Mandsaur News : अधिकारियों को बिना मुंडेर के कुएँ मिले, दुर्घटना के बाद वे कुएँ की मरम्मत के लिए दिए गए निर्देश

रविवार को नारायणगढ़ क्षेत्र में बिना मुंडेर के कुएं में गिरने से हुए हादसे में एक दर्जन मौतें हो गईं। बिना मुंडेर के कुओं को लेकर औपचारिकता का खेल अब तक कई जिंदगियां निगल चुका है। बिना मुंडेर के कुएं में एक दर्जन से ज्यादा हादसे कुछ ही सालों में हुए है। इसमें कई बड़े हादसे शामिल हैं। हर बार हादसों के बाद प्रशासन औपचारिकता निभाते हुए निर्देश जारी करता है। कुछ दिनों बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

कलेक्टर अदिती गर्ग से पहले पदस्थ कलेक्टर दिलीप कुमार ने भी हादसों के बाद सख्ती दिखाई। कई जगहों पर कुआं मालिकों पर एफआईआर हुई। कार्रवाई तो इस मामले में जरूर हुई, लेकिन बाद में प्रशासनिक अधिकारियों ने पलटकर नहीं देखा कि मुंडेर बनी या नहीं। इधर हर बार की तरह प्रशासन थोड़ा बहुत हरकत में आया। जिस कुएं पर हादसा हुआ था उसकी मरम्मत की तैयारी शुरू कर दी गई। मुंडेर बनवाने के लिए सामान सुबह यहां पहुंच गया। इसके अलावा अनुविभागीय अधिकारी रवींद्र परमार के साथ प्रशासनिक अमला क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के लिए निकल पड़ा। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई।

कार्रवाई हुई लेकिन मुंडेर नहीं बनी

पूर्व कलेक्टर शशांक मिश्र ने अभियान चलाकर 75 बिना मुंडेर के कुएं चिन्हित किए थे। इसके बाद पूर्व कलेक्टर कलेक्टर संजीवसिंह ने भी इस दिशा में कदम उठाए और एसडीएम को कार्रवाई के निर्देश दिए। एक हादसे के बाद पूर्व कलेक्टर मनोज पुष्प ने भी कार्रवाई के लिए निर्देशित किया, लेकिन अधिकारियों ने निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया। दस माह पहले कलेक्टर दिलीप कुमार यादव की सख्ती का असर दिखा। थानों में एक दर्जन से ज्यादा कुआं मालिकों के खिलाफ धारा 188 के तहत एफआईआर भी हुई। लेकिन एफआईआर कराने के बाद अधिकारियों ने पिछे मुड़कर नहीं देखा कि कुओं की मुंडेर बनी है या नहीं।

आंकड़ों में 94, हकीकत में 400, अब कितने पता नहीं

जिले में बिना मुंडेर वाले कुओं से होने वाली दुर्घटनाएं रोकने के लिए प्रशासन कितना गंभीर है, यह इसी से पता चलता है कि कुछ साल पहले सर्वे में जिले में कई खतरनाक कुओं को चिन्हित करने के बाद भी कुछ नहीं हो सका है। खेतों की ओर जाती पगडंडियों, राजमार्गों सहित जिले के कई मार्गों के आसपास बिना मुंडेर के कुओं की वजह से कई लोगों की मौत हो चुकी है। 16 नवंबर 2016 को ग्राम देवरी में बिना मुंडेर के कुएं में कार गिरने से तीन लोगों की जान गई तो अधिकारी हरकत में आए और सर्वे कराया। सर्वे के दौरान 94 बिना मुंडेर वाले कुएं चिन्हित किए गए। हालांकि यह संख्या हकीकत में चार सौ से अधिक है। अब कलेक्टर दिलीप कुमार यादव के निर्देशों के बाद एफआईआर तो हुई, लेकिन यह आंकड़ा किसी के पास नहीं है कि बिना मुंडेर के कुएं अब कितने बचे हैं?

अतिक्रमण हटाने जेसीबी लेकर पहुंचे अधिकारी

अतिक्रमण हटाने जेसीबी लेकर पहुंचे अधिकारी




Mandsaur News : हिमाचल प्रदेश के 15 क्विंटल अवैध मादक पदार्थ डोडाचूरा के साथ दो तस्कर गिरफ्तार

मंदसौर पुलिस ने अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए हिमाचल प्रदेश के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 14 क्विंटल 82 किलोग्राम डोडाचूरा तथा तस्करी में प्रयुक्त ट्रक जब्त किया गया है। जब्त सामग्री की अनुमानित कीमत लगभग 90 लाख रुपए बताई गई है।

शहर कोतवाली थाना प्रभारी पुष्पेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि मंगलवार को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि एक ट्रक अवैध मादक पदार्थ लेकर मंदसौर से गुजरने वाला है। सूचना के आधार पर प्रतापगढ़ रोड स्थित नाका नंबर 10 पर नाकाबंदी कर दी गई। इस दौरान बिना नंबर प्लेट वाले ट्रक क्रमांक एचपी 17 एफ 7086 को रोका गया। ट्रक की तलाशी लेने पर उसमें चाक पावडर के लगभग 300 कट्टों के बीच छिपाकर रखा गया 14 क्विंटल 82 किलो डोडाचूरा बरामद किया गया। पुलिस ने ट्रक के चालक व क्लीनर को मौके से गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान सुशील सिंह (42 वर्ष), निवासी कोटा साहिब, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश और ईमरान (28 वर्ष), निवासी जगतपुर थाना माझरा, जिला सिरमौर, हिमाचल प्रदेश के रूप में हुई है।

पुलिस ने ट्रक सहित जब्त मादक पदार्थ को कब्जे में लेकर दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया है। मामले की जांच कर रहीं एसआई कांता भाभर ने बताया कि दोनों आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें 22 अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। फिलहाल पुलिस टीम दोनों से पूछताछ कर रही है कि यह अवैध मादक पदार्थ कहां से लाया गया और इसे कहां ले जाया जा रहा था। साथ ही, इस तस्करी में शामिल अन्य लोगों की जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।