Tarbuj khane ke fayde: गर्मियों का सुपरफूड बना तरबूज, रिसर्च में सामने आए चौंकाने वाले स्वास्थ्य लाभ

गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक और हाइड्रेशन देने वाला Watermelon अब केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जा रहा है। हाल ही में सामने आए शोधों में यह दावा किया गया है कि नियमित रूप से तरबूज खाने वाले लोगों की डाइट अधिक पौष्टिक और संतुलित होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, तरबूज शरीर में पानी की कमी को दूर करने के साथ-साथ हृदय स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

रिसर्च में क्या सामने आया?

National Health and Nutrition Examination Survey (NHANES) के आंकड़ों पर आधारित एक अध्ययन में पाया गया कि जो लोग नियमित रूप से तरबूज का सेवन करते हैं, उनकी डाइट क्वालिटी बेहतर होती है। Louisiana State University द्वारा किए गए क्लिनिकल ट्रायल में भी तरबूज के जूस को रक्त वाहिकाओं और हृदय के लिए लाभकारी बताया गया है।

Nutrients जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, तरबूज खाने वाले लोगों के आहार में फाइबर, मैग्नीशियम, पोटैशियम, विटामिन A, विटामिन C और लाइकोपीन जैसे जरूरी पोषक तत्व अधिक मात्रा में पाए गए। वहीं अतिरिक्त चीनी और सैचुरेटेड फैट का सेवन कम देखा गया।

शरीर को रखता है हाइड्रेटेड

विशेषज्ञों का कहना है कि तरबूज में लगभग 92 प्रतिशत पानी होता है, जिससे शरीर लंबे समय तक हाइड्रेटेड रहता है। गर्मियों में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए इसे बेहद उपयोगी फल माना जाता है। दो कप तरबूज में करीब 80 कैलोरी होती है, इसलिए वजन नियंत्रित रखने वालों के लिए भी यह अच्छा विकल्प है।

दिल की सेहत के लिए फायदेमंद

शोधकर्ताओं के मुताबिक तरबूज में मौजूद L-citrulline और L-arginine नामक प्राकृतिक यौगिक शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड बनाने में मदद करते हैं। यह तत्व रक्त वाहिकाओं को फैलाने और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी कारण तरबूज को हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जा रहा है।

क्लिनिकल ट्रायल में 18 स्वस्थ युवाओं को दो सप्ताह तक रोजाना तरबूज का जूस दिया गया। अध्ययन में पाया गया कि इससे रक्त वाहिकाओं के कामकाज में सुधार हुआ और हृदय गति से जुड़े कुछ संकेतकों पर सकारात्मक असर देखने को मिला।

एंटीऑक्सीडेंट्स का पावरहाउस

तरबूज लाइकोपीन का अच्छा स्रोत माना जाता है। लाइकोपीन एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है, जो शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने और हृदय संबंधी बीमारियों के खतरे को घटाने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लाल रंग के तरबूजों में लाइकोपीन की मात्रा अधिक होती है।

डेली डाइट में ऐसे करें शामिल

तरबूज को रोजाना कई तरीकों से डाइट में शामिल किया जा सकता है। इसे सीधे काटकर खाने के अलावा जूस, स्मूदी और फ्रूट सलाद के रूप में भी सेवन किया जा सकता है। गर्मियों में यह स्वाद, ताजगी और पोषण का बेहतरीन मेल माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संतुलित आहार के साथ नियमित रूप से तरबूज का सेवन किया जाए तो यह शरीर को हाइड्रेट रखने, पोषण देने और दिल की सेहत बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।




दिनभर नहीं लग पाता काम में मन? सुबह की ये आदतें बढ़ा सकती हैं आपका फोकस

आज के दौर में काम या पढ़ाई के दौरान ध्यान भटकना एक आम समस्या बनती जा रही है। मोबाइल नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया, तनाव और लगातार बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच लोगों के लिए लंबे समय तक किसी एक काम पर फोकस बनाए रखना मुश्किल हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे बड़ा कारण हमारी सुबह की खराब दिनचर्या है।

दरअसल, सुबह का समय पूरे दिन की मानसिक और शारीरिक ऊर्जा तय करता है। यदि दिन की शुरुआत सही तरीके से की जाए, तो न केवल फोकस बेहतर होता है, बल्कि काम करने की क्षमता और मानसिक स्पष्टता भी बढ़ती है।

