गनेरा में नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा के तहत पदयात्रा व विशेष ग्राम सभा आयोजित

गनेरा। ग्राम गनेरा में नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा के अंतर्गत सरपंच महोदय की अध्यक्षता में पदयात्रा एवं विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के सम्मान, अधिकार एवं सशक्तीकरण के प्रति जनजागरूकता फैलाना रहा।

पदयात्रा में ग्राम की महिलाओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, छात्राओं एवं ग्रामवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” एवं “नारी शक्ति जिंदाबाद” जैसे प्रेरणादायक नारों के साथ पूरे ग्राम में जागरूकता का संदेश प्रसारित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान सरपंच कृष्ण कुमार झा ने अपने संबोधन में महिलाओं के सामाजिक, शैक्षिक एवं आर्थिक सशक्तीकरण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि समाज के समग्र विकास के लिए महिलाओं को सशक्त बनाना आवश्यक है। उन्होंने सभी ग्रामवासियों से इस दिशा में मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर  हर्ष तिवारी, श्रीमती कमलेश वर्मा (पर्यवेक्षक), आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।




नल-जल योजना में गड़बड़ी का मामला गरमाया, सरपंच संघ ने सौंपा ज्ञापन

नर्मदापुरम। जनपद पंचायत माखननगर क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों में चल रही नल-जल योजना के कार्यों में गंभीर अनियमितताओं और लापरवाही के मामले सामने आए हैं। ग्राम पंचायत सरपंच संघ ने इसको लेकर मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ), जनपद पंचायत माखननगर को लिखित शिकायत सौंपी है और अधूरे एवं घटिया गुणवत्ता के कार्यों की जांच की मांग की है।

सरपंच संघ के अध्यक्ष द्वारा दिए गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के ठेकेदारों द्वारा कई ग्राम पंचायतों में नल-जल योजना के कार्य या तो अधूरे छोड़ दिए गए हैं या मानकों के अनुरूप नहीं किए जा रहे हैं। कई पंचायतों में तो 8 से 10 माह से कार्य पूरी तरह से ठप पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों को इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

ज्ञापन में कहा गया है कि नल-जल योजना ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अत्यंत जरूरी है, लेकिन कार्यों के समय पर पूरा न होने और गुणवत्ता की अनदेखी से ग्रामीण विकास बाधित हो रहा है और लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।

सरपंच संघ अध्यक्ष कृष्ण कुमार झा ने मांग की है कि जनपद पंचायत माखननगर के अंतर्गत सभी चल रहे और अधूरे नल-जल योजना कार्यों की उचित तकनीकी जांच कराई जाए, निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से कार्य पूरा कराया जाए तथा लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

ज्ञापन सौंपने के दौरान सरपंच संघ के पदाधिकारी और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। अब प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर किस तरह की कार्रवाई करता है, यह देखना होगा।




माखननगर में सरपंच संघ की महत्वपूर्ण बैठक आज, नल जल योजना की समस्याएं होगी चर्चा का केंद्र

माखननगर : जनपद पंचायत माखननगर के अंतर्गत आने वाले सभी ग्राम पंचायतों के सरपंचों की एक महत्वपूर्ण बैठक आज मंगलवार को होने जा रही है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा क्षेत्र में चल रही या चल चुकी विभिन्न नल जल योजनाओं (टैप वॉटर स्कीम्स) से जुड़ी समस्याओं और चुनौतियों पर चर्चा करना है।

सरपंच संघ माखननगर के अध्यक्ष कृष्ण कुमार झा द्वारा जारी सूचना के अनुसार, बैठक में नल जल योजनाओं की वर्तमान स्थिति से संबंधित कई मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इन मुद्दों में शामिल हैं:

