मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लॉन्च किया “दृष्टि” ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, पंचायत ऑडिट होगा पूरी तरह डिजिटल

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की पंचायतों में वित्तीय ऑडिट प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से “दृष्टि” ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया। इसके साथ ही पंचायत दर्पण पोर्टल पर पेमेंट गेटवे सुविधा भी लॉन्च की गई। मंत्रालय में आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक के दौरान इन दोनों डिजिटल पहलों की शुरुआत की गई।

सरकार के अनुसार, “दृष्टि” ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रदेश की 23,011 ग्राम पंचायतों का वित्तीय ऑडिट अब डिजिटल तरीके से किया जा सकेगा। यह देश में पंचायतों के पूर्णतः डिजिटल रिमोट वित्तीय ऑडिट की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

घर या कार्यालय से कर सकेंगे ऑडिट

भारत के महालेखाकार के निर्देशन में पंचायती राज संचालनालय ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के तकनीकी सहयोग से इस प्लेटफॉर्म का विकास किया है। अब अधिकृत ऑडिटर अपने घर या कार्यालय से ही किसी भी ग्राम पंचायत के आय-व्यय और वित्तीय अभिलेख ऑनलाइन देख सकेंगे तथा उनकी जांच कर सकेंगे। इससे ऑडिट प्रक्रिया में तेजी आएगी, समय और संसाधनों की बचत होगी तथा सीमित कर्मचारियों के बावजूद समयबद्ध ऑडिट संभव हो सकेगा।

पंचायत दर्पण पोर्टल पर शुरू हुई ऑनलाइन भुगतान सुविधा

मुख्यमंत्री ने पंचायत दर्पण पोर्टल पर पेमेंट गेटवे सुविधा का भी शुभारंभ किया। यह सुविधा पंचायती राज संचालनालय, एनआईसी, जल निगम और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के सहयोग से विकसित की गई है। इसके माध्यम से पंचायतें विभिन्न सेवाओं के बिल ऑनलाइन जनरेट कर सकेंगी। नागरिक घर बैठे ही इन बिलों का ऑनलाइन भुगतान कर सकेंगे और तत्काल डिजिटल रसीद भी प्राप्त कर सकेंगे।

पारदर्शिता और सुशासन को मिलेगा बढ़ावा

सरकार का कहना है कि इन डिजिटल नवाचारों से पंचायत स्तर पर वित्तीय जवाबदेही बढ़ेगी, रिकॉर्ड स्वतः तैयार होंगे और विभागीय कार्यों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित होगा। साथ ही पारदर्शिता और सुशासन को भी नई मजबूती मिलेगी, जिससे ग्रामीण प्रशासन अधिक आधुनिक और प्रभावी बन सकेगा।




जनसुनवाई का त्वरित असर: 48 घंटे में स्वीकृत हुई मुख्यमंत्री कल्याणी पेंशन

नर्मदापुरम। जिला प्रशासन की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई का एक सकारात्मक उदाहरण सामने आया है। कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत एक आवेदन पर मात्र 48 घंटे के भीतर कार्रवाई करते हुए एक पात्र महिला को मुख्यमंत्री कल्याणी पेंशन योजना का लाभ प्रदान कर दिया गया।

जानकारी के अनुसार, ग्राम खोजपुर निवासी श्रीमती लक्ष्मी बाई, पत्नी स्वर्गीय ईश्वर सिंह ने पेंशन प्राप्त नहीं होने संबंधी अपनी समस्या को लेकर 2 जून 2026 को आयोजित जनसुनवाई में कलेक्टर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदिका ने बताया था कि पात्र होने के बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री कल्याणी पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को तत्काल जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। निर्देशों के पालन में अधिकारियों ने आवेदन का परीक्षण कर सभी आवश्यक दस्तावेजों एवं औपचारिकताओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया।

