जनपद पंचायत माखननगर के प्रतिनिधियों ने किया दो दिवसीय पंचायत एवं ऐतिहासिक स्थलों का अध्ययन दौरा

संजय गांधी एवं युवा नेतृत्व तथा पंचायत ग्रामीण विकास प्रशिक्षण संस्था पचमढ़ी द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत जनपद पंचायत माखननगर के अधिकारियों, सरपंचों, सचिवों एवं सहायक सचिवों ने दो दिवसीय अध्ययन दौरे में विभिन्न ग्राम पंचायतों और ऐतिहासिक स्थलों का निरीक्षण किया। यह प्रशिक्षण 4 दिसंबर से प्रारंभ हुआ।
पहले दिन प्रतिनिधि दल ने भीमबेटका (अब्दुल्लागंज) की प्राचीन गुफाओं का भ्रमण कर वहां की ऐतिहासिक धरोहरों की जानकारी प्राप्त की। इसके बाद रायसेन जिले की जनपद पंचायत अब्दुल्लागंज के ग्राम पंचायत क्षेत्र का दौरा किया, जहां चल रहे पंचायत विकास कार्यों का अवलोकन किया गया। टीम ने सांची स्थित विश्व प्रसिद्ध स्तूप एवं अन्य ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन किए तथा वहां के ‘नंदन फलोद्यान’ जैसे नवाचारों से परिचित हुए।
दूसरे दिन 5 दिसंबर को भोजपुर ग्राम पंचायत का विजिट किया गया। प्रतिनिधियों ने भोजपुर स्थित भगवान भोलेनाथ के प्राचीन मंदिर के दर्शन किए और स्थानीय पंचायत में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की। प्रशिक्षण के दौरान स्वच्छता, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास तथा छोटे-छोटे कदमों से ग्राम उन्नयन के मॉडल पर विस्तृत जानकारी दी गई।

इस प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर राजेंद्र कुशवाहा, जनपद अधिकारी घनश्याम मीणा सहित सरपंच कृष्ण कुमार झा, विशाल मालवीय, नरेंद्र मालवीय, लखन कीर, अनिल कहार, तथा सचिव सुरेंद्र सिंह तोमर, पवन, श्रुति, गोविंद यादव, लालजीराम मीणा, जीवन यादव, दुलारे मालवीय, विनोद यादव शामिल रहे।
सहायक सचिवों में मनोज मालवीय, राघवेंद्र तोमर, संदीप सिंह ठाकुर, सोनू चौहान, ललित पटेल, महेश चौरे, प्रवीण राजपूत, राजकुमार यादव, आशीष मालवीय सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रमाण पत्र हासिल किए।
अध्ययन दौरे ने प्रतिभागियों को पंचायत विकास से जुड़े नए आयामों, नवाचारों और व्यवहारिक ज्ञान से समृद्ध किया।




सीएम मोहन यादव के बयान पर सियासी बवाल: कांग्रेस ने बताया “जनता का अपमान”

cm-mohan-yadav
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भोपाल | मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बयानबाज़ी ने नया तूफ़ान खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (cm-mohan-yadav) के पंचायत सचिवों और सहायकों को लेकर दिए गए एक विवादित बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस ने इसे “ग्राम स्वराज की भावना पर हमला” और “प्रदेश के कर्मचारियों का अपमान” बताया है। पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री से तत्काल माफ़ी मांगने की मांग की है।

जंबूरी मैदान से उठी सियासी आग

मामला राजधानी भोपाल के जंबूरी मैदान का है, जहां मंगलवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव (cm-mohan-yadav) ने सरपंच संयुक्त मोर्चा सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान सीएम यादव ने पंचायत प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को मज़बूत करने के लिए काम कर रही है और पंचायतों को 25 लाख रुपए तक के विकास कार्यों का अधिकार दिया गया है।

