1 जून से महंगा हुआ कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर, घरेलू उपभोक्ताओं को मिली राहत

नई दिल्ली। जून महीने की शुरुआत के साथ ही तेल विपणन कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी गैस सिलिंडर की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 1 जून 2026 से लागू हो गई हैं। हालांकि घरेलू रसोई गैस सिलिंडर (14.2 किलोग्राम) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिली है।42 रुपये तक बढ़े कमर्शियल सिलिंडर के दामनई कीमतों के अनुसार राजधानी दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर की कीमत में 42 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद इसकी नई कीमत 3,113.50 रुपये हो गई है। वहीं कोलकाता में कमर्शियल सिलिंडर 53.50 रुपये महंगा होकर 3,255.50 रुपये में उपलब्ध होगा।तेल कंपनियों द्वारा की गई इस वृद्धि का सीधा असर होटल, रेस्तरां, ढाबों, कैटरिंग सेवाओं और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर पड़ सकता है, जहां बड़े पैमाने पर एलपीजी का उपयोग किया जाता है।

5 किलो वाले फ्री ट्रेड एलपीजी सिलिंडर के दाम भी बढ़ेकमर्शियल गैस के साथ-साथ 5 किलोग्राम वाले फ्री ट्रेड एलपीजी (एफटीएल) सिलिंडर की कीमत में भी 11 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में अब यह सिलिंडर 821.50 रुपये में मिलेगा। छोटे व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं और सीमित गैस खपत वाले ग्राहकों पर भी इस वृद्धि का असर पड़ सकता है।

कारोबारियों की बढ़ेगी लागतविशेषज्ञों का कहना है कि कमर्शियल गैस सिलिंडर की कीमतों में हुई वृद्धि से होटल और रेस्तरां उद्योग की परिचालन लागत बढ़ेगी। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर खाद्य पदार्थों और रेस्तरां में मिलने वाले व्यंजनों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।व्यापारिक संगठनों का मानना है कि लगातार बढ़ती परिचालन लागत पहले से ही चुनौती बनी हुई है, ऐसे में गैस कीमतों में बढ़ोतरी कारोबारियों के लिए अतिरिक्त बोझ साबित हो सकती है।

घरेलू उपभोक्ताओं को राहतहालांकि इस बार घरेलू एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे देशभर के करोड़ों परिवारों को राहत मिली है। घरेलू गैस की कीमतें स्थिर रहने से रसोई बजट पर तत्काल कोई अतिरिक्त असर नहीं पड़ेगा।तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी नई दरें रविवार, 1 जून 2026 से प्रभावी हो चुकी हैं। अब कारोबारियों की नजर आने वाले महीनों में गैस कीमतों की दिशा और सरकारी नीतियों पर रहेगी।




Brain Preservation Tech | मौत के 14 मिनट बाद भी सुरक्षित रह सकता है दिमाग? नई रिसर्च ने खोले विज्ञान के नए दरवाजे

नई दिल्ली। मौत के बाद क्या होता है? यह सवाल सदियों से इंसानों, दार्शनिकों और वैज्ञानिकों को आकर्षित करता रहा है। अब अमेरिका की एक रिसर्च ने इस बहस को नया आयाम दे दिया है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि मृत्यु के बाद भी कुछ समय तक दिमाग की संरचना को सुरक्षित रखा जा सकता है। सुअर के दिमाग पर किए गए एक प्रयोग में शोधकर्ताओं ने मृत्यु के बाद दिमाग की कोशिकाओं और न्यूरॉन्स को संरक्षित रखने में सफलता हासिल की है।

इस शोध ने मेडिकल साइंस, न्यूरोसाइंस और मानव चेतना को लेकर नई संभावनाओं के साथ कई नैतिक सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
सुअर के दिमाग पर किया गया सफल प्रयोग
अमेरिका के पोर्टलैंड स्थित स्टार्टअप “नेक्टोम” ने इस प्रयोग को अंजाम दिया। शोधकर्ताओं ने सुअर को इसलिए चुना क्योंकि उसका दिमाग और हृदय-रक्त संचार प्रणाली काफी हद तक इंसानों से मिलती-जुलती है।

प्रयोग के दौरान हृदय की धड़कन बंद होने के लगभग 10 मिनट बाद शरीर से सारा रक्त निकाल दिया गया। इसके बाद दिमाग में एल्डिहाइड नामक विशेष रसायन पहुंचाया गया, जिसने दिमाग के भीतर मौजूद प्रोटीन और कोशिकाओं को उनकी मूल स्थिति में स्थिर कर दिया।

इसके बाद दिमाग के ऊतकों में मौजूद पानी को विशेष क्रायोप्रोटेक्टेंट द्रव से बदला गया, जिससे ठंड के दौरान बर्फ के क्रिस्टल न बनें और कोशिकाएं क्षतिग्रस्त न हों। अंत में दिमाग को माइनस 32 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सुरक्षित कर दिया गया।

क्यों महत्वपूर्ण है 14 मिनट का समय?