त्वरित कार्रवाई के परिणामस्वरूप 4 जून 2026 को श्रीमती लक्ष्मी बाई की मुख्यमंत्री कल्याणी पेंशन स्वीकृत कर दी गई। पेंशन स्वीकृति की जानकारी मिलने पर उन्होंने जिला प्रशासन एवं कलेक्टर नर्मदापुरम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी समस्या का समय पर समाधान होने से उन्हें बड़ी राहत मिली है।

जिला प्रशासन ने कहा है कि जनसुनवाई का उद्देश्य आमजन की समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी निराकरण करना है तथा नागरिकों को शासन की योजनाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

यह प्रकरण दर्शाता है कि यदि शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई की जाए तो जरूरतमंद लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ शीघ्रता से पहुंचाया जा सकता है।




फोटोकॉपी वाला कन्या विवाह: जब सिस्टम ने जिम्मेदारी Xerox कर दी

लोकतंत्र में आमंत्रण सिर्फ एक कार्ड नहीं होता, वह सम्मान का प्रतीक होता है। लेकिन जब आमंत्रण ही “फोटो कॉपी” बनकर रह जाए और उसमें न नाम हो, न गरिमा—तो समझ लीजिए कि आयोजन से पहले ही उसकी आत्मा का कन्यादान हो चुका है।

मामला है 19 अप्रैल को आयोजित होने वाले मुख्यमंत्री कन्या विवाह समारोह का, जो हर साल बड़े उत्साह और गरिमा के साथ होता आया है। लेकिन इस बार जो हुआ, वह प्रशासनिक लापरवाही का ऐसा उदाहरण बन गया है, जिसे देखकर खुद “व्यवस्था” भी शर्मा जाए।

इस बार आयोजन से ज्यादा चर्चा आमंत्रण कार्ड की हो रही है—और वह भी इसलिए कि वह “कार्ड” कम और “फोटो कॉपी प्रयोग” ज्यादा लग रहा है। न उसमें अतिथियों के नाम, न कोई औपचारिकता, बस एक फोटो कॉपी पकड़ाओ और कह दो—“आ जाइए, कार्यक्रम है।” जैसे कोई शादी नहीं, बल्कि मोहल्ले की क्रिकेट मैच की घोषणा हो रही हो।

जनपद सदस्य सरिता राजीव का दर्द भी कुछ ऐसा ही है। उनका कहना है कि यदि सामूहिक विवाह जैसा बड़ा आयोजन होना था, तो कम से कम एक बैठक तो बुलाई जा सकती थी। लेकिन यहां तो बैठक भी “कल्पना लोक” में ही आयोजित हो गई और निर्णय धरती पर लागू हो गया। लोकतंत्र में संवाद की जगह अब “डाउनलोड और फॉरवर्ड” ने ले ली है।

सबसे मजेदार स्थिति तब बनती है जब जिम्मेदार अधिकारी खुद ही कहते नजर आते हैं—“हमें तो कुछ पता ही नहीं।” पंचायत इंस्पेक्टर हरि प्रसाद बरेले को प्रभारी बना दिया गया, लेकिन उन्हें जानकारी ही नहीं। यानी कप्तान को पता ही नहीं कि मैच किस मैदान में है, और टीम पहले से खेल रही है।

जनपद पंचायत सीईओ रंजीत ताराम का बयान तो और भी दिलचस्प है। वे छुट्टी से लौटे और सीधे एक ऐसे आयोजन के प्रभारी बन गए, जिसके बारे में उन्हें उसी दिन पता चला। बैठक हुई या नहीं—इसकी जानकारी भी नहीं। यह स्थिति कुछ वैसी ही है जैसे कोई छात्र परीक्षा देने पहुंचे और उसे वहीं पता चले कि आज उसका पेपर है।

अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह “आनन-फानन संस्कृति” आई कहां से? क्या यह वही प्रशासन है जो हर छोटे से छोटे कार्यक्रम के लिए महीनों की तैयारी करता है? या फिर यह एक नया प्रयोग है—जहां पहले आयोजन करो, बाद में सोचो?

