जीएसटी 2.0 : अगली पीढ़ी के सुधार और “GST Savings Mahotsav”

GST Savings Mahotsav

नई दिल्ली। सोमवार (22 सितंबर, 2025) से देश में लागू होने जा रहे घटित जीएसटी दरों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक “ऐतिहासिक और अगली पीढ़ी का सुधार” बताया है। नवरात्रि के पहले दिन से लागू होने वाले इन नए कर प्रावधानों को उन्होंने “जीएसटी सेविंग्स महोत्सव” GST Savings Mahotsav का नाम दिया और कहा कि यह गरीबों, मध्यम वर्ग और नए मध्यम वर्ग के जीवन पर सीधा सकारात्मक असर डालेगा।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत आज विकास की नई गाथा लिखने जा रहा है, जहां कर सुधार न केवल वस्तुओं और सेवाओं को सस्ता बनाएंगे बल्कि आर्थिक विकास को गति भी देंगे। उन्होंने “मेड इन इंडिया” वस्तुओं की खरीद पर बल देते हुए कहा कि भारत की समृद्धि स्वदेशी मंत्र से ही अपनी ताकत हासिल करेगी।


जीएसटी परिषद का ऐतिहासिक निर्णय

जीएसटी परिषद, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों शामिल हैं, ने 22 सितंबर से सामान और सेवाओं पर कर की दरों को घटाने का निर्णय लिया। यह फैसला नवरात्रि जैसे शुभ अवसर से जुड़ा हुआ है, जिससे सरकार नागरिकों तक “बचत और विकास” का संदेश पहुँचाना चाहती है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन (GST Savings Mahotsav) में बताया कि अब देश में केवल दो कर स्लैब रहेंगे – 5% और 18%। इससे कर संरचना सरल होगी और नागरिकों को राहत मिलेगी। खासकर 12% पर टैक्स लगने वाली 99% वस्तुएँ अब 5% के दायरे में आ गई हैं। इसका सीधा मतलब है कि दैनिक उपभोग की वस्तुएँ सस्ती होंगी और सामान्य परिवारों के मासिक खर्च में कमी आएगी।


“बचत महोत्सव” से बढ़ेगी खुशहाली

मोदी ने कहा कि इस सुधार से हर वर्ग को लाभ मिलेगा – गरीब, मध्यवर्ग, नया मध्यवर्ग, युवा, महिलाएँ और किसान।

  • दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली वस्तुएँ जैसे कपड़े, जूते, घरेलू सामान और छोटे उपकरण अब सस्ते मिलेंगे।
  • उपभोक्ताओं की बचत बढ़ेगी, जिससे उनकी क्रय शक्ति मजबूत होगी।
  • कारोबारी माहौल और भी आसान होगा और निवेश आकर्षक बनेगा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सुधार “देश की विकास यात्रा को तेज करेगा और प्रत्येक राज्य को इस दौड़ में समान भागीदार बनाएगा।”


जीएसटी 2.0 : अगली पीढ़ी के सुधार और “GST Savings Mahotsav

मोदी ने स्मरण कराया कि जब 2014 में उनकी सरकार आई, तब से ही जीएसटी को प्राथमिकता दी गई। 2017 में भारत ने जीएसटी लागू करके एक “कर क्रांति” की शुरुआत की। पहले स्थिति यह थी कि हर राज्य की अपनी कर व्यवस्था थी, चेकपोस्ट पर रुकावटें थीं और कारोबारियों को कई प्रकार के फॉर्म भरने पड़ते थे।

जीएसटी ने इन बाधाओं को खत्म किया और “एक राष्ट्र, एक टैक्स” की अवधारणा को साकार किया। अब 2025 में इसे और सरल बनाते हुए अगली पीढ़ी के सुधार लागू किए जा रहे हैं।


GST Savings Mahotsav” का असर आम नागरिकों पर

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए और नया मध्यम वर्ग बनकर उभरे। इस वर्ग की अपनी आकांक्षाएँ और अपेक्षाएँ हैं।

  • इस वर्ष सरकार ने 12 लाख रुपये तक की आय को आयकर से मुक्त किया।
  • अब, घटित जीएसटी दरों के रूप में गरीब, मध्यवर्ग और नया मध्यवर्ग को डबल बोनस मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि इस सुधार में “ग्राहक भगवान है” की मानसिकता का प्रतिबिंब झलकता है। दुकानदार और व्यापारी भी उत्साहित हैं और ग्राहक तक लाभ पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं।

मोदी ने दावा किया कि नई जीएसटी (GST Savings Mahotsav)दरों और कर छूट को मिलाकर 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत भारतीय नागरिकों तक पहुँचेगी।

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एमएसएमई और आत्मनिर्भर भारत

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों) पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि देश को आत्मनिर्भर बनाने की बड़ी जिम्मेदारी इन्हीं उद्योगों पर है।

जीएसटी दरों में कटौती से:

  • एमएसएमई की बिक्री बढ़ेगी।
  • टैक्स का बोझ घटेगा।
  • रोजगार और उत्पादन दोनों को गति मिलेगी।

मोदी ने कहा कि “भारत को उस खोए हुए गौरव को फिर से प्राप्त करना है जब हम विनिर्माण के शिखर पर थे। हमें ऐसा उत्पादन करना होगा जो वैश्विक बाजार में भारत की पहचान बने।”


स्वदेशी मंत्र और “मेड इन इंडिया”

प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम के स्वदेशी आंदोलन की याद दिलाते हुए कहा कि जिस तरह उस समय स्वदेशी ने देश को शक्ति दी, उसी तरह आज भी भारत की समृद्धि का आधार यही मंत्र है।

उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे विदेशी उत्पादों की बजाय “मेड इन इंडिया” सामान को खरीदें। यह सिर्फ एक आर्थिक विकल्प नहीं बल्कि देशभक्ति का प्रतीक भी होना चाहिए।

मोदी ने राज्य सरकारों से भी आह्वान किया कि वे विनिर्माण को प्रोत्साहित करें और निवेश के लिए बेहतर वातावरण तैयार करें।


सुधारों का व्यापक असर

  1. उपभोक्ताओं के लिए लाभ – सस्ती वस्तुएँ और अधिक बचत।
  2. व्यवसाय के लिए सरलता – कर संरचना का सरलीकरण, अनुपालन आसान।
  3. निवेश में वृद्धि – आकर्षक कारोबारी माहौल।
  4. राज्यों की भागीदारी – केंद्र और राज्यों का साझा विकास।
  5. एमएसएमई को बढ़ावा – आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस संबोधन ने स्पष्ट कर दिया कि घटित जीएसटी दरें केवल कर सुधार नहीं बल्कि एक आर्थिक-सामाजिक क्रांति हैं। इसे “जीएसटी सेविंग्स महोत्सव” GST Savings Mahotsav का नाम देकर सरकार ने यह संदेश दिया है कि विकास केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि आम नागरिकों की जेब और जीवन पर इसका सीधा असर दिखेगा।

यह सुधार नवरात्रि जैसे शुभ समय पर (GST Savings Mahotsav) लागू हो रहा है, जो प्रतीक है नए आरंभ और सकारात्मक बदलाव का। यदि केंद्र और राज्य मिलकर इस दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो निश्चित रूप से भारत आत्मनिर्भरता और वैश्विक आर्थिक नेतृत्व की ओर तेज कदमों से बढ़ेगा।




PM Modi के संबोधन से पहले कांग्रेस के तंज, ट्रंप के दावों और H-1B विवाद से गरमाया माहौल

pm Modi

भारत में रविवार, 21 सितंबर 2025 की शाम राजनीतिक और कूटनीतिक सरगर्मियों से भरी रही। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (pm Modi) शाम 5 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे। लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि उनके संबोधन का विषय गुप्त रखा गया। इस अस्पष्टता ने न केवल जनता की जिज्ञासा बढ़ाई, बल्कि विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस, को भी केंद्र सरकार पर तंज कसने का अवसर दिया।

पीएमओ की घोषणा और समय का महत्व

प्रधानमंत्री मोदी (pm Modi) का संबोधन ऐसे समय पर तय हुआ जब देश में नवरात्रि की पूर्व संध्या थी। ठीक इसी दिन से संशोधित जीएसटी दरें लागू हो रही थीं, जिनसे कई उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें कम होनी थीं। सरकार चाहती थी कि जीएसटी में कटौती का लाभ लोगों तक तुरंत पहुंचे और इसे एक “राहत पैकेज” की तरह देखा जाए।
हालाँकि, पीएमओ ने संबोधन के विषय पर चुप्पी साधे रखी। यही कारण था कि मीडिया और विपक्ष ने कयास लगाने शुरू कर दिए—क्या मोदी केवल नए जीएसटी दरों का दोहराव करेंगे, या फिर अमेरिका और पाकिस्तान से जुड़े ताजा विवादों पर भी बोलेंगे?

कांग्रेस का तंज और जयराम रमेश का बयान

कांग्रेस ने इस मौके पर तीखा हमला बोला। पार्टी के महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने एक पोस्ट में लिखा:

“जैसे ही पीएम राष्ट्र को संबोधित करने की तैयारी कर रहे हैं, उनके अच्छे मित्र वाशिंगटन डी.सी. में फिर से उनकी चमक चुरा लेते हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 42वीं बार दावा किया है कि उन्होंने अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापार का leverage इस्तेमाल करते हुए ऑपरेशन सिंदूर को रोका।”

रमेश ने व्यंग्य करते हुए सवाल उठाए—क्या मोदी ट्रंप के इन दावों पर कोई प्रतिक्रिया देंगे? क्या वह लाखों भारतीय H-1B वीज़ा धारकों की चिंताओं को संबोधित करेंगे, जिन पर अचानक शुल्क बढ़ोतरी का असर पड़ा है? या फिर केवल नए जीएसटी दरों की जानकारी देंगे, जो पहले से ही सबको पता है?

ट्रंप का दावा और भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम

दरअसल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले कुछ महीनों में बार-बार दावा किया है कि मई 2025 में हुए भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम में उनकी भूमिका थी। उनका कहना है कि उन्होंने बढ़ते अमेरिका-भारत व्यापार का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया और इस तरह संघर्ष को रोका।

  • 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले में 26 नागरिक मारे गए थे।
  • इसके जवाब में भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसका लक्ष्य पाकिस्तान और पाकिस्तान-नियंत्रित कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर हमला करना था।
  • इसके बाद 10 मई तक भारत और पाकिस्तान के बीच ड्रोन और मिसाइल हमले चले।
  • 10 मई की रात दोनों देशों ने संघर्ष विराम पर सहमति जताई।

भारत का आधिकारिक रुख हमेशा से यही रहा है कि यह सीज़फायर दोनों देशों के सैन्य संचालन निदेशकों (DGMO) के बीच सीधे संवाद का नतीजा था। लेकिन ट्रंप लगातार इसे अपनी “कूटनीतिक उपलब्धि” बताते रहे हैं। उन्होंने कई मंचों पर दावा किया कि उन्होंने “सात युद्धों को समाप्त करने” में भूमिका निभाई है और इसके लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए।

कांग्रेस का सवाल: “क्या मोदी(pm modi) ट्रंप को जवाब देंगे?”

