301वीं जयंती पर याद की गईं लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर, इंदौर में बन रहा भव्य अहिल्या स्मारक

इंदौर। लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जयंती पर पूरे मालवा-निमाड़ क्षेत्र सहित देशभर में उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। होल्कर रियासत की महान शासिका के रूप में प्रसिद्ध अहिल्याबाई का शासनकाल समाप्त हुए करीब 230 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन जनकल्याण, न्यायप्रियता और धार्मिक-सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।
इसी विरासत को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से इंदौर के ऐतिहासिक रामपुर कोठी परिसर में भव्य अहिल्या स्मारक का निर्माण किया जा रहा है। लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह स्मारक देवी अहिल्याबाई के जीवन, उनके शासनकाल और सामाजिक योगदान को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत करेगा।

साधारण परिवार से लोकमाता बनने तक का सफर

31 मई 1725 को महाराष्ट्र के चौंडी गांव में जन्मी अहिल्याबाई का विवाह वर्ष 1735 में होल्कर राज्य के संस्थापक मल्हारराव होल्कर के पुत्र खंडेराव होल्कर से हुआ था। वर्ष 1745 में उन्हें पुत्र मालेराव की प्राप्ति हुई।
कुम्हेर युद्ध में पति खंडेराव होल्कर के निधन के बाद उनके जीवन में संघर्षों का दौर शुरू हुआ। बाद में मल्हारराव होल्कर के निधन और पुत्र मालेराव की आकस्मिक मृत्यु के पश्चात वर्ष 1767 में अहिल्याबाई ने होल्कर रियासत की बागडोर संभाली। उन्होंने लगभग 28 वर्ष 5 माह 17 दिन तक कुशल प्रशासन चलाते हुए न्याय, धर्म और लोककल्याण की मिसाल कायम की। 13 अगस्त 1795 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवंत है।

ऐतिहासिक रामपुर कोठी बनेगी स्मृतियों का केंद्र

अहिल्या स्मारक का निर्माण इंदौर की ऐतिहासिक रामपुर कोठी में किया जा रहा है। इस भवन का अपना गौरवशाली इतिहास रहा है। महाराजा हरिराव होल्कर ने रामपुर नवाब के लिए इस कोठी का निर्माण कराया था। लालबाग महल बनने से पहले रियासत की महत्वपूर्ण बैठकें यहीं आयोजित होती थीं।

इतिहासकारों के अनुसार कोठी के समीप एक बावड़ी का भी निर्माण कराया गया था, जिसका उल्लेख 19 मार्च 1852 के रोजनामचे में मिलता है। बाद के वर्षों में यहां राज्य के प्रधानमंत्री टी. माधवराव का कार्यालय संचालित हुआ। स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक यह भवन आरटीओ कार्यालय के रूप में उपयोग में रहा। वर्ष 2016 में आरटीओ कार्यालय स्थानांतरित होने के बाद वर्ष 2024 में यह परिसर अहिल्या स्मारक ट्रस्ट को सौंप दिया गया।

आधुनिक तकनीक से जीवंत होगा इतिहास

करीब साढ़े तीन एकड़ क्षेत्र में विकसित हो रहे इस स्मारक को तीन चरणों में तैयार किया जाएगा। वर्तमान में पहले चरण के अंतर्गत भवन के नवीनीकरण का कार्य जारी है, जिसमें लगभग 25 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
स्मारक में थ्री-डी पेंटिंग्स, लाइट एंड साउंड शो, ऑडियो प्रेजेंटेशन और डिजिटल डिस्प्ले के माध्यम से देवी अहिल्याबाई के जीवन और उनके ऐतिहासिक कार्यों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही एक विशेष पर्यटन क्षेत्र भी विकसित किया जाएगा, जहां राजबाड़ा, गोपाल मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर, लालबाग महल सहित होल्करकालीन धरोहरों की झलक देखने को मिलेगी।

परंपरागत तकनीक से हो रहा संरक्षण
पुरातत्व विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रवीण श्रीवास्तव के अनुसार स्मारक के संरक्षण और मरम्मत कार्य में पारंपरिक निर्माण सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। चूना, मैथी दाना, बेलपत्र, उड़द की दाल, सूखी ईंट का चूर्ण और सरस जैसे पारंपरिक मिश्रणों से भवन को उसके मूल ऐतिहासिक स्वरूप में संरक्षित किया जा रहा है।

