Madhya Pradesh News:बांधवगढ़ में बाघ की मौत बनी रहस्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुए चौंकाने वाले खुलासे

उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पनपथा बफर क्षेत्र स्थित खेरवा टोला में एक घर के भीतर मृत मिले नर बाघ की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरे मामले को और अधिक रहस्यमय बना दिया है। 24 मई 2026 को मिले इस बाघ का पोस्टमार्टम 25 मई को तीन वन्यजीव चिकित्सकों के विशेष पैनल द्वारा किया गया। इस दौरान राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के प्रतिनिधि, एसडब्ल्यूएफएच जबलपुर के डायरेक्टर तथा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार बाघ की शारीरिक स्थिति मौत से पहले ही बेहद खराब हो चुकी थी। जांच में उसकी मांसपेशियां पीली और सूखी मिलीं, त्वचा खुरदरी और बेजान दिखाई दी तथा पाचन तंत्र पूरी तरह खाली पाया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि ये संकेत लंबे समय से भूख, कमजोरी अथवा किसी गंभीर आंतरिक बीमारी की ओर इशारा करते हैं।

डार्ट को लेकर उठे नए सवाल

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण और चौंकाने वाला पहलू बाघ के शरीर पर मिले डार्ट के निशान को लेकर सामने आया है। चिकित्सकों ने बाघ के दाहिने कंधे पर डार्ट का निशान मिलने की पुष्टि की, लेकिन वहां किसी प्रकार का रक्तस्राव नहीं पाया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति इस बात का संकेत हो सकती है कि डार्ट बाघ की मृत्यु के बाद लगाया गया था। इस खुलासे के बाद पूरे घटनाक्रम को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। अब यह चर्चा का विषय बन गया है कि बाघ की मौत पहले हुई या रेस्क्यू प्रक्रिया बाद में शुरू की गई।

कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेल्योर से मौत की आशंका

पोस्टमार्टम के दौरान बाघ के विभिन्न महत्वपूर्ण अंगों में कंजेस्टिव और हेमरेजिक परिवर्तन पाए गए, जो रक्त संचार प्रणाली में गंभीर गड़बड़ी की ओर संकेत करते हैं। चिकित्सकों और विशेषज्ञों की प्रारंभिक राय के अनुसार बाघ की मौत कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेल्योर यानी हृदय और श्वसन तंत्र के अचानक काम करना बंद कर देने के कारण हुई हो सकती है।
हालांकि यह केवल प्रारंभिक निष्कर्ष है और अंतिम कारणों की पुष्टि अभी बाकी है।

अंतिम रिपोर्ट का इंतजार

वन विभाग ने अभी तक बाघ की मौत को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष जारी नहीं किया है। पोस्टमार्टम के दौरान लिए गए विभिन्न जैविक नमूनों को बीमारी, आंतरिक संक्रमण, विषाक्तता, तनाव अथवा अन्य संभावित कारणों की जांच के लिए मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में भेजा गया है।

अधिकारियों का कहना है कि प्रयोगशाला रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट रूप से सामने आ सकेगी।

ग्रामीणों में दहशत, सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज

खेरवा टोला में बाघ की मौत के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों में अब भी दहशत का माहौल बना हुआ है। वहीं सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं और अटकलें लगाई जा रही हैं।
वन विभाग ने बताया कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पोस्टमार्टम से लेकर अंतिम संस्कार तक की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई गई है, ताकि भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में प्रमाण उपलब्ध रह सकें।

बड़ा सवाल: आखिर बस्ती तक कैसे पहुंचा जंगल का राजा?

बांधवगढ़ में हुई यह घटना अब केवल एक बाघ की मौत का मामला नहीं रह गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जंगल का राजा कही जाने वाली यह दुर्लभ प्रजाति इतनी कमजोर और बदहाल स्थिति में इंसानी बस्ती तक कैसे पहुंच गई। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना की गहन जांच से जंगल में बाघों के स्वास्थ्य, भोजन उपलब्धता और उनके व्यवहार से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर रोशनी पड़ सकती है।
फिलहाल सभी की निगाहें प्रयोगशाला रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस रहस्यमयी मौत के पीछे की सच्चाई उजागर कर सकती है।




Madhya Pradesh News:जंगल में मिला 15 वर्षीय किशोर का खून से सना शव, हत्या की आशंका से दहला मानपुर क्षेत्र

