माखन दादा की सरज़मीं पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन: रात 1 बजे तक कवियों ने बांधा समां

माखननगर (नर्मदापुरम)। राष्ट्रकवि माखनलाल चतुर्वेदी की पावन जन्मस्थली माखननगर में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन ने साहित्यिक वातावरण को देर रात तक जीवंत बनाए रखा। नगर के रामलीला मैदान में आयोजित इस भव्य आयोजन में देशभर से आए ख्याति प्राप्त कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

देर रात तक चला काव्य का जादू

कार्यक्रम का शुभारंभ 9:30 शुरू हुआ, जो रात करीब 1 बजे तक लगातार चलता रहा। हजारों की संख्या में मौजूद श्रोताओं ने पूरे उत्साह और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कवियों का उत्साहवर्धन किया।मंच पर हास्य, वीर, श्रृंगार और गीत—सभी रसों की अद्भुत प्रस्तुति देखने को मिली, जिसने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

डॉ. सुरेन्द्र शर्मा ने बिखेरा हास्य का रंग

प्रसिद्ध हास्य कवि डॉ. सुरेन्द्र शर्मा ने अपने चुटीले अंदाज और व्यंग्यपूर्ण कविताओं से दर्शकों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। उनके मंच पर आते ही माहौल पूरी तरह हास्यमय हो गया और श्रोता देर तक हंसते रहे।

वीर रस और ओज से गूंजा मंच

वीर रस के कवि शशिकांत यादव ने अपनी ओजपूर्ण कविताओं से श्रोताओं में देशभक्ति का जोश भर दिया। उनकी प्रस्तुति पर दर्शकों ने खड़े होकर तालियां बजाईं।

गीत और श्रृंगार ने छुआ दिल

गीतकार नीलोत्वल मृणाल ने अपनी भावपूर्ण रचनाओं से श्रोताओं के दिलों को छू लिया। वहीं श्रृंगार रस की कवयित्री अंकिता ने अपनी मधुर प्रस्तुति से कार्यक्रम में सौंदर्य और संवेदना का रंग घोला।
हास्य और लोक रंग की शानदार प्रस्तुति
कवि रमेश विश्वहार और दिनेश देसी ने अपने अनोखे अंदाज में हास्य और लोक रंग की प्रस्तुति देकर दर्शकों को खूब गुदगुदाया।

रामलीला मैदान में आयोजित इस कवि सम्मेलन में नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। देर रात तक कार्यक्रम चलने के बावजूद दर्शकों का उत्साह कम नहीं हुआ।
आयोजन समिति द्वारा मंच, ध्वनि एवं सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था की गई, जिससे कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

माखनलाल चतुर्वेदी की जन्मस्थली पर आयोजित यह अखिल भारतीय कवि सम्मेलन न केवल साहित्यिक आयोजन रहा, बल्कि यह ‘दादा’ की विरासत को जीवंत रखने का एक सशक्त प्रयास भी बना।
कवियों की ओजपूर्ण और भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने यह साबित कर दिया कि माखन दादा की धरती पर साहित्य आज भी उतना ही जीवंत और प्रभावशाली है।




राष्ट्रकवि माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती धूमधाम से मनाई, रैली और संगोष्ठी का हुआ आयोजन

माखननगर (नर्मदापुरम)। राष्ट्रकवि माखनलाल चतुर्वेदी की जन्म जयंती के अवसर पर श्री माखननगर शासकीय महाविद्यालय माखननगर में विविध कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम प्राचार्य डॉ. नीता चौबे के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई एवं हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।

प्रतिमा पर माल्यार्पण और संगोष्ठी
कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय परिसर स्थित राष्ट्रकवि की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर की गई। इसके पश्चात एक संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें वक्ताओं ने माखनलाल चतुर्वेदी के साहित्य, व्यक्तित्व एवं स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान पर प्रकाश डाला।
वक्ताओं ने कहा कि ‘दादा’ की रचनाएं आज भी युवाओं को राष्ट्रभक्ति, सत्य और संघर्ष की प्रेरणा देती हैं।