सुरक्षित रहेंगे पुराने वृक्ष

स्मारक निर्माण के दौरान पर्यावरण संरक्षण का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। परिसर में मौजूद पुराने वृक्षों को काटने के बजाय संरक्षित किया जा रहा है। यहां “अहिल्या वन” और “अहिल्या घाट” भी विकसित किए जाएंगे। स्मारक का मुख्य प्रवेश द्वार होल्करकालीन किले के प्रवेश द्वार की तर्ज पर बनाया जाएगा।

अहिल्या ट्रस्ट के सचिव अशोक डागा के अनुसार परियोजना के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें पहले चरण हेतु 40 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं। लक्ष्य है कि सिंहस्थ 2027 से पहले यह स्मारक पूरी तरह तैयार हो जाए।

इंदौर से जुड़ी हैं अहिल्याबाई की विशेष स्मृतियां

इतिहास के अनुसार देवी अहिल्याबाई 26 मई 1784 को महेश्वर से इंदौर आई थीं और 21 जून 1784 तक यहां रहीं। उनका यह प्रवास कुल 27 दिनों का था।

इंदौर में उनके सम्मान में कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए। 5 सितंबर 1959 को अहिल्या उत्सव के अवसर पर राजबाड़ा चौक का नाम बदलकर “अहिल्या चौक” रखा गया। वहीं 29 अप्रैल 1969 को राजबाड़ा के सामने उनकी प्रतिमा का अनावरण किया गया था।

लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर केवल एक सफल शासिका ही नहीं थीं, बल्कि न्याय, धर्म, सेवा और सुशासन की ऐसी प्रतीक थीं, जिनकी प्रेरणा आज भी समाज और प्रशासन दोनों के लिए प्रासंगिक बनी हुई है। उनकी 301वीं जयंती पर बन रहा यह भव्य स्मारक उनकी गौरवशाली विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।




Indore:इंदौर में जलसंकट ने बढ़ाई महंगाई, पानी के टैंकरों के दाम में भारी उछाल

इंदौर। भीषण गर्मी और गहराते जलसंकट के बीच इंदौरवासियों पर अब महंगाई की एक और मार पड़ने लगी है। शहर में पानी की कमी के चलते निजी टैंकरों की मांग लगातार बढ़ रही है, वहीं डीजल की कीमतों में वृद्धि का असर भी सीधे तौर पर टैंकरों के किराए पर दिखाई देने लगा है। परिणामस्वरूप पानी खरीदना अब आम लोगों के लिए पहले से कहीं अधिक महंगा हो गया है।
जानकारी के अनुसार छह हजार लीटर क्षमता वाला पानी का टैंकर, जो कुछ समय पहले तक लगभग 800 रुपये में उपलब्ध हो जाता था, अब 1000 से 1200 रुपये तक में मिल रहा है। वहीं बड़े होटलों, अस्पतालों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सप्लाई किए जाने वाले 12 हजार लीटर क्षमता के टैंकरों की कीमत में भी करीब एक हजार रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

परिवारों के बजट पर पड़ रहा असर
शहर के कई इलाकों में बोरवेल और जलस्रोत सूखने की स्थिति में पहुंच गए हैं, जिसके कारण रहवासी टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं। इसका सीधा असर लोगों के घरेलू बजट पर पड़ रहा है।
एक अपार्टमेंट में रहने वाले निवासी संदीप श्रीवर्धन ने बताया कि उनकी सोसायटी की बोरिंग ने पानी देना बंद कर दिया है, जिसके चलते टैंकरों से पानी मंगाया जा रहा है। अतिरिक्त खर्च को देखते हुए सोसायटी प्रबंधन ने अगले तीन महीनों के लिए मेंटेनेंस शुल्क में 1500 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है।

हॉस्टलों और संस्थानों में भी बढ़ी चिंता
जलसंकट का असर छात्रों और संस्थानों पर भी दिखाई देने लगा है। भंवरकुआ क्षेत्र के एक हॉस्टल में रहने वाले छात्र अभय श्रीवास्तव के अनुसार हॉस्टल प्रबंधन अब पानी खरीदकर व्यवस्था कर रहा है, लेकिन इसका खर्च छात्रों से ही वसूला जा रहा है। साथ ही पानी की बचत के लिए उपयोग संबंधी नियम भी सख्त कर दिए गए हैं।