उठते ही फोन देखने की आदत छोड़ें

विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह उठते ही मोबाइल फोन देखने की आदत दिमाग को तुरंत मनोरंजन और लगातार जानकारी लेने की स्थिति में डाल देती है। सोशल मीडिया, नोटिफिकेशन और ईमेल देखने से दिमाग का ध्यान बंटने लगता है, जिससे बाद में जरूरी कामों पर एकाग्रता बनाना कठिन हो जाता है।

ऐसे में सलाह दी जाती है कि उठने के बाद कम से कम 20 से 30 मिनट तक फोन से दूरी बनाए रखें और दिन की शुरुआत शांत माहौल में करें।

हल्का व्यायाम बढ़ाता है मानसिक ऊर्जा

सुबह हल्का व्यायाम या शारीरिक गतिविधि भी फोकस बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, शरीर के सक्रिय होने से रक्त संचार बेहतर होता है, तनाव कम होता है और दिमाग अधिक प्रभावी तरीके से काम करता है।

इसके लिए भारी जिम या कठिन वर्कआउट जरूरी नहीं है। हल्की स्ट्रेचिंग, योग, प्राणायाम या 10–15 मिनट की सैर भी पर्याप्त हो सकती है।

दिन की योजना बनाना है जरूरी

दिनभर के कामों की पहले से योजना बनाना भी मानसिक दबाव कम करता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सुबह सबसे पहले दिन के जरूरी कामों की सूची तैयार करें और प्राथमिकता तय करें। इससे दिमाग व्यवस्थित रहता है और काम करने की क्षमता बढ़ती है।

साथ ही बीच-बीच में छोटे ब्रेक लेने की योजना भी जरूरी मानी जाती है, ताकि लगातार काम के कारण मानसिक थकान न हो।

छोटी खुशियां भी हैं जरूरी

मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए दिन में कुछ ऐसे काम शामिल करना जरूरी है, जो खुशी और सुकून दें। पसंदीदा खाना, कोई अच्छा शो देखना, किताब पढ़ना या दोस्तों से बातचीत जैसी छोटी चीजें तनाव कम करने में मदद करती हैं।

नाश्ता छोड़ना पड़ सकता है भारी

विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह का नाश्ता छोड़ना फोकस और ऊर्जा दोनों को प्रभावित कर सकता है। फाइबर और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स से भरपूर भोजन जैसे ओट्स, फल, अंडे और साबुत अनाज लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखते हैं और दिमाग को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करते हैं।

पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी

शरीर में पानी की कमी होने पर थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान की कमी महसूस हो सकती है। इसलिए सुबह उठते ही एक गिलास पानी पीने की आदत फायदेमंद मानी जाती है। पर्याप्त पानी पीने से शरीर और दिमाग दोनों सक्रिय रहते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन छोटी-छोटी आदतों को रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल किया जाए, तो दिनभर बेहतर फोकस, ऊर्जा और मानसिक संतुलन बनाए रखा जा सकता है।

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है। यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं। इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें। denvapost किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा।




Health Tips: गर्मी में पसीने की बदबू से हैं परेशान? अपनाएं ये घरेलू उपाय, पूरे दिन रहेंगे फ्रेश

गर्मी का मौसम आते ही पसीना आना आम बात हो जाती है, लेकिन जब यही पसीना तेज दुर्गंध का कारण बनने लगे, तो यह परेशानी और शर्मिंदगी दोनों बढ़ा देता है। कई लोग इससे बचने के लिए महंगे परफ्यूम और डियोड्रेंट का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उनका असर कुछ घंटों तक ही सीमित रहता है। ऐसे में घरेलू और प्राकृतिक उपाय ज्यादा असरदार साबित हो सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर से आने वाली दुर्गंध केवल बाहरी गंदगी की वजह से नहीं होती, बल्कि इसका संबंध शरीर के अंदरूनी स्वास्थ्य, खान-पान और साफ-सफाई से भी जुड़ा होता है। गर्मी में उमस और तेज तापमान के कारण शरीर में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जो पसीने के संपर्क में आकर बदबू पैदा करते हैं।

नींबू का पानी देगा दिनभर ताजगी

घरेलू उपायों में नींबू सबसे आसान और प्रभावी माना जाता है। नींबू में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करते हैं। नहाने के पानी में कुछ बूंदें नींबू की मिलाकर स्नान करने से शरीर लंबे समय तक फ्रेश महसूस करता है और दुर्गंध कम होती है।