मुख्यमंत्री (cm-mohan-yadav) ने यह भी घोषणा की कि हर पंचायत प्रतिनिधि को 50-50 हजार रुपए की राशि विकास कार्यों के लिए ट्रांसफर की जाएगी। लेकिन इसी भाषण के दौरान उन्होंने कहा — “अगर सचिव काम नहीं करेगा तो साले को हटा देंगे… इनकी औकात क्या है, दिक्कत आएगी तो ठीक करेंगे।”

मुख्यमंत्री के इस बयान ने सभा में कुछ तालियां जरूर बटोरीं, लेकिन सियासी हलकों में इसने तुरंत तूफान खड़ा कर दिया।

कांग्रेस का तीखा पलटवार

मुख्यमंत्री (cm-mohan-yadav) के इस बयान पर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बुधवार को मीडिया से कहा — “अपने ही प्रदेश के कर्मचारियों और ग्राम पंचायत सचिवों को इस तरह की भाषा में गाली देना, जनता का सीधा अपमान है। मुख्यमंत्री को अपनी मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए और तुरंत सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।”

पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री (cm-mohan-yadav) जिस भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, वह लोकतांत्रिक परंपराओं और ग्राम स्वराज की भावना के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी की सरकार ग्राम पंचायतों के अधिकार छीनकर सारे निर्णय ऊपर से थोप रही है।

“सरपंच, जनपद और जिला पंचायत सदस्य अब केवल नाम के रह गए हैं। सरकार ने सारा नियंत्रण सचिवालय और मंत्रालय में केंद्रित कर दिया है। मुख्यमंत्री (cm-mohan-yadav) का बयान इस बात की पुष्टि करता है कि उन्हें न तो पंचायत कर्मियों की गरिमा की परवाह है और न लोकतंत्र की भावना की।” — जीतू पटवारी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष

‘ग्राम सरकार’ बनाम ‘मुख्यमंत्री सरकार’ की बहस

मुख्यमंत्री मोहन यादव (cm-mohan-yadav) के बयान ने पंचायत व्यवस्था को लेकर एक गहरी बहस छेड़ दी है। कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी सरकार ‘ग्राम सरकार’ के अधिकारों को सीमित कर रही है, जबकि संविधान का अनुच्छेद 243 ग्राम पंचायतों को स्वायत्त इकाई के रूप में मान्यता देता है।

पंचायती राज विशेषज्ञों का कहना है कि बीते कुछ वर्षों में प्रदेश में पंचायतों की स्वायत्तता घटती गई है, जबकि नौकरशाही और मंत्रालय का नियंत्रण बढ़ता गया है। कांग्रेस का दावा है कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में कई योजनाओं का निर्णय “ऊपर से नीचे” के बजाय “नीचे से ऊपर” की दिशा में होना चाहिए था, पर ऐसा नहीं हो रहा।

कांग्रेस की सड़कों पर उतरने की चेतावनी

जीतू पटवारी ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री (cm-mohan-yadav) सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते हैं तो कांग्रेस राज्यभर में आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा — “कर्मचारी, पंचायत सचिव और सहायक भी इस प्रदेश के नागरिक हैं। उनके प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किसी मुख्यमंत्री को शोभा नहीं देता। अगर मुख्यमंत्री माफी नहीं मांगते हैं, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर विरोध करेगी।” कांग्रेस ने इसे केवल “बयान का विवाद” नहीं बल्कि “नीति का मुद्दा” बताया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि बीजेपी सरकार लगातार केंद्रीकरण की नीति अपना रही है, जिससे स्थानीय स्वशासन की अवधारणा कमजोर हो रही है।

बीजेपी का पलटवार: “कांग्रेस को मुद्दे नहीं मिल रहे”