Umaria जिले के Manpur थाना क्षेत्र में 15 वर्षीय किशोर की संदिग्ध मौत ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। 14 मई से लापता चल रहे किशोर मयंक चौधरी का शव रविवार को सारनिया के जंगल में खून से लथपथ हालत में मिलने के बाद क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल है। शुरुआती परिस्थितियां हत्या की ओर इशारा कर रही हैं, हालांकि पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।

14 मई की शाम से था लापता

जानकारी के अनुसार मयंक चौधरी मूल रूप से Katni जिले के लालनगर कैमोर का निवासी था। वह कुछ दिन पहले अपने रिश्तेदारों के यहां मानपुर घूमने आया हुआ था। परिजनों ने बताया कि 14 मई की शाम करीब 6:30 बजे वह अचानक घर से निकला और फिर वापस नहीं लौटा। काफी देर तक तलाश करने के बाद भी जब उसका कोई सुराग नहीं मिला तो परिजनों ने मानपुर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई।

जंगल में मिला खून से सना शव

गुमशुदगी दर्ज होने के बाद पुलिस और परिजन लगातार किशोर की तलाश में जुटे हुए थे। इसी बीच सारनिया जंगल की ओर गए कुछ ग्रामीणों ने झाड़ियों के बीच एक शव पड़ा देखा। शव के आसपास खून के निशान भी दिखाई दिए, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी।

सूचना मिलते ही मानपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी। जब शव की पहचान कराई गई तो वह लापता किशोर मयंक चौधरी का निकला।

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शव की हालत देखकर सहमे ग्रामीण

मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक शव दो से तीन दिन पुराना प्रतीत हो रहा था। शरीर पर चोट के निशान होने की भी चर्चा है। शव की हालत देखकर ग्रामीण दहशत में आ गए। घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। वहीं मयंक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

हत्या की आशंका, हर पहलू पर जांच

घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। ग्रामीणों के बीच हत्या कर शव जंगल में फेंके जाने की आशंका जताई जा रही है। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

मानपुर थाना प्रभारी मुकेश मस्कुले ने बताया कि सारनिया जंगल से एक शव बरामद हुआ है, जो दो से तीन दिन पुराना प्रतीत हो रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों और चोटों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है।




Umaria News: कलश विसर्जन के बीच मातम, काली नृत्य करते युवक की मंच पर मौत, गांव में शोक

उमरिया। जिले की जनपद पंचायत करकेली अंतर्गत ग्राम पठारी में चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित कलश विसर्जन कार्यक्रम उस समय गम में बदल गया, जब भक्ति और उत्साह के बीच एक युवक की अचानक मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पठारी निवासी 40 वर्षीय रामगरीब कोल धार्मिक आयोजन में काली माता का स्वरूप धारण कर पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर रहे थे। बैंड-बाजों की गूंज, ढोल-नगाड़ों की थाप और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच उनका प्रदर्शन पूरे जोश और आस्था के साथ चल रहा था। लोग उनकी प्रस्तुति देखकर भाव-विभोर हो रहे थे और माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना हुआ था।

इसी दौरान अचानक मंच पर नृत्य करते-करते रामगरीब कोल लड़खड़ाए और देखते ही देखते जमीन पर गिर पड़े। शुरुआत में मौजूद लोगों को लगा कि यह भी उनके अभिनय का हिस्सा है, लेकिन जब वे काफी देर तक नहीं उठे तो वहां अफरा-तफरी मच गई। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने तुरंत उन्हें उठाने और संभालने की कोशिश की, लेकिन तब तक स्थिति गंभीर हो चुकी थी।

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ग्रामीणों के अनुसार उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाने की तैयारी की गई, लेकिन प्रारंभिक जानकारी में ही उनकी मृत्यु की पुष्टि हो गई। डॉक्टरों ने शुरुआती तौर पर हृदयाघात को मौत का संभावित कारण बताया है। घटना के बाद जहां कुछ समय पहले तक भक्ति और उत्साह का माहौल था, वहीं अचानक सन्नाटा पसर गया और कार्यक्रम को बीच में ही रोकना पड़ा।