फिटकरी का पानी भी कारगर

फिटकरी का उपयोग भी शरीर की बदबू कम करने में फायदेमंद माना जाता है। पानी में फिटकरी घोलकर नहाने से त्वचा के पोर्स टाइट होते हैं, जिससे पसीना कम आता है। नियमित इस्तेमाल से शरीर की दुर्गंध धीरे-धीरे खत्म होने लगती है।

ऐसे में लोग परफ्यूम और डियोड्रेंट का सहारा लेते हैं, लेकिन इनका असर कुछ ही घंटों में खत्म हो जाता है. डॉक्टर अनिल पटेल के अनुसार, अगर आप बिना केमिकल वाले उपाय अपनाना चाहते हैं तो कुछ आसान घरेलू तरीके आपकी इस समस्या को जड़ से खत्म कर सकते हैं और आपको पूरे दिन फ्रेश बनाए रख सकते हैं.

नारियल तेल और कपूर का देसी उपाय

नारियल तेल में कपूर मिलाकर तैयार किया गया मिश्रण प्राकृतिक डियोड्रेंट की तरह काम करता है। इसमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण त्वचा को ताजगी देते हैं और पसीने की बदबू को कम करते हैं। नहाने के बाद अंडरआर्म्स में इसे लगाने से ज्यादा फायदा मिलता है।

पानी और खान-पान का रखें ध्यान

विशेषज्ञ बताते हैं कि शरीर में पानी की कमी भी बदबू की एक बड़ी वजह बन सकती है। इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। साथ ही हल्का, ताजा और संतुलित भोजन करना चाहिए। ज्यादा मसालेदार, तला-भुना और जंक फूड शरीर में टॉक्सिन्स बढ़ाते हैं, जिससे पसीने की बदबू तेज हो सकती है।

हरी सब्जियां, मौसमी फल और पानी से भरपूर खाद्य पदार्थ शरीर को अंदर से ठंडा रखने में मदद करते हैं और दुर्गंध की समस्या को कम करते हैं।

डॉक्टर अनिल पटेल यह भी बताते हैं कि पसीने की बदबू सिर्फ बाहर की सफाई से नहीं, बल्कि शरीर के अंदर की स्थिति से भी जुड़ी होती है. इसलिए दिनभर पर्याप्त पानी पीना बेहद जरूरी है. साथ ही हल्का और ताजा भोजन करें और ज्यादा मसालेदार या जंक फूड से दूरी बनाए रखें, इससे शरीर में टॉक्सिन्स कम होंगे और बदबू भी कम आएगी.

कॉटन कपड़े हैं बेहतर विकल्प

गर्मी में कपड़ों का चुनाव भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। सिंथेटिक कपड़ों की बजाय कॉटन कपड़े पहनने चाहिए, क्योंकि ये पसीने को जल्दी सोख लेते हैं और शरीर को ठंडा बनाए रखते हैं। इससे बैक्टीरिया कम पनपते हैं और बदबू की समस्या भी घटती है।

दिनचर्या में बदलाव से मिलेगा फायदा

अगर इन आसान घरेलू उपायों को रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल किया जाए, तो बिना महंगे परफ्यूम और केमिकल प्रोडक्ट्स के भी पूरे दिन ताजगी और आत्मविश्वास बनाए रखा जा सकता है। गर्मी में शरीर की साफ-सफाई, सही खान-पान और प्राकृतिक उपाय ही पसीने की बदबू से बचाव का सबसे अच्छा तरीका माने जाते हैं।

गर्मी में कपड़ों का चुनाव भी बहुत मायने रखता है. सिंथेटिक कपड़ों की बजाय कॉटन कपड़े पहनना बेहतर होता है, क्योंकि ये पसीने को जल्दी सोख लेते हैं और शरीर को ठंडा बनाए रखते हैं. इससे दुर्गंध की समस्या काफी हद तक कम हो जाती है.
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कम तेल नहीं, अब बिना तेल की सब्जी! हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए लोगों ने खोजा नया तरीका

आजकल लोग फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो रहे हैं। डॉक्टरों से लेकर प्रधानमंत्री Narendra Modi तक बार-बार कम तेल खाने की सलाह दे रहे हैं। ज्यादा तेल का सेवन मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट की बीमारी और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं को बढ़ाता है। ऐसे में अब लोगों ने बिना तेल के स्वादिष्ट सब्जी बनाने का तरीका भी खोज निकाला है।