शोधकर्ताओं के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया में समय सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रारंभिक परीक्षणों में जब प्रक्रिया मृत्यु के 18 मिनट बाद शुरू की गई तो दिमाग की बाहरी कोशिकाओं में टूट-फूट और क्षति के संकेत दिखाई दिए। लेकिन जब यह समय घटाकर 14 मिनट से कम किया गया तो परिणाम पूरी तरह बदल गए।

माइक्रोस्कोपिक जांच में न्यूरॉन्स और उनके आपसी कनेक्शन लगभग सुरक्षित पाए गए। वैज्ञानिकों का मानना है कि मृत्यु के बाद कोशिकाओं के भीतर मौजूद एंजाइम ऊतकों को नष्ट करना शुरू कर देते हैं। यदि यह प्रक्रिया आगे बढ़ जाए तो नुकसान की भरपाई संभव नहीं रहती। यही कारण है कि मृत्यु के बाद शुरुआती 14 मिनट इस तकनीक की सफलता की कुंजी माने जा रहे हैं।

क्या यादों को भी सुरक्षित रखा जा सकेगा?

इस परियोजना की सबसे रोचक अवधारणा “कनेक्टोम” है। कनेक्टोम दिमाग के भीतर मौजूद अरबों न्यूरॉन्स और उनके बीच के कनेक्शनों का त्रि-आयामी नक्शा होता है।

कई वैज्ञानिकों का मानना है कि इंसान की यादें, अनुभव, व्यक्तित्व और सोच इसी जटिल नेटवर्क में संग्रहित रहते हैं। यदि इस नेटवर्क को पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके तो सैद्धांतिक रूप से किसी व्यक्ति की मानसिक पहचान भी संरक्षित की जा सकती है।

हालांकि वैज्ञानिक स्पष्ट करते हैं कि फिलहाल किसी सुरक्षित दिमाग को पढ़ना, उसकी यादों को समझना या किसी व्यक्ति को दोबारा जीवित करना संभव नहीं है।

गंभीर मरीजों पर हो सकता है प्रयोग
नेक्टोम अब भविष्य में गंभीर और लाइलाज बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को यह सुविधा देने की योजना बना रहा है। अमेरिका के कुछ राज्यों में ऐसे कानून मौजूद हैं जो असाध्य रोगियों को चिकित्सकीय सहायता से मृत्यु चुनने की अनुमति देते हैं।

योजना के अनुसार मरीज की मृत्यु की आधिकारिक पुष्टि के तुरंत बाद उसके दिमाग को संरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए पहले से कानूनी अनुमति और शरीरदान संबंधी दस्तावेज पूरे करना अनिवार्य होगा।

वैज्ञानिक समुदाय में मतभेद

इस शोध को लेकर वैज्ञानिक जगत में उत्साह के साथ-साथ संदेह भी मौजूद है।
कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक दिमाग की संरचना को सुरक्षित रखने में तो सफल हो सकती है, लेकिन इससे किसी व्यक्ति को दोबारा जीवित करना संभव नहीं होगा। आलोचकों का तर्क है कि किसी व्यक्ति के दिमाग की संरचना की प्रतिकृति बनाना और वास्तविक व्यक्ति को वापस लाना दो अलग-अलग बातें हैं।
कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि जीवन केवल न्यूरॉन्स की वायरिंग नहीं है, बल्कि उसमें जैविक प्रक्रियाएं, चेतना और व्यवहार जैसे कई जटिल तत्व शामिल होते हैं, जिन्हें अभी पूरी तरह समझा नहीं गया है।

क्या बदल जाएगी मौत की परिभाषा?

