Indore News: इंदौर में सबसे पहले सरकारी होली जलाई गई, फिर उसके अंगारों का उपयोग अन्य स्थानों पर होलिका दहन के लिए किया गया
written by Denva Post Bureau | 25/03/2024
इंदौर में सबसे पहले सरकारी होली जली।
इंदौर में वैसे तो रातभर होलिका दहन होते है, लेकिन सबसे पहले राजवाड़ा की सरकारी होली जली। शाम सात बजे ही पूरे विधिविधान केसाथ युवराज रिचर्ड होलकर दहन किया। होलकर राजवंश के राजपुरोहितों ने होलकरकालीन परंपरा निभाते हुए मंत्रोचर किए और होलकरी पगड़ी व अंगरखा पोशाख पहले आए होलकर राजपरिवार के सदस्यों ने ठीक सात बजे होली जलाई।
सरकारी होली देखने के लिए हजारों लोगों की भीड़ राजवाड़ा पर जुटी थी। जलती होली के लोगों ने फेरे लिए और फिर उसके अंगारे लेकर कई लोग अपने अपने इलाकों की होली जलाने पहुंचे। इंदौर में सरकारी होली दहन की पंरपरा 296 सालों से निभाई जा रही है। सरकारी होली जलने के बाद शहर की दूसरे स्थानों पर होली दहन होता है। ज्यादातर स्थानों पर काफी सजावट की गई थी। महिलाएं घर से पूजा की थाली लेकर निकली और होलिका की पूजा की। दहन के बाद गेहूं की बालियां भी अंगारों पर सेंकी।
होली के एक माह पहले गढ़ जाता था होली का डंडा
होलकरशासनकाल में होली का त्योहार उत्साह से मनाया जाता था। त्योहार के एक माह पहले होली के डंडा शहर में गढ़ जाया करते थे। इतिहासकारों के अनुसार होलकर रियासत में ढाले परिवार के यहां से अग्नि आती थी। जिससे राजपरिवार के लोग होलिका दहन करते थे।
इसके बाद राजपरिवार के लोग चांदी और सोने की पिचकारियों से सैनिकों और शहर की जनता पर रंग बरसाते थे। रंग पंचमी पर राजवाड़ा से इंदौरवासियों पर खुशबूदार प्राकृतिक रंग बरसाए जाते थे। बाद में इंदौर में पंचमी पर गैर निकालने की पंरपरा भी शुरू हुई, जो अब इंदौर की पहचान बन चुकी है।
Indore News: प्रधानमंत्री मोदी ने Pm-suraj पोर्टल के कार्यक्रम के दौरान इंदौर के युवाओं से बात की
written by Denva Post Bureau | 25/03/2024
प्रधानमंत्री से बात करते नरेंद्र सेन।
पीएम-सूरज पोर्टल योजना का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वर्चुअली कार्यक्रम से जुड़े और आईटी के क्षेत्र में काम करने वाले एक युवक से बात की। जिनका नाम नरेंद्र सेन है।
नरेंद्र ने प्रधानमंत्री से कहा कि मेरी पृष्ठभूमि ग्रामीण रही है। मेरा विषय कामर्स था लेकिन मुझे कम्यूटर चलाने का शौक था। मुझे आपसे प्रेरणा मिली। मैने साइबर कैफे पर कोडिंग सीखी। इसके बाद एक क्लाउट स्टार्टअप कंपनी बनाई।
नरेंद्र ने प्रधानमंत्री से कहा कि मुझे भी मेरे दोस्त नरेंद्र मोदी कह कर बुलाते, तब आप गुजरात के सीएम थे। एक बार एक कार्यक्रम में आपने कहा था कि देश का क्लाउड गोडाउन होना चाहिए। उस बात से मुझे प्रेरणा मिली। मैं मध्य प्रदेश में डाटा सेंटर बनाना चाहता हुं। मैने राज्य सरकार को पत्र भी लिखा है। मुझे सरकार की तरफ से मदद भी मिली है। कार्यक्रम में सांसद शंकर लालवानी भी मौजूद थे। चार बजे शुरू हुआ कार्यक्रम डेढ़ घंटे तक चला।
Indore News : विधायक भंवर सिंह बोले- इंदौर से चुनाव लड़ने का मेरा कोई इरादा नहीं
written by Denva Post Bureau | 25/03/2024
विधायक भंवर सिंह शेखावत