कांग्रेस का आरोप है कि मोदी (pm Modi) सरकार अमेरिका की दखलअंदाजी पर चुप रहती है। जयराम रमेश ने कहा कि ट्रंप ने न केवल अमेरिका में, बल्कि सऊदी अरब, कतर और यूके में भी यही दावा दोहराया है। विपक्ष का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी को इस मुद्दे पर देश को स्पष्ट करना चाहिए कि भारत की विदेश नीति में तीसरे पक्ष की कोई जगह नहीं है।

H-1B वीज़ा शुल्क बढ़ोतरी का विवाद

मोदी (pm Modi) के संबोधन से ठीक पहले एक और बड़ा मुद्दा सामने आया—H-1B वीज़ा शुल्क बढ़ोतरी

  • ट्रंप प्रशासन ने घोषणा की कि नए H-1B वीज़ा याचिकाओं के लिए 100,000 डॉलर का एकमुश्त शुल्क देना होगा।
  • यह शुल्क केवल नए आवेदनों पर लागू होगा, मौजूदा वीज़ा धारकों को इससे छूट दी गई है।
  • हालांकि, यह कदम अमेरिका में काम कर रहे लाखों भारतीय पेशेवरों और उनके परिवारों के लिए गहरी चिंता का कारण बना।

कांग्रेस ने सवाल किया कि क्या मोदी अपने संबोधन में भारतीय आईटी पेशेवरों और छात्रों के इस संकट पर कोई ठोस आश्वासन देंगे?

जीएसटी दरों में कटौती – सरकार का बड़ा कदम

इन अंतरराष्ट्रीय विवादों के बीच, मोदी (Pm Modi) सरकार घरेलू स्तर पर जीएसटी दरों में कटौती को एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश करना चाहती है।

  • 22 सितंबर से नई दरें लागू होंगी।
  • कई उपभोक्ता वस्तुएं और सेवाएँ सस्ती होंगी, जिससे त्योहारों के मौसम में लोगों को राहत मिलेगी।
  • सरकार का मानना है कि यह कदम महँगाई पर काबू पाने और उपभोग बढ़ाने में मदद करेगा।

हालाँकि, कांग्रेस का आरोप है कि यह कदम “हताशा” में उठाया गया है और इसका फायदा सीमित होगा।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर मोदी (pm modi)-ट्रंप समीकरण

मोदी और ट्रंप की व्यक्तिगत “दोस्ती” लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। दोनों नेताओं ने कई बार एक-दूसरे की तारीफ की है। लेकिन मौजूदा हालात में यह रिश्ता भारतीय राजनीति में आलोचना का केंद्र बन गया है।

  • ट्रंप द्वारा भारत-पाकिस्तान सीज़फायर का श्रेय लेने से विपक्ष को मोदी पर हमला करने का अवसर मिला।
  • एच-1बी वीज़ा शुल्क बढ़ोतरी से भारतीय आईटी सेक्टर पर गहरा असर पड़ सकता है, जो मोदी सरकार के लिए चुनौती है।
  • दूसरी ओर, मोदी सरकार अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापार और निवेश को अपनी सफलता बताती रही है।

विपक्ष बनाम सरकार – जनता की नजरें

जनता की निगाहें इस पर टिकी थीं कि प्रधानमंत्री (Pm Modi) अपने संबोधन में किन मुद्दों पर बोलेंगे।

  • क्या वह ट्रंप के दावों को खारिज करेंगे और भारत की स्वतंत्र विदेश नीति पर जोर देंगे?
  • क्या वह H-1B वीज़ा संकट से जूझ रहे भारतीयों के लिए कोई ठोस आश्वासन देंगे?
  • या फिर संबोधन केवल जीएसटी दरों की जानकारी और त्योहारों की शुभकामनाओं तक सीमित रहेगा?

कांग्रेस का कहना है कि मोदी को इन “गंभीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों” पर चुप्पी तोड़नी चाहिए, वरना यह संदेश जाएगा कि सरकार अमेरिकी दबाव में है।

21 सितंबर 2025 का दिन भारतीय राजनीति और कूटनीति दोनों के लिए अहम साबित हुआ। एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी (Pm Modi) का राष्ट्र को संबोधन उत्सुकता का विषय बना, तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने इसे लेकर केंद्र सरकार पर सवालों की बौछार कर दी। राष्ट्रपति ट्रंप के दावे, एच-1बी वीज़ा विवाद और जीएसटी दरों में बदलाव—इन सबके बीच मोदी का संबोधन केवल नीतिगत घोषणा भर नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक और राजनीतिक परीक्षा के रूप में देखा जा रहा था।

भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम का असली श्रेय किसे जाता है, इस पर बहस लंबे समय तक जारी रह सकती है। लेकिन इतना साफ है कि विपक्ष मोदी से जवाब मांग रहा है, जनता आश्वासन चाहती है और वैश्विक मंच पर भारत की छवि दांव पर है। ऐसे में प्रधानमंत्री का हर शब्द न केवल घरेलू राजनीति बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी असर डालने वाला होगा।




Hindi News|नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की वक्तृत्व कला

Humour gives Modi a special edge in politics

New Dehli। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की वक्तृत्व कला को लेकर उनके कट्टर विरोधी भी यह मानते हैं कि वह मंच पर भीड़ को बांधने और अपने संदेश को प्रभावी ढंग से पहुँचाने में अद्वितीय हैं। लेकिन उनकी भाषण शैली का सबसे अहम और कम आंका गया पहलू है — हास्य का रणनीतिक उपयोग