इस शोध ने मृत्यु की पारंपरिक मेडिकल परिभाषा पर भी सवाल खड़े किए हैं।
वर्तमान चिकित्सा मानकों के अनुसार रक्त प्रवाह और हृदय की धड़कन बंद होने के बाद व्यक्ति को मृत माना जाता है। लेकिन यदि मृत्यु के कुछ मिनट बाद तक दिमाग की संरचना सुरक्षित रखी जा सकती है, तो भविष्य में “मृत्यु” की परिभाषा पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह तकनीक चिकित्सा विज्ञान, जैव-नैतिकता और कानून के क्षेत्र में व्यापक बहस का विषय बन सकती है।

भविष्य की संभावनाएं

फिलहाल यह तकनीक केवल दिमाग की संरचना को सुरक्षित रखने तक सीमित है। किसी व्यक्ति की चेतना को पुनर्जीवित करना या उसे कंप्यूटर में स्थानांतरित करना अभी विज्ञान कथा जैसी अवधारणा है।

फिर भी वैज्ञानिक मानते हैं कि यह शोध मानव मस्तिष्क को समझने की दिशा में एक बड़ा कदम है। भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और उन्नत न्यूरोसाइंस की मदद से ऐसी संभावनाओं पर और काम किया जा सकता है।

हालांकि एक बात स्पष्ट है कि मौत के बाद जीवन और चेतना को लेकर चल रही वैज्ञानिक खोजों में यह शोध एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।




सोशल मीडिया पर वायरल हुई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’, संस्थापक ने लगाया अकाउंट हैक होने का आरोप

'No access to any of our platforms': Cockroach Janta Party Instagram page hacked नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से तेजी से वायरल हो रही ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ एक बार फिर चर्चा में है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दावा किया है कि उनका इंस्टाग्राम अकाउंट, पार्टी पेज और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म हैक कर लिए गए हैं।

शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए दिपके ने कहा कि यह उनकी ऑनलाइन मौजूदगी के खिलाफ चल रही एक व्यापक “कार्रवाई” का हिस्सा है। उन्होंने लिखा कि पार्टी का आधिकारिक इंस्टाग्राम पेज हैक हो गया है, उनका निजी इंस्टाग्राम अकाउंट भी प्रभावित हुआ है और ट्विटर अकाउंट को रोक दिया गया है।

दिपके ने अपने पोस्ट में लिखा,
“कॉकरोच जनता पार्टी पर कार्रवाई। इंस्टाग्राम पेज हैक। मेरा निजी इंस्टाग्राम हैक। ट्विटर अकाउंट रोक दिया गया। बैकअप अकाउंट भी हटा दिया गया।”
उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल उनकी टीम की किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक पहुंच नहीं है। ऐसे में आगे आने वाली किसी भी पोस्ट को “कॉकरोच जनता पार्टी” का आधिकारिक बयान न माना जाए।

एक सप्ताह में बना सोशल मीडिया सेंसेशन

बोस्टन यूनिवर्सिटी के छात्र और आम आदमी पार्टी के पूर्व सहयोगी अभिजीत दिपके ने यह व्यंग्यात्मक डिजिटल अभियान करीब एक सप्ताह पहले शुरू किया था। देखते ही देखते यह प्लेटफॉर्म युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर फॉलोअर्स की संख्या 1.9 करोड़ के पार पहुंच गई थी। सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ से जुड़े मीम्स, ग्राफिक्स और व्यंग्यात्मक पोस्ट बड़ी संख्या में शेयर किए जा रहे थे।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का ट्रेंड उस समय शुरू हुआ जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा कथित तौर पर की गई टिप्पणियों को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि फर्जी डिग्रियों के सहारे कानूनी पेशे में आने वाले लोगों पर टिप्पणी करते हुए “परजीवी” और “कॉकरोच” जैसे शब्दों का उपयोग किया गया था। हालांकि बाद में मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया और उनका संदर्भ केवल “फर्जी एवं नकली डिग्री” रखने वाले लोगों से था।

इसके बावजूद सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर व्यंग्य और मीम्स की बाढ़ आ गई। इसी दौरान अभिजीत दिपके ने “कॉकरोच जनता पार्टी” नाम से डिजिटल अभियान शुरू किया।
युवाओं के मुद्दों को बनाया केंद्र
कॉकरोच जनता पार्टी की पोस्ट मुख्य रूप से बेरोजगारी, पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं की समस्याओं पर आधारित थीं। इन विषयों को व्यंग्यात्मक चुनावी घोषणापत्र और राजनीतिक अभियान की शैली में प्रस्तुत किया गया।
दिपके ने इस आंदोलन को “आलसियों और बेरोजगारों की आवाज” बताया था।

