Baba Mahakal : भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल ने चंद्रमा और ॐ मस्तक पर शृंगार किया दिव्य दर्शन…

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में वैशाख शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि मंगलवार पर बाबा महाकाल का विदेशी करंसी से विशेष शृंगार किया गया। इस दौरान भस्म आरती के लिए सुबह चार बजे मंदिर के पट खोले गए। पण्डे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर फलों के रस से बने पंचामृत को अर्पित कर किया। इसके बाद प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट और रुद्राक्ष की माला धारण करवाई गई।

आज के शृंगार की विशेष बात यह रही कि बाबा महाकाल को मस्तक पर चंद्रमा और ॐ से सजाया गया। शृंगार के बाद बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग को महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म रमाई गई और फिर कपूर आरती कर भोग भी लगाया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या मे श्रद्धालु पहुंचे, जिन्होंने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और बाबा महाकाल की भक्ति में लीन होकर जय श्री महाकाल का उद्घोष करने लगे।

श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर में मोबाइल उपयोग प्रतिबंधित

श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा लिए गए निर्णय के क्रम में, सुरक्षा व अन्य कारणों से मन्दिर परिसर में मोबाइल ले जाना, उपयोग करना प्रतिबंधित किया गया है। मंदिर परिसर में धार्मिक परंपरा, शुचिता व पवित्रता के चलते न सिर्फ उपयोग बल्कि मोबाइल रखे जाने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। मोबाइल द्वारा नंदिहाल, गर्भगृह, दर्शन के समय फोटो लेने व वीडियो आदि बनाने से न सिर्फ अन्य यात्रीगण परेशान होते हैं अपितु दर्शन पंक्ति में अनावश्यक रुककर सभी को विलंब भी होता है। दर्शनार्थियों के मोबाइल आदि सुरक्षित रखने के लिए मंदिर के प्रवेश द्वार मानसरोवर भवन, बड़ा गणपति रोड द्वार क्रमांक 04, अवंतिका द्वार क्रमांक 01 पर लॉकर की व्यवस्था है, जिसमे श्रद्धालु सुविधापूर्वक मोबाइल रख कर रसीद प्राप्त करेंगे व दर्शन पश्चात रसीद जमाकर मोबाइल वापस प्राप्त कर सकते हैं। अतःपरिसर में मोबाईल का प्रयोग पूर्णतः प्रतिबंधित है। उपयोग करते पाए जाने पर दण्डात्मक कार्यवाही की जाएगी।

भस्म आरती के पहले हुआ पंचामृत स्नान।

भस्म आरती के पहले हुआ पंचामृत स्नान।

भस्म आरती के पहले हुआ पंचामृत स्नान।

भस्म आरती के पहले हुआ पंचामृत स्नान।




Baba Mahakal : चाँदी का मुकुट धारण किये बाबा महाकाल, दिये दिव्य दर्शन

वैशाख कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर रविवार को विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित समस्त भगवान की प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक के बाद प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया।

इसके बाद कपूर आरती संपन्न कर बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट एवं रुद्राक्ष की माला धारण करवाई गई। आज के विशेष श्रृंगार की विशेषता यह रही कि बाबा महाकाल को मस्तक पर रजत मुकुट अर्पित कर गले में मोगरे की माला पहनाई गई। श्रृंगार उपरांत महानिर्वाणी अखाड़े के पुजारियों द्वारा ज्योतिर्लिंग पर भस्म रमाई गई तथा फिर कपूर आरती कर भोग अर्पित किया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और दिव्य स्वरूप के दर्शन कर ‘जय श्री महाकाल’ के उद्घोष के साथ बाबा की भक्ति में लीन हो गए।

51 कैम्पर पानी दान किए

श्री महाकालेश्वर मंदिर में उज्जैन निवासी भक्त मनीष मीणा ने समाजसेवी पप्पू बौरासी के माध्यम से श्रद्धालुओं के लिए जल वितरण हेतु 51 नग 20 लीटर के पानी के कैम्पर दान किए। मनीष मीणा ने इसी माह श्री महाकालेश्वर मंदिर में 5 लाख रुपये की नकद राशि भी दान की थी। मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने दानदाता का सम्मान कर उन्हें रसीद प्रदान की और धन्यवाद ज्ञापित किया।
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गुजरात के श्रद्धालु ने दान किए 1 लाख 11 हजार 111 रुपये

श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुजरात के सूरत से पधारे भक्त भावेश भाई बरोत ने पुजारी राम शर्मा की प्रेरणा से मंदिर में 1 लाख 11 हजार 111 रुपये की नकद राशि दान की। सहायक प्रशासक प्रतीक द्विवेदी ने दानदाता को सम्मानित कर रसीद प्रदान की और आभार व्यक्त किया।