हालांकि बीजेपी ने मुख्यमंत्री (cm-mohan-yadav) का बचाव किया है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री के शब्दों को “तोड़ा-मरोड़ा” जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा था कि जो अधिकारी और कर्मचारी जनता के काम में बाधा डालेंगे, उन पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने सरपंचों को अधिकार देने की बात कही थी। कांग्रेस केवल सियासी रोटी सेंकने के लिए बयान को गलत तरीके से पेश कर रही है।” बीजेपी का कहना है कि मुख्यमंत्री की मंशा पंचायत प्रतिनिधियों को सशक्त बनाना है, ताकि ग्रामीण विकास तेज़ी से हो सके।

पंचायत कर्मियों में नाराजगी, अधिकारी भी असहज

मुख्यमंत्री (cm-mohan-yadav) के बयान के बाद पंचायत सचिव संघ और सहायक सचिव संगठन में भी नाराजगी देखने को मिली है। प्रदेश सचिव संघ के कुछ पदाधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री को “औकात” जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए था।

एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा — “मुख्यमंत्री राज्य के मुखिया हैं। उनके शब्द पूरे प्रशासन के लिए दिशा तय करते हैं। ऐसे में इस तरह की टिप्पणी से निचले स्तर के कर्मचारी निरुत्साहित होते हैं।”

आने वाले सम्मेलन पर निगाहें

मुख्यमंत्री (cm-mohan-yadav) ने अपने भाषण में यह भी कहा कि 24 से 26 नवंबर तक भोपाल में पंचायत प्रतिनिधियों की बड़ी राज्य स्तरीय कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। इस आयोजन में प्रदेशभर के सरपंच, जनपद और जिला पंचायत सदस्य भाग लेंगे। माना जा रहा है कि अब यह सम्मेलन भी राजनीतिक रूप से गरम माहौल में होगा। कांग्रेस ने ऐलान किया है कि यदि मुख्यमंत्री तब तक माफी नहीं मांगते, तो पार्टी सम्मेलन स्थल के बाहर प्रदर्शन करेगी।

एक बयान से बढ़ी दूरियां

सीएम मोहन यादव के इस बयान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रशासनिक सख्ती और राजनीतिक मर्यादा के बीच की रेखा बहुत पतली है। जहां बीजेपी इसे “काम न करने वालों के खिलाफ सख्ती” बता रही है, वहीं कांग्रेस “ग्राम स्वराज और लोकतंत्र की मर्यादा” का मुद्दा बना रही है। अब निगाहें इस पर हैं कि मुख्यमंत्री आगामी दिनों में माफी मांगते हैं या फिर कांग्रेस अपने आंदोलन की दिशा तय करती है।




Satna News : 15 हजार की रिश्वत लेते सब इंजीनियर और पंचायत सचिव रंगे हाथों धराए

सतना जिले में ईओडब्ल्यू की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सब इंजीनियर और पंचायत सचिव को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि ठेकेदार भुगतान करने की एवज में रिश्वत मांगी गई थी।

रीवा EOW की टीम ने कार्रवाई करते हुए जनपद पंचायत सोहावल में पदस्थ उपयंत्री रमेश सिंह को 10,000/-रु. एवं ग्राम पंचायत बाबूपुर के सचिव जय सिंह को 5,000/-रु. की रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा है। उपयंत्री, ठेकेदार अतुल त्रिवेदी की कंपनी के द्वारा निर्मित पुलिया के कार्य के मूल्यांकन के बदले में एवं सचिव, निर्मित पुलिया का भुगतान पंचायत से कराने के बदले में रिश्वत की मांग कर रहा था।

दरअसल, अतुल त्रिवेदी ठेकेदार हैं। उनकी कंपनी के द्वारा 6 महीने पहले एक पुलिया का निर्माण ग्राम पंचायत बाबूपुर में किया गया था। उस काम के भुगतान के लिए जनपद पंचायत सोहावल जिला सतना में पदस्थ उपयंत्री रमेश सिंह 20,000/-रु. रिश्वत मांग रहा था। उसने जैसे ही 10 हजार रुपए की रिश्वत ली। उसके बाद ही रिश्वतखोर को रंगे हाथों पकड़ लिया गया।