मुहावरों और फिल्मों से सीधे जुड़ाव

मोदी का अंदाज़ केवल तथ्यों या नीतिगत बहस तक सीमित नहीं रहता। वे आम लोगों की बोलचाल, मुहावरों और लोकप्रिय फिल्मों के संवादों को अपनी भाषा में इस तरह पिरोते हैं कि संदेश सीधा श्रोताओं के दिल में उतर जाता है। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने शोले फिल्म का प्रसिद्ध डायलॉग “अरे ओ सांभा, कितने वोट लाये?” कांग्रेस की चुनावी राजनीति पर तंज कसने के लिए इस्तेमाल किया। श्रोता हंसी से लोटपोट हो उठते और संदेश बेहद सहजता से पहुँच जाता।

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नरेंद्र मोदी (Narendra Modi)व्यंग्य से हमला और माहौल

मोदी के भाषणों में चुटीले वन-लाइनर्स एक राजनीतिक हथियार की तरह काम करते हैं। संसद से लेकर चुनावी मंच तक, वह विरोधियों पर व्यंग्य करते हुए माहौल को हल्का बना देते हैं।

  • जब कांग्रेस की सीटें लगातार घटती गईं तो उन्होंने कहा — “400 से 40 तक!”। यह पंक्ति सिर्फ़ भाषण तक सीमित नहीं रही, बल्कि सोशल मीडिया पर मीम बनकर वायरल हो गई।
  • 2020 में राहुल गांधी के भाषण पर चुटकी लेते हुए मोदी बोले — “मैंने 30-40 मिनट तक बात की, लेकिन करंट पहुंचने में इतना समय लग गया। कुछ ट्यूब लाइटें इसी तरह काम करती हैं!”। संसद ठहाकों से गूंज उठी।

नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) आत्मव्यंग्य की कला

मोदी ने अपने ऊपर होने वाले हमलों को भी हास्य में बदलकर अपने पक्ष में किया। उनका मशहूर कथन “मैं प्रतिदिन 2-3 किलो गाली खाता हूं, इसलिए मुझ पर कोई असर नहीं होता” दर्शाता है कि वह आलोचनाओं को भी सकारात्मक ऊर्जा में बदल देते हैं। यही वजह है कि विरोधियों के तीर भी अक्सर उन्हीं के हथियार बन जाते हैं।

राजनीतिक असर

हास्य और व्यंग्य से लिपटी यह शैली मोदी के लिए केवल ताली बटोरने का माध्यम नहीं है। यह रणनीति कई स्तरों पर असर डालती है:

  1. जनसंपर्क – सरल और मजाकिया भाषा से वह भीड़ के साथ भावनात्मक रिश्ता बना लेते हैं।
  2. विरोधियों को असहज करना – तंज और चुटकुलों से विपक्ष के नेताओं को अक्सर रक्षात्मक मुद्रा में आना पड़ता है।
  3. संदेश की याददाश्त – गंभीर मुद्दे भी मजेदार पंक्तियों के कारण जनता के मन में लंबे समय तक बने रहते हैं।
  4. डिजिटल युग में असर – उनकी वन-लाइनर्स सोशल मीडिया पर तुरंत वायरल हो जाती हैं और चुनावी विमर्श का हिस्सा बन जाती हैं।

नरेंद्र मोदी(narendra Modi) का वक्तृत्व केवल भाषण देने की कला नहीं, बल्कि एक सोच-समझकर गढ़ी गई संचार रणनीति है। इसमें हास्य, व्यंग्य और आत्मव्यंग्य का मिश्रण है, जिसने उन्हें भारतीय राजनीति में सबसे प्रभावशाली वक्ताओं में खड़ा कर दिया है। यही कारण है कि उनके भाषण सिर्फ सुनाए नहीं जाते, बल्कि याद रखे जाते हैं — और आगे भी राजनीति के मंच पर गूंजते रहेंगे।




नेपाल में जेन जेड (Gen Z) क्रांति : सुशीला कार्की बनीं पहली महिला प्रधानमंत्री

'New dawn in Nepal': PM Modi reaches out to Nepal's Gen Z; congratulates Sushila Karki

नेपाल में पिछले कुछ सप्ताहों की उथल-पुथल ने राजनीति की धारा बदल दी है। जेन जेड (Gen Z) के नेतृत्व में एक ऐसा आंदोलन खड़ा हुआ जिसने सत्ता  समीकरण को हिला दिया और अंततः सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुँचा दिया। यह न केवल नेपाल के लिए बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए युवा शक्ति के उभार का प्रतीक है।

मोदी का संदेश: कूटनीति और समर्थन का संकेत

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नेपाल की नई व्यवस्था पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने युवाओं की सक्रियता को “नेपाल में नई सुबह का संकेत” बताया और कहा—”मैं हर उस व्यक्ति की प्रशंसा करूँगा जिसने अस्थिरता के दौर में भी लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोच्च रखा।”

सुशीला कार्की को बधाई देते हुए मोदी ने उम्मीद जताई कि वह नेपाल को शांति, स्थिरता और समृद्धि की ओर ले जाएँगी। साथ ही, उन्हें नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने पर “महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण” करार दिया।

मोदी का यह संदेश केवल शुभकामनाओं तक सीमित नहीं था। यह भारत-नेपाल संबंधों की गहराई और सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी का स्पष्ट संकेत था। प्रधानमंत्री ने कहा—“नेपाल एक मित्र रहा है, बहुत घनिष्ठ मित्र। हम इतिहास और विश्वास के बंधन से जुड़े हैं। हम साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं।”

जेन ज़ेड: (Gen Z) सड़कों से सत्ता तक

नेपाल की नई व्यवस्था की असली कहानी जेन ज़ेड की भूमिका से जुड़ी है।

सड़कों की सफाई और शहरों को सजाने से शुरू हुआ यह आंदोलन जल्दी ही राजनीतिक विद्रोह में बदल गया।