शहर के कई बड़े होटल, अस्पताल, स्कूल और हॉस्टल भी इन दिनों निजी टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं, जिससे संचालन लागत में लगातार वृद्धि हो रही है।

डेढ़ हजार से अधिक निजी टैंकर कर रहे सप्लाई

नगर निगम जहां 600 से अधिक टैंकर किराए पर लेकर जलापूर्ति कर रहा है, वहीं शहर में करीब डेढ़ हजार निजी टैंकर और ट्रैक्टर-टैंकर पानी बेचने के काम में लगे हुए हैं।

निरंजनपुर, सिरपुर और बिलावली क्षेत्र के आसपास स्थित बोरवेलों से पानी भरकर ये टैंकर शहर के विभिन्न इलाकों में सप्लाई कर रहे हैं। बढ़ती मांग के कारण निजी टैंकर संचालकों का कारोबार भी तेजी से बढ़ रहा है।

महंगे पानी का दिखने लगा व्यापक असर

जलसंकट और बढ़ती कीमतों का असर अब शहर के कई क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है।अधिकांश अपार्टमेंट्स और आवासीय सोसायटियों में मेंटेनेंस शुल्क बढ़ा दिया गया है।
कई हॉस्टलों में पानी बचाने के लिए शॉवर के बजाय बाल्टी से स्नान करने की सलाह दी जा रही है।
निर्माण कार्यों पर भी असर पड़ा है, क्योंकि तराई और अन्य निर्माण संबंधी जरूरतों के लिए महंगा पानी खरीदना पड़ रहा है।
छोटे व्यवसायों और संस्थानों के संचालन खर्च में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

बारिश का इंतजार, राहत की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की अच्छी बारिश ही इस संकट से राहत दिला सकती है। फिलहाल शहर के कई हिस्सों में पानी की मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ता अंतर लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। यदि जल्द ही पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो आने वाले दिनों में जलसंकट और गहरा सकता है तथा पानी की कीमतों में और वृद्धि होने की आशंका है।




Indore News:मानसून से पहले इंदौर में सड़क सुधार अभियान तेज, जर्जर मार्गों पर युद्धस्तर पर पैचवर्क

इंदौर। मानसून के आगमन से पहले इंदौर नगर निगम ने शहर की सड़कों को दुरुस्त करने के लिए व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। बारिश के मौसम में होने वाले जलभराव, ट्रैफिक जाम और सड़क हादसों की संभावनाओं को कम करने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा जर्जर एवं क्षतिग्रस्त सड़कों पर युद्धस्तर पर पैचवर्क कार्य कराया जा रहा है। निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल के निर्देश पर मैदानी अमले को दिन-रात कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।

नगर निगम प्रशासन के अनुसार वर्षाकाल के दौरान नागरिकों को सुरक्षित, सुगम और बाधारहित यातायात सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके तहत शहर के प्रमुख एवं अत्यधिक व्यस्त मार्गों पर गुणवत्ता मानकों के अनुरूप सड़क मरम्मत और गड्ढों को भरने का कार्य लगातार जारी है।

कई प्रमुख मार्गों पर पूरा हुआ पैचवर्क
नगर निगम की टीमों ने इस सप्ताह शहर के कई महत्वपूर्ण मार्गों पर प्राथमिकता के आधार पर पैचवर्क कार्य पूर्ण किया है। इनमें राजकुमार ब्रिज का हिस्सा, रेडिसन चौराहे से स्टार चौराहे तक का मार्ग, रिंग रोड पर मूसा खेड़ी से वर्ल्ड कप चौराहे तक का रास्ता प्रमुख रूप से शामिल है।

इसके अलावा एमआर-10 रोड पर कर्नावत चौराहे से सुखलिया टेंपो स्टैंड तक, कालानी नगर मुख्य मार्ग, जवाहर मार्ग तथा बंबई बाजार क्षेत्र में भी सड़क मरम्मत और गड्ढे भरने का कार्य किया गया है।