उल्लेखनीय है कि श्री महाकालेश्वर मंदिर की समस्त व्यवस्थाएं दान के माध्यम से संचालित होती हैं। भक्त अपनी श्रद्धानुसार भगवान महाकाल को नकद राशि, वस्त्र, अन्न आदि भेंट स्वरूप अर्पित करते हैं। मंदिर प्रबंध समिति द्वारा संचालित नि:शुल्क अन्नक्षेत्र और गौशाला में भी श्रद्धालु समय-समय पर अन्नदान करते हैं। अधिकारी, पुजारी एवं कर्मचारी भक्तों को मंदिर में दान के लिए प्रेरित करते रहते हैं।




Ujjain News : भीषण गर्मी में शुरू होगी 118 किलोमीटर लंबी पंचक्रोशी यात्रा

बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में वैशाख माह की प्रचंड गर्मी में पंचक्रोशी यात्रा शुरू होने जा रही है। इस यात्रा की शुरुआत 23 अप्रैल से होगी और यह 28 अप्रैल तक चलेगी। जो देवों के देव महादेव के पांच प्रसिद्ध मंदिरों से होकर गुजरेगी। यह पंचक्रोशी यात्रा 118 किलोमीटर की होगी। भीषण गर्मी की परवाह किए बिना, हजारों भक्त नंगे पैर, सिर पर अपनी आवश्यकता की सामग्री रखकर यह कठिन यात्रा करेंगे। इस दौरान श्रद्धालु भगवान शिव के पांच प्रमुख मंदिरों के दर्शन करेंगे।

पंचक्रोशी यात्रा का इतिहास उज्जैन में वैशाख मास के दौरान होने वाली पंचक्रोशी यात्रा का शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है। जिस प्रकार माघ और कार्तिक मास का धार्मिक महत्व है, उसी प्रकार वैशाख मास में किए गए दान, पुण्य और स्नान का भी विशेष महत्व है। पुराणों में भी वैशाख मास में स्नान के महत्व का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस पवित्र महीने में दान-पुण्य या स्नान नहीं कर पाते हैं, वे इस पंचक्रोशी यात्रा में शामिल होकर अथवा यात्रा के अंतिम पांच दिनों में स्नान करके पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं। यही कारण है कि दूर-दूर से श्रद्धालु इस आध्यात्मिक यात्रा में भाग लेने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।

हालांकि, इस यात्रा की शुरुआत कब हुई, इसका कोई निश्चित उल्लेख नहीं मिलता, लेकिन विद्वानों का मानना है कि यह परंपरा अनादिकाल से चली आ रही है। पंचक्रोशी यात्रा का केंद्र उज्जैन महाकाल की नगरी उज्जैन का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। प्राचीन अवंतिका नगरी चौकोर आकार में बसी हुई है और इसके विभिन्न कोणों पर स्थित शिव मंदिर इसके द्वारपाल माने जाते हैं। पूर्व में पिंगलेश्वर, दक्षिण में कायावरोहणेश्वर, पश्चिम में बिल्वकेश्वर, उत्तर दिशा में दुर्देश्वर और नीलकंठेश्वर महादेव इन पांच प्रमुख मंदिरों की दूरी लगभग 118 किलोमीटर है। पंचक्रोशी यात्रा के दौरान श्रद्धालु इन्हीं पांचों शिव मंदिरों की परिक्रमा करते हैं और पवित्र क्षिप्रा नदी में स्नान करते हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इस यात्रा को पूर्ण करने वाले भक्तों को 33 कोटि देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पांचक्रोशि यात्रा के लिए की गई कुछ ऐसी तैयारी।

यहां से शुरू होगी पंचक्रोशी यात्रा

श्रद्धालुगण नागचंद्रेश्वर मंदिर पटनी बाजार से बल प्राप्त कर यात्रा प्रारंभ कर लखेरवाडी से होते हुए छत्रीचौक, सराफा, कंठाल चौराहा, निजातपुरा, कोयला फाटक चौराहा, उद्योगपुरी, ढांचा भवन, होटल नक्षत्र के सामने, उण्डासा, पिंग्लेश्वर, श्री सिंथेटिक चौराहा, धतरावदा, लालपुर, सेफी नाका चौराहा, शक्करवासा, शनि मंदिर, महावीर तपोभूमि चौराहा, राघौपिपलिया, करोहन, गोंदिया, तालोद, बंबोरा, नलवा चौपाटी, अंबोदिया, नईखेडी, आजमपुरा, सोढंग नाका चौराहा, के.डी.पैलेस, जैथल, आगर रोड पुराना टोलटेक्स, उण्डासा होते हुए पुनः होटल नक्षत्र के सामने से ढांचा भवन, उद्योगपुरी, कोयला फाटक चौराहा, निजातपुरा, कंठाल चौराहा, सराफा, छत्री चौक, नागचंद्रेश्वर मंदिर पर बल वापस कर रामघाट पर स्नान पश्चात यात्रा समाप्त करेंगे।