युवाओं ने सोशल मीडिया को हथियार बनाया और पारंपरिक सत्ता ढाँचों को चुनौती दी।

अंततः उन्होंने न केवल पुरानी सरकार को गिराया बल्कि राजनीतिक वर्ग के विरोध के बावजूद सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाने में भी सफलता पाई।

यह घटना दक्षिण एशिया में युवाओं की निर्णायक भूमिका का ऐतिहासिक उदाहरण है।

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पृष्ठभूमि: भारत-नेपाल रिश्तों का महत्व

भारत और नेपाल का रिश्ता सिर्फ पड़ोसी देशों का नहीं है, बल्कि इतिहास, संस्कृति और विश्वास की साझी विरासत का है।

खुली सीमाएँ, साझा धर्म-संस्कृति और आर्थिक रिश्ते दोनों देशों को एक-दूसरे से गहरे जोड़ते हैं।

नेपाल में अस्थिरता का असर हमेशा भारत पर भी पड़ता है, इसलिए भारत लगातार स्थिर और लोकतांत्रिक नेपाल की वकालत करता रहा है।

मोदी का संदेश इसी नीति की निरंतरता को दर्शाता है।

नेपाल में जेन ज़ेड (Gen Z) का यह उभार और सुशीला कार्की का नेतृत्व, एशियाई राजनीति में एक नया अध्याय खोल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी का संदेश इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत इस बदलाव को सकारात्मक दृष्टि से देख रहा है और नेपाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहना चाहता है।




ट्रंप बोले– मोदी रहेंगे हमेशा मेरे दोस्त, भारत-अमेरिका संबंध ‘बेहद खास’

'I'll always be friends with Modi': Trump calls India-US ties 'very special';  voices disappointment over PM's recent actionsरूस से तेल खरीद और व्यापार टैरिफ पर जताई नाराज़गी, पर रिश्तों में ‘चिंता की कोई बात नहीं’

नई दिल्ली/वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी दोस्ती को “हमेशा कायम रहने वाली” बताते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते “बेहद खास” हैं। उन्होंने साफ किया कि दोनों देशों के संबंधों में “किसी प्रकार की चिंता की कोई बात नहीं” है, हालांकि उन्होंने मोदी सरकार के कुछ मौजूदा कदमों पर असहमति जताई।

ट्रंप ने एएनआई से बातचीत में कहा, “मैं हमेशा दोस्त रहूँगा। मैं मोदी का हमेशा दोस्त रहूँगा। वह एक महान प्रधानमंत्री हैं। लेकिन मुझे इस समय उनके द्वारा किए जा रहे काम पसंद नहीं आ रहे हैं।”

रूस से तेल खरीद पर निराशा

ट्रंप ने विशेष तौर पर भारत द्वारा रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदने पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई है।
“मुझे बहुत निराशा हुई है कि भारत रूस से इतना तेल खरीदेगा। मैंने उन्हें यह बता दिया है। हमने भारत पर बहुत बड़ा टैरिफ लगाया है—50 प्रतिशत, बहुत ज़्यादा टैरिफ।”

दोस्ती और मतभेद साथ-साथ

राष्ट्रपति ट्रंप ने दोहराया कि मोदी के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध हमेशा मजबूत रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कुछ महीने पहले मोदी अमेरिका आए थे और वाइट हाउस के रोज़ गार्डन में दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की थी।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक परिदृश्य बदल रहा है और कभी-कभी “खास पल” आते हैं जो रिश्तों को चुनौतीपूर्ण बनाते हैं।

भारत की प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी भारत-अमेरिका संबंधों को “बेहद महत्वपूर्ण” बताया। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी साझा हितों, लोकतांत्रिक मूल्यों और मजबूत जन-जन संबंधों पर आधारित है।
जायसवाल ने कहा, “यह संबंध कई बदलावों और चुनौतियों से गुजरा है। हम ठोस एजेंडे पर केंद्रित हैं और आपसी सम्मान के आधार पर यह रिश्ता आगे भी मजबूत होता रहेगा।”
उन्होंने पुष्टि की कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक मुद्दों पर बातचीत जारी है।

रिश्तों पर नजर

ट्रंप और मोदी के बीच व्यक्तिगत गर्मजोशी पहले भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दिख चुकी है—चाहे 2019 का “Howdy Modi” कार्यक्रम हो या 2020 का “Namaste Trump”। लेकिन मौजूदा हालात में व्यापार, रूस और चीन को लेकर मतभेद उभर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच वार्ता की दिशा यह तय करेगी कि यह “बेहद खास रिश्ता” कितनी मजबूती से आगे बढ़ेगा।




मोदी 3.0 श्रृंखला | भाग 3: विपक्ष की स्थिति और 2029 की राजनीतिक तस्वीर

Denvapost | विशेष राजनीतिक विश्लेषण | जुलाई 2025

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल की शुरुआत भले ही भारी जनादेश के साथ हुई हो, लेकिन एक लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष के बीच संतुलन देश की राजनीतिक सेहत का मूल तत्व होता है। वर्ष 2029 के आम चुनाव से पहले विपक्ष की स्थिति, रणनीति और भविष्य की भूमिका पर यह विश्लेषण केंद्रित है।

2024 के बाद विपक्ष का परिदृश्य

1. INDIA गठबंधन की असफलता

2024 में विपक्षी दलों ने INDIA (Indian National Developmental Inclusive Alliance) नामक गठबंधन बनाया था।