आधुनिक तकनीक और गुणवत्ता पर विशेष जोर

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि सभी कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों एवं आधुनिक तकनीकों के उपयोग के साथ किए जा रहे हैं। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आगामी भारी बारिश के दौरान भी प्रमुख सड़कों की स्थिति बेहतर बनी रहे और नागरिकों को आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

आगामी दिनों में इन मार्गों पर होगा कार्य

निगम की कार्ययोजना के अनुसार आने वाले दिनों में शहर के अन्य महत्वपूर्ण मार्गों पर भी पैचवर्क और डामरीकरण कार्य किया जाएगा। प्रस्तावित कार्यों में राजकुमार ब्रिज का शेष भाग, रिंग रोड पर बॉम्बे हॉस्पिटल से निपानिया चौराहे तक का मार्ग, मूसा खेड़ी से वर्ल्ड कप चौराहे तक के शेष हिस्से, मक्सी बाजार मार्ग तथा एमआर-10 रोड के अन्य हिस्से शामिल हैं।

तय समयसीमा में पूरा होगा काम

नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने सभी तकनीकी एवं क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सड़क सुधार कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं।

उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि निर्माण कार्य के दौरान यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो और आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

आयुक्त ने कहा कि शहर के सभी प्रमुख मार्गों पर चरणबद्ध तरीके से सड़क सुधार एवं पैचवर्क कार्य जारी रहेगा, ताकि मानसून के दौरान नागरिकों को बेहतर और सुरक्षित सड़क सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।




Madhya Pradesh News:उज्जैन में पुलिस नौकरी के नाम पर 25 लाख की ठगी, खुद को डीजीपी का रिश्तेदार बताकर लोगों को बनाया शिकार

उज्जैन। मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में पुलिस विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोपी खुद को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) का रिश्तेदार बताकर लोगों को भरोसे में लेता था और पुलिस में भर्ती कराने का झांसा देकर रकम वसूलता था। मामले में पुलिस ने धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार झारखेड़ी निवासी बालूसिंह पिता भेरूलाल वाड़िया के खिलाफ कई लोगों ने एसपी कार्यालय उज्जैन पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पीड़ितों का आरोप है कि आरोपी ने खुद को डीजीपी कैलाश मकवाना का रिश्तेदार बताते हुए पुलिस विभाग में नौकरी लगवाने का भरोसा दिया था।

10 लोगों से वसूले करीब 25 लाख रुपये

शिकायतकर्ताओं के मुताबिक आरोपी ने अलग-अलग 10 लोगों से तीन से चार लाख रुपये तक लिए और कुल मिलाकर करीब 25 लाख रुपये की ठगी की। आरोप है कि पैसे लेने के बावजूद आरोपी किसी भी व्यक्ति की नौकरी नहीं लगवा सका।

जब पीड़ितों ने अपने रुपये वापस मांगे तो आरोपी ने गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी तक दे डाली। इसके बाद सभी पीड़ितों ने पुलिस की शरण ली।

किसी ने जमीन गिरवी रखी, किसी ने जमा पूंजी दी

एसडीओपी जेंडर लिंगजेरपा ने बताया कि आरोपी ने लोगों की मजबूरी और बेरोजगारी का फायदा उठाया। किसी ने जमीन गिरवी रखकर रुपये दिए तो किसी ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी आरोपी को सौंप दी।

शिकायतकर्ताओं में जितेंद्र पिता रणजीत, फतेसिंह पिता अंबाराम, बलराम पिता रमेश, रमेश बोड़ाना, विकास पिता अंतरसिंह, विक्रम पिता रमेश, मुकेश पिता रामेश, लालूबाई पति स्वर्गीय अनिल, कमलाबाई पति स्वर्गीय सत्यनारायण निवासी उज्जैन तथा हेमंत पिता रणजीत और विकास यादव पिता वासुदेव निवासी देवास शामिल हैं।

तीन साल से देता रहा झांसा

पुलिस जांच में सामने आया है कि पीड़ितों ने करीब तीन साल पहले आरोपी को रुपये दिए थे। नौकरी को लेकर पूछताछ करने पर आरोपी लगातार टालमटोल करता रहा। लंबे समय तक इंतजार के बाद जब किसी की भी भर्ती नहीं हुई तो लोगों को अपने साथ ठगी होने का एहसास हुआ।