नगर में निकाली गई जागरूकता रैली
कार्यक्रम के अंतर्गत एक विशाल रैली का आयोजन भी किया गया। यह रैली महाविद्यालय से प्रारंभ होकर माखननगर के प्रमुख स्थानों—रामलीला मैदान, बालाजी मंदिर एवं मुख्य मार्गों से होते हुए नगर स्थित माखनलाल चतुर्वेदी की प्रतिमा स्थल तक पहुंची।

रैली के दौरान विद्यार्थियों ने “माखन दादा अमर रहे” के नारों से पूरे नगर को गुंजायमान कर दिया, जिससे वातावरण देशभक्ति से ओतप्रोत हो गया।

विधायक विजयपाल सिंह ने दी श्रद्धांजलि

रैली के समापन पर क्षेत्रीय विधायक ठाकुर विजयपाल सिंह ने प्रतिमा स्थल पहुंचकर राष्ट्रकवि को माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके साथ ही उन्होंने महाविद्यालय परिसर में स्थापित प्रतिमा पर भी पुष्पांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर प्राचार्य एवं विद्यार्थियों द्वारा राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया, जिससे कार्यक्रम का माहौल और अधिक भावनात्मक एवं प्रेरणादायक बन गया।

छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में महाविद्यालय की जनभागीदारी समिति के सदस्य मनीष चतुर्वेदी, हर्ष तिवारी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
साथ ही प्रो. डी.एस. खत्री, डॉ. राजकुमार पटवा, प्रो. आई.एस. कनेश, डॉ. मनीष शर्मा, डॉ. आकांक्षा यादव, डॉ. सुमन अवस्थी, प्रो. अजय मेहरा, अमित तिवारी, प्रो. पंकज बैरवा, डॉ. क्षमा मेहरा, सुषमा यादव, डॉ. कविता दुबे, श्रीमती मंजू मेहरा, श्रीमती संध्या गोलियां, अशोक मेहरा, योगेश राजपूत एवं जितेंद्र अहिरवार का विशेष योगदान रहा।

रैली एवं कार्यक्रम का सफल संचालन रासेयो कार्यक्रम अधिकारी डॉ. धर्मेंद्र सिंह चौहान द्वारा किया गया, जबकि व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी डॉ. राजकुमार पटवा ने संभाली।




माखनलाल चतुर्वेदी जयंती पर विधायक विजय पाल सिंह ने दी श्रद्धांजलि, 43 लाख के वाचनालय का किया भूमिपूजन

माखननगर (नर्मदापुरम)। राष्ट्रकवि माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती के अवसर पर क्षेत्र में श्रद्धा और सम्मान के साथ कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक विजय पाल सिंह ने ‘दादा’ की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, वहीं उनकी जन्मस्थली पहुंचकर 43 लाख रुपए की लागत से बनने वाले वाचनालय का विधिवत भूमिपूजन किया।

प्रतिमा स्थल पर श्रद्धासुमन अर्पित

कार्यक्रम की शुरुआत माखननगर स्थित माखनलाल चतुर्वेदी की प्रतिमा स्थल से हुई, जहां विधायक विजय पाल सिंह ने पुष्पमाला अर्पित कर ‘दादा’ को नमन किया। इस दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और नागरिकों ने भी बारी-बारी से माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी।

विधायक ने अपने संबोधन में कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने साहित्य और पत्रकारिता के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और समाज को जागरूक करने का कार्य किया। उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं और हमें उनके बताए मार्ग पर चलने की आवश्यकता है।

जन्मस्थली पर 43 लाख के वाचनालय का भूमिपूजन

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद विधायक विजय पाल सिंह ‘दादा’ की जन्मस्थली पहुंचे, जहां 43 लाख रुपए की लागत से बनने वाले आधुनिक वाचनालय का भूमिपूजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भूमि पूजन संपन्न हुआ।
विधायक ने कहा कि इस वाचनालय के निर्माण से क्षेत्र के विद्यार्थियों और युवाओं को अध्ययन के लिए बेहतर सुविधा मिलेगी। यह स्थान न केवल ज्ञान का केंद्र बनेगा, बल्कि माखनलाल चतुर्वेदी के विचारों और साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी बनेगा।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार शिक्षा और बौद्धिक विकास को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है, और यह वाचनालय उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