यातायात व्यवस्था में होगा यह बदलाव

23 अप्रैल 2025 से 27 अप्रैल 2025 तक पंचक्रोशी यात्रा का आयोजन होना है। जिसके तहत यातायात व्यवस्था निम्नानुसार रहेगी। दिनांक 22 अप्रैल से ही श्रद्धालुगण यात्रा मार्ग में यात्रा करने लगते हैं अतः पंचक्रोशी यात्रा मार्ग में निम्नानुसार डायवर्सन रहेगा।

1. जो भारी वाहन एवं अन्य वाहन आगरनाका से मण्डीगेट, पांण्ड्याखेड़ी होकर देवास और इन्दौर की ओर जाना चाहते है वो आगरनाका से उन्हेलनाका साडू माता की बावडी से वाय-पास होकर आस्था गार्डन, त्पोभूमि होकर जा सकेगें। इस मार्ग से इन्दौर, देवास से आगर की ओर जा सकेंगे।

2. जो वाहन देवास से नरवर, नागझिरी होकर उज्जैन की ओर जाना चाहते है वो वाय-पास से त्पोभूमि, प्रशांति धाम चौराहा होकर उज्जैन के लिये जा सकेंगे।

3. पंचक्रोशी यात्रा रूद्धाक्ष होटल शनि मंदिर से त्पोभूमि टर्निंग तक रॉग साइड से जायेगी इसलिये जो यातायात इन्दौर से उज्जैन की ओर जाएगा उसे त्पोभूमि से प्रशांति धाम चौराहा तक रॉग साइड से भेजा जायेगा और इसी मार्ग से प्रशांति धाम से इन्दौर की ओर जाने वाला यातायात भेजा जायेगा। इसलिये वाहन चालक सावधानी पूर्वक वाहन चलायें।

4. पंचक्रोशी यात्रा में जैथल से यात्रा क्रास करेगी इसलिये आगर से आने वाले यातायात को जैथल क्रांसिंग से रॉग साइड उज्जैन की ओर भेजा जायेगा इसी मार्ग से उज्जैन से आगर की ओर जाने वाला यातायात भी गुजरेगा।

5. देवास तरफ से आने वाले भारी वाहन जो बड़नगर बदनावर की ओर जाना चाहते है वो भारी वाहन सीधे बदनावर फोर लेन से होकर जायेगें।




Ujjain News : प्रधानमंत्री आवास योजना की दूसरी किस्त जारी करने की एवज में 20 हजार की रिश्वत लेते सरपंच गिरफ्तार

लोकायुक्त उज्जैन की टीम ने गुरुवार को रतलाम की ग्राम पंचायत इटावा खुर्द के सरपंच घनश्याम कुमावत को गिरफ्तार किया है। आरोपी सरपंच को प्रधानमंत्री आवास योजना की दूसरी किस्त जारी करने के एवज में 20 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है।

लोकायुक्त डीएसपी दिनेश पटेल ने बताया कि फरियादी विनोद डाबी, निवासी ग्राम बिंजाखेड़ी जिला रतलाम द्वारा 15 अप्रैल को लोकायुक्त एसपी उज्जैन अनिल विश्वकर्मा को एक शिकायत दर्ज करवाई गई थी। जिसमें उसने बताया था कि ग्राम इटावा के सरपंच घनश्याम कुमावत द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना की दूसरी किस्त जारी करने के एवज में 20 हजार रुपए रिश्वत की मांग की जा रही है।

सत्यापन में शिकायत सही पाई गई, जिसके बाद एक टीम का गठन किया गया। गुरुवार को टीम रतलाम के ग्राम इटावा खुर्द पहुंची और फरियादी विनोद डाबी को केमिकल लगे रुपए देकर सरपंच के पास भेजा। जैसे ही फरियादी विनोद डाबी ने सरपंच घनश्याम कुमावत को रिश्वत के 20 हजार रुपए उसके निवास पर जाकर दिए, लोकायुक्त टीम ने सरपंच को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। डीएसपी दिनेश पटेल ने बताया कि लोकायुक्त द्वारा आरोपी घनश्याम कुमावत के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच में लिया गया है।