1. योजना का कार्य अभी भी चल रहा है या नहीं।
2. यदि कार्य बीच में ही रुका हुआ है, तो उसके कारण।
3. योजना पूर्ण हो चुकी है, लेकिन काम की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है।
4. ठेकेदारों द्वारा आधा-अधूरा काम छोड़कर भुगतान या पूर्णता प्रमाण-पत्र के लिए दबाव बनाना।
5. पहले से चालू योजनाओं का अब क्षतिग्रस्त हो जाना।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार “नल जल योजना से सम्बंधित और भी अन्य समस्याओं से सम्बंधित विषयों हेतु यह बैठक आयोजित की जा रही है।” इससे स्पष्ट है कि सरपंचगण इस मुद्दे पर व्यापक रूप से अपने अनुभव और चिंताएं साझा करेंगे।

अध्यक्ष  झा ने सभी सम्मानीय सरपंच साथियों एवं सरपंच प्रतिनिधियों से बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का आग्रह किया है। यह बैठक संभवतः इन योजनाओं से जुड़ी व्यवस्थित खामियों को दूर करने और समन्वित रणनीति बनाने के लिए एक मंच का काम करेगी, ताकि ग्रामवासियों को शुद्ध पेयजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।




जनपद पंचायत माखननगर के प्रतिनिधियों ने किया दो दिवसीय पंचायत एवं ऐतिहासिक स्थलों का अध्ययन दौरा

संजय गांधी एवं युवा नेतृत्व तथा पंचायत ग्रामीण विकास प्रशिक्षण संस्था पचमढ़ी द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत जनपद पंचायत माखननगर के अधिकारियों, सरपंचों, सचिवों एवं सहायक सचिवों ने दो दिवसीय अध्ययन दौरे में विभिन्न ग्राम पंचायतों और ऐतिहासिक स्थलों का निरीक्षण किया। यह प्रशिक्षण 4 दिसंबर से प्रारंभ हुआ।
पहले दिन प्रतिनिधि दल ने भीमबेटका (अब्दुल्लागंज) की प्राचीन गुफाओं का भ्रमण कर वहां की ऐतिहासिक धरोहरों की जानकारी प्राप्त की। इसके बाद रायसेन जिले की जनपद पंचायत अब्दुल्लागंज के ग्राम पंचायत क्षेत्र का दौरा किया, जहां चल रहे पंचायत विकास कार्यों का अवलोकन किया गया। टीम ने सांची स्थित विश्व प्रसिद्ध स्तूप एवं अन्य ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन किए तथा वहां के ‘नंदन फलोद्यान’ जैसे नवाचारों से परिचित हुए।
दूसरे दिन 5 दिसंबर को भोजपुर ग्राम पंचायत का विजिट किया गया। प्रतिनिधियों ने भोजपुर स्थित भगवान भोलेनाथ के प्राचीन मंदिर के दर्शन किए और स्थानीय पंचायत में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की। प्रशिक्षण के दौरान स्वच्छता, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास तथा छोटे-छोटे कदमों से ग्राम उन्नयन के मॉडल पर विस्तृत जानकारी दी गई।

इस प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर राजेंद्र कुशवाहा, जनपद अधिकारी घनश्याम मीणा सहित सरपंच कृष्ण कुमार झा, विशाल मालवीय, नरेंद्र मालवीय, लखन कीर, अनिल कहार, तथा सचिव सुरेंद्र सिंह तोमर, पवन, श्रुति, गोविंद यादव, लालजीराम मीणा, जीवन यादव, दुलारे मालवीय, विनोद यादव शामिल रहे।
सहायक सचिवों में मनोज मालवीय, राघवेंद्र तोमर, संदीप सिंह ठाकुर, सोनू चौहान, ललित पटेल, महेश चौरे, प्रवीण राजपूत, राजकुमार यादव, आशीष मालवीय सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रमाण पत्र हासिल किए।
अध्ययन दौरे ने प्रतिभागियों को पंचायत विकास से जुड़े नए आयामों, नवाचारों और व्यवहारिक ज्ञान से समृद्ध किया।