देखें तो यह पूरा मामला “फोटो कॉपी लोकतंत्र” का बेहतरीन उदाहरण बन चुका है। यहां निर्णय भी कॉपी-पेस्ट, संवाद भी कॉपी-पेस्ट और आमंत्रण भी कॉपी-पेस्ट। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां मूल प्रति किसी को नहीं मिलती।

कन्या विवाह जैसा आयोजन सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं होता, यह समाज की संवेदनाओं से जुड़ा होता है। इसमें शामिल हर परिवार अपने सपनों और सम्मान के साथ आता है। लेकिन जब आयोजन की तैयारी ही इस तरह की हो, तो सवाल उठना लाजमी है कि क्या हम सिर्फ औपचारिकता निभा रहे हैं?

यह स्थिति हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि कहीं हम “कार्यक्रम करने” की होड़ में “कार्यक्रम की गरिमा” तो नहीं खो रहे? क्या अब प्रशासनिक दक्षता का मतलब सिर्फ यह रह गया है कि तारीख तय करो और किसी तरह कार्यक्रम निपटा दो?

अगर यही हाल रहा, तो आने वाले समय में शायद निमंत्रण कार्ड की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। एक व्हाट्सएप मैसेज आएगा—“आज शादी है, समय मिले तो आ जाना।” और नीचे लिखा होगा—“Forwarded many times।”

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दुखद पहलू यह है कि जिन जनप्रतिनिधियों को सम्मानपूर्वक आमंत्रित किया जाना चाहिए था, उन्हें मोबाइल संदेशों और फोटो कॉपी से बुलाया जा रहा है। यह न सिर्फ उनकी गरिमा का सवाल है, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक ढांचे पर भी प्रश्नचिन्ह है।

अंत में, जनपद सीईओ की बात शायद सबसे सटीक लगती है—“ऐसे आयोजन आनन-फानन में नहीं होने चाहिए।” लेकिन सवाल यह है कि यह समझ पहले क्यों नहीं आई? क्या हर बार हमें एक “फोटो कॉपी विवाद” का इंतजार करना पड़ेगा, तब जाकर हम सीखेंगे?

फिलहाल, यह आयोजन होने जा रहा है। लोग आएंगे, शादियां होंगी, फोटो खिंचेंगे और सब कुछ सामान्य दिखेगा। लेकिन इस “फोटो कॉपी आमंत्रण” की कहानी प्रशासनिक इतिहास में एक हल्के-फुल्के व्यंग्य के रूप में जरूर दर्ज हो जाएगी—जहां आमंत्रण से ज्यादा उसकी अनुपस्थिति चर्चा में रही।

और शायद आने वाले समय में यह उदाहरण प्रशिक्षण सत्रों में पढ़ाया जाएगा—
“कैसे एक गंभीर आयोजन को मजाक में बदला जा सकता है, सिर्फ एक आमंत्रण कार्ड के जरिए।”




सूचना आयोग की सख्ती: आरटीआई जानकारी दबाने पर ग्राम पंचायत सचिव पर 25 हजार का जुर्माना

नर्मदापुरम। जिले में सूचना का अधिकार (RTI) कानून की खुलेआम अनदेखी का मामला सामने आया है। सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए आरटीआई कानून को कई लोक सूचना अधिकारी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। ताजा मामले में जानकारी छिपाने और आयोग के नोटिसों की अवहेलना करने पर मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए ग्राम पंचायत महेन्द्रबाड़ी के लोक सूचना अधिकारी एवं सचिव ओमप्रकाश यादव पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है
आयोग के पत्र लेने से भी किया इंकार
हैरानी की बात यह रही कि लोक सूचना अधिकारी ने आयोग द्वारा भेजे गए पत्र लेने से भी इंकार कर दिया। इतना ही नहीं, आयोग की सुनवाई में भी उपस्थित नहीं हुए और न ही कारण बताओ नोटिस का कोई जवाब दिया।