वहीं सचिव जय सिंह ने ठेकेदार से 5 प्रतिशत कमीशन मांगा था। उसको भी 5 हजार रुपए की रिश्वत लेते EOW की टीम ने रंगे हाथों पकड़ लिया।




Gwalior News : 17 साल का लंबा इंतजार… अब मिला पंचायत सचिव को न्याय,  ये है पूरा मामला

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद 17 साल का लंबा संघर्ष जीता है। भिंड के मेंहगांव तहसील के अवधेश सोनी 17 साल बाद पंचायत सचिव बन गए हैं। 2008 में कन्हारी पंचायत सचिव के लिए मेरिट में पहले नंबर पर होने के बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई थी। क्योंकि उनके पिता को दूसरी पंचायत कतरौल का निवासी बताया गया था।

पंचायत सचिव की नियुक्ति के लिए उसी ग्राम पंचायत का निवासी होना जरूरी है। जबकि दूसरे नंबर पर मेरिट सूची में रहे भगवान सिंह बघेल को कन्हारी ग्राम पंचायत सचिव बना दिया गया था। अब हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने पंचायत सचिव भगवान सिंह बघेल को हटाकर अवधेश सोनी को नियुक्त करने के आदेश दिए हैं। इस मामले में भिंड कलेक्टर जिला पंचायत के मुख्य कार्यक्रम अधिकारी सहित ग्राम पंचायत कन्हारी के ठहराव को भी कोर्ट ने मनमाना करार दिया है।

दरअसल, 2008 में अवधेश सोनी ने पंचायत सचिव की भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। कक्षा 10वीं की मार्कशीट के आधार पर उन्हें पहला स्थान मिला था। जबकि दूसरे स्थान पर भगवान सिंह बघेल रहे थे। लेकिन अवधेश सोनी को यह कहकर पंचायत सचिव नियुक्त नहीं किया गया, क्योंकि वह दूसरी पंचायत कतरौल के रहने वाले बताए गए। जबकि उनकी अंकसूची मूल निवासी और जाति प्रमाण पत्र में उन्हें कन्हारी पंचायत का निवासी बताया गया।

अवधेश सोनी के पिता मेहगांव तहसील की कतरौल ग्राम पंचायत की बीपीएल सूची में दर्ज थे। इसीलिए अवधेश सोनी को पंचायत सचिव की नियुक्ति नहीं दी गई। लेकिन अन्य दस्तावेजों को देखते हुए हाईकोर्ट ने भिंड कलेक्टर जिला पंचायत सीईओ सहित अन्य अधिकारियों की प्रक्रिया को मनमाना पूर्ण बताया और पंचायत सचिव भगवान सिंह बघेल को हटाने के निर्देश दिए। उनके स्थान पर अब 17 साल बाद अवधेश सोनी पंचायत सचिव बनाए गए हैं। लेकिन अवधेश सोनी को इस दौरान लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। जबकि भगवान सिंह बघेल भी सालों बाद 2019 में पंचायत सचिव बन सके थे अब उन्हें हटाया गया है।




Murena News : मनरेगा में 48 फर्जी जॉब कार्ड से 20 करोड़ का भ्रष्टाचार, 4 पंचायत सचिव सहित 10 पर गिरी गाज

मुरैना जिला पंचायत सीईओ ने फर्जी जॉबकार्ड से करोड़ों की राशि हड़पने वाले 4 पंचायत सचिवों को निलंबित करने के साथ ही छह जीआरएस को बर्खास्त कर दिया है। इस कार्रवाई से जिले के अन्य सचिव और जीआरएस के बीच हड़कंप मचा हुआ है।