लोकसभा चुनाव में इंदौर से कांग्रेस के नेता फिलहाल दावेदारी नहीं जता रहे है। पूर्व विधायक संजय शुक्ला और विशाल पटेल पहले ही चुनाव लड़ने से इनकार कर चुके है। इंदौर सीट के लिए भाजपा छोड़कर कांग्रेस में अए और बदनावर से विधानसभा चुनाव जीते भंवर सिंह शेखावत का नाम चर्चा में है, लेकिन शेखावत भी इंदौर से चुनाव लड़ने के मूड में नहीं है।
अमर उजाला से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि अभी मेरे पास इंदौर से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव नहीं आया है। मेरा इंदौर से चुनाव लड़ने का कोई इरादा भी नहीं है। शेखावत ने कहा कि इंदौर में कई योग्य नेता है जो चुनाव लड़ सकते है। मुझे बदनावर की जनता ने चुना है। मैं पांच साल उनकी सेवा करना है।
इसलिए चर्चा में है शेखावत का नाम
शेखावत भाजपा में वर्षों तक रहे। वे पांच नंबर विधानसभा क्षेत्र के विधायक भी रह चुके है। कई भाजपा नेताअेां से उनके आज भी संबंध है। कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि कांग्रेस प्रत्याशी के रुप में शेखावत इंदौर में भाजपा के उम्मीदवार को अच्छी टक्कर दे सकते है।
भाजपा के नाराज कार्यकर्ता भी शेखावत की चुनाव में मदद कर सकते है। इंदौर से कांग्रेस पंकज संघवी, सत्यनारायण पटेल को दो बार सांसद का उम्मीदवार बना चुकी है। संजय शुक्ला मेयर और विधायक का चुनाव लगातार हार चुके है, इसलिए कांग्रेस इंदौर के लिए नया चेहरा खोज रही है। शेखावत भले ही इंदौर से चुनाव लड़ने के लिए फिलहाल इनकार कर रहे है, लेकिन राहुल गांधी की न्याय यात्रा बदनावर से भी गुजरेगी। यदि कांग्रेस के बड़े नेता शेखावत पर दबाव बनाएंगे तो शेखावत की ‘न’ फिर ‘हां’ में तब्दील हो सकता है।
Indore Metro : मेट्रो प्रोजेक्ट के चलते संकट में इंदौर की ऐतिहासिक इमारत रानी सराय
written by Denva Post Bureau | 25/03/2024
रानी सराय भवन – फोटो : सोशल मीडिया
इंदौर में तेजी से लागू किए जा रहे मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट के कारण रीगल तिराहे पर स्थित ऐतिहासिक भवन रानी सराय पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। रानी सराय वर्तमान में इंदौर के पुलिस आयुक्त का कार्यालय है। यहां पुलिस के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के भी कार्यालय है।
रानी सराय 1907 में बनाया गया था। करीब 117 वर्ष पुरानी इस धरोहर को तोड़कर मेट्रो के शहरी हिस्से के लिए राह आसान करने की बात हो रही है। आधुनिक इंदौर के निर्माताओं में पूर्ववर्ती महाराजा शिवाजीराव होल्कर का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। उनके कार्यकाल में इंदौर में कई भवनों का निर्माण हुआ। उनमें प्रमुख हैं होल्कर कॉलेज, शिवविलास पैलेस, फूटी कोठी (जो अधूरी रही), मोती बंगला, गांधी हॉल, बड़वाह का दरियाव महल आदि हैं।
महाराजा शिवाजीराव ने दिया इंदौर को नियोजित रूप
महाराजा शिवाजीराव होल्कर ने इंदौर नगर के नियोजित विकास के लिए उस वक्त के प्रख्यात नगर नियोजक पैट्रिक गिडीज को लंदन से इंदौर बुलवाया था। उन्होंने इंदौर का पहला मास्टर प्लॉन बनाया था। शिवाजीराव होल्कर की पत्नी वाराणसी बाई साहेब होल्कर बीमार थीं। तब महाराजा शिवाजीराव होल्कर ने 1 लाख 25 हजार रुपये की राशि का धार्मिक और पारमार्थिक कार्यों का प्रावधान किया था। इस राशि के उपयोग का विचार महारानी वाराणसी बाई साहेब के निधन बाद शिवाजीराव होल्कर के पुत्र और उनके उत्तराधिकारी महाराजा तुकोजीराव होल्कर तृतीय के कार्यकाल में हुआ। महारानी वाराणसी बाई की याद में एक सराय यानी धर्मशाला बनाने का निर्णय हुआ।