इस पर सख्ती दिखाते हुए सूचना आयुक्त डॉ. वंदना गांधी ने प्रकरण क्रमांक ए-158/एसआईसी/नर्मदापुरम/2025 में 26 फरवरी 2026 को आदेश पारित करते हुए सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20(1) के तहत 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि जुर्माने की राशि एक माह के भीतर जमा कर रसीद प्रस्तुत की जाए, अन्यथा नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

निर्माण कार्यों की जानकारी मांगी थी
मामले के अनुसार आवेदक विनोद केवट ने 5 अगस्त 2024 को ग्राम पंचायत महेन्द्रबाड़ी में आरटीआई आवेदन देकर पंचायत में हुए निर्माण कार्यों की जानकारी मांगी थी। लेकिन लोक सूचना अधिकारी ने निर्धारित समय सीमा में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई।

इसके बाद आवेदक ने जनपद पंचायत माखननगर में प्रथम अपील दायर की, लेकिन वहां भी मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। अंततः आवेदक को न्याय के लिए मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

तीन-तीन नोटिस, फिर भी नहीं पहुंचे अधिकारी

आयोग ने लोक सूचना अधिकारी को सुनवाई के लिए 24 सितंबर 2025, 2 दिसंबर 2025 और 16 जनवरी 2026 को नोटिस जारी किए। लेकिन अधिकारी ने नोटिस लेने से ही इंकार कर दिया।

कार्रवाई से बचने की कोशिश भी नाकाम
सूचना आयोग के आदेश में उल्लेख है कि लोक सूचना अधिकारी ने बाद में आवेदक को डाक से अपूर्ण जानकारी भेजकर कार्रवाई से बचने की कोशिश की, लेकिन आयोग के समक्ष कोई संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया।
आरटीआई व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने जिले में आरटीआई कानून के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि लोक सूचना अधिकारी ही आयोग के आदेशों को नजरअंदाज कर रहे हैं, तो आम नागरिकों को सूचना देने की व्यवस्था कितनी पारदर्शी और जवाबदेह है, यह बड़ा प्रश्न बन गया है।
आयोग का यह फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि सूचना छिपाने और कानून की अवहेलना करने वाले अधिकारियों को अब जवाब देना ही होगा।




सीएम डॉ. मोहन यादव के माखन नगर आगमन को लेकर जोरदार तैयारियां,
जनसभा में शामिल होने पंचायत कर्मचारी बांट रहे घर-घर पीले चावल

माखन नगर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आगामी माखन नगर दौरे को लेकर क्षेत्र में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। मुख्यमंत्री अपने प्रवास के दौरान माखन नगर में भव्य जनसभा को संबोधित करेंगे, जिसे लेकर प्रशासनिक अमला और स्थानीय कार्यकर्ता पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जनभागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पंचायत कर्मचारियों द्वारा घर-घर पीले चावल वितरित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही लोगों से अपील की जा रही है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर जनसभा का हिस्सा बनें।

पंचायत स्तर पर कर्मचारियों को जनसंपर्क की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो लोगों को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की जानकारी दे रहे हैं और समय-स्थल से अवगत करा रहे हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जनसभा स्थल पर मंच, पंडाल, सुरक्षा व्यवस्था, यातायात और पार्किंग सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। जनसभा के माध्यम से मुख्यमंत्री द्वारा क्षेत्रीय विकास योजनाओं, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों और शासन की प्राथमिकताओं पर संबोधन किए जाने की संभावना है।
प्रशासन ने आमजन से कार्यक्रम के दौरान सहयोग बनाए रखने और निर्धारित समय पर सभा स्थल पर पहुंचने की अपील की है।