भारतीय रसोई में आमतौर पर सब्जियों में तड़का लगाने और मसाले भूनने के लिए तेल का खूब इस्तेमाल किया जाता है। कई लोग मानते हैं कि बिना तेल के सब्जी स्वादिष्ट बन ही नहीं सकती। लेकिन हेल्थ कॉन्शियस लोगों ने इस सोच को बदल दिया है। अब केवल पानी की मदद से भी स्वादिष्ट और हेल्दी सब्जी तैयार की जा सकती है।

कैसे बनाएं बिना तेल की स्वादिष्ट सब्जी

सबसे पहले एक पैन या कड़ाही लें। इसमें आधा चम्मच जीरा डालकर हल्का सूखा भून लें। इसके बाद 3-4 चम्मच पानी डालें और उसमें बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, टमाटर और लहसुन डाल दें। सब्जियों को पकाते समय बीच-बीच में थोड़ा-थोड़ा पानी डालते रहें ताकि मसाला जले नहीं।

जब मसाला हल्का पक जाए, तब अपनी पसंद की सब्जियां डाल दें। आलू-गोभी, आलू-बैंगन या मिक्स वेज जैसी कोई भी सब्जी इस तरीके से बनाई जा सकती है।

अब सब्जियों में थोड़ा पानी डालकर ढक दें और मीडियम फ्लेम पर पकाएं। जब सब्जियां आधी पक जाएं, तब मसाले तैयार करें। इसके लिए नमक, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और थोड़ा गरम मसाला 2 चम्मच पानी में मिलाकर पेस्ट बना लें।

इस मसाले के पेस्ट को सब्जी में डालकर धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए पकाएं। जरूरत पड़ने पर थोड़ा पानी डालते रहें ताकि सब्जी नीचे से जले नहीं। जब सब्जी अच्छी तरह गल जाए तो गैस बंद कर दें।

अंत में ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया डालें। स्वाद बढ़ाने के लिए चाहें तो आधा चम्मच घी या बटर ऊपर से डाल सकते हैं। खास बात यह है कि इस सब्जी का स्वाद चखकर कोई आसानी से नहीं पहचान पाएगा कि इसे बिना तेल के बनाया गया है।

सेहत के लिए फायदेमंद

विशेषज्ञों के अनुसार कम तेल या बिना तेल वाला भोजन वजन नियंत्रित रखने में मदद करता है। इससे पाचन बेहतर रहता है और शरीर में अतिरिक्त फैट जमा नहीं होता। यही वजह है कि अब फिटनेस पसंद लोग इस तरह की रेसिपी तेजी से अपना रहे हैं।

अगर आप भी हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना चाहते हैं, तो बिना तेल की यह सब्जी आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है।




Radishes benefits : सर्दियों की मूली सेहत के लिए किसी औषधि से कम नहीं, पाचन से लेकर इम्यूनिटी तक देती है कई फायदे

Radishes benefits:

सर्दियों के मौसम में बाजार में आसानी से मिलने वाली मूली न सिर्फ स्वाद में खास होती है, बल्कि सेहत के लिए भी किसी औषधि से कम नहीं मानी जाती। आमतौर पर लोग इसे सलाद, सब्जी या पराठे के रूप में खाते हैं, लेकिन आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा दोनों ही पद्धतियों में मूली को गुणों का भंडार बताया गया है। नियमित रूप से मूली का सेवन करने से शरीर को कई तरह के स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं।

पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है मूली

लोकल 18 से बातचीत में रायबरेली जिले के आयुष चिकित्सालय शिवगढ़ की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. स्मिता श्रीवास्तव (बीएएमएस, लखनऊ विश्वविद्यालय) बताती हैं कि मूली का सफेद कंद पाचन तंत्र को मजबूत करने में बेहद सहायक होता है।
मूली में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है और कब्ज, गैस व अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है।

एसिडिटी और भूख की समस्या में फायदेमंद

डॉ. स्मिता के अनुसार, भोजन के साथ मूली का सेवन करने से पेट हल्का रहता है और भूख भी संतुलित बनी रहती है। जिन लोगों को बार-बार एसिडिटी की शिकायत रहती है, उनके लिए मूली का सेवन काफी लाभकारी माना जाता है।

