Narmadapuram News: राइट डेम में तेंदुए की मौत, कारण अज्ञात

नर्मदापुरम जिले के माखन नगर थाना क्षेत्र में बागरा के जंगल में राइट डेम क्षेत्र में तड़के एक तेंदुए की मौत हो गई। सूत्रों से ऐसी जानकारी आ रही है कि तेंदुआ की मौत कैसे हुई अभी कारण अज्ञात हैं। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए के शव को कब्जे में ले लिया हैं।

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Tiger Attacks : फॉरेस्ट के चौकीदार को मोबाइल पर बात करना पड़ा भारी,अचानक टाइगर ने किया हमला

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के मढ़ई कोर क्षेत्र स्थित लगदा कैंप में तैनात फॉरेस्ट के चौकीदार को मोबाइल पर बात करना भारी पड़ गया। अचानक उस पर टाइगर ने हमला कर दिया।
दरअसल, चौकीदार बृजेंद्र तेकाम बीती रात मोबाइल नेटवर्क न मिलने के कारण कैंप से बाहर आकर फोन पर बात कर रहा था। इसी दौरान एक टाइगर ने उस पर अचानक हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। बृजेंद्र के कंधे पर गंभीर चोट आई। घटना के समय मौजूद दूसरे चौकीदार रामदास ने उसकी चीख-पुकार सुनकर उसे टाइगर से बचाया और तुरंत कैंप के भीतर लाया। रामदास ने बताया कि बृजेंद्र कैंप से करीब 10 मीटर की दूरी पर जाकर मोबाइल पर बात कर रहा था, तभी टाइगर ने पीछे से उस पर झपट्टा मार दिया।

घटना की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया गया। इस दौरान टाइगर लगभग आधे घंटे तक कैंप के आसपास ही घूमता रहा, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई। घायल चौकीदार को तत्काल सरकारी वाहन से मढ़ई लाया गया और प्राथमिक उपचार के लिए सोहागपुर अस्पताल भेजा गया। वहां से प्राथमिक इलाज के बाद उसे जिला अस्पताल नर्मदापुरम रेफर किया गया, जहां उसका इलाज जारी है।

मढ़ई क्षेत्र के रेंजर प्रेमनारायण ठाकुर ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि यह घटना रात करीब 8 बजे की है। चौकीदार मोबाइल नेटवर्क न मिलने के कारण कैंप से बाहर गया था, उसी दौरान टाइगर ने हमला कर दिया। दूसरे चौकीदार की सतर्कता और साहस से घायल बृजेंद्र की जान बचाई जा सकी। वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम करने की बात कही है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं रोकी जा सकें।




Satpura Tiger Reserve : बाघ को पकड़ने के सर्च ऑपरेशन शुरू

नर्मदापुरम जिले के ग्राम गुडला शुक्करवाड़ा में अप्रैल माह से गांव में बाघ का मूवमेंट बना हुआ है। यह बाघ रातापानी के जंगलों से होता हुआ नर्मदा नदी पार कर ग्राम में पहुंच गया। हालाकि इस बीच इस बाघ ने किसी प्रकार की जन हानि नहीं पहुंचाई है। आज सुबह आठ बजे से बाघ के रेस्क्यू के लिए अब STR प्रबंधन लगा हुआ है जिसमें 150 से अधिक कर्मचारियों एवं डॉक्टर, एसटीआर के दो हाथी और वाइल्ड लाइफ की टीम मिलकर बाघ का रेस्क्यू कर रहे हैं। लेकिन खबर लिखे जाने तक बाघ का कोई मूवमैंट नहीं मिला।

STR से बुलाए 2 हाथी, ड्रोन से तलाश

ग्राम गुड़ला शुक्करवाड़ा में बाघ की निगरानी करने के लिए एसटीआर से दो हाथियों का सहारा लिया जा रहा है, इसके अलावा ट्रैप करने के लिए कैमरे भी 8 से बढ़कर अब 25 कैमरे कर दिए गए हैं। बाघ को पकड़ने का पूरा रेस्क्यू एसटीआर फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा के नेतृत्व में किया जा रहा है।   वन विभाग ने जिला प्रशासन और पुलिस को भी तैनात रहने एवं स्थानीय स्तर पर सहयोग मांगा जारहा है । साथ ही ड्रोन के जरिए टाइगर की तलाश की जा रही है। वन विभाग और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व टीम का प्रयास है कि बार-बार गांव में आ रहे टाइगर को जल्द पकड़ लिया जाए।




Satpura Tiger Reserve : बाघ को पकड़ने के लिए हाथियों की मदद

नर्मदापुरम के ग्राम गुढ़ला और आसपास के क्षेत्र में रातापानी का टाइगर करीब दो महीनों से घूम रहा है, जिससे आधा दर्जन गांव के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। टाइगर के लगातार मूवमेंट और मवेशियों का शिकार करने से ग्रामीणों में भय बना हुआ है। वन विभाग ने टाइगर को पकड़ने के लिए नाले के पास पिंजरा लगाकर उसमें शिकार रखकर पकड़ने का प्रयास किया था, लेकिन शिकार के लालच में भी टाइगर अभी तक पिंजरे के आसपास नहीं आया है। अब वन विभाग के अधिकारी टाइगर को सुरक्षित पकड़ने के लिए हाथियों की मदद लेने की तैयारी कर रहा है, जिसके लिए उन्होंने सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से दो हाथियों को बुलाया है।टाइगर को पकड़ने के लिए वन विभाग बड़े स्तर पर अभियान शुरू करने जा रहा है। गुरुवार को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना रेंज से दो मादा हाथियों को बुलाया गया है, जिनके नाम स्मिता और प्रिया है। इस अभियान में 150 से अधिक अधिकारी, कर्मचारी और चिकित्सकों की टीम शामिल है, जो टाइगर को सुरक्षित पकड़ने के लिए काम करेगी। वन विभाग की टीम टाइगर के मूवमेंट पर लगातार नजर रख रही है।वन विभाग के डीएफओ मयंक गुर्जर ने बताया कि दो माह गुढ़ला क्षेत्र में टाइगर का मूवमेंट देखा जा रहा था। बीच में कुछ दिनों के लिए टाइगर का मूवमेंट कम हो गया था, लेकिन एक बार फिर टाइगर का मूवमेंट देखा जा रहा है। जिसे पकड़ने के लिए पहले पिंजरे लगाए गए थे। जिसमें सफलता नही मिली। इसके बाद अब सेकंड स्टेज में हाथियों ओर करीब 150 से अधिक वन कर्मचारियों ओर ट्रेंकुलाइजर कर रेस्क्यू किया जाएगा। वन विभाग की टीम 24 घंटे वन क्षेत्र में तैनात की गई है। जहां-जहां टाइगर का मूवमेंट ज्यादा देखने को मिल रहा है। उन क्षेत्र में वन विभाग की टीम नजर रखे हुए है। वहीं अधिकारी भी वन क्षेत्र में लगातार दौरा कर रहे हैं।