नल-जल योजना में गड़बड़ी का मामला गरमाया, सरपंच संघ ने सौंपा ज्ञापन

नर्मदापुरम। जनपद पंचायत माखननगर क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों में चल रही नल-जल योजना के कार्यों में गंभीर अनियमितताओं और लापरवाही के मामले सामने आए हैं। ग्राम पंचायत सरपंच संघ ने इसको लेकर मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ), जनपद पंचायत माखननगर को लिखित शिकायत सौंपी है और अधूरे एवं घटिया गुणवत्ता के कार्यों की जांच की मांग की है।

सरपंच संघ के अध्यक्ष द्वारा दिए गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के ठेकेदारों द्वारा कई ग्राम पंचायतों में नल-जल योजना के कार्य या तो अधूरे छोड़ दिए गए हैं या मानकों के अनुरूप नहीं किए जा रहे हैं। कई पंचायतों में तो 8 से 10 माह से कार्य पूरी तरह से ठप पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों को इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

ज्ञापन में कहा गया है कि नल-जल योजना ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अत्यंत जरूरी है, लेकिन कार्यों के समय पर पूरा न होने और गुणवत्ता की अनदेखी से ग्रामीण विकास बाधित हो रहा है और लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।

सरपंच संघ अध्यक्ष कृष्ण कुमार झा ने मांग की है कि जनपद पंचायत माखननगर के अंतर्गत सभी चल रहे और अधूरे नल-जल योजना कार्यों की उचित तकनीकी जांच कराई जाए, निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से कार्य पूरा कराया जाए तथा लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

ज्ञापन सौंपने के दौरान सरपंच संघ के पदाधिकारी और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। अब प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर किस तरह की कार्रवाई करता है, यह देखना होगा।




मनरेगा के बाद का भारत: रोजगार की गारंटी या केंद्रीकृत नियंत्रण?

भारत की ग्रामीण रोजगार नीति में सरकार ने ऐसा हस्तक्षेप किया है, जिसकी गूंज दूर तक सुनाई देगी। ‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ केवल मनरेगा का नया संस्करण नहीं है, बल्कि यह उस दर्शन का पुनर्लेखन है, जिस पर पिछले बीस वर्षों से ग्रामीण रोजगार की बुनियाद टिकी हुई थी।

मनरेगा का जन्म एक स्पष्ट संवैधानिक विचार से हुआ था—काम का अधिकार मांग पर मिले। नया कानून इस मूल विचार को बनाए रखते हुए भी उसकी आत्मा को अलग दिशा में ले जाता दिखाई देता है।

125 दिन का वादा: विस्तार या पुनर्परिभाषा?

पहली नजर में 100 से बढ़ाकर 125 दिन की रोजगार गारंटी एक प्रगतिशील कदम प्रतीत होता है। ग्रामीण परिवारों की आय सुरक्षा को देखते हुए यह फैसला स्वागत योग्य है। पर सवाल यह है कि क्या यह वृद्धि वास्तविक होगी या कागज़ी?
मनरेगा में यदि किसी राज्य में काम की मांग बढ़ती थी, तो केंद्र को बजट बढ़ाना पड़ता था। नया कानून इस लचीलापन को समाप्त कर देता है। अब केंद्र सरकार राज्यवार आवंटन तय करेगी और वही अंतिम सीमा होगी।
यानी दिन बढ़े, लेकिन बजट बंधा रहे—तो रोजगार की गारंटी कितनी व्यावहारिक रह जाएगी?