लीवर को करता है डिटॉक्स

मूली लीवर के लिए भी बेहद फायदेमंद है। इसमें मौजूद तत्व लीवर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं, जिससे शरीर में जमा विषैले पदार्थ बाहर निकलते हैं और लीवर की कार्यक्षमता बढ़ती है।
डॉ. स्मिता बताती हैं कि मूली का रस पीलिया की रोकथाम में भी उपयोगी माना जाता है।

इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक

मूली में विटामिन-सी, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। सर्दियों में मूली का सेवन करने से सर्दी-खांसी और मौसमी संक्रमण से बचाव में भी मदद मिलती है।

त्वचा, बाल और दिल के लिए भी फायदेमंद

मूली में मौजूद सल्फर यौगिक त्वचा और बालों की सेहत के लिए लाभकारी होते हैं। वहीं, हृदय स्वास्थ्य की बात करें तो मूली में पाया जाने वाला पोटैशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है, जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है।
इसके अलावा मूली कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखने में भी सहायक मानी जाती है।

संतुलित मात्रा में करें सेवन

विशेषज्ञों का कहना है कि मूली सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है, लेकिन इसका सेवन संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए। अधिक मात्रा में सेवन करने से कुछ लोगों को गैस या पेट से जुड़ी दिक्कत हो सकती है।




बालों के झड़ने से हैं परेशान? करी पत्ता बन सकता है रामबाण, जानिए फायदे और इस्तेमाल के तरीके

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Image Source : FREEPIK/UNSPLASH
हेयर फॉल

करी पत्ता का इस्तेमाल आमतौर पर खाने का स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए किया जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह पत्ता बालों की सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है। आयुर्वेद के अनुसार, करी पत्ता में मौजूद पोषक तत्व बालों के झड़ने, पतले होने और कमजोर जड़ों की समस्या को कम करने में मदद करते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक करी पत्ता में पाए जाने वाले अमीनो एसिड स्कैल्प को मजबूत बनाते हैं और बालों को अंदर से पोषण देते हैं, जिससे बाल लंबे, घने और मजबूत बनते हैं।

करी पत्ता क्यों है बालों के लिए फायदेमंद?

करी पत्ता में विटामिन A, B, C और E भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। ये सभी विटामिन स्कैल्प को पोषण देने, बालों की ग्रोथ बढ़ाने और जड़ों को मजबूत करने में मदद करते हैं।
इसके अलावा, इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण फ्री रेडिकल्स को बेअसर कर बालों को डैमेज होने से बचाते हैं और उन्हें हेल्दी बनाए रखते हैं।

बालों के लिए करी पत्ता इस्तेमाल करने के आसान तरीके

1. करी पत्ता और दही का हेयर मास्क

मुट्ठी भर ताजे करी पत्ता लें और उसमें 3 बड़े चम्मच दही डालकर ग्राइंड कर लें। तैयार पेस्ट को बालों की स्कैल्प पर अच्छी तरह लगाएं।
करीब 30 मिनट बाद हल्के शैंपू और साफ पानी से बाल धो लें। यह मास्क स्कैल्प को ठंडक देने के साथ बालों को मजबूती देता है।

2. करी पत्ता और नारियल तेल

नारियल तेल बालों को पोषण और नमी देने में बेहद असरदार माना जाता है।
एक पैन में नारियल तेल हल्का गर्म करें और उसमें करी पत्ता डालकर 3–4 मिनट तक पकाएं। जब पत्तों के पोषक तत्व तेल में अच्छी तरह मिल जाएं, तो इसे ठंडा कर लें।
अब इस तेल से स्कैल्प पर हल्के हाथों से मसाज करें। करीब 1 घंटे बाद शैंपू से बाल धो लें।

3. करी पत्ता का पेस्ट या पाउडर

करी पत्ता को ग्राइंडर में पीसकर सीधे पेस्ट बना सकते हैं। चाहें तो पत्तों को सुखाकर पाउडर भी तैयार कर सकते हैं।
उपयोग के समय पाउडर में थोड़ा पानी मिलाकर पेस्ट बनाएं और इसे बालों की जड़ों में लगाएं।
कम से कम 30 मिनट बाद बाल धो लें।

कब और कितनी बार करें इस्तेमाल?