चार्ल्स स्टिकेंस कंपनी ने बनाई डिजाइन
इंदौर रेलवे स्टेशन के समीप नगर के बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए इस स्थान पर सराय बनाने का निर्णय हुआ। बॉम्बे के चार्ल्स स्टिकेंस कंपनी ने इस भवन को डिजाइन किया। रानी सराय दो मंजिला बनाई गई। मुख्य द्वार भव्य बनाया गया, आबो-हवा के लिए भवन में कई खिड़कियां रखी थीं। सराय में दो बड़े हॉल और 25 कमरे बनाए गए थे। इस तरह 1907 में तैयार हुए इस भवन का उद्घाटन भी 1907 में कर दिया गया था। इस सराय का नाम न्यू वाराणसी बाई होल्कर सराय किया गया था।
1909 में सराय के प्रवेश द्वार के प्रवेश करते ही खुले मैदान में एक भव्य फव्वारे का निर्माण करवाया गया था यह फव्वारा वाराणसी बाई साहेब की सहायिका गेरटयूड के निधन होने पर किया गया था। सराय के निर्माण पर 1 लाख 51 हजार 186 रुपये व्यय हुए थे। सराय निर्माण में काले और सफेद पत्थरों का उपयोग किया गया था।
1944 तक ही सराय के रूप में उपयोग
यह इमारत 1907 से 1944 तक ही सराय रही। इसका उपयोग बंद हो गया और इसके कमरों में सरकारी विभाग का रिकॉर्ड रख दिया गया। 1952 में यह सराय मध्यभारत शासन द्वारा गोविंदराम सेकसरिया कॉलेज को उपयोग के लिए दे दी गई थी।
1989 में बना पुलिस अधीक्षक कार्यालय
1989 में पुलिस अधीक्षक कार्यालय इस भवन में स्थानांतरित हो गया था। इस परिसर के मैदान पर कई देशों की प्रसिद्ध नाटक मंडलियों ने अपने नाटकों की प्रस्तुति दी थी। इसके मैदान पर शाही मीना बाजार लगता था।
एक संयोग है कि 117 वर्ष प्राचीन होल्कर कालीन धरोहर जो जिस उद्देश्य के लिए बनाई गई थी वह 37 वर्ष ही सराय रही। 80 साल से वह कभी कॉलेज के पास तो कभी पुल निर्माण के लिए सामग्री का भंडार रही। शेष समय खाली और करीब 35 साल से पुलिस विभाग के पास है। अब महारानी की स्मृति में निर्मित रानी सराय को मेट्रो के लिए तोड़ने की कवायदें हो रही हैं। नागरिक मांग कर रहे हैं कि इस धरोहर को सहेज कर रखा जाए।
Indore News : इंदौर में मेडिकल छात्र ने अपने कमरे में लगाई फांसी, नहीं मिला सुसाइड नोट
written by Denva Post Bureau | 25/03/2024
मृतक प्रदीप
इंदौर के इंडेक्स नर्सिंग काॅलेज के एक छात्र ने फांसी लगाकर अपनी जीवन समाप्त कर ली। वह मूसाखेड़ी क्षेत्र में अपने एक दोस्त के साथ रूम किराए पर लेकर रहता था। छात्र ने आत्महत्या की क्यों की, इसका पता नहीं चल सका। उसके रूम से पुलिस को कोई सुसाइड नोट नहीं मिला।
प्रदीप पिता श्यामलाल पटोदिया शाजापुर का रहने वाला था। वह इंडेक्स काॅलेज से नर्सिंग की पढ़ाई कर रहा था। परिजनों ने उसे इंदौर में रूम किराए पर लेकर दिया था। उसके साथ संदीप भी रहता था।
संदीप ने पुलिस को बताया कि प्रदीप सुबह उठा। वह गुमसुम लग रहा था। इसके बाद मैं कोचिंग क्लास चला गया। दोपहर में रूम पर आया तो प्रदीप फांसी पर लटका मिला। आसपास के लोगों की मदद से उसे फंसे से उतारा, लेकिन उसकी सांसें नहीं चल रही थी। इसके बाद परिजनों को सूचना दी। वे शााजापुर से इंदौर पहुंचे।
प्रदीप के पिता किसान हैं। उसका एक भाई और बहन भी है। दोनों गांव में रहते हैं। प्रदीप पढ़ने में तेज था, इसलिए उसे इंदौर में पढ़ाई करने भेजा था। परिजन भी प्रदीप की आत्महत्या से सदमे में है, क्योंकि प्रदीप का किसी से विवाद नहीं था। उसके कमरे से सुसाइड नोट भी नहीं मिला। पुलिस ने उसका मोबाइल फोन जांच के लिए जब्त किया है। मर्ग कायम कर तलाश की जा रही है।