फिलहाल पुलिस ने आरोपी बालूसिंह के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने इसी तरह और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।




मध्यप्रदेश में जल संकट पर हाहाकार, 42 फीसदी शहरों में रोज नहीं मिल रहा पानी

भोपाल। मध्यप्रदेश में भीषण गर्मी के बीच जल संकट गहराता जा रहा है। प्रदेश के कई शहरों में लोगों को रोजाना पानी तक नसीब नहीं हो रहा। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की ताजा रिपोर्ट ने प्रदेश की जल व्यवस्था की पोल खोल दी है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 413 नगरीय निकायों में से 162 निकाय ऐसे हैं जहां प्रतिदिन जलप्रदाय नहीं हो पा रहा है। यानी प्रदेश के करीब 42 फीसदी शहर पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं।

स्थिति इतनी खराब है कि 8 नगरीय निकायों में दो दिन छोड़कर पानी सप्लाई किया जा रहा है, जबकि जबलपुर संभाग के दो निकायों में तीन दिन में एक बार पानी पहुंच रहा है। लगातार बढ़ती गर्मी, घटते जलस्तर और कमजोर जल प्रबंधन ने हालात को और चिंताजनक बना दिया है।

जबलपुर संभाग में सबसे ज्यादा चिंता

रिपोर्ट के अनुसार जबलपुर संभाग के कुल 56 नगरीय निकायों में से केवल 46 निकायों में ही प्रतिदिन पानी की सप्लाई हो रही है। बाकी शहरों में लोगों को एक दिन छोड़कर या उससे भी ज्यादा अंतराल में पानी मिल रहा है। कई इलाकों में नागरिकों को पानी भरने के लिए रातभर जागना पड़ रहा है।
इंदौर संभाग की स्थिति भी गंभीर
प्रदेश की आर्थिक राजधानी माने जाने वाले इंदौर संभाग में भी जल संकट गहराता दिखाई दे रहा है। यहां 55 नगरीय निकायों में से 42 निकायों में एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई की जा रही है। यानी करीब 76 फीसदी शहर नियमित जलप्रदाय से वंचित हैं। टैंकरों पर बढ़ती निर्भरता और सूखते जल स्रोत प्रशासन की चिंता बढ़ा रहे हैं।

उज्जैन संभाग में भी बिगड़े हालात

उज्जैन संभाग में भी हालात बेहतर नहीं हैं। यहां 67 में से 43 नगरीय निकायों में एक दिन छोड़कर जलप्रदाय किया जा रहा है। करीब 64 फीसदी शहर जल संकट से प्रभावित बताए गए हैं। कई क्षेत्रों में पेयजल को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

भोपाल संभाग में बढ़ा दबाव

राजधानी भोपाल संभाग भी जल संकट की मार से अछूता नहीं है। संभाग के 43 नगरीय निकायों में से 17 में एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है। वहीं जावर-MPUDC और मंडीदीप में दो दिन छोड़कर जलप्रदाय हो रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ जल स्रोतों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे आने वाले दिनों में संकट और गहराने की आशंका जताई जा रही है।

सरकार पर उठे सवाल

प्रदेश में बिगड़ती जल व्यवस्था को लेकर अब सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन विभाग जल संकट को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद शहरों में नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हो पा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जल संरक्षण, वर्षा जल संग्रहण और नई पेयजल योजनाओं पर तेजी से काम नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भयावह हो सकती है। फिलहाल प्रदेश के लाखों लोग भीषण गर्मी में पानी की बूंद-बूंद के लिए परेशान हैं।




Indore News:इंदौर में जल संकट पर कांग्रेस का हल्लाबोल

इंदौर में लगातार गहराते जल संकट ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। भीषण गर्मी के बीच शहर के कई इलाकों में पानी की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि लोगों को सुबह से ही पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। नगर निगम द्वारा भेजे जा रहे टैंकर भी लोगों की जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहे हैं, जिससे नागरिकों में भारी नाराजगी व्याप्त है।

शहर की कई कॉलोनियों, मोहल्लों और बस्तियों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दैनिक जरूरतों के लिए उन्हें दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है। पानी की समस्या को लेकर नगर निगम प्रशासन के खिलाफ लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।