चार साल बाद पता चला — मैं जिंदा हूँ! पंचायत ने मृत घोषित कर निकाल ली अन्त्येष्टि सहायता

माखननगर (नर्मदापुरम)। “सोचिए, कैसा लगेगा जब आपको बताया जाए कि आप अब इस दुनिया में नहीं हैं?” ग्राम बागलखेड़ी के नरेश अहिरवाल की ज़िंदगी पिछले नौ महीनों से इसी अजीब सवाल में उलझी है। सरकारी रिकॉर्ड में उनकी मौत चार साल पहले दर्ज की जा चुकी है, पंचायत ने उनके नाम पर अन्त्येष्टि सहायता भी निकाल ली, और अब वे खुद को जिंदा साबित करने के लिए दफ्तर-दर-दफ्तर भटक रहे हैं।

कैसे हुआ खुलासा

23 नवंबर 2024 को नरेश के घर बेटे का जन्म हुआ। निजी अस्पताल ने शासकीय योजना का लाभ दिलाने के लिए संबल कार्ड मांगा। कार्ड की स्थिति चेक करने पर पता चला कि नरेश की मौत जुलाई 2020 में दर्ज है। इस खुलासे के बाद नरेश ने तत्काल CM हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई।

पीड़ित की आपबीती

नरेश ने denvapost को बताया कि “मैं चार साल से ज़िंदा हूँ, गाँव में सबके बीच घूम रहा हूँ, फिर भी सरकारी रिकॉर्ड में मैं मर चुका हूँ। अब अपने ही जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए चक्कर काट रहा हूँ। नौ महीने हो गए, कोई सुनवाई नहीं।”

प्रशासन की चुप्पी

जनपद पंचायत और ग्राम पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में कैमरे के सामने कुछ भी कहने से बचते रहे। सूत्रों के मुताबिक, नरेश को मृत घोषित करने में पंचायत स्तर पर बड़ी लापरवाही हुई, जिससे अन्त्येष्टि सहायता राशि भी किसी ने हड़प ली।

कानूनी स्थिति

विनीत वर्मा एडवोकेट ने बताया कि भारत में गलत तरीके से मृत घोषित होने पर पीड़ित व्यक्ति को सिविल कोर्ट में आवेदन करना पड़ता है। जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के तहत संबंधित अधिकारी को रिकॉर्ड सुधारना होता है, लेकिन यह प्रक्रिया अक्सर वर्षों तक खिंच जाती है।

पुराने उदाहरण

लाल बिहारी “मृतक” (उत्तर प्रदेश): 18 साल तक आधिकारिक रूप से मृत रहे, अंत में न्याय मिला।

मध्य प्रदेश, 2022: एक किसान को ज़मीन विवाद में मृत घोषित कर दिया गया, कोर्ट ने हस्तक्षेप कर रिकॉर्ड सुधरवाया।

भ्रष्टाचार और लापरवाही का पैटर्न

ऐसे मामले प्रायः तीन कारणों से होते हैं—

1. भूमि या संपत्ति विवाद

2. पंचायत/रिकॉर्ड विभाग की लापरवाही

3. भ्रष्टाचार के जरिए सरकारी राशि हड़पना

नरेश का मामला भी इसी पैटर्न में फिट बैठता है—एक जिंदा व्यक्ति को ‘कागज़ों में मार’ दिया गया और अब उसे खुद को जिंदा साबित करने के लिए सरकारी गलियारों में चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

इस तरह की घटनाएँ न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती हैं, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती हैं कि सरकारी रिकॉर्ड और योजनाओं की निगरानी कितनी कमजोर है।




Denvapost Exclusive : पांच माह की चुप्पी – पंचायत बचा रहे हैं या सच्चाई छुपा रहे हैं?