विकास और विरासत का संगम

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती पर वाचनालय का भूमिपूजन होना एक प्रतीकात्मक और सार्थक पहल है। यह विरासत और विकास का सुंदर संगम है, जहां एक ओर महान साहित्यकार को श्रद्धांजलि दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर ज्ञान के नए द्वार खोले जा रहे हैं।

इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने ‘दादा’ के विचारों को आत्मसात करने और समाज के विकास में योगदान देने का संकल्प लिया।

माखनलाल चतुर्वेदी जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम श्रद्धा, सम्मान और विकास की सोच का प्रतीक बना।
‘दादा’ की स्मृति में बनने वाला वाचनालय आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान का केंद्र बनेगा और उनके विचारों को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।




माखनलाल चतुर्वेदी जयंती पर कांग्रेस का आयोजन: प्रतिमा पर माल्यार्पण, पत्रकारों का सम्मान

नर्मदापुरम जिले के माखननगर में राष्ट्रकवि माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती के अवसर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान ‘दादा’ की प्रतिमा स्थल पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई, वहीं नगर के प्रतिष्ठित पत्रकारों का सम्मान कर उनकी भूमिका को भी सराहा गया।

प्रतिमा स्थल पर दी गई श्रद्धांजलि
कार्यक्रम की शुरुआत माखनलाल चतुर्वेदी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर की गई। कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने ‘दादा’ के चित्र और प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके योगदान को स्मरण किया। उपस्थित जनों ने उनके साहित्यिक और स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए योगदान को याद करते हुए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी केवल कवि नहीं थे, बल्कि वे स्वतंत्रता आंदोलन के ऐसे योद्धा थे, जिन्होंने अपनी लेखनी से जन-जन में राष्ट्रभक्ति की भावना जगाई। उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।

पत्रकारों का किया गया सम्मान

कार्यक्रम के दौरान नगर के वरिष्ठ एवं सक्रिय पत्रकारों को शॉल-श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं और समाज को सही दिशा देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

वक्ताओं ने यह भी कहा कि जिस तरह माखनलाल चतुर्वेदी ने पत्रकारिता को जनसेवा और सत्य के लिए समर्पित किया, उसी आदर्श को आज के पत्रकार भी आगे बढ़ा रहे हैं। ऐसे में उनका सम्मान करना समाज के प्रति उनकी सेवाओं का सम्मान है।

कार्यक्रम में उपस्थित नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि आज के दौर में माखनलाल चतुर्वेदी के विचारों की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। उन्होंने सत्य, साहस और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा, जो आज की राजनीति और समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

कुछ वक्ताओं ने वर्तमान समय में पत्रकारिता के सामने आने वाली चुनौतियों का भी जिक्र किया और कहा कि निष्पक्ष एवं निर्भीक पत्रकारिता ही लोकतंत्र को मजबूत बना सकती है।

कार्यक्रम में कांग्रेस के स्थानीय पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में ‘दादा’ के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।




कलम का क्रांतिकारी और आज की राजनीति पर सवाल: माखनलाल चतुर्वेदी जयंती पर विशेष

भारत की स्वतंत्रता केवल विदेशी शासन से मुक्ति का संघर्ष नहीं था, बल्कि वह एक ऐसी व्यवस्था स्थापित करने का सपना भी था, जहां ईमानदारी, नैतिकता और जनसेवा सर्वोपरि हों। इस स्वप्न को शब्दों में ढालने वाले महान साहित्यकार और स्वतंत्रता सेनानी थे—माखनलाल चतुर्वेदी। उनकी जयंती आज केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं, बल्कि वर्तमान राजनीति और समाज का आईना देखने का भी दिन है।

स्वतंत्रता संग्राम: आदर्शों की राजनीति

माखनलाल चतुर्वेदी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जिस राजनीति को देखा और जिया, वह त्याग, बलिदान और सिद्धांतों पर आधारित थी। उस समय राजनीति सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का संकल्प थी।

नेताओं के लिए पद नहीं, बल्कि उद्देश्य महत्वपूर्ण था। जेल जाना, संघर्ष करना और व्यक्तिगत सुखों का त्याग करना—यही उस दौर की राजनीति की पहचान थी।

सेवा या सत्ता का खेल?