जान से मारने की धमकियों का भी दावा

इससे पहले भी अभिजीत दिपके ने दावा किया था कि उन्हें व्हाट्सएप पर जान से मारने की धमकियां मिली थीं। उन्होंने कथित धमकी भरे संदेशों के स्क्रीनशॉट साझा करते हुए कहा था कि उनसे “कॉकरोच जनता पार्टी” अकाउंट बंद करने या किसी राजनीतिक दल में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा है।

फिलहाल सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से चर्चा में है। हालांकि अकाउंट हैकिंग और धमकियों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।




पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान, 9 अप्रैल से शुरू होगी वोटिंग

नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग (ECI) ने रविवार को पांच राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों का पूरा कार्यक्रम घोषित कर दिया। दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने चुनाव कार्यक्रम की जानकारी दी।

आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे। चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही इन राज्यों में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई है।
पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान
निर्वाचन आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल में इस बार दो चरणों में मतदान होगा। पहले चरण के लिए 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे, जबकि दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को कराया जाएगा। पिछली बार 2021 के चुनाव में यहां आठ चरणों में मतदान हुआ था।

अन्य राज्यों में एक चरण में वोटिंग
असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान कराया जाएगा। वहीं तमिलनाडु में 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे।

4 मई को आएंगे नतीजे

आयोग के मुताबिक पांचों राज्यों में हुए मतदान की मतगणना 4 मई को की जाएगी और उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे।

17.4 करोड़ मतदाता करेंगे मतदान
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि इन पांचों राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में कुल 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। यहां कुल 824 विधानसभा सीटों पर चुनाव होंगे।

उन्होंने बताया कि मतदान के लिए करीब 2.19 लाख मतदान केंद्र बनाए जाएंगे, जहां लगभग 25 लाख चुनाव अधिकारियों की तैनाती की जाएगी। प्रत्येक मतदान केंद्र पर औसतन 750 से 900 मतदाता होंगे।

मतदान केंद्रों पर मोबाइल ले जाने पर रोक

निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान केंद्र के भीतर मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं होगी। मतदाताओं को मोबाइल बाहर रखना होगा और मतदान के बाद उसे वापस ले सकेंगे।
इसके साथ ही आयोग ने बताया कि सभी मतदान केंद्रों पर तैनात पीठासीन अधिकारी हर दो घंटे में मतदान प्रतिशत की जानकारी अपलोड करेंगे, जबकि मतदान समाप्त होते ही अंतिम आंकड़े जारी कर दिए जाएंगे।

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इन पांचों राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल मई में समाप्त हो रहा है, ऐसे में निर्धारित समय सीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी की जाएगी।




होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का बड़ा ऐलान, अमेरिका-इजरायल के जहाजों के लिए बंद, भारत को राहत

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा फैसला लिया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने घोषणा की है कि यह जलमार्ग अब अमेरिका, इजरायल, यूरोप और उनके सहयोगी देशों के जहाजों के लिए पूरी तरह बंद रहेगा। हालांकि भारत और कुछ अन्य देशों के लिए यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है।

Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने गुरुवार को ईरान के सरकारी प्रसारक Islamic Republic of Iran Broadcasting (IRIB) के माध्यम से यह ऐलान किया। IRGC ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि United States, Israel, यूरोप या उनके समर्थक देशों का कोई भी जहाज इस जलमार्ग से गुजरने की कोशिश करता है तो उस पर हमला कर उसे नष्ट कर दिया जाएगा।
हालांकि इस घोषणा के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि India और China जैसे देशों के जहाजों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। इससे भारत के लिए तेल आपूर्ति जारी रहने की संभावना बनी हुई है, जिसे भारत के नजरिए से बड़ी राहत माना जा रहा है।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून और युद्धकालीन प्रावधानों के तहत Iran को Strait of Hormuz में आवागमन नियंत्रित करने का अधिकार है। उनका कहना है कि युद्ध की स्थिति में इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण रखना ईरान का अधिकार है।
यह घोषणा ऐसे समय आई है जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस स्थिति के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार Strait of Hormuz दुनिया के समुद्री तेल परिवहन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा वहन करता है। फारस की खाड़ी के देशों के लिए यह समुद्री मार्ग बेहद अहम है, क्योंकि यहीं से तेल और गैस की बड़ी खेप दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचती है। इसी मार्ग से Jebel Ali Port जैसे बड़े बंदरगाहों तक भी जहाजों की आवाजाही होती है।
समुद्री ट्रैकिंग वेबसाइटों के अनुसार कुवैत और दुबई के तट के पास सैकड़ों तेल टैंकर और मालवाहक जहाज फिलहाल लंगर डाले खड़े हैं। वहीं ईरान का बेड़ा भी Bandar Abbas Port के आसपास तैनात है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नाकाबंदी लंबे समय तक जारी रहती है तो खाड़ी क्षेत्र के व्यापार और तेल-गैस आपूर्ति पर भारी दबाव पड़ सकता है। उल्लेखनीय है कि इतिहास में पहली बार वाणिज्यिक जहाजों के लिए इस तरह होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किया गया है। यहां तक कि 1980-88 के Iran–Iraq War के दौरान भी जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं हुई थी।