फरियादी विनोद डाबी ने बताया कि ग्राम बिंजाखेड़ी में उसकी मां सुगन बाई के नाम से प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुआ था। जिसकी दूसरी किस्त अपनी मां के खाते में डलवाने के लिए वह सरपंच घनश्याम कुमावत से मिला तो उसके द्वारा 20 हजार रुपए रिश्वत की मांग की गई थी।




Ujjain Mahakal : भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का हुआ चंद्रमा से शृंगार

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर सोमवार तड़के भस्म आरती के दौरान चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर फलों के रस से बने पंचामृत अर्पित किया। इसके बाद प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट और रुद्राक्ष और नोट की माला धारण करवाई गई।

आज के शृंगार की विशेष बात यह रही कि आज भस्मआरती में सोमवार के संयोग पर बाबा महाकाल का त्रिनेत्र और मुंडमाला से शृंगार किया गया और भोग लगाया गया। बाबा के मस्तक पर चंद्रमा से शृंगारित करते हुए फूलों की माला भी धारण करवाई गई। शृंगार के बाद बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग को महानिर्वाणी अखाड़े के द्वारा भस्म रमाई गई और फिर कपूर आरती की गई और भोग भी लगाया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिन्होंने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और बाबा महाकाल की भक्ति में लीन होकर जय श्री महाकाल का उद्घोष करने लगे।

भस्म आरती में त्रिनेत्र और चंद्रमा से सजे बाबा महाकाल, किसी ने ई कार्ट तो किसी ने नगद राशि का द

श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति को ई-कार्ट का आया दान

श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति को केनरा बैंक की ओर से दो ई-कार्ट और श्री महाकाल महालोक में दर्शनार्थियों को छाया 18 केनोपी टेंट भेट की गई। केनरा बैंक की एमडी सत्यनारायण राजू और चैयरमैन विजय रंगन और बैंक की टीम ने श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर श्री महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले दर्शनार्थियों की सुविधा हेतु 2 नग ई-कार्ट और 20 कनोपी टेंट भेंट किए गए। मंदिर प्रबंध समिति की ओर सुरक्षा प्रभारी अनुराग चौबे द्वारा बैंक प्रबंधन का धन्यवाद ज्ञापित कर सम्मान किया गया। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन और श्री महाकाल महालोक के भ्रमण हेतु पधारने वाले वरिष्ठ नागरिक/दिव्यांगजनों के लिए नीलकण्ठ पथ, त्रिवेणी संग्रहालय, नंदी द्वार से श्री महाकालेश्वर में प्रवेश हेतु निर्धारित द्वार तक आवागमन करने के लिए प्रतिक्षालय स्थापित कराए जाकर, प्रतिक्षालय से सतत् ई-कार्ट चलायी जाती है। ज्ञात हो कि श्री महाकालेश्वर मंदिर की सभी व्यवस्थायें दान के माध्यम से ही संचालित होती हैं। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा संचालित नि:शुल्क अन्नक्षेत्र, गौशाला आदि में भी अपनी श्रद्धानुसार अन्न दान भी करते हैं। समय–समय पर मंदिर के अधिकारी/ पुजारी/पुरोहितों/मंदिर प्रबंध समिति सदस्यों व कर्मचारियों के माध्यम से भी भक्तों को मंदिर में दान करने हेतु प्रेरित किया जाता है।

भस्म आरती में त्रिनेत्र और चंद्रमा से सजे बाबा महाकाल, किसी ने ई कार्ट तो किसी ने नगद राशि का द

भस्म आरती में त्रिनेत्र और चंद्रमा से सजे बाबा महाकाल, किसी ने ई कार्ट तो किसी ने नगद राशि का द

एक लाख एक हजार नगद दान किए

श्री महाकालेश्वर मंदिर में झारखंड से पधारे भक्त ने पुरोहित रूपम शर्मा और नवनीत शर्मा की प्रेरणा से श्री महाकालेश्वर भगवान को रुपये एक लाख एक हजार नकद भेंट किए। दानदाता द्वारा गुप्त दान किया गया है और उनकी पहचान नहीं बताने का निवेदन किया है। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से दानदाता को विधिवत रसीद प्रदान कर मंदिर के विरेन्द्र शर्मा और अभिषेक शर्मा द्वारा सम्मान किया गया।




Bhopal News : दिल्ली के लाल किले पर तीन दिवसीय विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन किया जाएगा