ग्राम पंचायत नया चूरना की गलियों में गूंजती एक आवाज़ है – “सत्ता किसकी, संचालन किसका?”
यह सवाल सिर्फ गांव का नहीं, लोकतंत्र की आत्मा का सवाल है, जहां चुने हुए जनप्रतिनिधि की भूमिका को पीछे धकेलकर, ‘सरपंच पति’ जैसे अनौपचारिक ताकतवर किरदार पंचायत पर कब्ज़ा किए बैठे हैं।

24 दिसंबर 2024 को उपसरपंच फग्गनसिंह ककोड़िया ने ग्रामवासियों के साथ मिलकर जनपद सीईओ और कलेक्टर को एक लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप था कि पंचायत की योजनाओं में मनमानी, नियमों की अनदेखी और फंड के दुरुपयोग में सरपंच पति का प्रत्यक्ष हस्तक्षेप है।

यह शिकायत अगर झूठी होती, तो इसका तत्काल खंडन या स्पष्टीकरण जारी होता। लेकिन तथ्यों की बजाय आई सिर्फ चुप्पी — पांच महीने की लंबी, गहरी, साजिश भरी चुप्पी।

इसी संदर्भ में 24 मार्च 2025 को आरटीआई कार्यकर्ता दीपक शर्मा ने दो बिंदुओं पर सूचना मांगी:

1. शिकायत की सत्यापित प्रति।

2. जनपद द्वारा की गई जांच और कार्यवाही की रिपोर्ट।

अब चार महीने बीत चुके हैं। न जवाब आया, न प्रतिवेदन। क्या यह चुप्पी अनजाने में है? शायद नहीं। यह सोची-समझी ‘नीतिगत मौन’ है, जो इस देश के लाखों गांवों में फैलते भ्रष्टाचार और संरक्षणवाद की एक झलक है।

जब RTI भी बेमानी हो जाए…

सूचना का अधिकार नागरिक का संवैधानिक औज़ार है। पर जब वही सूचना अधिकारी महीनों तक जानकारी न दें, तो यह सिर्फ नियमों की अनदेखी नहीं, लोकतंत्र के चेहरे पर एक काला धब्बा है।

क्या जनपद पंचायत माखननगर, जिला प्रशासन, और पंचायत विभाग — सभी की चुप्पी — महज़ संयोग है? या फिर कोई ऐसा ‘पंचायती गठजोड़’ है जिसे उजागर होने से बचाया जा रहा है?

लोकतंत्र के सबसे निचले पायदान पर कुंडली मारकर बैठे हैं ‘छद्म सरपंच’

आज हर पंचायत में एक निर्वाचित प्रतिनिधि होता है, पर सत्ता संभालते हैं कोई और। ‘सरपंच पति’, ‘साला जी’, या ‘मामाजी’ जैसे सत्ता के छाया पात्र ग्रामीण लोकतंत्र को लील रहे हैं। और यह सब प्रशासन की मौन सहमति से हो रहा है।

अब फैसला जनता को लेना होगा

यह सिर्फ नया चूरना की बात नहीं है। यह तो पूरे सिस्टम की पोल खोलने वाली एक मिसाल है। यदि आज इस आरटीआई पर भी प्रशासन जवाब नहीं देता, तो समझिए लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव – ग्रामसभा – को अंदर ही अंदर खोखला किया जा रहा है।

अब जनता को पूछना चाहिए:

किसे बचाया जा रहा है?

पंचायत में कौन असली सरपंच है?

अफसर जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं?

क्योंकि जब सरकारें जवाब देना छोड़ दें, और अफसर जांच करने से बचें — तब कलम को सवाल उठाना ही होगा।




Makhannagar News : दुर्घटना ग्रस्त जोन में नाली निर्माण कार्य

जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत पंचायतों में साफ सफाई, गंदे पानी निकासी का का कार्य जनपद माखन नगर में वरीयता मैं करवाया जा रहा है जिसके अंतर्गत
ग्राम पंचायत आंचलखेड़ा  के वार्ड क्रमांक 16   के पास मैन रोड किनारे मोहल्ले का गंदा पानी MAIN रोड पर बहता रहता था। जिसके कारण रोड में कटाव एवं रोड में गड्ढे हो रहे थे। जिससे रोड की स्थिति खराब हो चुकी थी , मेन रोड से आने जाने वाले वाहन चालक ,पैदल राहगीर एवं दो पहिया वाहन दुर्घटना की संभावना बनी रहती थी ।