बताया जा रहा है कि रामगरीब कोल गांव में होने वाले धार्मिक आयोजनों में हमेशा सक्रिय रहते थे और हर वर्ष काली नृत्य की प्रस्तुति देकर लोगों को आकर्षित करते थे। उनकी इस तरह अचानक हुई मौत से परिवार के साथ-साथ पूरा गांव स्तब्ध और दुखी है।

घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग हैरानी के साथ गहरा दुख व्यक्त कर रहे हैं। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि जीवन कितना अनिश्चित है, जहां खुशियों के बीच भी पल भर में सब कुछ बदल सकता है।




Umaria Bandhavgarh Tiger Reserve : गर्मियों में गिद्धों की संख्या बढ़ी, गिद्धों की संख्या 246, 124 घोंसले

उमरिया जिले में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की वादियों में इन दिनों गिद्धों की गूंज सुनाई दे रही है। मंगलवार को यहां ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना के दौरान कुल 246 गिद्धों की मौजूदगी दर्ज की गई, जो जैव विविधता के लिहाज से बेहद सकारात्मक खबर है। साथ ही कुल 124 गिद्धों के घोंसलों की पहचान भी हुई, जो यह दर्शाता है कि यह इलाका गिद्धों के सुरक्षित और अनुकूल आवास के रूप में विकसित हो रहा है।

यह गणना रिजर्व के नौ प्रमुख परिक्षेत्रों ताला, मगधी, खितौली, कल्लवाह, पतौर, पनपथा कोर, पनपथा बफर, मानपुर और धमोखर में की गई। इनमें ताला परिक्षेत्र सबसे खास रहा, जहां सर्वाधिक 139 देशी गिद्ध पाए गए। यहीं की पहाड़ियों में 121 घोंसलों की उपस्थिति ने इसे गिद्धों का मुख्य आश्रय क्षेत्र साबित कर दिया।

गणना के दौरान चार से अधिक गिद्ध प्रजातियों की पहचान की गई, जिनमें देशी गिद्ध, सफेद गिद्ध, सफेद पीठ गिद्ध, राज गिद्ध और चमर गिद्ध प्रमुख हैं। यह विविधता दर्शाती है कि बांधवगढ़ न केवल बाघों के लिए बल्कि संकटग्रस्त पक्षियों के लिए भी एक मजबूत शरण स्थली बनता जा रहा है। क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि इस बार की गणना में वयस्क और अवयस्क दोनों तरह के गिद्ध देखे गए हैं, जो उनकी जनसंख्या में प्राकृतिक वृद्धि का संकेत है। यह संकेत करता है कि यहां की पारिस्थितिकीय व्यवस्था गिद्धों के प्रजनन और जीवन चक्र के लिए उपयुक्त है।

गणना का मुख्य उद्देश्य गिद्धों की संख्या में मौसमी बदलाव को समझना था, ताकि यह जाना जा सके कि तापमान, वर्षा या अन्य मौसमी कारक इनके जीवन पर कोई नकारात्मक प्रभाव तो नहीं डाल रहे। खासकर गर्मी के मौसम में गिद्धों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि उनके लिए जल स्रोत, भोजन और घोंसले बनाने के लिए सुरक्षित स्थान पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।

ज्ञात हो कि गिद्धों की आबादी में विगत वर्षों में भारी गिरावट देखी गई थी, जिसका मुख्य कारण डाइक्लोफेनेक जैसी औषधियों का उपयोग था। ऐसे में बांधवगढ़ में इनकी संख्या में यह वृद्धि संरक्षण प्रयासों की सफलता का परिचायक है। बांधवगढ़ की यह गिद्ध गणना न केवल वैज्ञानिकों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए उत्साहजनक है, बल्कि जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणास्पद कदम भी मानी जा रही है।




Umaria News : बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में चीतल का शिकार करने वाले शिकारी गिरफ्तार, तीन आरोपी अभी भी फरार

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व अंतर्गत खितौली रेंज के छिपियाडॉड क्षेत्र में चीतल के शिकार की एक गंभीर घटना प्रकाश में आई है। वन विभाग की सक्रियता के चलते तीन आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि तीन अन्य आरोपी फरार हैं। विभाग ने उनके खिलाफ तलाश अभियान तेज कर दिया है।

