क्या पीठ और हिप्स के दर्द से हैं परेशान? रोज खाएं उबला काला चना, शरीर को मिलेंगे कई जबरदस्त फायदे

हेल्थ डेस्क। बदलती जीवनशैली, घंटों बैठकर काम करना और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण आजकल कम उम्र में भी पीठ, कमर और हिप्स में दर्द की समस्या आम होती जा रही है। यदि आपको भी बार-बार थकान, मांसपेशियों में कमजोरी या हड्डियों में दर्द महसूस होता है, तो केवल दवाओं या एक्सरसाइज पर निर्भर रहने के बजाय अपनी डाइट पर भी ध्यान देना जरूरी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, उबला हुआ काला चना ऐसा पौष्टिक आहार है, जो शरीर को कई आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है। नियमित और संतुलित मात्रा में इसका सेवन मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है।

क्यों फायदेमंद है काला चना?

काला चना कई जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत माना जाता है। इसमें मौजूद प्रोटीन, आयरन, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस शरीर के समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

मांसपेशियों को देता है मजबूती

काले चने में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है, जो मांसपेशियों की मरम्मत और विकास में मदद करता है। नियमित सेवन से शरीर को मजबूती मिल सकती है और कमजोरी कम महसूस होती है।

आयरन की कमी दूर करने में सहायक

आयरन से भरपूर काला चना शरीर में ऑक्सीजन के संचार को बेहतर बनाने में मदद करता है। इससे थकान, कमजोरी और सुस्ती जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है।

नसों और मांसपेशियों के लिए लाभकारी

काले चने में मौजूद मैग्नीशियम नसों और मांसपेशियों के सामान्य कार्य को बनाए रखने में सहायक होता है। यह शरीर को सक्रिय और ऊर्जावान रखने में मदद कर सकता है।

हड्डियों को बनाता है मजबूत

फॉस्फोरस हड्डियों और दांतों के लिए आवश्यक खनिज है। काले चने का सेवन शरीर में इसकी पूर्ति करने में मदद करता है, जिससे हड्डियों की मजबूती बनी रहती है।

कैसे करें सेवन?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, काले चने को रातभर पानी में भिगोकर रखें और सुबह उबाल लें।

इसे आप कई तरीकों से खा सकते हैं, जैसे—

  • सादा उबला हुआ काला चना
  • सलाद के रूप में
  • प्याज, टमाटर, हरा धनिया और नींबू मिलाकर हेल्दी स्नैक

रोजाना एक कटोरी या लगभग एक मुट्ठी उबले काले चने का सेवन संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है।

अधिक मात्रा में खाने से बचें

हालांकि काला चना पौष्टिक होता है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन कुछ लोगों में गैस, अपच या पेट फूलने जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। इसलिए शुरुआत कम मात्रा से करें और शरीर की सहनशीलता के अनुसार धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाएं।

स्वस्थ जीवनशैली भी है जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल काला चना खाने से ही पीठ या हिप्स का दर्द पूरी तरह ठीक नहीं होता। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त पानी, सही बैठने की मुद्रा और अच्छी नींद भी हड्डियों एवं मांसपेशियों के स्वास्थ्य के लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

 

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Denvapost किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.




Breakfast Recipe: रोज-रोज के पराठों से हो गए हैं बोर? इस बार ट्राई करें स्वाद और सेहत से भरपूर धनिया पराठा

लाइफस्टाइल डेस्क। अगर आप हर दिन आलू, गोभी या सादा पराठा खाकर ऊब चुके हैं और नाश्ते में कुछ नया, स्वादिष्ट और पौष्टिक बनाना चाहते हैं, तो धनिया का पराठा आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है। ताजे हरे धनिये, पुदीना, बेसन और गेहूं के आटे से तैयार यह पराठा न केवल स्वाद में लाजवाब होता है, बल्कि शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी प्रदान करता है। खास बात यह है कि इसे कम समय में आसानी से तैयार किया जा सकता है।

क्यों खास है धनिया पराठा?

