
भोपाल। राजधानी में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां मध्यप्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड पर निजी संपत्ति पर जबरन कब्जा करने के गंभीर आरोप लगे हैं। हैरानी की बात यह है कि शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जबकि विभाग के अधिकारी अपने ही अंदाज में इस कब्जे को जायज ठहराते नजर आ रहे हैं।
दुकान माखननगर नर्मदापुरम के प्रतिष्ठित व्यवसायी डेरिया फैमिली की संयुक्त प्रॉपर्टी है।
ताला तोड़कर कब्जा, फिर शुरू कर दिया एम्पोरियम
जानकारी के मुताबिक, यह दुकान पहले खादी ग्रामोद्योग बोर्ड को किराए पर दी गई थी। वर्ष 2024 तक विभाग हर महीने 4000 रुपए किराया देता रहा, लेकिन बाद में परिस्थितियां बदलीं और दुकान खाली करवा ली गई।
मालिकों ने सुरक्षा के लिहाज से दुकान में ताला डाल दिया, लेकिन आरोप है कि विभाग ने बिना किसी सूचना या अनुमति के ताला हटाकर कब्जा कर लिया। इतना ही नहीं, दुकान का रेनोवेशन कर वहां दोबारा खादी ग्रामोद्योग एम्पोरियम चालू कर दिया गया।
DB स्टार को अधिकारी का अजीव तर्क —‘वारिस आए तो किराया बढ़ा देंगे’
सबसे चौंकाने वाला पक्ष विभाग के अधिकारियों का बयान है। मध्यप्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के एक अधिकारी ने DB स्टार से कहा कि भवन का रेनोवेशन कराया गया है और यदि कोई वैध वारिस सामने आता है, तो किराया बढ़ाकर देने पर विचार किया जा सकता है।
यानी पहले कब्जा, फिर शर्त—यह तर्क खुद विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
शिकायतें हुईं, लेकिन सिस्टम ‘खामोश’
दुकान मालिकों ने मामले की शिकायत भोपाल पुलिस और सीएम हेल्पलाइन में दर्ज कराई, लेकिन अब तक न तो सुनवाई हुई और न ही कोई कार्रवाई।
पीड़ितों का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने भी मामले को गंभीरता से नहीं लिया, जिससे विभाग के हौसले और बुलंद हो गए।
बड़े सवाल, जिनका जवाब जरूरी
क्या कोई शासकीय विभाग इस तरह निजी संपत्ति पर कब्जा कर सकता है?
बिना नोटिस ताला तोड़ना क्या कानून के दायरे में आता है?
शिकायतों के बावजूद प्रशासन चुप क्यों है?