आज का राजनीतिक परिदृश्य कई सवाल खड़े करता है।
राजनीति अब आदर्शों से अधिक प्रबंधन और समीकरणों का खेल बनती जा रही है।

  • दल बदलना अब सामान्य हो चुका है
  • विचारधारा की जगह अवसरवाद ने ले ली है
  • चुनावी वादे अक्सर सत्ता मिलने के बाद भूल जाते हैं
  • जनहित के मुद्दे कई बार राजनीतिक स्वार्थों के नीचे दब जाते हैं

भ्रष्टाचार, सत्ता का दुरुपयोग और प्रशासनिक दबाव—ये समस्याएं अब अपवाद नहीं, बल्कि कई जगहों पर व्यवस्था का हिस्सा बनती जा रही हैं।

यदि माखनलाल चतुर्वेदी आज होते, तो वे निश्चित ही अपनी लेखनी से इस स्थिति पर तीखा प्रहार करते। वे सवाल करते कि जिस स्वतंत्रता के लिए इतनी कुर्बानियां दी गईं, क्या वह केवल सत्ता के खेल के लिए थी?

पत्रकारिता और राजनीति का बदलता रिश्ता

चतुर्वेदी जी ने पत्रकारिता को सत्ता के खिलाफ एक मजबूत आवाज बनाया था।
आज, कई बार मीडिया और राजनीति के रिश्तों पर भी सवाल उठते हैं।

जहां पत्रकारिता का एक हिस्सा सत्ता के करीब दिखाई देता है, वहीं सच्चाई बोलने वाले पत्रकारों को दबाव और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

यह स्थिति उस आदर्श के विपरीत है, जिसे माखनलाल चतुर्वेदी ने स्थापित किया था—जहां कलम केवल सच के लिए चलती थी, किसी दबाव या स्वार्थ के लिए नहीं।

‘पुष्प की अभिलाषा’ बनाम आज का स्वार्थ

माखनलाल चतुर्वेदी की अमर रचना ‘पुष्प की अभिलाषा’ त्याग और समर्पण की चरम अभिव्यक्ति है।

“मुझे तोड़ लेना वनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक…”

यह पंक्ति आज की राजनीति से सवाल करती है—
क्या आज का नेतृत्व भी उसी त्याग और समर्पण की भावना से काम कर रहा है?
या फिर व्यक्तिगत लाभ और सत्ता की लालसा ने उस भावना को पीछे छोड़ दिया है?

आज की राजनीति को बदलने की सबसे बड़ी ताकत युवाओं के पास है।
यदि युवा जागरूक होंगे, सवाल पूछेंगे और सही नेतृत्व का चयन करेंगे, तो राजनीति भी दिशा बदलेगी।

माखनलाल चतुर्वेदी का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा है—कि बदलाव केवल आलोचना से नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदारी से आता है।

माखनलाल चतुर्वेदी की लेखनी आज भी जैसे हमें चेतावनी देती है—
“यदि राजनीति से नैतिकता खत्म हो जाएगी, तो लोकतंत्र केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा।”

माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती केवल माल्यार्पण और भाषण तक सीमित नहीं होनी चाहिए।

यह दिन हमें खुद से यह पूछने का अवसर देता है—

  • क्या हम ईमानदार राजनीति का समर्थन कर रहे हैं?
  • क्या हम भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं?
  • क्या हम अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का सही उपयोग कर रहे हैं?

आज जरूरत है कि हम राजनीति को फिर से सेवा, त्याग और नैतिकता की दिशा में ले जाएं—यही माखनलाल चतुर्वेदी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।




माखननगर में गोस्वामी तुलसीदास जयंती मनाई गई

माखननगर। श्रावण मास की सप्तमी तिथि पर श्री माखनलाल चतुर्वेदी शासकीय महाविद्यालय, माखननगर में गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई। 31 जुलाई, गुरुवार को आयोजित इस कार्यक्रम में तुलसीदास जी के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं प्राचार्य डॉ. नीता चौबे ने तुलसीदास जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने समाज में समरसता, नैतिकता और आध्यात्मिकता की भावना को स्थापित करने का प्रयास किया। उनके द्वारा प्रस्तुत ‘रामराज्य’ में सामाजिक न्याय और आध्यात्मिक मूल्यों का आदर्श स्वरूप देखने को मिलता है।