Indore News : इंदौर में कम हो गए गिद्ध, तीन साल पहले 116 थे, अब 86 ही बचे
written by Denva Post Bureau | 25/03/2024
इंदौर में की गई गिनती में 86 गिद्ध ही मिेले।
इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में गिद्धों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। विलुप्त हो रही इस प्रजाति को बचाने के लिए वन विभाग भी ठोस उपाय नहीं कर रहा है। कम हो रही संख्या का खुलासा भी वन विभाग की गिनती में ही हुआ है।
इंदौर वनमंडल क्षेत्र में हुई तीन दिनों गिद्धों की गिनती के आंकड़े चौकाने वाले है। वन विभाग द्वारा की गई पिछली गिनती की तुलना में गिद्धों की संख्या पहले से कम हो गई । तीन दिन तक 25 स्थानों पर 18 टीमों ने गिद्धों की गिनती की।
टीम को इंदौर वनमंडल की चारों रेंज में सिर्फ 86 गिद्ध ही दिखे,जबकि तीन साल पहले हुई गिनती में इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में 116 गिद्ध थे। अब इंदौर वनमंडल रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय को सौंपेगा।
प्रदेश में तीन साल पहले गिद्धों की संख्या दस हजार थी, लेकिन अब प्रदेश में भी गिद्ध कम होने की आशंका है,क्योकि सभी वनमंडलों में हुई गिनती में कम गिद्ध मिले है। वर्ष 2021 के बाद गिद्धों का सर्वे विभाग ने पहली बार तीन दिन तक किया ।
इंदौर, चोरल, महू और मानपुर रेंज में 25 सेे अधिक स्थानों को चुनना गया। वहां टीमें सुबह 6 से 8 बजे के बीच जाती थी और गिद्धों के फोटो, उनकी गूगल लोकेशन एप में अपलोड करती थी।
टीम को इंदौर के आसपास पेडमी, देवगुराडिया, पठान पिपलिया, चिखली, मेंहदीकुंड, पातालपामनी, तिन्छा, भड़किया, गिद्ध खो में गिद्ध मिले। ज्यादातर व्यस्क गिद्ध दिखाई दिए। टीम को पहले दिन 38, दूसरे दिन और तीसरे दिन 22 गिद्ध नजर आए। इस तरह इस बार की गणना में 86 गिद्ध ही मिले।
प्रमाण मिले है। अधिकारियों ने कहा कि गिद्धों के उड़ने से पहले इनकी गिनती करनी थी। जमीन, घोंसले और पेड़ पर बैठे गिद्धों के आंकड़े जुटाए गए है, इसलिए टीम सुबह गिनती के लिए जाती थी। दोपहर में ज्यादातर गिद्ध भोजन की तलाश में निकल जाते है।
Acharya Vidyasagar Maharaj : आचार्य विद्यासागर महाराज ने ली समाधि
written by Denva Post Bureau | 25/03/2024
आचार्य विद्यासागर महाराज ने ली समाधि, जैन समाज पहुंचा चन्द्रगिरि तीर्थ
इंदौर ऐसा एकमात्र शहर है जहां आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज (Acharya Vidyasagar Maharaj ) ने अपने साधु जीवन का सबसे अधिक वक्त बिताया है। 56 साल के साधु जीवन में उन्होंने 10 महीने से ज्यादा का समय इंदौर में बिताया। 19 साल के लंबे इंतजार के बाद साल 2020 में उनका आगमन अहिल्या की नगरी इंदौर में हुआ। इस दौरान इंदौर के भक्तों का सौभाग्य ऐसा जागा कि गुरु का सानिध्य 300 दिन से ज्यादा का मिल गया।
कोरोना संक्रमण की वजह से इंदौर को मिला सौभाग्य
साल 2020 में जब आचार्य विद्यासागर इंदौर आए तो कोरोना की वजह से लाकडाउन लगा। इस वजह से इंदौर की जनता को गुरु का यह प्रेम मिल पाया। जैन समाजजन कहते हैं कि गुरु के प्रति अपार स्नेह की वजह से इंदौर को यह सौभाग्य मिला।
चन्द्रगिरि तीर्थ में देह त्यागी
छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चन्द्रगिरि तीर्थ (chandragiri dongargarh jain temple) में शनिवार देर रात 2:35 बजे श्री विद्यासागर जी महाराज ने अपना शरीर त्याग दिया। दिगंबर मुनि परंपरा के आचार्य ने पूर्ण जागृतावस्था में आचार्य पद का त्याग किया। इसके बाद तीन दिन का उपवास लिया और अखंड मौन धारण कर लिया। इसके बाद उन्होंने प्राण त्याग दिए। उनके शरीर त्यागने की खबर मिलने के बाद जैन समाज के लोग डोंगरगढ़ में जुटना शुरू हो गए हैं। आज दोपहर 1 बजे उनकी अंतिम संस्कार विधि होगी।
पीएम मोदी मिलने पहुंचे थे
पिछले साल 5 नवंबर को पीएम मोदी (pm modi) ने डोंगरगढ़ पहुंचकर मुनि श्री का आशीर्वाद लिया था। तब उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था कि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी का आशीर्वाद पाकर धन्य महसूस कर रहा हूं।
Mp News : वन अधिकारियों ने टाइगर रिजर्व में गिद्धों का आकलन शुरू किया
written by Denva Post Bureau | 25/03/2024
गिद्धों की गिनती करते वनकर्मी।
मध्य प्रदेश टाइगर, लेपर्ड और चीता स्टेट तो है ही, गिद्ध स्टेट भी है। मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व में भी गिद्धों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इनकी गिनती शुरू हो गई है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भी मैनुअली गिनती की जा रही है। तीन दिन तक यह गणना चलेगी।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मध्य प्रदेश में तीन प्रकार के गिद्ध दूसरे देशों से भी आते हैं। इसके अलावा चार प्रकार के गिद्ध भारत में पाए जाते हैं। कुल सात प्रकार के गिद्धों की गणना पूरे भारत में हो रही है। मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ के साथ ही सभी टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में तीन दिवसीय गिद्ध गणना गुरुवार को शुरू हुई। बीटों में वनकर्मी गिद्धों की गिनती कर रहे हैं। सुबह साढ़े छह बजे से रात साढ़े आठ बजे तक गिनती होगी। इसके बाद सभी गणनाओं को एकत्रित किया जाएगा।
हर दो साल में होती है गिद्धों की गिनती
गिद्धों की गिनती हर दो साल में की जाती है। सात फरवरी 2024 से गिद्धों की गिनती शुरू हुई है। इसके बाद अप्रैल में इन्हें दोबारा गिना जाएगा। जंगलों के साथ-साथ अन्य इलाकों में भी गिद्धों की गिनती की जाएगी। 7 फरवरी 2022 को गिद्धों की गिनती हुई थी। तब एक अनुमान में मध्य प्रदेश में 9,448 गिद्ध मिले थे। वन विहार भोपाल को इस बार गिद्धों की गिनती का नोडल केंद्र बनाया गया है।
टेक्नोलॉजी की ले रहे हैं मदद
गिद्धों की गिनती में टेक्नोलॉजी की मदद ली जा रही है। फोटो, ड्रॉपिंग्स, उनके घोसले आदि से जुड़े साक्ष्यों के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसकी मदद से सॉफ्टवेयर गिद्धों की पहचान करने और उनकी प्रजातियों को पहचाना जा सकेगा।
Indore News : सराफा की फायर सेफ्टी देखने पहुंची समिति, अध्यक्ष बोले
written by Denva Post Bureau | 25/03/2024
समिति सदस्य पहुंचे सराफा।
इंदौर की शान सराफा चौपाटी में अग्नि सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब खोजने मेयर द्वारा गठित नगर नगम की समिति शुक्रवार रात सराफा चौपाटी पहुंची। समिति सदस्यों ने पाया कि चौपाटी में सिलेंडरों का उपयोग धड़ल्ले से हो रहा है। भीड़ ज्यादा होती है और घटना होने पर भगदड़ जैसी स्थिति निर्मित हो सकती है।