अतीत के गौरवशाली इतिहास को जन सामान्य के सामने लाने के लिए दो हजार वर्ष पहले सम्राट विक्रमादित्य द्वारा सुशासन के सिद्धांतों पर स्थापित शासन संचालन व्यवस्था और उनकी कीर्ति पर केंद्रित महानाट्य की प्रस्तुति दिल्ली के लाल किले पर 12-13-14 अप्रैल को होने जा रही है। ये जानकारी दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी। सीएम नई दिल्ली में विक्रमोत्सव अंतर्गत सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के महामंचन के संबंध में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ध्येय वाक्य ‘विरासत से विकास की ओर’ हमारे लिए एक पाथेय की तरह सिद्ध हो रहा है। हम विकास कार्यों में विरासत को महत्वपूर्ण स्थान दे रहे हैं। मध्यप्रदेश सरकार सुशासन को ध्यान में रखते हुए विकास और जनकल्याण की सभी गतिविधियां संचालित कर रही हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य के विराट व्यक्तित्व को सबके सामने लाने के लिए महानाट्य की कल्पना की गई है। उन्होंने कहा कि जब इसका मंचन दिल्ली में 12, 13 और 14 अप्रैल को लाल किले पर होगा तो इसमें हाथी, घोड़ों, पालकी के साथ 250 से ज्यादा कलाकार अभिनय करते नजर आएंगे। महानाट्य में शामिल कलाकार निजी जीवन में अलग-अलग क्षेत्र के प्रोफेशनल्स हैं। महानाट्य में वीर रस समेत सभी रस देखने को मिलेंगे। महानाट्य का मंचन गौरवशाली इतिहास को विश्व के सामने लाने का मध्यप्रदेश सरकार का एक अभिनव प्रयास है। इस कालजयी रचना को सबके सामने रखने में दिल्ली सरकार का भी सहयोग मिल रहा है। इससे पहले हैदराबाद में भी विक्रमादित्य महानाट्य की प्रस्तुति हो चुकी है।

उनके नवाचार और कार्य आज भी हैं प्रासंगिक

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य का शासन काल, सुशासन व्यवस्था का एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करता है। वे एकमात्र ऐसे शासक थे, जिनके जीवन के विविध प्रसंगों से आज भी लोग प्रेरणा लेते हैं। उनके द्वारा किए गए कार्य और नवाचार आज भी प्रासंगिक हैं। वर्तमान में हिजरी और विक्रम संवत प्रचलन में हैं। इसमें विक्रम संवत उदार परंपरा को लेकर चलने वाला संवत है, अर्थात संवत चलाने वाले के लिए शर्त है कि जिसके पास पूरी प्रजा का कर्ज चुकाने का सामर्थ्य हो, वही संवत प्रारंभ कर सकता है। सम्राट विक्रमादित्य ने अपने सुशासन, व्यापार-व्यवसाय को प्रोत्साहन और दूरदृष्टि से यह संभव किया। विक्रमादित्य ने विदेशी शक आक्रांताओं को पराजित कर विक्रम संवत का प्रारंभ 57 ईस्वी पूर्व में किया था।

विक्रम संवत के 60 अलग-अलग प्रकार

विक्रम संवत के 60 अलग-अलग प्रकार के नाम हैं। संवत 2082 को धार्मिक अनुष्ठानों के संकल्प में “सिद्धार्थ” नाम दिया गया है। ये 60 नाम चक्रीकरण में बदलते रहते हैं। विक्रमादित्य का न्याय देश और दुनिया में प्रचारित हुआ। यह सम्वत् भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आधार वाला कालगणना सम्वत् बन गया, जो आज भी प्रचलित है। भारत वर्ष में उज्जयिनी के सार्वभौम सम्राट विक्रमादित्य युग परिवर्तन और नवजागरण की एक महत्वपूर्ण धुरी रहे हैं और उनके द्वारा प्रवर्तित विक्रम सम्वत् हमारी एक अत्यंत मूल्यवान धरोहर है। विक्रम सम्वत् हिंदू समाज का महज एक पर्व या नववर्ष भर नहीं है। विक्रम सम्वत् तथा सम्राट विक्रमादित्य भारतवर्ष के गौरव को, मनोबल को और राष्ट्र की चेतना को जागृत करने का एक उपयुक्त अवसर है। यह पुरातन परंपरा से शक्ति प्राप्त कर भारत को विश्वगुरु के रूप में प्रतिष्ठित करने का एक राष्ट्रव्यापी अभियान है। हमारे प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि “यही समय है, सही समय है…”विश्व में भारत का समय है।