विशेषज्ञों के अनुसार, हफ्ते में 1 से 2 बार करी पत्ता का इस्तेमाल करना बालों के लिए पर्याप्त होता है। नियमित उपयोग से बालों का झड़ना कम होता है और ग्रोथ बेहतर होती है।




Health benefits of ginger coffee: कॉफी में अदरक डालकर पीना सेहत के लिए फायदेमंद या नुकसानदायक? जानिए पूरा सच

चाय ही नहीं, कॉफी में भी अदरक डालकर पीते हैं लोग, जानें इसके फायदे और नुकसान

आजकल लोग अपनी रोजमर्रा की कॉफी को और ज्यादा हेल्दी बनाने के लिए उसमें तरह-तरह की चीजें मिलाकर पीने लगे हैं। चाय में अदरक का इस्तेमाल तो आम है, लेकिन अब कॉफी में अदरक डालकर पीना एक नया हेल्थ ट्रेंड बनता जा रहा है। कुछ लोग इसे मेटाबॉलिज्म बढ़ाने के लिए पीते हैं, तो कुछ इसे इम्युनिटी बूस्टर और वजन घटाने वाला ड्रिंक मानते हैं।

लेकिन सवाल यह है कि कॉफी और अदरक का यह कॉम्बिनेशन सच में सेहत के लिए फायदेमंद है या इससे नुकसान भी हो सकता है? आइए जानते हैं इसके फायदे और नुकसान।

कॉफी और अदरक: दोनों के अपने-अपने फायदे

कॉफी और अदरक, दोनों ही अपने-अपने आप में सेहत के लिए लाभकारी माने जाते हैं।

  • कॉफी में मौजूद कैफीन दिमाग को अलर्ट रखने, थकान कम करने और फोकस बढ़ाने में मदद करता है।

  • अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो पाचन सुधारने, सर्दी-खांसी से राहत देने और इम्युनिटी मजबूत करने में सहायक होते हैं।

जब इन दोनों को एक साथ मिलाया जाता है, तो यह ड्रिंक शरीर में गर्माहट पैदा करता है और मेटाबॉलिज्म को सक्रिय करने में मदद कर सकता है।

कॉफी में अदरक डालने के संभावित फायदे

  • मेटाबॉलिज्म को तेज करने में मदद

  • पेट की गैस, ब्लोटिंग और मतली से राहत

  • सर्दी-खांसी में आराम

  • शरीर को एनर्जी और गर्माहट प्रदान करता है

  • कुछ लोगों में वजन घटाने की प्रक्रिया को सपोर्ट करता है

इन लोगों को सावधान रहने की जरूरत

हालांकि यह ड्रिंक हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होती। कुछ मामलों में इसके नुकसान भी हो सकते हैं—

  • ज्यादा कैफीन और अदरक मिलकर एसिडिटी और जलन बढ़ा सकते हैं

  • खाली पेट पीने से पेट दर्द या बेचैनी हो सकती है

  • हाई ब्लड प्रेशर या हार्ट की समस्या वाले लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए

  • गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर की सलाह के बिना इसे नहीं अपनाना चाहिए

कैसे करें सही तरीके से सेवन

  • कॉफी में अदरक की मात्रा बहुत कम रखें

  • दिन में एक बार से ज्यादा न पिएं

  • खाली पेट पीने से बचें

  • अगर पहले से पेट या एसिडिटी की समस्या है, तो इसे न लें




सेहत का रामबाण है सलाद, आयुर्वेद में हर बीमारी के लिए अलग-अलग सलाद का महत्व

हेल्थ डेस्क : अक्सर लोग खाने के साथ सलाद को केवल स्वाद बढ़ाने का माध्यम मानते हैं, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार सलाद हमारे शरीर के लिए किसी औषधि से कम नहीं है। यह न केवल पाचन को दुरुस्त करता है, बल्कि कई गंभीर बीमारियों में भी लाभकारी सिद्ध होता है। यही कारण है कि आजकल शादी समारोहों से लेकर रोज़मर्रा के भोजन तक, सलाद की कई किस्में देखने को मिलती हैं।

आयुर्वेद मानता है कि हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति और बीमारी के अनुसार सलाद का चयन किया जाना चाहिए। सही सलाद सही समय पर लिया जाए, तो यह शरीर को स्वस्थ और संतुलित बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