बावजूद इसके, नेतृत्व, सीट बंटवारा, और क्षेत्रीय अहंकार की वजह से यह प्रयोग धराशायी हो गया।

कांग्रेस ने कुछ सीटों पर प्रदर्शन सुधारा, लेकिन समग्र रूप से मोदी लहर के सामने टिक नहीं पाई।

2. कांग्रेस की चुनौतियाँ

राहुल गांधी के नेतृत्व की स्वीकार्यता अब भी सवालों के घेरे में है।

पार्टी को संगठनात्मक स्तर पर जमीनी मजबूती और नए चेहरे नहीं मिल पा रहे हैं।

दक्षिण भारत में कुछ आधार बचा है, लेकिन हिंदी पट्टी पूरी तरह भाजपा के पक्ष में झुकी हुई है।

3. क्षेत्रीय दलों की रणनीति

ममता बनर्जी (टीएमसी), अरविंद केजरीवाल (AAP), केसीआर (BRS), स्टालिन (DMK) जैसे नेता राष्ट्रीय दावेदार बनना चाहते हैं, लेकिन एकजुट विपक्ष की धारणा कमजोर हो चुकी है।

AAP को केंद्र सरकार की केंद्रीय एजेंसियों से लगातार टकराव झेलना पड़ा है, जिससे उसकी गति थमी है।

2029 की राजनीति: संभावनाएं और तस्वीर

भाजपा की दिशा:

यदि मोदी 2029 तक बने रहते हैं, तो वह नेहरू के लगातार कार्यकाल को पीछे छोड़ सकते हैं।

लेकिन, पार्टी के भीतर नेतृत्व उत्तराधिकार (succession) को लेकर 2027–28 तक स्पष्टता लानी होगी।

विपक्ष के लिए संभावनाएं:

एक नया, करिश्माई, गैर-वंशवादी नेता यदि राष्ट्रीय मंच पर उभरता है, तभी विपक्ष मोदी की छाया से बाहर निकल सकता है।

राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की वैकल्पिक व्याख्या के बिना, विपक्ष के पास न तो वैचारिक मजबूती है और न जनसंपर्क का मॉडल।

2029 चुनाव: कौन से फैक्टर निर्णायक होंगे?

निर्णायक फैक्टर असर

मोदी का नेतृत्व भाजपा को ब्रांड के रूप में मजबूत बनाए रखेगा
विपक्ष की एकता अब भी कमजोर कड़ी; सीटों का बंटवारा टकराव लाएगा
युवा मतदाता (18–29) रोजगार और शिक्षा आधारित मुद्दों से प्रभावित होंगे
क्षेत्रीय दलों का गठजोड़ कांग्रेस से दूरी या समीकरण पलट सकते हैं
सोशल मीडिया/AI प्रचार भाजपा की रणनीति अब भी सबसे आक्रामक और व्यापक बनी हुई है

2029 का चुनाव भाजपा के उत्तराधिकार और विपक्ष के पुनरुत्थान की परीक्षा होगा।
यदि मोदी 3.0 जनहित योजनाओं के ठोस निष्पादन, सामाजिक समावेश और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने में सफल होते हैं, तो 2029 में भी उनकी पकड़ मजबूत रह सकती है।




Denvapost Exclusive : मोदी 3.0 की चुनौतियाँ और प्राथमिकताएँ: तीसरे कार्यकाल का रोडमैप

2024 में ऐतिहासिक जीत के साथ तीसरी बार सत्ता में आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यकाल अब एक निर्णायक मोड़ पर है। मोदी 3.0 न केवल एक राजनीतिक उपलब्धि है, बल्कि इससे जुड़ी उम्मीदें और चुनौतियाँ भी पहले से कहीं ज़्यादा व्यापक और पेचीदा हैं।

प्रमुख चुनौतियाँ:

1. 📉 आर्थिक मंदी और बेरोजगारी

भारत की युवाओं की जनसंख्या वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी है, लेकिन रोजगार सृजन अभी भी बड़ा सवाल बना हुआ है।

MSME सेक्टर अभी भी कोविड और नोटबंदी के प्रभाव से पूरी तरह उबर नहीं पाया है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निवेश और कृषि से जुड़े सुधार अपेक्षित हैं।

2. 🌾 कृषि और किसान आंदोलन की विरासत

किसानों में अब भी विश्वास की कमी है। कृषि कानून वापसी के बावजूद उनकी मूलभूत मांगें जैसे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी पर ठोस कदम अपेक्षित हैं।

3. 🧱 संस्थाओं की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्य

सुप्रीम कोर्ट से लेकर संसद तक पर सत्ता के एकाधिकार के आरोपों को जवाब देने की जरूरत है।

विपक्ष कमजोर जरूर है, लेकिन देश में प्रजातांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना मोदी सरकार के दीर्घकालिक छवि के लिए जरूरी होगा।

4. 🌐 विदेश नीति और चीन-पाक चुनौती

LAC पर चीन के साथ तनाव अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-चीन टकराव के दौर में भारत को अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए वैश्विक नेतृत्व दिखाना होगा।

मोदी 3.0 की प्राथमिकताएँ:

1. 🏗 ‘विकसित भारत 2047’ की नींव

सरकार “विकसित भारत @100” के लक्ष्य को लेकर योजनाएं बना रही है, जिसमें बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीकी नवाचार पर फोकस होगा।

2. 💡 डिजिटल इंडिया 2.0 और टेक्नोलॉजी नेतृत्व

भारत को AI, चिप मैन्युफैक्चरिंग, और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना मोदी 3.0 की प्राथमिक रणनीति है।

3. 🌱 हरित ऊर्जा और पर्यावरणीय नेतृत्व

2030 तक नेट ज़ीरो मिशन, सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में भारत को अग्रणी बनाने का लक्ष्य।