उनके शासन में दिखा नवरत्नों का समूह

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम जानते हैं कि विदेशी आक्रांताओं और उपनिवेशवादी इतिहासकारों ने भारत गौरव तथा ज्ञान संपदा के प्रमाणों, साक्ष्यों, स्थापत्यों के सुनियोजित विनाश का अभियान चलाया। उनके द्वारा हमारी संपदा का विध्वंस किये जाने के प्रमाण लगातार मिलते रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पहली बार सम्राट विक्रमादित्य की शासन व्यवस्था में ही नवरत्नों का समूह देखने को मिलता है। इन नवरत्नों में सभी अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञ थे। उन्होंने सुशासन की व्यवस्था स्थापित की। नवरत्न सभी परिस्थितियों में सुचारू शासन संचालन में सक्षम थे। इसी क्रम में 300 साल पहले शिवाजी महाराज के अष्ट प्रधान की पद्धति में यही व्यवस्था दिखाई देती है। विक्रमादित्य उज्जैन के सार्वभौम सम्राट के रूप में लोक विख्यात हैं। आज विक्रमादित्य के अनेक पुरातत्वीय प्रमाण, लेख, मुद्रा अवशेष प्राप्त हैं।

विक्रमादित्य का मूल नाम साहसांक था

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य की दानशीलता, वीरता और प्रजा के प्रति संवेदनशीलता अद्भुत थी। विक्रम-बेताल पच्चीसी और सिंहासन बत्तीसी की कहानियों में इस प्रकार के कई प्रसंग आते हैं। सम्राट विक्रमादित्य के आदर्शों का सभी शासक अनुसरण करना चाहते थे। विक्रमादित्य का मूल नाम साहसांक था, उन्हें विक्रमादित्य की उपाधि से सुशोभित किया गया, जो उल्टे क्रम को सूत्र में बदल दे, वो विक्रम और जो सूर्य के समान प्रकाशमान रहे वो आदित्य का भाव निहीत था। उज्जयिनी के सार्वभौम सम्राट विक्रमादित्य भारतीय अस्मिता के उज्जवल प्रतीक हैं। वे शक विजेता, सम्वत् प्रवर्तक, वीर, दानी, न्यायप्रिय, प्रजावत्सल, स्तत्व सम्पन्न थे। वे साहित्य, संस्कृति और विज्ञान के उत्प्रेरक रहे।




Ujjain News : शहर की प्रतिष्ठित संस्थाओं में भी अब शराब पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा धार्मिक शहरों में शराबबंदी लागू करने के फैसले का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। खासतौर पर उज्जैन में इस निर्णय का सख्ती से पालन शुरू हो गया है। शहर की प्रतिष्ठित संस्थाओं में भी अब शराब पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है।
उज्जैन नगर निगम सीमा को पूरी तरह से शराब मुक्त घोषित कर दिया गया है। इस फैसले के तहत शहर में स्थित 17 शराब दुकानों पर ताले लगा दिए गए हैं। साथ ही, शहर के सभी बार भी बंद कर दिए गए हैं। टूरिज्म विभाग के अधीन आने वाली होटलों में भी अब शराब नहीं परोसी जाएगी। इसमें फ्रीगंज स्थित होटल शिप्रा और तीन बत्ती चौराहे की होटल उज्जयिनी शामिल हैं। इन दोनों होटलों में संचालित बार अब पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं।

इस निर्णय का असर शहर के प्रतिष्ठित माधव क्लब पर भी पड़ा है। लगभग सौ साल पुराना यह क्लब निजी संस्था है, जिसके अध्यक्ष पदेन संभागायुक्त होते हैं, जबकि उपाध्यक्ष जिला कलेक्टर। क्लब के सचिव का चयन निजी सदस्यों द्वारा चुनाव के माध्यम से किया जाता है। करीब 900 सदस्यों वाला यह क्लब अब शराबबंदी के कारण शांत और वीरान नजर आ रहा है।

क्लब के मैनेजर महेश प्रसाद ने बताया कि सभी सदस्यों को बार बंद होने की सूचना दे दी गई है। अब क्लब को पारिवारिक गतिविधियों और सामाजिक आयोजनों से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। शराबबंदी लागू होने के बाद से शहर में एक नई सामाजिक चेतना देखी जा रही है। सरकार के इस कदम को लोगों का समर्थन भी मिल रहा है, खासकर धार्मिक नगरी की पवित्रता बनाए रखने की दिशा में।