मंच संचालन कर रहीं हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सुमन अवस्थी ने तुलसीदास जी की कठिन बाल्यावस्था का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस न केवल भारत, बल्कि विदेशों में भी भक्ति साहित्य का अनुपम ग्रंथ माना जाता है।

इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में श्री पंकज बेरवा ने सभी अतिथियों और सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।




Makhannagar News : राष्ट्रकवि श्री माखनलाल जी के जन्मोत्सव को धूमधाम से मनाया

माखन नगर राष्ट्रकवि श्री माखनलाल चतुर्वेदी की जन्म जयंती को माखन नगर गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है । इसी उपलक्ष्य में श्री माखनलाल चतुर्वेदी शासकीय महाविद्यालय माखन नगर में राष्ट्रकवि पंडित श्री माखनलाल चतुर्वेदी जी के प्रतिमा के समक्ष महाविद्यालय प्राचार्य डॉ नीता चौबे जन भागीदारी अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल व भागीदारी समिति के सभी सदस्यों ,महाविद्यालय नोडल अधिकारी प्रो आर के चौकीकर सहित समस्त महाविद्यालय स्टाफ द्वारा राष्ट्रकवि पं माखन दादा जी को माल्यार्पण व दीप प्रचलित कर उनका स्मरण किया गया। जन भागीदारी अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने राष्ट्रकवि पंडित माखनलाल चतुर्वेदी जी के जीवन परिचय व उनके द्वारा रचित विभिन्न कविताओं के बारे में विस्तार से बताया एवं उन्होंने बतालाय कि माखन नगर में उनके जन्म दिवस को गौरव दिवस के रूप में हम प्रतिवर्ष मानते आ रहे हैं, महाविद्यालय प्राचार्य ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में कहा कि हम सभी बड़े ही सौभाग्यशाली हैं जो श्री माखनलाल चतुर्वेदी जी की जन्म भूमि में निवास कर रहे हैं व अपने कर्तव्यों का निर्वाहन कर रहे हैं , वरिष्ठ प्रो आरके चौकीकर ने उपस्थित जनसमूह व छात्र-छात्राओं को बतलाया कि मध्य प्रदेश शासन ने विगत कुछ वर्ष पूर्व बाबई नगर का नाम बदल कर माखन नगर नाम दिया गया यह हम सभी के लिए सौभाग्य की बात है,आज उनकी जन्म जयंती पर हम सभी उनको श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं ।




जयंती पर विशेष : छायावाद युग का वह चमकता सितारा जो ‘एक भारतीय आत्मा’ के नाम से हुआ प्रसिद्ध

Makhanlal Chaturvedi 136th Birth Anniversary : स्वतंत्रता संग्राम के कालखंड में हर क्रांतिकारी ने मातृभूमि को स्वतंत्र कराने का यथाशक्ति परिश्रम किया। किसी ने अहिंसा तो किसी ने अपनी ओजस्वी वाणी और कलम काे हथियार बनाकर विदेशी सत्ता काे झुकाने का काम किया। इसी कालखंड के लोकप्रहरी और कवियों की श्रेणी में एक नाम आता है बहुमुखी प्रतिभा के धनी माखनलाल चतुर्वेदी का। जिनकी अनेकों कविताएं देश के कई वीर और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनीं। माखनलाल ने तत्कालीन वीरों की अभिलाषा को पुष्प की अभिलाषा के रूप में पिरोकर जन-जन तक पहुंचाया। …

‘…मुझे तोड़ लेना बनमाली, उस पथ पर तुम देना फेंक। मातृ-भूमि पर शीश चढाने, जिस पथ जावें वीर अनेक।’ माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा रचित ये वो पंक्तियां हैं जिन्हें 18 फरवरी 1922 को लिखा गया था। अर्थात् लगभग आठ दशक पहले। उस समय देश में पहुंओर आजादी का नारा ही गूंज रहा था। इसी संघर्ष के दौरान कई बारे ऐसे क्षण भी आएं जब माखनलाल चतुर्वेदी को जेल जाना पड़ा। आज हम भारत माता के इन्हीं सपूत जयंती मना रहे हैं।