यह घटना खितौली रेंज के आरएफ 380 क्षेत्र, बीट डोभा के जंगल में घटित हुई। पकड़े गए आरोपियों की पहचान गोरेलाल बैगा, राममिलन बैगा और दिनेश बैगा के रूप में हुई है, जो सभी गढ़पुरी गांव के निवासी हैं। आरोप है कि आरोपियों ने क्लच वायर से फंदा बनाकर एक चीतल का शिकार किया और उसे जंगल में ही काटकर उसके मांस को घर ले गए। इस जघन्य कृत्य से वन्यजीव संरक्षण कानून का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है।

वन विभाग को जब घटना की सूचना मिली तो तत्काल एक टीम घटनास्थल पर पहुंची। जांच के दौरान टीम को जंगल में रक्तरंजित ठूंठ, चीतल का सिर और शिकार में इस्तेमाल किया गया क्लच वायर का फंदा मिला। साक्ष्यों के आधार पर वन विभाग ने आरोपियों के खिलाफ वन अपराध प्रकरण क्रमांक 1674/25 के तहत मामला दर्ज किया। गिरफ्तार आरोपियों को 28 अप्रैल को न्यायालय उमरिया में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। फरार तीन अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए वन विभाग की टीम संभावित इलाकों में लगातार दबिश दे रही है। विभाग का कहना है कि जल्द ही शेष आरोपियों को भी पकड़ लिया जाएगा।

इस संपूर्ण कार्रवाई में परिक्षेत्र अधिकारी खितौली एवं पतौर, परिक्षेत्र सहायक गढ़पुरी, बीटगार्ड डोभा, रंछा, गढ़पुरी, उमरिया बकेली सहित अन्य वनकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विभागीय अधिकारियों ने जानकारी दी कि आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाया जा सके।




Umaria News : बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघिन के हमले से वनकर्मी घायल

उमरिया में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के आरएफ 428, बीट पनपथा, रेंज पतौर में रविवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई जब सामूहिक पैदल गश्त के दौरान एक बाघिन ने अचानक हमला कर दिया। झाड़ियों में छिपी बाघिन ने वनकर्मी रामसुहावन चौधरी पर झपट्टा मारा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। तत्काल घायल वनकर्मी को जिला अस्पताल उमरिया में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है।

घटना के बाद गश्त कर रहे अन्य वनकर्मियों को तत्काल उस क्षेत्र से हटा लिया गया। वर्तमान में बाघिन की निगरानी के लिए हाथियों की मदद ली जा रही है, ताकि किसी और अप्रिय घटना को टाला जा सके। यह वही बाघिन है, जिसने कुछ दिन पहले कुशमाहा गांव के दो ग्रामीणों पर भी हमला किया था। उन हमलों के बाद ग्रामीणों ने आक्रोशित होकर पनपथा बैरियर पर जाम लगा दिया था और बाघिन को इलाके से हटाने की मांग की थी। प्रबंधन ने उस समय हाथियों की सहायता से बाघिन को अस्थायी तौर पर खदेड़ दिया था, लेकिन ग्रामीण बाघिन को स्थायी रूप से अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन प्रबंधन ने बाघिन को शिफ्ट करने की अनुमति पीसीसी वाइल्डलाइफ से मांगी थी। इसके साथ ही बाघिन को लगातार 2 से 3 दिनों तक ट्रैक भी किया जा रहा था, ताकि स्थानांतरण के दौरान गलती से किसी अन्य बाघ को न पकड़ा जाए। हालांकि, रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू होने से पहले ही बाघिन ने गश्ती दल पर हमला कर दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में एक बार फिर दहशत का माहौल बन गया है। घायल रामसुहावन चौधरी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के स्थाई वनकर्मी बताए जा रहे हैं, जिनकी स्थिति अभी स्थिर है।

प्रबंधन ने घटना के बाद प्रभावित क्षेत्र में गश्त पर रोक लगा दी है और स्थिति सामान्य होने तक हाथियों के माध्यम से निगरानी जारी रखने का निर्णय लिया है। साथ ही, बाघिन के स्थायी रेस्क्यू एवं सुरक्षित स्थानांतरण के लिए उच्च स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। ग्रामीणों की चिंता को देखते हुए जल्द ही बाघिन को सुरक्षित तरीके से शिफ्ट करने के प्रयास तेज किए जाएंगे, ताकि मानव-बाघ संघर्ष को रोका जा सके और दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।