Bhasma Aarti : बाबा महाकाल को चंद्रमा, मुकुट और कानों में कुंडल पहनाए

उज्जैन विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मंगलवार तड़के भस्म आरती के दौरान चार बजे मंदिर के पट खोले गए। पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से किया। प्रथम घंटा बजाकर बाबा महाकाल को हरि ओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा को चांदी का मुकुट और रुद्राक्ष और पुष्पों की माला धारण करवाई गई।

आज के श्रृंगार की विशेष बात यह रही कि चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया की भस्म आरती में बाबा महाकाल का आकर्षक स्वरूप में श्रृंगार किया गया। बाबा के मस्तक पर चंद्र और त्रिपुंड का श्रृंगार किया गया, साथ ही फूलों की माला भी धारण करवाई गई। श्रृंगार के बाद बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग को महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म रमाई गई और फिर कपूर आरती कर भोग अर्पित किया गया। इस दौरान भस्म आरती में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और उनकी भक्ति में लीन होकर जय श्री महाकाल का उद्घोष करने लगे। इससे पूरा मंदिर गुंजायमान हो गया।

भक्त ने रजत मुकुट भेंट किया

श्री महाकालेश्वर मंदिर में महाराष्ट्र के नागपुर से आए अमित कुकडे और चेतन खडसे ने अनिकेत सेन की प्रेरणा से भगवान श्री महाकालेश्वर को 1 नग रजत मुकुट भेंट किया। इसका वजन नग सहित लगभग 1028.00 ग्राम है। इसे श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के वीरेन्द्र शर्मा द्वारा प्राप्त किया गया और दानदाता का सम्मान कर उन्हें विधिवत रसीद प्रदान की गई।

1250 किलो हापुस आम अर्पित किए गए

पुणे के डॉ. सागर, उनकी पत्नी डॉ. साधना, पुत्र साराध्य, पुत्री साध्या और चिरंजीवी पुत्र सात्विक कोलते परिवार द्वारा बाबा श्री महाकाल को महाराष्ट्र के रत्नागिरी के आमों का राजा हापुस आम का 1250 किलो का महाभोग चढ़ाया गया। प्रतिनिधि मुरली मनोहर जोशी ने बताया कि हिंदू नववर्ष के पहले दिन करीब 4 लाख रुपये कीमत के हापुस आम अर्पित किए गए। स्वर्ण वर्क जड़ित आमों को चांदी की थाली में महाराजा भोग के रूप में साढ़े तीन मुहूर्त के शुभ अवसर पर बाबा के चरणों में महाकाल मंदिर के पुजारी महेश पुजारी और गोपाल पुजारी द्वारा पूजन-अर्चन कर अर्पित किया गया।

भस्म आरती - चन्द्र, मुकुट और कानों में कुंडल पहनकर सजे बाबा महाकाल, जानिए क्यों चढ़ाए गए इतने क

भस्म आरती - चन्द्र, मुकुट और कानों में कुंडल पहनकर सजे बाबा महाकाल, जानिए क्यों चढ़ाए गए इतने क

भस्म आरती - चन्द्र, मुकुट और कानों में कुंडल पहनकर सजे बाबा महाकाल, जानिए क्यों चढ़ाए गए इतने क




Ujjain News : बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचीं सिंगर श्रेया घोषाल

जय श्री महाकाल… मेरे पास शब्द नहीं है, आज भस्म आरती के दौरान मैंने महाकालेश्वर मंदिर में जो अनुभव किया उसे मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती। उज्जैन आने का बुलावा आया था और महाकाल के दर्शन का मौका मुझे मिलना था। इतनी सुंदर आरती जो मैंने देखी, जिसमें बाबा महाकाल को जिस तरह से सजाया गया। हर पल, हर क्षण यह जीवन बदलने की तरह था। यह बात प्रसिद्ध गायिका श्रेया घोषाल ने सुबह भस्म आरती में बाबा महाकाल के दर्शन करने के बाद मीडिया से कही।

बाबा महाकाल के दर्शन के बाद प्रसिद्ध गायिका श्रेया घोषाल ने कहा - भस्म आरती का हर पल जैसे जीवन

विक्रमोत्सव के दिव्य और भव्य आयोजन में नववर्ष पर अपनी प्रस्तुति देने उज्जैन आईं सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका श्रेया घोषाल ने सोमवार सुबह विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने बाबा महाकाल के निराकार से साकार स्वरूप के दर्शन तो किया, लेकिन इस दिव्य आरती को देखने के दौरान उनके दिल की धड़कनें बढ़ीं हुई थीं आंखों से आंसू आ रहे थे और कुछ ऐसा महसूस हो रहा था, जिसका अनुभव आज के पहले कभी उन्होंने नहीं किया था। श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित आकाश शर्मा ने बताया कि प्रसिद्ध गायिका श्रेया घोषाल ने श्री महाकालेश्वर भगवान की भस्म आरती में सम्मिलित होकर बाबा महाकाल के दर्शन किए। आरती उपरांत आकाश पुजारी द्वारा घोषाल को चांदी द्वार से बाबा महाकाल का पूजन अर्चन करवाया गया और इस दौरान उन्होंने मस्तक पर तिलक लगाया और माथा टेककर बाबा महाकाल का आशीर्वाद भी लिया।