4. 🏛 संविधानिक सुधार और यूनिफॉर्म सिविल कोड

मोदी सरकार समान नागरिक संहिता (UCC) को कानूनी रूप देने की दिशा में निर्णायक कदम उठा सकती है, जो सामाजिक बहस का बड़ा विषय बनेगा।

मोदी 3.0 केवल सत्ता का विस्तार नहीं, बल्कि राजनीतिक विरासत स्थापित करने की अंतिम पारी है। अगर यह सरकार नीतिगत साहस और सामाजिक संतुलन के साथ आगे बढ़ती है, तो यह भारत को एक नई दिशा देने वाला युग बन सकता है।




नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री कार्यकाल: एक नज़र में (2014–2025)

मुख्य पड़ाव — टाइमलाइन

26 मई 2014: नरेंद्र मोदी ने भारत के 15वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।

2014–2019: पहले कार्यकाल में स्वच्छ भारत अभियान, जन-धन योजना, उज्ज्वला योजना जैसी योजनाओं की शुरुआत।

2016: नोटबंदी की घोषणा (8 नवंबर)।

2017: GST लागू किया गया — ऐतिहासिक कर सुधार।

2019: दूसरी बार पूर्ण बहुमत से सत्ता में वापसी।

5 अगस्त 2019: अनुच्छेद 370 हटाया गया (जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा समाप्त)।

2020: कोविड-19 महामारी के दौरान लॉकडाउन और वैक्सीनेशन मिशन।

2021: तीन कृषि कानूनों की वापसी के फैसले की घोषणा।

2024: तीसरी बार प्रधानमंत्री बने — लगातार तीन लोकसभा चुनाव जीतने वाले नेहरू के बाद दूसरे नेता बने।

25 जुलाई 2025: 4,078 दिन लगातार प्रधानमंत्री रहने का कीर्तिमान — इंदिरा गांधी को पीछे छोड़ा।

क्या है मोदी युग की विशेषता?

प्रमुख उपलब्धियाँ

राजनीतिक स्थिरता: तीन बार बहुमत की सरकार बनाकर दुर्लभ उदाहरण पेश किया।

विकास और योजनाएँ: उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, जनधन, डिजिटल इंडिया, PM आवास योजना जैसी जनहित योजनाओं की शुरुआत।

राष्ट्रवाद और सुरक्षा: सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक, नागरिकता कानून जैसे मुद्दों पर सशक्त निर्णय।

बाहरी छवि: वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका को सशक्त बनाया।

मुख्य आलोचनाएँ

लोकतंत्र की संस्थाओं पर नियंत्रण: विपक्ष ने बार-बार न्यायपालिका, मीडिया और संवैधानिक संस्थाओं पर हस्तक्षेप के आरोप लगाए।

सामाजिक ध्रुवीकरण: NRC, CAA जैसे मुद्दों पर देशभर में विरोध।

महंगाई और बेरोजगारी: आर्थिक मोर्चे पर कई बार सवाल उठे हैं, खासकर युवाओं की रोजगार दर को लेकर।

कृषि आंदोलन और किसान नीतियाँ: कृषि कानूनों की वापसी से नीतिगत कमजोरी उजागर हुई।

क्या मोदी नेहरू को पीछे छोड़ सकते हैं?

जवाहरलाल नेहरू का लगातार प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड 6,130 दिनों (17 साल से अधिक) का है।
यदि नरेंद्र मोदी 2029 तक लगातार पद पर बने रहते हैं, तो वे यह रिकॉर्ड भी तोड़ सकते हैं।




Bhopal News : भोपाल में PM मोदी ने कहा : सिंदूर भारत के शौर्य का प्रतीक बना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भोपाल के जम्बूरी मैदान में ‘लोकमाता देवी अहिल्याबाई महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन’ कार्यक्रम में शामिल हुए।इस दौरान सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्म जयंती है। 140 करोड़ भारतीयों के लिए ये अवसर प्रेरणा का है, राष्ट्र निर्माण के लिए हो रहे भगीरथ प्रयासों में अपना योगदान देने का है। देवी अहिल्याबाई होल्कर कहतीं थी की शासन का सही अर्थ जनता की सेवा करना और उनके जीवन में सुधार लाना होता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि देवी अहिल्याबाई भारत की विरासत की बहुत बड़ी संरक्षक थीं। जब देश की संस्कृति पर, हमारे मंदिरों, हमारे तीर्थ स्थलों पर हमले हो रहे थे, तब लोकमाता ने उन्हें संरक्षित करने का बीड़ा उठाया। उन्होंने काशी विश्वनाथ सहित पूरे देश में हमारे अनेकों मंदिरों का, हमारे तीर्थों का पुनर्निर्माण किया। ये मेरा सौभाग्य है कि जिस काशी में लोकमाता अहिल्याबाई ने विकास के इतने काम किए, उस काशी ने मुझे भी सेवा का अवसर दिया है। आज अगर आप काशी विश्वनाथ महादेव के दर्शन करने जाएंगे, तो वहां आपको देवी अहिल्याबाई की मूर्ति भी मिलेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर पाकिस्तान पर निशाना साधा। भोपाल मे उन्होंने कहा कि गोली का जवाब गोले से मिलेगा। सिंदूर भारत के शौर्य का प्रतीक बन गया है। आतंकियों ने नारी शक्ति को चुनौती दी थी। यही चुनौती उनके और उनके आकाओं को लिए काल बन गई। हमारी सेना ने दुश्मन के घर में सैकड़ों किमी दूर घुसकर उनके आतंकी ठिकानों को मिटाया ।