इसी मुद्दे को लेकर मुख्य विपक्षी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को शहर के ऐतिहासिक राजबाड़ा पर कांग्रेस द्वारा बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है। जल संकट को लेकर शहर की राजनीति भी गरमा गई है और कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है।

इसी मुद्दे को लेकर मुख्य विपक्षी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को शहर के ऐतिहासिक राजबाड़ा पर कांग्रेस द्वारा बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है। जल संकट को लेकर शहर की राजनीति भी गरमा गई है और कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष एवं नगर निगम नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने बताया कि 26 मई को शाम 5 बजे राजबाड़ा पर विशाल धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इस प्रदर्शन में जीतू पटवारी विशेष रूप से शामिल होंगे। इसके अलावा कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता और समर्थक भी आंदोलन में भाग लेंगे।
चौकसे ने आरोप लगाया कि शहर में पानी के लिए त्राहिमाम मचा हुआ है, लेकिन नगर निगम और महापौर इस गंभीर समस्या को लेकर संवेदनशील नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस आंदोलन के माध्यम से महापौर के इस्तीफे की मांग करेगी।

कांग्रेस द्वारा आंदोलन की पूरी रणनीति तैयार कर ली गई है। तय कार्यक्रम के अनुसार पहले राजबाड़ा पर धरना प्रदर्शन और सभा आयोजित होगी। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ता पैदल मार्च करते हुए नगर निगम मुख्यालय पहुंचेंगे, जहां नगर निगम प्रशासन के विरोध में प्रतीकात्मक रूप से मटके फोड़े जाएंगे।
इस प्रस्तावित मटका फोड़ आंदोलन को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने भी सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए हैं। वहीं शहर में जल संकट और विरोध प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्माया हुआ है।




Indore:इंदौर में कर्ज वसूली के नाम पर बुजुर्ग दंपत्ति को बनाया बंधक, किडनी निकालने की दी धमकी

इंदौर। शहर के मारुति नगर क्षेत्र में कर्ज वसूली का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां तीन आरोपियों ने एक बुजुर्ग दंपत्ति को उनके ही घर में बंधक बना लिया। आरोपियों ने दंपत्ति को डराने के लिए किडनी निकालकर बेचने तक की धमकी दे डाली।
जानकारी के अनुसार, मामला लाखों रुपये के लेन-देन से जुड़ा है। आरोपियों का कहना है कि दंपत्ति के बेटे अंकित जोशी ने उनसे बड़ी रकम उधार ली थी, लेकिन पिछले करीब 20 दिनों से वह लापता है और उसका मोबाइल फोन भी बंद आ रहा है।

बताया जा रहा है कि तीनों आरोपी पहले अंकित के दोस्त बनकर उसके घर पहुंचे। जब अंकित नहीं मिला, तो उन्होंने उसके माता-पिता को ही बंधक बना लिया और बेटे को बुलाने के लिए दबाव बनाने लगे। अंकित के पिता रमेश जोशी एक निजी कंपनी में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत हैं।

आरोपी पूरी रात दंपत्ति के साथ घर में ही मौजूद रहे। सुबह जब रमेश जोशी ने ड्यूटी पर जाने की बात कही, तो एक आरोपी उनके साथ जाने लगा। इसी दौरान रमेश जोशी ने सूझबूझ दिखाते हुए आरोपी को चकमा दिया और सीधे हीरानगर थाना पहुंचकर पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। दंपत्ति ने बताया कि आरोपियों ने उनके मोबाइल फोन छीन लिए थे और घर की तलाशी भी ली थी।

पुलिस का कहना है कि आरोपियों का उद्देश्य अपना पैसा वापस लेना था, लेकिन उन्होंने कानून अपने हाथ में लेकर गंभीर अपराध किया है। फिलहाल पुलिस दंपत्ति के बेटे अंकित जोशी की तलाश कर रही है, जिसके बारे में जानकारी मिली है कि उसने कई लोगों से उधार लिया था और वर्तमान में फरार है।

मामले की जांच जारी है और पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर आगे की कार्रवाई कर रही है।




Indore: पारिवारिक तनाव में युवक ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, पत्नी से बात के बाद उठाया कदम