मनरेगा बचाओ : राहुल गांधी का मोदी सरकार पर तीखा हमला, बोले– मजदूरों के अधिकार छीनने की साजिश

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मनरेगा बचाओ मोर्चा अभियान के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार मनरेगा जैसी गरीब-हितैषी योजना को धीरे-धीरे खत्म करने की साजिश कर रही है। राहुल गांधी ने मनरेगा पर सरकार के रवैये की तुलना तीन कृषि कानूनों से करते हुए कहा कि जिस तरह किसानों पर हमला किया गया था, उसी तरह अब मजदूरों को निशाना बनाया जा रहा है।

कृषि कानूनों जैसा हमला मजदूरों पर: राहुल गांधी

राहुल गांधी ने कहा,
“कुछ साल पहले भाजपा ने तीन काले कृषि कानूनों के जरिए किसानों पर आक्रमण किया था, लेकिन किसानों और हम सबने मिलकर नरेंद्र मोदी पर दबाव बनाया और उन्हें पीछे हटना पड़ा। अब उसी तरह का हमला मजदूरों पर किया जा रहा है।”

उन्होंने कहा कि मनरेगा के जरिए गरीबों को काम करने का कानूनी अधिकार मिला था, लेकिन भाजपा इसे खत्म करना चाहती है ताकि मजदूर फिर से ठेकेदारों और अमीरों पर निर्भर हो जाएं।
‘एक राजा तय करेगा सब कुछ’
राहुल गांधी ने भाजपा की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए कहा कि
“भाजपा एक ऐसा भारत बनाना चाहती है जहां सिर्फ एक राजा ही सब कुछ तय करे।”
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार यह तय करेगी कि किस राज्य को कितना पैसा मिलेगा।

भाजपा शासित राज्यों को ज्यादा धन
विपक्ष शासित राज्यों को कम धन
इतना ही नहीं, काम कब होगा, कहां होगा और मजदूरी कितनी मिलेगी — यह सब फैसले भी केंद्र सरकार ही करेगी।
मजदूरों के अधिकार ठेकेदारों को सौंपने का आरोप

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि
“जो अधिकार पहले मजदूरों के पास थे, वे अब ठेकेदारों को दिए जा रहे हैं।”
राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा की सोच है कि देश का धन और संसाधन कुछ चुने हुए अमीर लोगों के हाथों में रहे और वही लोग देश को चलाएं। इससे गरीब, दलित और आदिवासी समाज पूरी तरह अमीरों पर निर्भर हो जाएगा।

लोकतंत्र और संविधान पर हमला
राहुल गांधी ने भाजपा पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी
लोकतंत्र
संविधान
एक व्यक्ति-एक वोट
जैसी अवधारणाओं को खत्म करना चाहती है।

उन्होंने कहा कि भाजपा आजादी से पहले वाला हिंदुस्तान वापस लाना चाहती है।

‘भाजपा डरपोक है, एकजुटता से पीछे हटेगी’

अपने संबोधन के अंत में राहुल गांधी ने भाजपा को डरपोक बताते हुए कहा,
“अगर हम सब एक साथ खड़े हो गए, तो नरेंद्र मोदी को पीछे हटना पड़ेगा और मनरेगा फिर से पूरी ताकत के साथ बहाल होगी।”
उन्होंने मजदूरों, किसानों और आम जनता से एकजुट होकर इस लड़ाई को लड़ने की अपील की।