माखनलाल चतुर्वेदी का परिचय: देशभक्त कवि माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म चार अप्रैल 1889 को  बाबई, होशंगाबाद, मध्य प्रदेश में हुआ था। 15 वर्ष की अवस्था में इनका विवाह हो गया था। 17 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने खंडवा में अध्यापन प्रारंभ कर दिया। इसी दौरान उनका संपर्क क्रांतिकारियों से हुआ था। माखनलाल जी के व्यक्तित्व के कई पहलू देखने को मिलते हैं। जैसे एक पत्रकार जिन्होंने प्रभा, कर्मवीर और प्रताप का संपादन किया, एक क्रांतिकारी जिन्होंने असहयोग आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन जैसी गतिविधियों में बढ़-चढ़ भाग लिया। हालांकि जनता को स्वतंत्रता दिलाने के इस मार्ग पर उन्हें कई बार अंग्रेजी हुकूमत के द्वारा प्रताड़ित किया, लेकिन इसके बावजूद वे अडिग रहे। माखनलाल चतुर्वेदी का नाम छायावाद की उन शख्सियतों में से एक है जिनके कारण वह एक युग अमर हो गया। इनकी कई रचनाएं ऐसी भी हैं जहां उन्होंने प्रकृति के माध्यम से अपनी भावनाओं को व्यक्त किया है। माखनलाल चतुर्वेदी के काव्य का कलेवर तथा रहस्यात्मक प्रेम उनकी आत्मा रही। इसीलिए उन्हें एक भारतीय आत्मा के नाम से भी जाना जाता है।

जब निभाई ‘प्रताप’ के संपादक की भूमिका: माखनलाल चतुर्वेदी ने साल 1913 में ‘प्रभा पत्रिका’ का संपादन किया। इसी समय ये स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी के संपर्क में आए, जिनसे ये बेहद प्रभावित हुए। इन्होंने साल 1918 में प्रसिद्ध ‘कृष्णार्जुन युद्ध’ नाटक की रचना की और 1919 में जबलपुर में ‘कर्मयुद्ध’ का प्रकाशन किया। स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण 1921 में इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, इसके बाद 1922 में ये रिहा हुए। साल 1924 में गणेश शंकर विद्यार्थी की गिरफ्तारी के बाद इन्होंने प्रताप का संपादन किया।

ये हैं प्रमुख रचनाएं: 20वीं सदी की शुरुआत में माखनलाल ने काव्य लेखन शुरू किया था। हिमकिरीटिनी, हिम तरंगिनी, युग चरण, समर्पण, मरण ज्वार, माता, वेणु लो गूंजे धरा, ‘बीजुरी काजल आंज रही’ जैसी प्रमुख कृतियों सहित कई अन्य रचनाएं कीं। महान साहित्यकार माखनलाल चतुर्वेदी ने 30 जनवरी, 1968 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया था।

…तो इसलिए छोड़ दिया था सीएम का पद: कवयित्री महादेवी वर्मा अपने साथियों को इनका एक किस्सा बताती थीं कि स्वतंत्रता संग्राम के समय माखनलाल चतुर्वेदी को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद के लिए चुना गया था। सूचना मिलने के उपरांत इन्होंने कहा कि “शिक्षक और साहित्यकार बनने के बाद मुख्यमंत्री बना तो मेरी पदावनति होगी।” ये कहकर मुख्यमंत्री के पद को पंडित जी ने ठुकरा दिया था।

उपलब्धियां:
पत्रकार परिषद के अध्यक्ष (1929)
म.प्र.हिंदी साहित्य सम्मेलन (रायपुर अधिवेशन) के सभापति
भारत छोड़ो आंदोलन के सक्रिय कार्यकर्ता (1942) सागर वि.वि. से डी.लिट् की मानद उपाधि
हिमकिरीटिनी रचना के लिए 1943 में देव पुरस्कार
पुष्प की अभिलाषा और अमर राष्ट्र जैसी ओजस्वी रचनाओं के लिए 1959 में डी.लिट्. की मानद उपाधि
1963 में पद्मभूषण
हिमतरंगिणी के लिये उन्हें 1955  में साहित्य अकादमी पुरस्कार