पारिवारिक विवाद और लंबे समय से चल रहे तनाव के बीच एक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान दिनेश पिता मोतीलाल के रूप में हुई है, जो चंदन नगर क्षेत्र में फल बेचने का काम करता था। बताया गया है कि पति-पत्नी के बीच विवाद के चलते पत्नी पिछले दो वर्षों से उससे अलग रह रही थी और दोनों बच्चों को भी अपने साथ ले गई थी।

परिजनों के अनुसार, दिनेश घर में अकेला रहता था और लगातार मानसिक तनाव में था। परिवार की ओर से दोनों के बीच सुलह कराने के प्रयास भी किए गए, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। गुरुवार को दिनेश ने अपनी पत्नी से फोन पर बातचीत की थी, लेकिन पत्नी के वापस आने से इंकार करने के बाद वह और अधिक तनाव में आ गया।

इसके कुछ समय बाद दिनेश ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जब परिजनों के फोन कॉल का जवाब नहीं मिला, तब वे उसके घर पहुंचे, जहां वह फांसी के फंदे पर लटका मिला। घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई।

परिजनों का आरोप है कि पत्नी द्वारा झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दिए जाने के कारण दिनेश मानसिक दबाव में रहता था। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कमरे की तलाशी ली, हालांकि कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ। मृतक का मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है।

पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है और मामले की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मोबाइल की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।




Indore News । कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के घर नकाबपोश बदमाशों का धावा

इंदौर। मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मंत्री जीतू पटवारी के इंदौर स्थित राजेंद्र नगर आवास पर शुक्रवार देर रात बदमाशों ने डकैती की कोशिश की। जानकारी के मुताबिक, पांच से अधिक नकाबपोश बदमाश रात करीब 2 बजे पटवारी के घर में घुसे और वहां स्थित ऑफिस को खंगाल डाला।

बदमाशों ने सबसे पहले घर की बिजली काट दी, जिससे CCTV कैमरे बंद हो गए। इसके बाद उन्होंने दराज और लॉकर तोड़ने की कोशिश की। हालांकि, घर से कोई सामान चोरी नहीं हुआ। मौके पर मौजूद मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी उन्होंने नहीं छुआ।

तीन और घरों में भी सेंध

पटवारी का घर ही नहीं, बल्कि उसी इलाके में बदमाशों ने नगर पंचायत पुनासा के सीएमओ राजकुमार ठाकुर, एमपीईबी अधिकारी नरेंद्र दुबे और आर्य परिवार के घरों में भी धावा बोला। सभी घरों की खिड़कियों की जालियां काटी गईं। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि किन घरों से क्या सामान चोरी हुआ।

पड़ोसियों के कैमरों में कैद

चूंकि पटवारी के घर की बिजली काट दी गई थी, उनके कैमरों में बदमाश रिकॉर्ड नहीं हो पाए। लेकिन पड़ोसी नरेंद्र दुबे और राजकुमार ठाकुर के घरों के CCTV फुटेज में बदमाशों की गतिविधियां कैद हो गईं। इन फुटेज में बदमाशों को पटवारी के घर में घुसते हुए भी देखा गया है।

डेढ़ से ढाई घंटे तक सक्रिय

स्थानीय लोगों के अनुसार, बदमाश रात 2 बजे इलाके में दाखिल हुए और अंतिम बार सुबह 4:30 बजे दिखाई दिए। यानी करीब ढाई घंटे तक बदमाश इलाके में सक्रिय रहे और चार घरों को निशाना बनाया।

बांक टांडा गैंग पर शक

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, राजेंद्र नगर, राऊ और तेजाजी नगर क्षेत्रों में पहले भी बांक टांडा गैंग सक्रिय रही है। तेजाजी नगर थाना प्रभारी देवेंद्र मरकाम इस गैंग के कई सदस्यों को पहले गिरफ्तार कर चुके हैं, लेकिन कुछ आरोपी अभी भी जमानत पर बाहर हैं। पुलिस इसी गैंग पर संदेह जता रही है।

पुलिस की कार्रवाई

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। कांग्रेस नेता के प्रतिनिधि आशीष शर्मा की शिकायत पर चोरी के प्रयास का केस दर्ज कर लिया गया है। इलाके के सभी CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। फिलहाल बदमाशों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।