मांग आधारित से सप्लाई आधारित मॉडल: नीतिगत यू-टर्न

मनरेगा की सबसे बड़ी ताकत उसकी मांग आधारित प्रकृति थी। ग्रामीण गरीब तय करता था कि उसे काम चाहिए। नया कानून इस अधिकार को सैद्धांतिक रूप से बरकरार रखते हुए भी व्यवहार में उसे केंद्र के बजटीय और भौगोलिक निर्णयों पर निर्भर कर देता है।
यह बदलाव सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और संघीय संतुलन से जुड़ा हुआ है। राज्यों की भूमिका अब कार्यान्वयन एजेंसी से अधिक कुछ नहीं रह जाती।

केंद्र का बढ़ता नियंत्रण

नए कानून के तहत केंद्र न केवल यह तय करेगा कि किस राज्य को कितना पैसा मिलेगा, बल्कि यह भी कि कहां रोजगार दिया जाएगा। मनरेगा जहां पूरे देश के लिए यूनिवर्सल था, वहीं नया कानून नोटिफाइड क्षेत्रों तक सीमित होगा।
यह सवाल अनिवार्य हो जाता है—
क्या ग्रामीण गरीबी अब भौगोलिक चयन का विषय बनेगी?

संविधान के संघीय ढांचे में यह बदलाव राज्यों की वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता को सीमित करता है, जिसे लेकर संसद में तीखी बहस तय है।
ग्रामीण रोजगार से ग्रामीण परिवर्तन तक
नए कानून का सकारात्मक पहलू यह है कि यह रोजगार को सिर्फ गड्ढा खोदने और भरने की प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखता।

जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका ढांचा और आपदा प्रबंधन—इन चार स्तंभों पर आधारित ढांचा ग्रामीण अर्थव्यवस्था के दीर्घकालिक परिवर्तन की संभावना दिखाता है।
विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन पर दिया गया जोर इस कानून को समयानुकूल बनाता है। मनरेगा के समय यह मुद्दा इतना केंद्रीय नहीं था।

खेती के मौसम में काम पर रोक

खेती के पीक सीजन में 60 दिन तक काम रोकने का फैसला किसानों की मांग के अनुरूप हो सकता है, लेकिन यह भूमिहीन मजदूरों के लिए गंभीर संकट भी पैदा कर सकता है।
कृषि मजदूरी अस्थिर है और मनरेगा जैसे कार्यक्रम ऐसे समय में सुरक्षा कवच का काम करते थे। सवाल है—
क्या सरकार ने इस सामाजिक प्रभाव का पर्याप्त आकलन किया है?

डिजिटल पारदर्शिता या डिजिटल निर्भरता?

AI आधारित ऑडिट, बायोमेट्रिक उपस्थिति और रियल-टाइम डैशबोर्ड पारदर्शिता बढ़ा सकते हैं, लेकिन ग्रामीण भारत की डिजिटल असमानता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यदि तकनीक बाधा बन गई, तो सबसे कमजोर वर्ग फिर हाशिये पर चला जाएगा।

पंचायतें: व्यवस्था की धुरी या कमजोर कड़ी?

सरकार ने ग्राम पंचायत को योजना की आधारशिला बताया है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश पंचायतें:
तकनीकी रूप से कमजोर
मानव संसाधन की कमी से जूझती
जटिल प्लानिंग ढांचे के लिए अपर्याप्त रूप से तैयार
बिना व्यापक क्षमता निर्माण के यह कानून कागज़ों में भव्य और जमीन पर बोझ बन सकता है।

सुधार या पुनर्संरचना?

यह कानून न तो पूरी तरह जनविरोधी है, न ही निर्विवाद रूप से जनहितैषी।
यह रोजगार की गारंटी को विकास की रणनीति में बदलने का प्रयास है, लेकिन इसकी कीमत केंद्रीकरण और लचीलापन खोने के रूप में चुकानी पड़ सकती है।
मनरेगा ने ग्रामीण भारत को संकट के समय सहारा दिया था। अब नया कानून दावा कर रहा है कि वह ग्रामीण भारत को स्थायी विकास की राह दिखाएगा।
सवाल सिर्फ इतना है—क्या गारंटी अधिकार के रूप में बचेगी, या योजना बनकर सिमट जाएगी?