रामदास अठावले का पिनाराई विजयन को NDA में शामिल होने का खुला न्योता, कहा– केरल को मिलेगा ज्यादा फंड और तेज विकास

केरल | केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदास अठावले ने केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को एनडीए में शामिल होने का खुला न्योता दिया है। उन्होंने इसे एक “क्रांतिकारी निर्णय” बताते हुए कहा कि यदि पिनाराई विजयन और उनकी पार्टी सीपीआई (एम) एनडीए में शामिल होती है, तो केरल को केंद्र सरकार से अधिक वित्तीय सहायता मिलेगी और राज्य का विकास तेजी से होगा।
रामदास अठावले ने यह बयान केरल के कॅलब्लॉकर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया।

“एनडीए में आएंगे तो फंड की दिक्कत खत्म होगी” – अठावले
केंद्रीय मंत्री ने कहा,
“मैं केरल के लंबे समय से मुख्यमंत्री रहे पिनाराई विजयन से अपील करता हूं कि वे एनडीए में शामिल हों। यह एक क्रांतिकारी फैसला होगा। अगर वे और सीपीआई (एम) एनडीए में आते हैं, तो केरल को ज्यादा फंड मिलेगा और राज्य का तेजी से विकास होगा।”

अठावले ने दावा किया कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर तालमेल से विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी और केरल को केंद्रीय योजनाओं का पूरा लाभ मिलेगा।

NDA और CPI(M): कट्टर वैचारिक विरोधी

भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए और वामपंथी दल सीपीआई (एम) लंबे समय से एक-दूसरे के कट्टर राजनीतिक और वैचारिक विरोधी माने जाते हैं। ऐसे में रामदास अठावले का यह प्रस्ताव राजनीतिक हलकों में चौंकाने वाला माना जा रहा है।

गौरतलब है कि केरल की सीपीआई (एम) सरकार लगातार आरोप लगाती रही है कि केंद्र सरकार राज्य के साथ भेदभाव कर रही है और कई योजनाओं के फंड या तो रोके जा रहे हैं या जानबूझकर देरी से जारी किए जा रहे हैं।

केंद्र पर भेदभाव के आरोप, विरोध प्रदर्शन भी

इसी महीने की शुरुआत में केरल की सत्तारूढ़ वाम मोर्चा सरकार (LDF) ने केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया था। केरल के आबकारी मंत्री एम.बी. राजेश ने आरोप लगाया था कि केंद्र ने कई योजनाओं की राशि कम कर दी है और भुगतान में जानबूझकर देरी की जा रही है। उन्होंने वायनाड में हुए भूस्खलन के दौरान भी पर्याप्त मदद न मिलने का आरोप लगाया था।

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए रामदास अठावले ने कहा कि यदि केरल सरकार एनडीए से हाथ मिला लेती है, तो फंड से जुड़ी समस्याएं समाप्त हो जाएंगी और राज्य को केंद्र से पूरा सहयोग मिलेगा।

राज्यपाल–मुख्यमंत्री विवाद से और गरमाई राजनीति

इस बीच केरल की राजनीति पहले से ही गरमाई हुई है। मंगलवार को एक नया विवाद तब खड़ा हो गया जब मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के उत्तराधिकारी आर्लेकर पर आरोप लगाया कि उन्होंने मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर नीति भाषण में अपने स्तर पर बदलाव किए। वहीं लोकभवन ने पलटवार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का भाषण आधी-अधूरी सच्चाइयों से भरा था।

चुनावी साल में बढ़ा राजनीतिक तापमान

इस साल के अंत में केरल में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनावी मैदान में सत्तारूढ़ एलडीएफ, कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ, और लगातार मजबूत होती भाजपा-एनडीए के बीच मुकाबला तय माना जा रहा है। हाल ही में तिरुवनंतपुरम नगर निगम चुनाव में भाजपा की जीत के बाद राज्य की राजनीति अब त्रिकोणीय संघर्ष की ओर बढ़ती दिख रही है।

रामदास अठावले का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब केरल की राजनीति निर्णायक मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है।




MGNREGA पर कांग्रेस का आरोप: “अधिकार छीने जा रहे हैं”, ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’

A file image of Chairperson of Rachnatmak Congress leader Sandeep Dikshit.