Umaria News : मोर्चा बाबा गेट के पास घुंघूटी जंगल में रात को लगी आग

उमरिया जिले के पाली तहसील अंतर्गत ग्राम घुनघुटी के जंगलों में बीती रात अचानक आग लग गई। यह आग मोर्चा बाबा फाटक के पास लगी, जिसने जंगल के एक बड़े हिस्से को चपेट में ले लिया। आग लगते ही वन विभाग की टीम हरकत में आई और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया गया। घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार आग पर नियंत्रण पा लिया गया।

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स्थानीय लोगों के अनुसार, रात के समय जंगल से धुआं उठता देखा गया। जैसे-जैसे आग बढ़ती गई, ग्रामीणों में दहशत फैल गई। घुनघुटी और आसपास के गांवों के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और आग बुझाने में जुट गए। वन विभाग को सूचना मिलते ही क्षेत्रीय वन अधिकारी और कर्मचारी दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। आग को फैलने से रोकने के लिए तुरंत फायर ब्रेकर बनाए गए और समन्वित रूप से बुझाने की प्रक्रिया शुरू की गई। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता, तो यह आसपास के गांवों तक फैल सकती थी और वन्यजीवों को भी गंभीर खतरा हो सकता था। आग बुझाने की इस पूरी प्रक्रिया में ग्रामीणों ने अहम भूमिका निभाई। बिना किसी संसाधन के भी उन्होंने साहस और समर्पण से आग बुझाने में मदद की। गांव के युवा, बुजुर्ग और महिलाएं भी देर रात तक आग बुझाने में लगे रहे। यह सामूहिक प्रयास ही था जिसने एक बड़े नुकसान को टाल दिया।

आग लगने के कारणों की जांच जारी

फिलहाल आग लगने के पीछे के कारणों की पुष्टि नहीं हो पाई है। वन विभाग ने जांच शुरू कर दी है। संभावना जताई जा रही है कि गर्मी और सूखे पत्तों के कारण छोटी सी चिंगारी ने विकराल रूप ले लिया हो, हालांकि मानवीय लापरवाही की भी आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।




Umaria News : पाली थाना क्षेत्र में सड़क किनारे जली हुई कार में मिला शव

उमरिया जिले के पाली थाना अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग 43 पर स्थित घुनघुटी चौकी क्षेत्र में शुक्रवार सुबह एक सनसनीखेज घटना सामने आई। JK कॉम्प्लेक्स के पास शहडोल रोड पर सड़क किनारे एक जली हुई कार में शव मिलने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस हरकत में आ गई। पाली थाना प्रभारी मदन लाल मरावी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और क्षेत्र को घेरकर जांच शुरू की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शहडोल से फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया, जिसने घटनास्थल की बारीकी से जांच की। कार से बरामद शव पूरी तरह से झुलस चुका था। शव की स्थिति अत्यंत खराब होने के कारण उसकी पहचान नहीं हो सकी है।

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घटना स्थल पर जांच में जुटी पुलिस

पाली पुलिस इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी एंगल से जांच में जुट गई है। क्या गर्मी के कारण कार में तकनीकी खराबी आ गई, जिससे इंजन में आग लगी और हादसे में व्यक्ति की जान चली गई, या फिर यह किसी सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या है। साथ ही यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कार किसके नाम पर पंजीकृत है और उसका हालिया मूवमेंट क्या रहा है।

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स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की जा रही है, लेकिन अभी तक किसी ने स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि कार कब से वहां खड़ी थी या उसमें कोई व्यक्ति देखा गया था। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि मौत का कारण क्या था। पाली थाना प्रभारी का कहना है कि जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। हालांकि सभी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए पुलिस साक्ष्य जुटा रही है और जल्द ही इस रहस्य से पर्दा उठने की उम्मीद की जा रही है।




Umaria News : नरवर में गेहूं से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली में लगी आग

उमरिया जिले के ग्राम पंचायत पतौर के अंतर्गत आने वाले ग्राम नरवार में एक बड़ा हादसा हो गया। गेहूं से भरी लॉक ट्रैक्टर-ट्रॉली में अचानक आग लग गई। यह हादसा दोपहर के समय हुआ जब ट्रैक्टर-ट्रॉली गेहूं लेकर खेत से लौट रही थी। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरी ट्रॉली जलकर खाक हो गई।
स्थानीय लोगों के अनुसार, ट्रैक्टर-ट्रॉली जैसे ही नरवार गांव की सीमा में पहुंची, वैसे ही उसमें अचानक धुआं उठता दिखा। शुरू में लोगों को लगा कि शायद ट्रैक्टर में तकनीकी खराबी आ गई हो, लेकिन कुछ ही देर में आग की लपटें उठने लगीं और स्थिति बेकाबू हो गई। ग्रामीणों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग ने गेहूं को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया।