मनरेगा मजदूरों के 48 जॉब कार्ड बनाकर दो साल में निकाल ली गई 20 करोड़ मजदूरी

बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं। जिसमें बताया गया था कि “एक गांव में फर्जी नाम से मनरेगा मजदूरों के 48 जॉब कार्ड बनाकर दो साल में 20 करोड़ मजदूरी निकाल ली गई। ये मनरेगा में मजदूरी तो कर रहे है, लेकिन वोटर लिस्ट में कहीं भी इनके नाम नहीं है। जिला पंचायत सीईओ कमलेश कुमार भार्गव ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच पड़ताल शुरू की।

जांच के दौरान चार पंचायतों के सचिव और आधा दर्जन ग्राम पंचायतों के रोजगार सहायक दोषी पाए गए। इनके नाम सबलगढ़ जनपद की ग्राम पंचायत कढावना के पंचायत सचिव अखलेश चतुर्वेदी, कैलारस जनपद की पंचायत बहराना के बासुदेव, जौरा जनपद की पंचायत सिंघोरा के राजेंद्र कुशवाह और मुरैना जनपद की पंचायत नायक पुरा के लोकेन्द्र सिंह है। जिपं सीईओ ने इनको तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए हैं।

इसी प्रकार सबलगढ़ जनपद की ग्राम पंचायत कढावना के ग्राम रोजगार सहायक बैजनाथ सिंह, पहाड़गढ जनपद की ग्राम पंचायत जडेरु के रोजगार सहायक मुकेश सिंह, निचली बहराई के भूपेन्द्र सिंह, कुकरोली पंचायत के लक्ष्मण सिंह, जौरा जनपद की ग्राम पंचायत सिंघोरा के जितेंद्र गुर्जर तथा मुरैना जनपद की ग्राम पंचायत नायकपुरा की रोजगार सहायक को बर्खास्त किया गया है।

जिला पंचायत CEO की जांच कराई गई तो शिकायत सही मिली

इस मामले में जिला पंचायत CEO कमलेश कुमार भार्गव ने बताया “पिछले दिनों शिकायत मिली थी कि कुछ लोग फर्जी जॉब कार्ड बनाकर मनरेगा से राशि हड़प रहे हैं। जब इसकी जांच कराई गई तो शिकायत सही मिली। मामले में 4 सचिव और छह जीआरएस के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।”




Makhannagar News : नए अंदाज में पुराने सीईओ को विदाई, नए का स्वागत

जनपद पंचायत माखन नगर मैदान  में शुक्रवार को सीईओ का विदाई समारोह आयोजित किया गया। जिसमें नए अंदाज में बाबा भोलेनाथ की मड़िया का भूमि पूजन कर किया गया। इसमें निवर्तमान सीईओ एस सी अग्रवाल को भावभीनी विदाई दी गई तथा नये सीईओ रंजीत कुमार ताराम  का स्वागत किया गया। समारोह की अध्यक्षता जनपद अध्यक्ष सावित्री बाई परनामे की।

सरपंच संघ अध्यक्ष कृष्ण कुमार झा ने  कहा कि हर विदाई का क्षण दुखदायी होता है। आज पूर्व अंचलाधिकारी एस सी अग्रवाल विदा करने से सभी लोग दुखी हैं। लेकिन स्थानांतरण तो  सभी का होना है। उन्होंने सीईओ एस सी अग्रवाल के द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की।

नवपदस्थापित सीईओ रंजीत कुमार ताराम ने कहा कि निवर्तमान सीओ द्वारा सेवा काल में किये गये कार्यों को आम जनता के विश्वास पर आगे बढाने का प्रयास करुंगा।

स्थान्तरित सीईओ ने कहा कि अगर निष्ठा एवं समर्पण हो तो सभी कार्य सहज हो जाता है। उन्होंने कहा कि पदाधिकारी, कर्मी व आमलोगों का कार्य और दायित्व निर्वहन में मिला सहयोग कभी भुलाया नहीं जा सकता है। विदाई समारोह में हरिकृष्ण नायक,जिला पंचायत सदस्य उमेश यादव, जनपद उपाध्यक्ष लालचंद यादव, पंचायत सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक सहित जनपद कर्मचारी मौजूद रहे।