समिति अध्यक्ष राजेंद्र राठौर ने कहा कि सराफा अब पहले जैसा नहीं रहा। ज्यादातर लोग यहां व्यजंन सिलेंडरों पर बनाते है। परिवार भी रहते है। निर्मित परिस्थितियों के हिसाब से सराफा बारूद के ढेर पर बैठा है।
रात को समिति सदस्य राजेंद्र राठौर, निरंजन सिंह चौहान, राकेश शर्मा ने आधा किलोमीटर में फैली चौपाटी का दौरा किया। सदस्यों ने दुकानदारों से पूछा कि व्यजंन बनाते समय फायर सेफ्टी का कितना ध्यान रखा जाता है।
हादसा होने की स्थिति में बचाव के क्या उपाय रखे है। सदस्यों से मिलने सराफा क्षेत्र के रहवासी भी आ गए। उन्होंने बताया कि दो माह पहले सराफा के एक मकान में आग लग चुकी है। संकरी गलियों के कारण दमकलें भी यहां नहीं पहुंच पाई थी। चौपाटीवालों ने सुरक्षा के इंतजाम नहीं कर रखे है। छोटा हादसा भी यहां बड़ा रुप ले सकता है।
कंपनी देगी 20 फरवरी तक रिपोर्ट
सराफा में अवंतिका गैस कंपनी के अफसरों ने दौरा किया। गली में गैस पाइप लाइन बिछाई जा सकती है या नहीं, इसके लिए सर्वे शुरू हो गया है। 20 फरवरी तक कंपनी अपनी रिपोर्ट तैयार कर नगर निगम को सौंपेगी।
अध्यक्ष बोले-सभी विकल्पों पर विचार करेंगे
समिति अध्यक्ष राजेंद्र राठौर ने कहा कि सराफा में पहले दुकानदार व्यजंन घरों में तैयार करते थे और सराफा में लाकर बेचते थे, लेकिन अब पहले जैसी बात नहीं है। ज्यादातर दुकानदार चौपाटी में व्यंजन बनाते है। पनीर टिक्का के लिए तो कोयले भी जलाए जा रहे है। चौपाटी कहा शिफ्ट हो सकती है या मौजूदा स्थान पर क्या उपाय किए जाए। इन सभी विकल्पों पर विचार किया जाएगा।
Indore News : मर्डर क्राइम मामा मामी भांजा
written by Denva Post Bureau | 25/03/2024
इंदौर में चौकाने वाला मामला सामने आया है। मामा की हत्या के मामले में पुलिस ने भांजे को गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक यह प्रेम प्रसंग का मामला है, जिसमें भांजा और मामी एक दूसरे से प्रेम करते थे। बाद में मामा की हत्या कर दी गई।
पुलिस ने कहा कि इंदौर के विदुर नगर में एक दिन पहले मिले रूपसिंह राठौर (बंजारा) का मर्डर किया गया था। इसमें उसका भांजा शुभम (22) भी शामिल था। पुलिस ने शुभम के साथ हत्या में शामिल चार दोस्तों को हिरासत में लिया है। हत्याकांड का खुलासा मृतक के छह साल के बेटे ने किया।
हत्या के पीछे की वजह शुभम और मृतक की पत्नी पूजा यानी मामी से प्रेम-प्रसंग बताई जा रही है।
द्वारिकापुरी पुलिस ने बताया कि जिस समय शव मिला तब एक्सीडेंट केस लग रहा था। डॉक्टर ने भी पोस्टमार्टम में एक्सीडेंट से मौत होना माना था। गुरुवार को पड़ताल शुरू की। मृतक के रिश्तेदारों सहित उसके छह साल के बेटे से पूछताछ की। पुलिस को पूछताछ के बाद शक हुआ कि यह हादसा नहीं हत्या का मामला है। पूजा के 6 साल के बेटे ने बताया कि मां और पिता के बीच हमेशा झगड़ा होता रहता था। इसके बाद पुलिस ने पूजा का मोबाइल चेक किया इसमें पूजा ने शुभम को कई बार वीडियो कॉल किए थे।
पुलिस ने तुरंत शुभम को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने पूरे मामले का खुलासा कर दिया। उसने बताया कि चार दोस्तों के साथ मिलकर उसने अपने मामा की हत्या की थी। पुलिस की शुभम और उसके चारों दोस्तों के साथ पूजा को भी हिरासत में ले लिया है।