उक्त समस्या को देखते हुए ग्राम पंचायत आंचल खेड़ा सरपंच  श्रीमती आशा व  सचिव  प्रेम यादव के प्रयासों से  राजेश संकल्लय उपयंत्री के मार्गदर्शन में भगवती राइस मिल से राय मोहन की दुकान तक आरसीसी नाली का निर्माण कार्य लंबाई 235 मीटर 2*2 कुल लागत 6.32 लाख मद 15 वा वित्त से किया जा रहा है जिससे दुर्घटना ग्रस्त जोन में आमजनों को राहत मिलेगी ।

जनपद पंचायत सीईओ रंजीत ताराम ने बताया कि काफी ग्रामीणों को समस्या हो रही थी। हमने इस कार्य को जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत लिया हैं। जिससे ग्रामीणों को हो रही समस्या का निदान हो सके।




Jabalpur News: भ्रष्टाचार में फंसे सरपंच के पास नहीं होगा पैसे खर्च करने का हक, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

जबलपुर हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने कहा है कि भ्रष्टाचार के आरोपी सरपंच से पैसे खर्च करने का अधिकार वापस लेना सही फैसला है। कोर्ट ने सरपंच की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने अपने अधिकार छीने जाने को गलत बताया था।

जबलपुर हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने फैसला सुनाया है कि भ्रष्टाचार के आरोपी सरपंच से वित्तीय अधिकार वापस लेना सही कदम है। कोर्ट ने सरपंच की याचिका खारिज कर दी है, जिसमें उसने अपने अधिकार वापस लेने के फैसले को गलत बताया था। यह याचिका मंघु बैगा (पिता श्री धन्नू बैगा) ने दायर की थी। वह जिला शहडोल के तहसील सोहागपुर की ग्राम पंचायत मायकी का निर्वाचित सरपंच है। उसके खिलाफ लोकायुक्त ने 50 हजार रुपये की रिश्वत लेने का केस दर्ज किया है, जो अभी लंबित है। इस मामले के बाद जिला पंचायत शहडोल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने उसके वित्तीय अधिकार छीन लिए और ये अधिकार पंचायत समन्वयक राजबहोर साकेत को दे दिए।

सरपंच ने कोर्ट में यह दलील दी थी कि उसके खिलाफ सिर्फ केस दर्ज हुआ है, फैसला नहीं आया है, इसलिए उसके अधिकार छीनना गलत है। लेकिन सरकार की ओर से बताया गया कि आरोप भ्रष्टाचार और अधिकारों के गलत इस्तेमाल से जुड़े हैं, इसलिए यह कदम उठाया गया।

कोर्ट ने “मध्य प्रदेश पंचायत (मुख्य कार्यपालन अधिकारी की शक्तियाँ एवं कार्य) नियम, 1995” का हवाला देते हुए कहा कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी को यह अधिकार है कि वह पंचायत के कार्यों की निगरानी करे और पंचायत की संपत्ति और धन की सुरक्षा सुनिश्चित करे। इसलिए यदि कोई सरपंच भ्रष्टाचार में शामिल पाया जाए, तो उसके वित्तीय अधिकार छीने जा सकते हैं। इस आधार पर कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।




Ujjain News : प्रधानमंत्री आवास योजना की दूसरी किस्त जारी करने की एवज में 20 हजार की रिश्वत लेते सरपंच गिरफ्तार

लोकायुक्त उज्जैन की टीम ने गुरुवार को रतलाम की ग्राम पंचायत इटावा खुर्द के सरपंच घनश्याम कुमावत को गिरफ्तार किया है। आरोपी सरपंच को प्रधानमंत्री आवास योजना की दूसरी किस्त जारी करने के एवज में 20 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है।

