परीक्षा नहीं, पास कराने की साजिश चल रही

यह कैसा एग्जाम सिस्टम है, जहाँ पास कराने की होड़ में नकल को ही हथियार बना लिया गया है? पहले बच्चे चोरी-छिपे नकल करते थे, अब खुलेआम शिक्षक नकल करा रहे हैं। सवाल यह नहीं है कि नकल हो रही है—सवाल यह है कि इसे सामान्य बना दिया गया है।
चाहे निजी स्कूल हों या शासकीय, इस दौड़ में कोई पीछे नहीं है। पढ़ाई, मूल्यांकन और ईमानदारी—तीनों को ताक पर रखकर सिर्फ़ रिजल्ट चमकाने की होड़ लगी है। शिक्षक, जिन पर बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी है, वही भविष्य को खोखला करने में जुटे दिखाई दे रहे हैं।

पढ़ने वाले बच्चों के साथ खुला अन्याय

जो बच्चे ईमानदारी से पढ़ाई करते हैं, मेहनत करते हैं, आज वही सबसे ज़्यादा ठगे जा रहे हैं। जब बिना पढ़े, बिना मेहनत के नकल के सहारे पास होना ही सिस्टम का हिस्सा बन जाए, तो होशियार और मेहनती बच्चों का मनोबल टूटना स्वाभाविक है।
यह सीधा-सीधा उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है—और हैरानी की बात यह है कि किसी को चिंता नहीं।

शासकीय स्कूल: ड्यूटी में लापरवाही, रिजल्ट में सख्ती

शासकीय स्कूलों में पूरे सत्र के दौरान पढ़ाई पर ध्यान नहीं दिया गया, लेकिन अब परीक्षा में रिजल्ट बिगड़ने का डर सताने लगा है। नतीजा—नकल को “मैनेजमेंट टूल” बना लिया गया। यानि सालभर पढ़ाने की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ो और परीक्षा में नकल कराकर आंकड़े सुधार लो। क्या यही शिक्षक की भूमिका रह गई है?

निजी स्कूलों पर भी बड़ा सवाल

दूसरी ओर निजी स्कूलों का हाल भी कम चिंताजनक नहीं है। अभिभावक भारी-भरकम फीस देते हैं, बेहतर शिक्षा के भरोसे बच्चों को निजी स्कूल भेजते हैं। लेकिन जब वहां भी बच्चे नकल के सहारे पास हो रहे हों, तो यह फीस किस बात की?
यह सवाल सिर्फ़ अभिभावकों का नहीं, पूरे शिक्षा मॉडल पर सवाल है।

परिपाटी बेहद खतरनाक

शिक्षाविद अशोक शर्मा का साफ़ कहना है कि यह परिपाटी बेहद खतरनाक है। इससे न सिर्फ़ शिक्षा का स्तर गिर रहा है, बल्कि ईमानदारी, परिश्रम और योग्यता जैसी मूलभूत मूल्य प्रणाली भी खत्म होती जा रही है।
नकल से पास हुआ बच्चा आगे चलकर क्या बनेगा—एक योग्य नागरिक या सिर्फ़ डिग्रीधारी नाम?

सिस्टम की चुप्पी सबसे बड़ा अपराध
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस पूरे खेल पर प्रशासनिक चुप्पी है। न सख्त निगरानी, न उदाहरणात्मक कार्रवाई।

जब तक नकल कराने वाले शिक्षकों, लापरवाह प्रबंधन और दिखावटी रिजल्ट सिस्टम पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक यह बीमारी फैलती ही जाएगी।
आज नकल से पास करवा रहे हैं, कल वही बच्चे सिस्टम को खोखला करेंगे।
यह सिर्फ़ परीक्षा की नहीं, पूरे समाज के भविष्य की लड़ाई है।

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