Indore News । सलमान लाला की मौत से उपजा नया खतरा

इंदौर के कुख्यात गैंगस्टर सलमान लाला की मौत ने शहर की आपराधिक दुनिया को थामने के बजाय एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। मौत के बाद उसके समर्थकों ने सोशल मीडिया पर अफवाहों और माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। पुलिस की साइबर टीम ने 35 संदिग्ध अकाउंट्स की पहचान की है, जिनमें कुछ युवतियों के नाम भी शामिल हैं। सवाल यह है कि अपराधियों की मौत तक को “रोमांटिक छवि” देने की कोशिश आखिर किस दिशा की ओर इशारा करती है?

अपराध से मौत तक : सलमान लाला की कहानी

31 अगस्त को सलमान लाला की मौत तालाब में कूदने से हुई। वह पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए भाग रहा था, लेकिन भागते-भागते उसी पानी में डूब गया जिससे निकलने के लिए वह अपराध की दुनिया में उतरा था। परिवार के खिलाफ हत्या, चाकूबाजी, लूट और अवैध शराब से जुड़े कई मामले दर्ज रहे हैं। यानी यह कोई व्यक्तिगत दुर्घटना नहीं बल्कि एक अपराधी जीवन की स्वाभाविक परिणति थी।

सोशल मीडिया पर अपराधी की ‘ब्रांडिंग’

क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट बताती है कि गैंगस्टर की मौत के बाद समर्थक सोशल मीडिया पर ऐसा माहौल बनाने में जुट गए थे मानो यह कोई शहादत हो। यह प्रवृत्ति चिंताजनक है—युवाओं के बीच अपराधियों की छवि को “नायक” बना देने का काम वही करता है। खासकर जब इसमें युवतियों तक की भागीदारी हो, तो यह सवाल उठता है कि समाज में अपराधी छवि के प्रति आकर्षण किस तरह पनप रहा है।

1990 का रीगल चौराहा और आज की चुनौती

पुलिस खुफिया रिपोर्ट ने आगाह किया कि समर्थक 1990 के रीगल चौराहे जैसी स्थिति दोहराने की तैयारी कर रहे थे, जब शक्ति प्रदर्शन के दौरान पथराव और तोड़फोड़ हुई थी। यानी चुनौती सिर्फ कानून-व्यवस्था संभालने की नहीं, बल्कि इतिहास को खुद को दोहराने से रोकने की थी।

भीड़, प्रशासन और कानून की नसीहत

सलमान लाला के जनाजे में हजारों की भीड़ उमड़ी। प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात कर स्थिति संभाली, लेकिन ट्रैफिक अव्यवस्था और जेल से लाए गए उसके भाई गोलू की मौजूदगी ने यह साफ किया कि अपराध का तंत्र केवल व्यक्ति की मौत से खत्म नहीं होता।

राजनीति और प्रशासन : मौन सहमति या मजबूरी?

इंदौर में संगठित अपराध का लंबा इतिहास बताता है कि अपराधी तत्व केवल डर से नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक मौन-सहमति से भी पनपते हैं। कई बार स्थानीय नेताओं की सामाजिक दबदबे की राजनीति और पुलिस-प्रशासन की समझौता संस्कृति ने ऐसे गैंगस्टरों को ताकत दी है। यही कारण है कि सलमान लाला जैसा अपराधी मौत के बाद भी बड़ी भीड़ और डिजिटल समर्थन जुटा पाया। यह सवाल सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि शासन की प्राथमिकताओं और राजनीतिक संरक्षकत्व का भी है।

सलमान लाला की मौत महज एक अपराधी के अंत की कहानी नहीं है। यह उस सामाजिक मानसिकता का आईना है, जिसमें अपराधियों की मौत भी शक्ति प्रदर्शन और गौरव का बहाना बन जाती है। पुलिस की कार्रवाई जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरी यह समझना भी कि राजनीति और प्रशासन की निष्क्रियता अपराधी संस्कृति को कैसे पालती-पोसती रही है। समाज को अपराधियों को नायक बनाने की मानसिकता से बाहर निकालना तभी संभव होगा, जब शासन-प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व मिलकर अपराध के हर रूप पर बेबाक कार्रवाई करें।