कांग्रेस के नेता और चेयरपर्सन संदीप दीक्षित की एक फ़ाइल तस्वीर।
| फोटो क्रेडिट: पीटीआई

नई दिल्ली | 21 जनवरी 2026
कांग्रेस ने बुधवार को केंद्र सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को कमजोर करने और मजदूरों के अधिकार छीनने का गंभीर आरोप लगाया। पार्टी ने दावा किया कि MGNREGA की जगह एक नया कानून VB-G RAM G लाया गया है, जिसका कांग्रेस लगातार विरोध कर रही है।

दीक्षित ने कहा—




Delhi News ।नितिन नबीन बने बीजेपी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष, पीएम मोदी बोले—“पार्टी मामलों में वही मेरे बॉस”

‘You are my boss, I am a worker’: PM Narendra Modi as Nitin Nabin takes charge as BJP chief; asks partymen to shun congress ‘failings’भारतीय जनता पार्टी को मंगलवार को नया नेतृत्व मिला। नितिन नबीन ने बीजेपी के 12वें और अब तक के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें खुला समर्थन देते हुए कहा कि पार्टी के मामलों में नितिन नबीन ही उनके “बॉस” हैं और वह स्वयं एक कार्यकर्ता की भूमिका में हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,
“लोग सोचते हैं कि नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने हैं, 50 साल की उम्र में मुख्यमंत्री बने और 25 वर्षों से सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। लेकिन इन सबसे ऊपर मेरी पहचान एक बीजेपी कार्यकर्ता की है। यही मेरा सबसे बड़ा गर्व है।”

संगठन, अनुशासन और आत्ममंथन पर जोर

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने बीजेपी के निरंतर विस्तार और चुनावी सफलता का श्रेय संगठनात्मक मजबूती, अनुशासन और कार्यकर्ता संस्कृति को दिया। उन्होंने कांग्रेस के पतन की तुलना करते हुए कहा कि 1984 में 400 से अधिक लोकसभा सीटें और लगभग 50 प्रतिशत वोट पाने वाली पार्टी आज 100 सीटें जीतने के लिए संघर्ष कर रही है।

मोदी ने कहा,
“कांग्रेस अपने पतन पर आत्मनिरीक्षण नहीं कर सकती, क्योंकि ऐसा करने से उस परिवार पर सवाल खड़े होंगे जिसने पार्टी को कब्ज़े में ले रखा है। परिवारवाद लोकतंत्र का सबसे बड़ा दुश्मन है।”
उन्होंने बिना नाम लिए विपक्ष के उस आरोप का भी जवाब दिया, जिसमें चुनावी हार के लिए चुनाव आयोग और बीजेपी की मिलीभगत की बात कही जाती है, और इसे हार से बचने का बहाना करार दिया।

‘बीजेपी अलग सोच के साथ आगे बढ़ी’
प्रधानमंत्री ने 2002 के गुजरात विधानसभा चुनावों का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारी जीत के बावजूद वह हारी हुई सीटों की समीक्षा के लिए बैठक कर रहे थे।

“बीजेपी शुरू से ही आत्ममंथन करने वाली पार्टी रही है। यही वजह है कि आज वह राष्ट्रीय से लेकर स्थानीय स्तर तक शासन की पसंदीदा पार्टी बन चुकी है।”
उन्होंने हाल के विधानसभा और नगर निगम चुनावों में बीजेपी की “अभूतपूर्व स्ट्राइक रेट” का उल्लेख किया।
घुसपैठ, राष्ट्रीय सुरक्षा और ‘शहरी नक्सल’
पीएम मोदी ने अवैध घुसपैठ और जनसांख्यिकीय असंतुलन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि दुनिया के कई शक्तिशाली और समृद्ध देश भी घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कदम उठा रहे हैं।

“कोई भी देश अवैध घुसपैठ को स्वीकार नहीं करता। भारत भी अपनी ज़मीन पर अवैध लोगों को बर्दाश्त नहीं कर सकता। यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।”
उन्होंने वोट-बैंक की राजनीति के लिए घुसपैठियों को संरक्षण देने वाली पार्टियों को बेनकाब करने की अपील की। साथ ही ‘शहरी नक्सलियों’ पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साजिश रच रहे हैं, लेकिन देश में माओवाद अब अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है।

नए अध्यक्ष को ‘रिपोर्टिंग’
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा कि वह अपने काम का हिसाब नए पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन को दे रहे हैं, जो उनकी “गोपनीय रिपोर्ट” तैयार करेंगे। इस टिप्पणी पर सभागार तालियों से गूंज उठा।