आयुर्वेदिक चिकित्सक की राय

आयुर्वेदिक चिकित्सालय से बीएएमएस, एमडी डॉक्टर हर्ष ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि सलाद रुचिकर होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होता है। उन्होंने कहा कि सलाद को अलग-अलग तरीकों से भोजन में शामिल किया जा सकता है और यह शरीर की पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है। आयुर्वेद के अनुसार हर व्यक्ति को अपनी आवश्यकता और बीमारी के अनुसार सलाद का चयन करना चाहिए।

बीमारियों के अनुसार सलाद का चयन

डॉक्टर हर्ष के अनुसार—वजन घटाने के लिए – हरा सलाद, ब्रोकली और करेला,शरीर में कमजोरी होने पर – फलों का सलाद,मधुमेह (डायबिटीज) रोगियों के लिए – अंकुरित अनाज व प्याज का सलाद,खून की कमी (एनीमिया) में – चुकंदर और पालक का सलाद,हृदय रोगियों के लिए – अंकुरित अनाज, हरी सब्जियां, टमाटर व प्याज का सलाद,बीपी के मरीजों के लिए – प्याज का सलाद,आंखों की रोशनी कमजोर होने पर – गाजर का सलाद,छोटे बच्चों के लिए – कॉर्न सलाद

डॉक्टर हर्ष ने बताया कि ब्रोकली का सलाद कब्ज की समस्या को दूर करने में सहायक है। वहीं मूली का सलाद पाचन शक्ति को बढ़ाता है और शरीर में रुकी हुई अपान वायु को बाहर निकालने में मदद करता है। पेट से जुड़ी समस्याओं में पत्ता गोभी और अलसी का सलाद भी काफी लाभकारी माना गया है।

सलाद न केवल भोजन का स्वाद बढ़ाता है, बल्कि यह शरीर को आवश्यक पोषक तत्व भी प्रदान करता है। आयुर्वेद के अनुसार नियमित रूप से सही प्रकार का सलाद खाने से शरीर निरोगी रहता है और कई बीमारियों से बचाव संभव है।




क्या सर्दियों में बार-बार होता है सिर दर्द? परेशान हैं तो अपनाएं ये देसी तरीका, मिनटों में मिलेगा आराम

ठंड के मौसम में बहुत से लोग बार-बार सिरदर्द की समस्या से परेशान रहते हैं। यह दर्द कभी हल्का तो कभी इतना तेज हो जाता है कि दिनभर काम करना मुश्किल हो जाता है। अगर सर्दियों में सिरदर्द बार-बार हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है, क्योंकि यह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है।

डॉक्टरों के अनुसार, सर्दी का मौसम जहां कुछ लोगों के लिए आरामदायक होता है, वहीं कई लोगों के लिए यह सेहत से जुड़ी परेशानियां लेकर आता है। जुकाम-खांसी के साथ-साथ सर्दियों में सिरदर्द सबसे आम समस्या बन जाती है।

ठंडी हवा का सीधा असर

ठंडी हवा जब सीधे सिर या कानों पर लगती है, तो रक्तवाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे सिरदर्द हो सकता है। इसलिए बाहर निकलते समय सिर और कानों को मफलर या टोपी से ढकना जरूरी है।

शरीर में पानी की कमी

सर्दियों में प्यास कम लगती है, जिस कारण लोग कम पानी पीते हैं। डिहाइड्रेशन से दिमाग तक ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाता है और सिरदर्द शुरू हो जाता है।
समाधान: दिनभर गुनगुना पानी, हर्बल टी या सूप लेते रहें।

सूरज की रोशनी की कमी

धुंध और बादलों की वजह से धूप कम मिलती है, जिससे सेरोटोनिन और मेलाटोनिन हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है। यह भी सिरदर्द का कारण बन सकता है।

साइनस की समस्या

सर्दियों में नाक बंद होना या साइनस में सूजन होने से माथे पर भारीपन और तेज दर्द महसूस होता है।

नींद की कमी

सर्दियों में दिन छोटे और रातें लंबी होती हैं। अनियमित नींद माइग्रेन और सिरदर्द की समस्या को बढ़ा सकती है।

क्या खाएं जिससे सिरदर्द से मिले राहत

  • मैग्नीशियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त भोजन

  • ताजे फल और हरी सब्जियां

  • सुबह हल्की धूप में बैठें, इससे विटामिन-D मिलेगा

सिरदर्द होने पर अपनाएं ये देसी उपाय

  अदरक की चाय पिएं – इसमें सूजन कम करने वाले गुण होते हैं
  गर्म पानी की भाप लें – साइनस खुलने में मदद मिलेगी
  हल्के गर्म तेल से सिर की मालिश करें – ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होगा
  शांत जगह पर थोड़ी देर आराम करें

कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?

