MP News: गुना में पंचायत को गिरवी रखने का मामला, सरपंच और पंच को पद से हटाया गया , एफआईआर दर्ज

मध्यप्रदेश की पंचायत व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। गुना जिले की एक महिला सरपंच ने पंचायत को 20 लाख रुपये के कर्ज के बदले गिरवी रख दिया।

मध्यप्रदेश की पंचायत व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। गुना जिले की एक महिला सरपंच ने पंचायत को 20 लाख रुपये के कर्ज के बदले गिरवी रख दिया।


ग्राम पंचायत मोहगांव में भ्रमण के दौरान देखा गया कि ग्राम पंचायत मोहगांव कार्यालय बंद है। वहीं हितग्राही परेशान हो रहे हैं और केवाईसी नहीं हो पा रही है। शासन की अन्य योजना से वंचित रहना पड़ रहा है। वर्तमान में कलेक्टर सोनिया मीना द्वारा शक्त निर्देश दिए गए हैं कि जल गंगा संवर्धन के तहत ग्रामों में वाटर रिचार्ज, सॉक्पिट गड्ढा एवं तालाब निर्माण जैसे कार्य किए जाने हैं । यह होना तो दूर की बात है वर्तमान में ग्राम पंचायत सचिव गोपाल मेहरा एवं सहायक सचिव रूपेश साहू दोनों कार्यालय में उपस्थित नहीं रहते हैं । वही सप्ताह में अकसर ग्राम पंचायत बंद रहती है।
सचिव एवं सहायक सचिव नहीं बैठते पंचायत
मुकेश वर्मा ने denvapost को बताया कि की सचिव गोपाल मेहरा नर्मदापुरम में रहता है। वहीं से आना जाना करता है, कभी आते कभी नहीं और सहायक सचिव रूपेश साहू ग्राम में निवास करने के बाद भी पंचायत कार्यालय में नहीं बैठता है। जब काम कराना हो तो घर जाना पड़ता है।

रंजीत टेकाम जनपद सीईओ ने denvapost से कहा कि मेरे द्वारा कई आकस्मिक निरीक्षण के दौरान पंचायत कार्यालय मोहगांव खुला मिला है। फिर भी हितग्राही की शिकायत है तो हम दिखवाते हैं।


जिले के पटेरा में प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने तीन कंप्यूटर सेंटर पर छापेमारी की.इस दौरान 38 ग्राम पंचायतों के सरपंच-सचिव के डिजिटल सिग्नेचर वाले डोंगल बरामद हुए। साथ ही सैकड़ों आधार कार्ड, सरकारी मस्टर और जनपद अधिकारियों की सीलें भी मिलीं।
एक व्यक्ति की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई। हटा एसडीपीओ प्रशांत सुमन, प्रभारी नायब तहसीलदार शिवराम चढ़ार और दमोह कोतवाली टीआई मनीष कुमार की टीम ने विश्वकर्मा कंप्यूटर और दो राय कंप्यूटर सेंटर पर दबिश दी।

कंप्यूटर सेंटर में मिली पंचायतों की फाइलें
जांच में पता चला कि पंचायतों के विकास कार्यों की फाइलें भी इन कंप्यूटर सेंटर से संचालित की जा रही थीं। एसडीओपी प्रशांत सुमन ने कहा कि यह सामग्री केवल सरकारी कार्यालय में होनी चाहिए थी। सभी दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं।
जांच करेंगें कि दस्तावेज कैसे सेंटर पहुंचे
नायब तहसीलदार चढ़ार ने बताया कि सरकारी दस्तावेजों का कंप्यूटर सेंटर में मिलना गंभीर मामला है। जांच की जाएगी कि ये दस्तावेज यहां कैसे पहुंचे और किसकी मिलीभगत से यह काम हो रहा था। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फर्जी बिलों के भुगतान होने की संभावना
सरपंच सचिव के डिजिटल हस्ताक्षर वाले डोंगल का उपयोग भुगतान के लिए हो रहा था । यह काफी गोपनीय होता है, जिसका पासवर्ड केवल सरपंच सचिव के पास होता है, लेकिन ऐसे करीब 38 डोंगल इन कंप्यूटर सेंटर पर मिले है।
संभावना जताई जा रही है कि फर्जी बिलों पर भुगतान हो रहा था। गौर करने वाली बात यह है कि पटेरा जनपद में कुल 61 ग्राम पंचायत है, जिसमें से 38 ग्राम पंचायत के डिजिटल सिग्नेचर वाले डोंगल इन तीन कंप्यूटर सेंटर पर मिले।

मुरैना जिला पंचायत सीईओ ने फर्जी जॉबकार्ड से करोड़ों की राशि हड़पने वाले 4 पंचायत सचिवों को निलंबित करने के साथ ही छह जीआरएस को बर्खास्त कर दिया है। इस कार्रवाई से जिले के अन्य सचिव और जीआरएस के बीच हड़कंप मचा हुआ है।
मनरेगा मजदूरों के 48 जॉब कार्ड बनाकर दो साल में निकाल ली गई 20 करोड़ मजदूरी
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं। जिसमें बताया गया था कि “एक गांव में फर्जी नाम से मनरेगा मजदूरों के 48 जॉब कार्ड बनाकर दो साल में 20 करोड़ मजदूरी निकाल ली गई। ये मनरेगा में मजदूरी तो कर रहे है, लेकिन वोटर लिस्ट में कहीं भी इनके नाम नहीं है। जिला पंचायत सीईओ कमलेश कुमार भार्गव ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच पड़ताल शुरू की।
जांच के दौरान चार पंचायतों के सचिव और आधा दर्जन ग्राम पंचायतों के रोजगार सहायक दोषी पाए गए। इनके नाम सबलगढ़ जनपद की ग्राम पंचायत कढावना के पंचायत सचिव अखलेश चतुर्वेदी, कैलारस जनपद की पंचायत बहराना के बासुदेव, जौरा जनपद की पंचायत सिंघोरा के राजेंद्र कुशवाह और मुरैना जनपद की पंचायत नायक पुरा के लोकेन्द्र सिंह है। जिपं सीईओ ने इनको तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए हैं।
इसी प्रकार सबलगढ़ जनपद की ग्राम पंचायत कढावना के ग्राम रोजगार सहायक बैजनाथ सिंह, पहाड़गढ जनपद की ग्राम पंचायत जडेरु के रोजगार सहायक मुकेश सिंह, निचली बहराई के भूपेन्द्र सिंह, कुकरोली पंचायत के लक्ष्मण सिंह, जौरा जनपद की ग्राम पंचायत सिंघोरा के जितेंद्र गुर्जर तथा मुरैना जनपद की ग्राम पंचायत नायकपुरा की रोजगार सहायक को बर्खास्त किया गया है।
जिला पंचायत CEO की जांच कराई गई तो शिकायत सही मिली
इस मामले में जिला पंचायत CEO कमलेश कुमार भार्गव ने बताया “पिछले दिनों शिकायत मिली थी कि कुछ लोग फर्जी जॉब कार्ड बनाकर मनरेगा से राशि हड़प रहे हैं। जब इसकी जांच कराई गई तो शिकायत सही मिली। मामले में 4 सचिव और छह जीआरएस के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।”