बाबा महाकाल के दर्शन के बाद प्रसिद्ध गायिका श्रेया घोषाल ने कहा - भस्म आरती का हर पल जैसे जीवन

महाकाल के दर्शन कर भाव विभोर हुई श्रेया

आज सुबह बाबा महाकाल की भस्म आरती देखने के बाद श्रेया घोषाल भावविभोर नजर आईं। मीडिया के सवालों का जवाब देने के दौरान उन्होंने बार-बार इस बात को दोहराया कि मुझे बाबा महाकाल के दरबार वापस आना है। उन्हें बाबा महाकाल की भस्म आरती से कुछ ऐसा अनुभव हुआ कि उन्होंने कहा कि जब भी मुझे यहां आने का बुलावा मिलेगा मैं यहां जरूर आऊंगी।

मंदिर की व्यवस्थाओं की भी की जमकर की तारीफ

गायिका श्रेया घोषाल ने श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति की व्यवस्थाओं की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि यहां की दर्शन व्यवस्था इतनी अच्छी है कि मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं के होने के बावजूद सभी को बाबा महाकाल की इस दिव्य भस्म आरती के दर्शन काफी अच्छे से हुए। उन्होंने कहा मैं सौभाग्यशाली हूं, जो मुझे यहां आने का मौका मिला।




Ujjain Mahakal : चैत्र शुक्ल द्वितीया पर अद्वितीय रूप में शृंगार किया गया महाकाल का

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज चैत्र शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर सोमवार तड़के भस्म आरती के दौरान चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पण्डे पुजारी ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर फलों के रस से बने पंचामृत से कर पूजन अर्चन किया। इसके बाद प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट और रुद्राक्ष और पुष्पों की माला धारण करवाई गई। आज के शृंगार की विशेष बात यह रही कि आज द्वितीया की भस्मआरती में बाबा महाकाल का आकर्षक स्वरूप में शृंगार किया गया।

भस्म आरती मे निराले स्वरूप मे सजे बाबा महाकाल, आज जमकर आया दान, मंदिर परिसर मे गूंज उठा जय श्री

जिसमें बाबा मस्तक पर चंद्र और त्रिपुंड से शृंगारित हुए साथ ही फूलों की माला भी धारण की। शृंगार के बाद बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग को महानिर्वाणी अखाड़े के द्वारा भस्म रमाई गई और फिर कपूर आरती की गई और भोग भी लगाया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिन्होंने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और बाबा महाकाल की भक्ति में लीन होकर जय श्री महाकाल का उद्घोष करने लगे।

भस्म आरती मे निराले स्वरूप मे सजे बाबा महाकाल, आज जमकर आया दान, मंदिर परिसर मे गूंज उठा जय श्री

बाबा के भक्त द्वारा रजत छत्र भेट किया

श्री महाकालेश्वर मंदिर में मुरादाबाद से पधारे हिमांशु जुनेजा ने पुजारी गौरव शर्मा की प्रेरणा से भगवान श्री महाकालेश्वर जी को रजत छत्र भेंट किया गया। जिसे श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा प्राप्त पर दानदाता का सम्मान किया और विधिवत रसीद प्रदान की गईं। श्री महाकालेश्वर मंदिर में पुजारी अर्पित शर्मा की प्रेरणा से गुड़गांव के प्रफुल्ल माथुर द्वारा एक नग चांदी का मुकुट श्री महाकालेश्वर भगवान को भेट किया गया।

भस्म आरती मे निराले स्वरूप मे सजे बाबा महाकाल, आज जमकर आया दान, मंदिर परिसर मे गूंज उठा जय श्री

वहीं श्री महाकालेश्वर मंदिर महाराष्ट्र के नांदेड से पधारे रोहित बागधरे ने भगवान श्री महाकालेश्वर को एक नग रजत मुकुट मय नागकुण्डल भेंट किया गया। जिसका वजन लगभग 2607.600 ग्राम है। जिसे श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा प्राप्त पर दानदाता का सम्मान किया व विधिवत रसीद प्रदान की गईं।