       अगर सिरदर्द के साथ:

  • लगातार उल्टी जैसा महसूस हो

  • आंखों के सामने अंधेरा आए

  • तेज बुखार हो

  • दर्द कई दिनों तक बना रहे

तो इसे घरेलू उपायों से ठीक करने की कोशिश न करें। यह न्यूरोलॉजिकल समस्या या हाई ब्लड प्रेशर का संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. denvapost.com इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)




सर्दियों में ज्यादा चाय पीना सेहत के लिए कितना सही? जानिए आयुर्वेद की चेतावनी और बेहतर विकल्प

जैसे-जैसे सर्दियों का मौसम नजदीक आता है, वैसे-वैसे घरों में चाय का सेवन भी बढ़ने लगता है। ठंड से राहत पाने और शरीर को गर्म रखने के लिए लोग दिन में कई बार चाय पीते हैं। कई लोगों के लिए सुबह की शुरुआत और शाम की थकान बिना चाय के अधूरी लगती है। लेकिन आयुर्वेद सिर्फ स्वाद या तात्कालिक गर्माहट के लिए चाय पीने को पूरी तरह सही नहीं मानता। आयुर्वेद के अनुसार खान-पान हमेशा शरीर के दोष, पाचन शक्ति और मौसम के अनुरूप होना चाहिए। ऐसे में सवाल यह उठता है कि सर्दियों में ज्यादा चाय पीना फायदेमंद है या धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है।

आयुर्वेद चाय के बारे में क्या कहता है

लोकल 18 से बातचीत में डॉ. राजकुमार (आयुष) ने बताया कि सर्दियों में शरीर में कफ दोष स्वाभाविक रूप से बढ़ता है। ठंड का असर पाचन अग्नि पर भी पड़ता है। चाय में मौजूद कैफीन, दूध और चीनी का अधिक सेवन पाचन अग्नि को कमजोर कर सकता है। जब पाचन सही ढंग से काम नहीं करता, तो गैस, एसिडिटी, भारीपन और कब्ज जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
आयुर्वेद के अनुसार चाय ऊपर से शरीर को गर्म महसूस कराती है, लेकिन अंदर से कफ को बढ़ाकर शरीर का संतुलन बिगाड़ सकती है

ज्यादा चाय पीने के नुकसान

अधिक मात्रा में चाय पीने से सर्दी-जुकाम और बलगम की समस्या बढ़ सकती है। खासतौर पर दूध वाली चाय कफ को और ज्यादा बढ़ाती है, जिससे नाक बंद रहना, गले में खराश और खांसी जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
इसके अलावा चाय में मौजूद टैनिन आयरन के अवशोषण को कम करता है। लंबे समय तक ज्यादा चाय पीने से कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है। आयुर्वेद यह भी मानता है कि बार-बार चाय पीने से शरीर उस पर निर्भर हो जाता है और बिना चाय के सिरदर्द, चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

सर्दियों में चाय के बेहतर विकल्प

आयुर्वेद के अनुसार सर्दियों में ऐसे पेय ज्यादा फायदेमंद होते हैं, जो हल्की लेकिन स्थायी गर्माहट दें।

  • अदरक, तुलसी, दालचीनी या सौंठ से बनी हर्बल चाय

  • गुनगुना पानी, जीरा पानी या हल्का काढ़ा

ये न सिर्फ शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं, बल्कि पाचन को मजबूत करते हैं और इम्युनिटी बढ़ाने में भी मददगार होते हैं।

अगर कोई व्यक्ति चाय छोड़ नहीं सकता, तो आयुर्वेद दिन में एक या दो कप से ज्यादा चाय न पीने की सलाह देता है। साथ ही खाली पेट चाय पीने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

सर्दियों में चाय का सीमित सेवन नुकसानदेह नहीं है, लेकिन जरूरत से ज्यादा चाय पीना धीरे-धीरे सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है। आयुर्वेद के अनुसार संतुलन ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है, इसलिए चाय के साथ-साथ स्वास्थ्यवर्धक और प्राकृतिक विकल्पों को अपनाना ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।