जनपद पंचायत माखननगर के प्रतिनिधियों ने किया दो दिवसीय पंचायत एवं ऐतिहासिक स्थलों का अध्ययन दौरा

संजय गांधी एवं युवा नेतृत्व तथा पंचायत ग्रामीण विकास प्रशिक्षण संस्था पचमढ़ी द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत जनपद पंचायत माखननगर के अधिकारियों, सरपंचों, सचिवों एवं सहायक सचिवों ने दो दिवसीय अध्ययन दौरे में विभिन्न ग्राम पंचायतों और ऐतिहासिक स्थलों का निरीक्षण किया। यह प्रशिक्षण 4 दिसंबर से प्रारंभ हुआ।
पहले दिन प्रतिनिधि दल ने भीमबेटका (अब्दुल्लागंज) की प्राचीन गुफाओं का भ्रमण कर वहां की ऐतिहासिक धरोहरों की जानकारी प्राप्त की। इसके बाद रायसेन जिले की जनपद पंचायत अब्दुल्लागंज के ग्राम पंचायत क्षेत्र का दौरा किया, जहां चल रहे पंचायत विकास कार्यों का अवलोकन किया गया। टीम ने सांची स्थित विश्व प्रसिद्ध स्तूप एवं अन्य ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन किए तथा वहां के ‘नंदन फलोद्यान’ जैसे नवाचारों से परिचित हुए।
दूसरे दिन 5 दिसंबर को भोजपुर ग्राम पंचायत का विजिट किया गया। प्रतिनिधियों ने भोजपुर स्थित भगवान भोलेनाथ के प्राचीन मंदिर के दर्शन किए और स्थानीय पंचायत में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की। प्रशिक्षण के दौरान स्वच्छता, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास तथा छोटे-छोटे कदमों से ग्राम उन्नयन के मॉडल पर विस्तृत जानकारी दी गई।

इस प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर राजेंद्र कुशवाहा, जनपद अधिकारी घनश्याम मीणा सहित सरपंच कृष्ण कुमार झा, विशाल मालवीय, नरेंद्र मालवीय, लखन कीर, अनिल कहार, तथा सचिव सुरेंद्र सिंह तोमर, पवन, श्रुति, गोविंद यादव, लालजीराम मीणा, जीवन यादव, दुलारे मालवीय, विनोद यादव शामिल रहे।
सहायक सचिवों में मनोज मालवीय, राघवेंद्र तोमर, संदीप सिंह ठाकुर, सोनू चौहान, ललित पटेल, महेश चौरे, प्रवीण राजपूत, राजकुमार यादव, आशीष मालवीय सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रमाण पत्र हासिल किए।
अध्ययन दौरे ने प्रतिभागियों को पंचायत विकास से जुड़े नए आयामों, नवाचारों और व्यवहारिक ज्ञान से समृद्ध किया।




शासकीय संस्थाओं में धूमधाम से मनाया गया संविधान स्थापना दिवस

माखननगर। देशभर की तरह माखननगर नगर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में संविधान स्थापना दिवस बड़े ही उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। तहसील कार्यालय, जनपद पंचायत, ग्राम पंचायतों, शासकीय विद्यालयों सहित सभी सरकारी संस्थाओं में संविधान के प्रति जागरूकता एवं सम्मान प्रकट करने हेतु  कार्यक्रम आयोजित किए गए।

तहसील कार्यालय में विशेष कार्यक्रम

तहसील परिसर में सुबह 11 बजे अधिकारियों, कर्मचारियों एवं आगंतुकों की उपस्थिति में संविधान दिवस कार्यक्रम शुरू हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के सामूहिक वाचन से किया गया। तहसीलदार महेंद्र चौहान ने संविधान के महत्व, अधिकारों और कर्तव्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत के लोकतंत्र की मजबूत नींव है।”
इसके बाद अधिकारियों ने नागरिक कर्तव्यों के निर्वहन पर जोर देते हुए कर्मचारियों को सेवाभाव और पारदर्शिता बनाए रखने की शपथ दिलाई।

