातों-रात आसमान में तो उड़ नहीं सकतीं। दर्जनों ट्रक माल गोदाम से बाहर निकला और MPWLC के जिला स्तरीय अधिकारियों से लेकर शाखा प्रबंधक तक किसी को भनक तक नहीं लगी? या फिर भनक सबको थी, बस हिस्सेदारी का खेल चल रहा था?

एकलव्य वेयरहाउस कांड के बाद भी सबक नहीं लिया गया। उसमें भी खानापूर्ति की कार्रवाई करके मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की गई, जिसका नतीजा आज कनकधारा वेयरहाउस के रूप में सामने है।

ताला आपका, कर्मचारी आपका… फिर बलि का बकरा सिर्फ संचालक क्यों?

सरकारी नियमों के मुताबिक, एक बार जब उपार्जन का माल वेयरहाउस के अंदर चला जाता है और उस पर MPWLC का ताला लग जाता है, तो उसकी सुरक्षा, रखरखाव और गुणवत्ता की पूरी जिम्मेदारी निगम (MPWLC) की होती है।

  • गोदाम पर ताला MPWLC का होता है।
  • चाबी और कस्टडी MPWLC के कर्मचारी के पास होती है।
  • माल के आवक-जावक की एंट्री MPWLC शाखा प्रबंधक के दस्तखत से होती है।

इसके बावजूद जब भी कोई फर्जीवाड़ा या अमानक माल पकड़ा जाता है, तो पूरी भड़ास वेयरहाउस संचालक पर निकालकर इतिश्री कर ली जाती है। वेयरहाउस सील कर दिया जाता है, एफआईआर (FIR) की जाती है, लेकिन MPWLC का शाखा प्रबंधक और उसके मातहत कर्मचारी मजे से अपनी कुर्सियों पर जमे रहते हैं। क्या वेयरहाउस संचालक बिना MPWLC कर्मचारियों की सहमति के गोदाम के अंदर मिट्टी से भरी बोरियां रखवा सकता है?

अधिकारियों का गोलमोल जवाब: जांच का झुनझुना कब तक?

इस पूरे घटनाक्रम पर जब MPWLC के जिला प्रबंधक वासुदेव दवंडे से सीधी बात की गई, तो उनका वही रटा-रटाया जवाब था— “मामले की जांच चल रही है, जो भी दोषी पाया जाएगा उसे बख्शा नहीं जाएगा।”

लेकिन जब उनसे यह तीखा सवाल पूछा गया कि “क्या इस मामले में MPWLC के संबंधित शाखा प्रबंधक या कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर उन पर निलंबन या विभागीय कार्रवाई की जाएगी?” तो जिला प्रबंधक महोदय स्थिति स्पष्ट करने से बचते नजर आए। विभागीय कर्मचारियों के बचाव में मौन साध लेना यह दर्शाता है कि कुएं में ही भांग घुली हुई है।

क्या खुलेगी बड़ी मछलियों की पोल?

माखननगर क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों से उपार्जन और वेयरहाउसिंग घोटालों का गढ़ बनता जा रहा है। कनकधारा और एकलव्य वेयरहाउस जैसी घटनाएं महज बानगी हैं। यदि निष्पक्ष और गहराई से जांच कराई जाए, तो इसमें उपार्जन समितियों, सर्वेयर कंपनियों, MPWLC के अधिकारियों और बिचौलियों का एक बड़ा गठजोड़ (सिंडिकेट) बेनकाब होगा।

किसानों का सीधा सवाल: कलेक्टर सोमेश मिश्रा की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन जनता यह जानना चाहती है कि क्या कार्रवाई सिर्फ सील लगाने और संचालक को नोटिस देने तक सीमित रहेगी? या फिर MPWLC के उन भ्रष्ट नुमाइंदों पर भी आपराधिक मुकदमे दर्ज होंगे, जिनकी सरपरस्ती में करोड़ों की हेराफेरी और ‘मिट्टी को मूंग’ बनाने का खेल चल रहा है?