Benefits of Amla for Skin: सर्दियों में आंवला है स्किन के लिए वरदान, बढ़ाता है ग्लो और रोकता है असमय बुढ़ापा

Amla benefits for Skin:

सर्दियों के मौसम में बाजारों में मिलने वाला आंवला स्वाद के साथ-साथ सेहत और त्वचा के लिए भी किसी सुपरफूड से कम नहीं है। आंवले की चटनी हो या कच्चा आंवला, इसका नियमित सेवन इम्यूनिटी बूस्ट करने के साथ-साथ स्किन को हेल्दी और ग्लोइंग बनाता है। विटामिन-C से भरपूर आंवला न सिर्फ शरीर को मजबूत करता है, बल्कि त्वचा को अंदर से पोषण देकर असमय बुढ़ापे को भी रोकने में मदद करता है।

पोषक तत्वों का पावरहाउस है आंवला

आंवले में मौजूद विटामिन-C की मात्रा संतरे की तुलना में कई गुना अधिक होती है। इसके अलावा इसमें फाइबर, कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम, विटामिन A और B, एंटीऑक्सीडेंट्स और पॉलीफेनॉल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यही कारण है कि आंवला सेहत के साथ-साथ स्किन और बालों के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है।

Benefits of Amla for skin

केमिकल-फ्री स्किन केयर के लिए बेस्ट

अगर आप केमिकल युक्त स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहतीं, तो नेचुरल तरीके से त्वचा की देखभाल करना सबसे बेहतर विकल्प है। आंवला को अपनी डाइट में शामिल करके आप बिना ज्यादा समय लगाए नेचुरल तरीके से स्किन को हेल्दी और ग्लोइंग बना सकती हैं।

गहराई से पोषण देता है आंवला

महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स जहां त्वचा को सिर्फ ऊपर से साफ करते हैं, वहीं आंवला स्किन को अंदर से पोषण देता है। इसमें मौजूद विटामिन-C त्वचा में कोलेजन के निर्माण को बढ़ाता है, जिससे स्किन टाइट, स्मूद और जवां बनी रहती है। इसके साथ ही इम्यूनिटी मजबूत होने से कई बीमारियों से भी बचाव होता है।

झुर्रियां और पिग्मेंटेशन से राहत

नियमित रूप से कच्चा आंवला चबाकर खाने से झुर्रियां, झाइयां, पिग्मेंटेशन और ड्राई स्किन जैसी समस्याएं असमय नहीं होतीं। आंवला शरीर को डिटॉक्स करता है, जिससे त्वचा साफ और हेल्दी बनी रहती है। इससे एक्ने, मुहांसे और फोड़े-फुंसियों की समस्या भी कम होती है।

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ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाव

आंवले में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और पॉलीफेनॉल्स त्वचा को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। इससे स्किन डैमेज नहीं होती और नेचुरल ग्लो बरकरार रहता है। खून साफ होने से त्वचा शाइनी और हेल्दी नजर आती है।

हॉर्मोन बैलेंस कर स्किन को रखता है हेल्दी

हॉर्मोनल असंतुलन के कारण अक्सर स्किन से जुड़ी समस्याएं जैसे दाने, एक्ने, मुहांसे और अनचाहे बाल होने लगते हैं। आंवला हॉर्मोन को बैलेंस रखने में मदद करता है, जिससे इन समस्याओं से काफी हद तक बचाव हो सकता है।

Benefits of Amla for skin

कैसे करें आंवले का सेवन

  • सर्दियों में फ्रेश कच्चा आंवला खाना सबसे फायदेमंद

  • गर्मियों में आंवला पाउडर पानी के साथ लेना बेहतर

  • आंवले की चटनी, अचार, जूस आदि भी कर सकते हैं शामिल

नियमित रूप से आंवले का सेवन करने से न सिर्फ आपकी सेहत बेहतर रहेगी, बल्कि त्वचा भी लंबे समय तक जवां, ग्लोइंग और हेल्दी बनी रहेगी।




सर्दियों में ज्यादा चाय पीना सेहत के लिए कितना सही? जानिए आयुर्वेद की चेतावनी और बेहतर विकल्प

जैसे-जैसे सर्दियों का मौसम नजदीक आता है, वैसे-वैसे घरों में चाय का सेवन भी बढ़ने लगता है। ठंड से राहत पाने और शरीर को गर्म रखने के लिए लोग दिन में कई बार चाय पीते हैं। कई लोगों के लिए सुबह की शुरुआत और शाम की थकान बिना चाय के अधूरी लगती है। लेकिन आयुर्वेद सिर्फ स्वाद या तात्कालिक गर्माहट के लिए चाय पीने को पूरी तरह सही नहीं मानता। आयुर्वेद के अनुसार खान-पान हमेशा शरीर के दोष, पाचन शक्ति और मौसम के अनुरूप होना चाहिए। ऐसे में सवाल यह उठता है कि सर्दियों में ज्यादा चाय पीना फायदेमंद है या धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है।

आयुर्वेद चाय के बारे में क्या कहता है

लोकल 18 से बातचीत में डॉ. राजकुमार (आयुष) ने बताया कि सर्दियों में शरीर में कफ दोष स्वाभाविक रूप से बढ़ता है। ठंड का असर पाचन अग्नि पर भी पड़ता है। चाय में मौजूद कैफीन, दूध और चीनी का अधिक सेवन पाचन अग्नि को कमजोर कर सकता है। जब पाचन सही ढंग से काम नहीं करता, तो गैस, एसिडिटी, भारीपन और कब्ज जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
आयुर्वेद के अनुसार चाय ऊपर से शरीर को गर्म महसूस कराती है, लेकिन अंदर से कफ को बढ़ाकर शरीर का संतुलन बिगाड़ सकती है

ज्यादा चाय पीने के नुकसान

अधिक मात्रा में चाय पीने से सर्दी-जुकाम और बलगम की समस्या बढ़ सकती है। खासतौर पर दूध वाली चाय कफ को और ज्यादा बढ़ाती है, जिससे नाक बंद रहना, गले में खराश और खांसी जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
इसके अलावा चाय में मौजूद टैनिन आयरन के अवशोषण को कम करता है। लंबे समय तक ज्यादा चाय पीने से कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है। आयुर्वेद यह भी मानता है कि बार-बार चाय पीने से शरीर उस पर निर्भर हो जाता है और बिना चाय के सिरदर्द, चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

सर्दियों में चाय के बेहतर विकल्प

आयुर्वेद के अनुसार सर्दियों में ऐसे पेय ज्यादा फायदेमंद होते हैं, जो हल्की लेकिन स्थायी गर्माहट दें।

  • अदरक, तुलसी, दालचीनी या सौंठ से बनी हर्बल चाय

  • गुनगुना पानी, जीरा पानी या हल्का काढ़ा

ये न सिर्फ शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं, बल्कि पाचन को मजबूत करते हैं और इम्युनिटी बढ़ाने में भी मददगार होते हैं।

अगर कोई व्यक्ति चाय छोड़ नहीं सकता, तो आयुर्वेद दिन में एक या दो कप से ज्यादा चाय न पीने की सलाह देता है। साथ ही खाली पेट चाय पीने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

सर्दियों में चाय का सीमित सेवन नुकसानदेह नहीं है, लेकिन जरूरत से ज्यादा चाय पीना धीरे-धीरे सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है। आयुर्वेद के अनुसार संतुलन ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है, इसलिए चाय के साथ-साथ स्वास्थ्यवर्धक और प्राकृतिक विकल्पों को अपनाना ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।