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हादसे की जानकारी मिलते ही ग्राम पंचायत के सदस्य और कुछ प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। हालांकि तब तक ट्रॉली पूरी तरह जल चुकी थी और उसमें भरा गेहूं भी राख हो चुका था। ग्रामीणों ने बताया कि अगर समय पर दमकल वाहन पहुंच जाता तो नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था, लेकिन दमकल की अनुपलब्धता ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।

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अभी तक आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल सका है। कुछ लोगों का मानना है कि शॉर्ट सर्किट या किसी चिंगारी की वजह से आग लगी हो सकती है, जबकि अन्य इसे ट्रैक्टर की तकनीकी खराबी मान रहे हैं। ट्रॉली में भरे गेहूं की कीमत लाखों रुपये में बताई जा रही है, जिससे किसान को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।

उमेश सिंह, जिनकी यह ट्रॉली थी, ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने बड़ी मेहनत से यह फसल उगाई थी और इस नुकसान से उनकी आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है, ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके। इस हादसे ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में दमकल और सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमी को उजागर कर दिया है। प्रशासन से ग्रामीणों ने मांग की है कि ऐसे क्षेत्रों में आग से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन और त्वरित सहायता सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को टाला जा सके।




Umaria News : बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघिन ने किया सांभर का शिकार

मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में स्थित विश्वप्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक बेहद रोमांचक और हैरान कर देने वाला दृश्य देखने को मिला, जिसने पर्यटकों को दांतों तले उंगलियां दबाने पर मजबूर कर दिया। रिजर्व के ताला जोन के चक्रधरा क्षेत्र में एक बाघिन ने झाड़ियों से निकलकर नाले में पानी पी रहे सांभर पर झपट्टा मारा और उसे शिकार बना जंगल की ओर चली गई। यह पूरा दृश्य पर्यटकों के कैमरे में कैद हो गया और अब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
बताया जा रहा है कि यह सिद्ध बाबा फीमेल बाघिन थी, जिसकी उम्र करीब सात वर्ष है। यह बाघिन ताला जोन के चक्रधरा क्षेत्र में अक्सर अपने शावकों के साथ देखी जाती है। पर्यटक जब जंगल सफारी के दौरान ताला जोन की प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों का दीदार कर रहे थे, उसी दौरान उन्होंने नाले के पास झाड़ियों में बाघिन को बैठा देखा। नाले में एक झुंड सांभरों का पानी पी रहा था। कुछ ही पलों में बाघिन ने झाड़ियों से छलांग लगाई और तेज रफ्तार से सांभर पर झपट पड़ी। उसने एक सांभर को अपने मजबूत जबड़ों में दबोच लिया और शिकार को लेकर जंगल की ओर रवाना हो गई।

इस अद्भुत और रोमांचक दृश्य को देखकर पर्यटक स्तब्ध रह गए। कई पर्यटकों ने इस घटना का वीडियो बनाया जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस दुर्लभ दृश्य को देखने का सौभाग्य बहुत कम पर्यटकों को मिलता है, और यह उनके लिए जीवनभर की अविस्मरणीय स्मृति बन गया।

गौरतलब है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 165 से अधिक बाघ और बाघिनें हैं। यहां का ताला जोन पर्यटकों के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय है, जहां अक्सर बाघ और अन्य वन्यजीवों की सीडिंग होती रहती हैं। बाघिनों की मौजूदगी और उनके शावकों का प्राकृतिक वातावरण में विचरण पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इस घटना से साफ है कि बांधवगढ़ की जैव विविधता और वन्यजीवों का स्वाभाविक व्यवहार पर्यटकों को रोमांच और आश्चर्य से भर देता है। ऐसी घटनाएं न सिर्फ वन्यजीव संरक्षण के महत्व को दर्शाती हैं, बल्कि लोगों को प्रकृति से जुड़ने का भी अवसर प्रदान करती हैं।