Pm’s Bhopal Visit : सुरक्षा से लेकर संचालन तक सब कुछ महिला शक्ति के हाथ में

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शनिवार को भोपाल दौरे में महिला सशक्तिकरण की नई तस्वीर सामने आने वाली है। पहली बार किसी बड़े सरकारी आयोजन की संपूर्ण जिम्मेदारी महिला अधिकारियों और कर्मचारियों के हाथों में सौंपी गई है। सुरक्षा, मंच संचालन, साइट मैनेजमेंट से लेकर हेलीपैड और कारकेट तक हर स्तर पर महिलाएं अग्रणी भूमिका निभाएंगी। खास बात यह है कि दतिया से पहले विमान को महिला पायलट ही उड़ाएगी, जो इस आयोजन में नारी शक्ति के प्रभावशाली प्रतिनिधित्व का प्रतीक बनेगी। वहीं, इंदौर में मेट्रो के पहले फेरे में महिलाएं ही सवार होंगी।

300 रुपये के सिक्के में 50% चांदी

31 मई को भोपाल में देवी अहिल्याबाई की 300वीं जयंती पर महिला सम्मेलन होगा। पीएम मोदी देश का पहला 300 का स्मारक सिक्का जारी करेंगे। शुक्रवार को वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में गजट अधिसूचना भी जारी कर दी है। 35 ग्राम वजनी सिक्के में चांदी की मात्रा 50% होगी। एक तरफ अहिल्या बाई का फोटो होगा। ऊपरी तरफ हिंदी तथा निचली परिधि पर अंग्रेजी में अहिल्या बाई होल्कर की 300वीं जयंती लिखा होगा। बाएं और दाएं तरफ 1725-2025 लिखा होगा। दूसरी तरफ अशोक स्तंभ के नीचे रुपये के प्रतीक चिह्न के साथ मूल्यवर्ग 300 लिखा होगा अशोक स्तंभ के दाएं-बाएं हिंदी तथा अंग्रेजी में भारत लिखा होगा। यह देश-दुनिया में जारी होने वाला ऐसा पहला सिक्का होगा, जिसका मूल्यवर्ग 300 रुपये है। प्रधानमंत्री मोदी लोकमाता देवी अहिल्याबाई की 300वीं जयंती पर विशेष डाक टिकिट भी जारी करेंगे।

सप्ताह में चार दिन दतिया से चलेगी फ्लाइट

प्रधानमंत्री मोदी नवनिर्मित दतिया एयरपोर्ट का भोपाल से वर्चुअली लोकार्पण करेंगे। यह एयरपोर्ट दतिया के विकास को नई उड़ान देगा और इससे श्रद्धालुओं को आवागमन में सुविधा मिलेगी। 60 करोड की लागत से बना यह एयरपोर्ट 124 एकड़ में फैला है। इसमें 1.81 किमी लंबा रनवे, दो चेक-इन काउंटर और 50 कारों की पार्किंग की सुविधा है। फ्लाईबिग एयरलाइन की 19 सीटर फ्लाइट्स हफ्ते में चार दिन संचालित होंगी।

सतना एयरपोर्ट पर 19 सीटर विमान उतर सकेंगे

प्रधानमंत्री सतना एयरपोर्ट का लोकार्पण भी करेंगे। 37 करोड़ की लागत से सतना की पुरानी हवाई पट्टी का पुनर्निर्माण कर आधुनिक एयरपोर्ट बनाया गया। 1200 मीटर रनवे तैयार किया गया है, जिसमें 19 सीटर विमान आसानी से उतर सकेंगे। एक समय में दो विमानों की पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है। एयरपोर्ट पर 750 वर्गमीटर क्षेत्र में हवाई टर्मिनल बिल्डिंग, एटीसी टावर, वीआईपी लाउंज, विशेष जरूरतमंदों के लिए सुविधाएं और सुरक्षा के सभी इंतजाम पूरे किए गए हैं। एयरपोर्ट की कुल 5.5 किमी बाउंड्री वॉल सुरक्षा के लिए तैयार की गई है। एयरपोर्ट शुरू होने से सतना सहित पूरे विंध्य क्षेत्र को उद्योग, पर्यटन, शिक्षा, और स्वास्थ्य क्षेत्र में विकास के नए अवसर मिलेंगे।

इंदौर एक नए युग में करेगा प्रवेश

प्रधानमंत्री भोपाल से वर्चुअली इंदौर मेट्रो के सुपर प्रॉयोरिटी कॉरिडोर पर यात्री सेवा का शुभारंभ करेंगे। यह लगभग 6 किलोमीटर का हिस्सा येलो लाइन का है। इसमें पांच स्टेशन गांधीनगर स्टेशन, सुपर कॉरिडोर 6 स्टेशन, सुपर कॉरिडोर 5 स्टेशन, सुपर कॉरिडोर 4 स्टेशन और सुपर कॉरिडोर 3 स्टेशन शामिल हैं। यह कॉरिडोर ट्रैफिक और प्रदूषण कम करेगा। साथ ही यात्रियों को आरामदायक सफर प्रदान करेगा। सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इंदौर की आधुनिकता की ओर बढ़ती दिशा का प्रतीक भी है।

पंचायतों को स्थायी भवन

483 करोड़ रुपये की लागत से 1271 नए अटल ग्राम सुशासन भवनों के लिए पीएम पहली किश्त का अंतरण करेंगे। अटल ग्राम सुशासन भवनों के निर्माण से ग्राम पंचायतों को स्थाई भवन की सुविधा मिलेगी। ग्राम पंचायातों को प्रशासनिक कार्य करने, बैठकों के आयोजन एवं रिकार्ड प्रबंधन में सहायता मिलेगी।