जनपद पंचायत में भी दिखा उत्साह

जनपद पंचायत कार्यालय में जनपद सीईओ रंजीत ताराम के नेतृत्व में संविधान दिवस मनाया गया। यहां अधिकारियों, पंचायत सचिवों एवं कर्मचारियों ने संविधान की प्रस्तावना पढ़कर राष्ट्र की एकता, अखंडता और समानता के सिद्धांतों को अपनाने की शपथ ली।
जनपद स्तर पर आयोजित गोष्ठी में ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों में संवैधानिक सिद्धांतों—विशेषकर न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व—को लागू करने पर चर्चा की गई।

ग्राम पंचायतों में भी मनाया गया संविधान दिवस

क्षेत्र की सभी ग्राम पंचायतों में सरपंचों व पंचों की उपस्थिति में संविधान दिवस कार्यक्रम आयोजित किए गए। ग्राम पंचायत भवनों में छात्रों, ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने मिलकर संविधान की उद्देशिका का पाठ किया।
कुछ पंचायतों में जागरूकता रैली भी निकाली गई, जिसमें युवाओं ने हाथों में संविधान जागरूकता से जुड़े पोस्टर लेकर लोगों को लोकतांत्रिक अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक किया।

शासकीय विद्यालयों में विविध गतिविधियाँ

नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक, माध्यमिक तथा उच्च विद्यालयों में संविधान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। शिक्षकों ने बच्चों को संविधान के इतिहास, निर्माण प्रक्रिया और डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
विद्यालयों में पोस्टर प्रतियोगिता,निबंध लेखन,भाषण प्रतियोगिता,प्रश्नोत्तरी
का आयोजन हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

कई स्कूलों में बच्चों द्वारा संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ किया गया तथा मानव श्रृंखला बनाकर 26/11 की आकृति भी प्रस्तुत की गई।

प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति

संविधान दिवस के अवसर पर अनेक शासकीय कार्यक्रमों में विभागीय अधिकारी, कर्मचारी, पंचायत प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने संविधान की मूल भावनाओं—लोकतंत्र, समानता, न्याय, स्वतंत्रता और भाईचारा—को जीवन में उतारने का संकल्प लिया।




Makhannagar News : दुर्घटना ग्रस्त जोन में नाली निर्माण कार्य

जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत पंचायतों में साफ सफाई, गंदे पानी निकासी का का कार्य जनपद माखन नगर में वरीयता मैं करवाया जा रहा है जिसके अंतर्गत
ग्राम पंचायत आंचलखेड़ा  के वार्ड क्रमांक 16   के पास मैन रोड किनारे मोहल्ले का गंदा पानी MAIN रोड पर बहता रहता था। जिसके कारण रोड में कटाव एवं रोड में गड्ढे हो रहे थे। जिससे रोड की स्थिति खराब हो चुकी थी , मेन रोड से आने जाने वाले वाहन चालक ,पैदल राहगीर एवं दो पहिया वाहन दुर्घटना की संभावना बनी रहती थी ।

उक्त समस्या को देखते हुए ग्राम पंचायत आंचल खेड़ा सरपंच  श्रीमती आशा व  सचिव  प्रेम यादव के प्रयासों से  राजेश संकल्लय उपयंत्री के मार्गदर्शन में भगवती राइस मिल से राय मोहन की दुकान तक आरसीसी नाली का निर्माण कार्य लंबाई 235 मीटर 2*2 कुल लागत 6.32 लाख मद 15 वा वित्त से किया जा रहा है जिससे दुर्घटना ग्रस्त जोन में आमजनों को राहत मिलेगी ।

जनपद पंचायत सीईओ रंजीत ताराम ने बताया कि काफी ग्रामीणों को समस्या हो रही थी। हमने इस कार्य को जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत लिया हैं। जिससे ग्रामीणों को हो रही समस्या का निदान हो सके।