लोकायुक्त डीएसपी दिनेश पटेल ने बताया कि फरियादी विनोद डाबी, निवासी ग्राम बिंजाखेड़ी जिला रतलाम द्वारा 15 अप्रैल को लोकायुक्त एसपी उज्जैन अनिल विश्वकर्मा को एक शिकायत दर्ज करवाई गई थी। जिसमें उसने बताया था कि ग्राम इटावा के सरपंच घनश्याम कुमावत द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना की दूसरी किस्त जारी करने के एवज में 20 हजार रुपए रिश्वत की मांग की जा रही है।

सत्यापन में शिकायत सही पाई गई, जिसके बाद एक टीम का गठन किया गया। गुरुवार को टीम रतलाम के ग्राम इटावा खुर्द पहुंची और फरियादी विनोद डाबी को केमिकल लगे रुपए देकर सरपंच के पास भेजा। जैसे ही फरियादी विनोद डाबी ने सरपंच घनश्याम कुमावत को रिश्वत के 20 हजार रुपए उसके निवास पर जाकर दिए, लोकायुक्त टीम ने सरपंच को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। डीएसपी दिनेश पटेल ने बताया कि लोकायुक्त द्वारा आरोपी घनश्याम कुमावत के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच में लिया गया है।

फरियादी विनोद डाबी ने बताया कि ग्राम बिंजाखेड़ी में उसकी मां सुगन बाई के नाम से प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुआ था। जिसकी दूसरी किस्त अपनी मां के खाते में डलवाने के लिए वह सरपंच घनश्याम कुमावत से मिला तो उसके द्वारा 20 हजार रुपए रिश्वत की मांग की गई थी।




Makhannagar News : सरपंच को घर में घुस कर दी, जान से मारने की धमकी

ग्राम पंचायत गनेरा के सरपंच को कलीराम बल्द शिवदयाल और उसके परिवार द्वारा घर में घुस कर दी गई जान से मारने की धमकी । सरपंच कृष्ण कुमार झा एवं ग्रामीणजनों द्वारा थाना मानखनगर को इस सम्बंध में आवेदन दिया गया ।

क्या था मामला ?

ग्राम गनेरा में खसरा क्र. 297/4 रकवा लगभग 12 एकड़ जो कि ग्राम आवादी का खसरा है । जिसका सीमांकन दिनांक 21/03/2024  दो पटवारी एवं आर.आई. की संयुक्त टीम द्वारा किया गया था । उक्त सीमांकन में ग्राम के कलीराम अहिरवार द्वारा मौके पर 4 से 5 एकड़ जमीन पर कब्जा पाया गया था । सीमांकन से आक्रोशित होकर कलीराम द्वारा अपने परिवार के साथ शनिवार सुबह सुबह घर मे घुस कर ग्राम के सरपंच के साथ गाली गलौच की गई साथ ही उक्त मामले में हस्तक्षेप करने पर जान से मारने की धमकी दी गई ।

सरपंच कृष्ण कुमार झा द्वारा बताया गया ग्राम गनेरा में आवादी की लगभग 12 एकड़ जमीन है जिसको भूमिहीन परिवारों को आवंटित किया जाना है एवं युवाओ के लिए खेल मैदान निर्मित किया जाना है । लेकिन कब्जे धारियों द्वारा आवादी की भूमि पर खेती की जा रही है जिससे आर्थिक रूप से कमजोर भूमिहीन परिवारों को निवास हेतु भूमि आवंटित नही हो पा रही साथ ही युवाओं को खैल मैदान उपलब्ध नही करा पा रहे । 
सरपंच द्वारा ग्राम के विकास में निजिलाभ के चलते अड़चन पैदा करने बालो पर शासन प्रशासन से सख्त से सख्त कार्यवाही करने की माँग की गई ।