नितिन नबीन के नेतृत्व में बीजेपी संगठन को और मजबूत करने तथा आगामी राजनीतिक चुनौतियों से निपटने की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।




प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में नितिन नबीन ने संभाला भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद

नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संगठनात्मक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया, जब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में पार्टी के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नबीन ने औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व, केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, सांसदों, वरिष्ठ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की बड़ी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का माहौल उत्साह, अनुशासन और संगठनात्मक एकजुटता से भरा नजर आया।

पदभार ग्रहण समारोह को पार्टी की भावी राजनीतिक दिशा और संगठनात्मक रणनीति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन में नितिन नबीन को बधाई देते हुए कहा कि भाजपा केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का आंदोलन है। उन्होंने कहा—
“भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका संगठन है। यह संगठन विचार, संस्कार और सेवा की त्रिवेणी पर खड़ा है। नितिन नबीन जैसे समर्पित और ऊर्जावान कार्यकर्ता के हाथों में संगठन की कमान जाना, पार्टी के लिए एक सशक्त भविष्य का संकेत है।”

प्रधानमंत्री ने कार्यकर्ताओं से विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर पूरी निष्ठा से काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्ष भाजपा के लिए केवल चुनावी नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा के निर्णायक वर्ष हैं। मोदी ने संगठन से अपेक्षा जताई कि वह समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सरकार की योजनाओं और विचारधारा को पहुंचाए।

नवनिर्वाचित अध्यक्ष नितिन नबीन का पहला संदेश

पदभार ग्रहण करने के बाद अपने पहले संबोधन में  नितिन नबीन ने प्रधानमंत्री मोदी, पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा—
“यह पद मेरे लिए सम्मान से अधिक एक बड़ी जिम्मेदारी है। भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता मेरा परिवार है और संगठन को और मजबूत बनाना मेरी प्राथमिकता होगी।”
नितिन नबीन ने स्पष्ट किया कि पार्टी का फोकस संगठनात्मक विस्तार, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा बूथ स्तर तक संगठन को सशक्त करने पर रहेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के मंत्र के साथ आगे बढ़ती रहेगी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने उद्बोधन में संगठनात्मक अनुशासन और चुनावी रणनीति पर जोर दिया। उन्होंने कहा—
“भाजपा का संगठन विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक संगठन है। इसकी ताकत उसकी विचारधारा और कार्यकर्ताओं की निष्ठा में है। नितिन नबीन के नेतृत्व में संगठन नई ऊंचाइयों को छुएगा।”
अमित शाह ने कहा कि पार्टी हर चुनाव को जनसेवा का अवसर मानकर लड़ती है और यही भाजपा को अन्य दलों से अलग बनाता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भाजपा ने हमेशा राष्ट्रहित को राजनीति से ऊपर रखा है। उन्होंने नवनिर्वाचित अध्यक्ष को शुभकामनाएं देते हुए कहा—
“संगठन की मजबूती ही मजबूत सरकार की नींव होती है। भाजपा का अनुशासित ढांचा उसकी सबसे बड़ी पूंजी है।”

पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता

  जे.पी. नड्डा ने कहा कि नितिन नबीन का संगठनात्मक अनुभव पार्टी को नई ऊर्जा देगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट रहकर पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर कई मुख्यमंत्रियों, वरिष्ठ सांसदों और राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने भी अपने विचार रखे और नए अध्यक्ष को शुभकामनाएं दीं।

कार्यकर्ताओं में उत्साह
पदभार ग्रहण समारोह के दौरान कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। “मोदी है तो मुमकिन है” और “भाजपा जिंदाबाद” जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। कार्यकर्ताओं ने इसे संगठनात्मक मजबूती और भविष्य की राजनीतिक लड़ाइयों के लिए संकल्प का अवसर बताया।

नितिन नबीन का भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण करना ऐसे समय में हुआ है, जब देश की राजनीति तेजी से बदल रही है और संगठन की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और शीर्ष नेतृत्व के सहयोग से नितिन नबीन के सामने पार्टी को और मजबूत करने, नई पीढ़ी को जोड़ने और विकसित भारत के लक्ष्य को संगठनात्मक स्तर पर साकार करने की बड़ी जिम्मेदारी है।

यह पदभार ग्रहण समारोह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भाजपा के आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक सफर की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।