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मध्यप्रदेश के जबलपुर में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है यहां 7 सोसायटी से करीब 7 हजार मीट्रिक टन धान गायब हो गई है। तौल के हिसाब से धान कम पाए जाने के बाद कलेक्टर ने इस मामले में जांच के आदेश देने के साथ ही 23 करोड़ रूपए का भुगतान रोक दिया है। 7 हजार मीट्रिक टन धान का गायब होने में बड़े घोटाले की आशंका जताई जा रही है। अब जांच पूरी होने का इंतजार है और तब ही पता चल पाएगा कि गड़बड़ी कहां और कैसे की गई है?
जबलपुर की 7 सोसायटियों में तौल के हिसाब से 7 हजार मीट्रिक टन धान कम होने की जानकारी मिलते ही कलेक्टर दीपक सक्सेना ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। कलेक्टर ने कहा कि जिन जिन सोसायटियों में धाम कम मिली है उनकी जांच के लिए टीम गठित की गई है। इन सोसायटियों में 2 से 3 सोसायटी ऐसी हैं जिनमें पहले भी गड़बड़ियां सामने आती रही हैं।
जानकारी के मुताबिक जबलपुर जिले में 50 हजार से ज्यादा किसानों से धान की खरीदी की गई थी। ये धान वेयर हाउस और सोसायटियों में रखवाई गई थी। किसानों से जो धान खरीदी गई थी उसके एवज में 876 करोड़ रूपए का भुगतान किया जाना था जिसमें से 853 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। शेष बचा 23 करोड़ रूपए का भुगतान गड़बड़ी सामने आने के बाद कलेक्टर के आदेश पर रोक दिया गया है।