धनिया में विटामिन A, C और K के साथ-साथ एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो इम्यूनिटी मजबूत करने और पाचन को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। वहीं बेसन और गेहूं का आटा इसे अधिक पौष्टिक बनाते हैं। दही, अचार, हरी चटनी या मक्खन के साथ इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है।

धनिया पराठा बनाने के लिए सामग्री

  • 1 कप गेहूं का आटा
  • ½ कप बेसन
  • ½ छोटा चम्मच जीरा
  • स्वादानुसार नमक
  • 2 छोटे चम्मच बारीक कटा अदरक
  • 2 बारीक कटी हरी मिर्च
  • ½ कप बारीक कटा प्याज
  • ½ छोटा चम्मच हल्दी
  • 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
  • 1 छोटा चम्मच चाट मसाला
  • लगभग 1½ कप बारीक कटा ताजा हरा धनिया
  • कुछ पुदीने की पत्तियां
  • 1 बड़ा चम्मच घी
  • जरूरत अनुसार पानी
  • सेंकने के लिए घी या तेल

ऐसे बनाएं स्वादिष्ट धनिया पराठा

सबसे पहले एक बड़े बाउल में गेहूं का आटा, बेसन, जीरा, नमक, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर और चाट मसाला डालकर अच्छी तरह मिला लें। अब इसमें अदरक, हरी मिर्च, प्याज, बारीक कटा हरा धनिया और पुदीने की पत्तियां डालें। इसके बाद एक बड़ा चम्मच घी मिलाएं और धीरे-धीरे पानी डालते हुए मुलायम आटा गूंथ लें।

आटे को 15–20 मिनट के लिए ढककर रख दें, ताकि वह अच्छी तरह सेट हो जाए। इसके बाद आटे की बराबर-बराबर लोइयां बनाकर पराठे की तरह बेल लें।

अब तवा गर्म करें और मध्यम आंच पर पराठे को दोनों तरफ घी या तेल लगाकर सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेकें। तैयार धनिया पराठे को दही, अचार, मक्खन या हरी चटनी के साथ गरमागरम परोसें।

हेल्दी नाश्ते का बेहतरीन विकल्प

यदि आप अपने नाश्ते में स्वाद के साथ पोषण भी चाहते हैं, तो धनिया पराठा एक शानदार विकल्प हो सकता है। इसमें मौजूद हरी पत्तेदार सामग्री और मसाले इसे स्वादिष्ट बनाने के साथ-साथ पौष्टिक भी बनाते हैं।

Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यदि आपको किसी विशेष खाद्य पदार्थ से एलर्जी या कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो अपने आहार में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।




मानसून में बच्चों की डाइट का रखें खास ध्यान, सही खानपान से मजबूत होगी इम्यूनिटी और कम होगा संक्रमण का खतरा

लाइफस्टाइल डेस्क। मानसून की पहली बारिश जहां गर्मी से राहत देती है, वहीं छोटे बच्चों की सेहत के लिए यह मौसम अतिरिक्त सावधानी की मांग करता है। मौसम बदलते ही 1 से 10 वर्ष तक के बच्चों में सर्दी, खांसी, बुखार, पेट का संक्रमण और वायरल बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में बच्चों के खानपान और स्कूल टिफिन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस मौसम में संतुलित और स्वच्छ भोजन दिया जाए तो बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रह सकती है।

बच्चों को हमेशा दें ताजा और गर्म भोजन

फरीदाबाद स्थित अमृता हॉस्पिटल की क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट कोमल भाटी के अनुसार, बारिश के मौसम में बच्चों की इम्यूनिटी कमजोर होने की संभावना अधिक रहती है। इसलिए उन्हें हमेशा ताजा और गर्म भोजन खिलाना चाहिए। रात का बचा हुआ या बासी खाना देने से बचें, क्योंकि इस मौसम में ऐसे भोजन में बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

फास्ट फूड और अनहाइजीनिक भोजन से रखें दूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में बच्चों को बाहर का फास्ट फूड, कटे हुए फल और अस्वच्छ वातावरण में तैयार भोजन नहीं देना चाहिए। पिज्जा, बर्गर और फ्रेंच फ्राइज जैसी चीजें संक्रमण का कारण बन सकती हैं। इसके बजाय घर का ताजा, पौष्टिक और साफ-सुथरा भोजन बेहतर विकल्प है।

यदि बच्चे की भूख कम हो तो उसे एक साथ अधिक भोजन खिलाने की बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कई बार भोजन दें। रोटी रोल, हेल्दी पास्ता या अन्य पौष्टिक व्यंजन आकर्षक तरीके से बनाकर देने से बच्चे उन्हें आसानी से खा लेते हैं।

स्कूल टिफिन में रखें पौष्टिक और संतुलित आहार

विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल टिफिन में जरूरत से ज्यादा खाना भरने की बजाय पौष्टिक और संतुलित भोजन रखना चाहिए। रोटी रोल, पनीर रोल, ताजे फल, भुना चना, मखाना और अन्य हेल्दी स्नैक्स अच्छे विकल्प हैं। टिफिन में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और सब्जियों का संतुलन बच्चों को पूरे दिन ऊर्जा प्रदान करता है।

इम्यूनिटी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ जरूर दें

मानसून में बच्चों के भोजन में विटामिन-सी, आयरन और जिंक से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें। नट्स का पाउडर, हरी पत्तेदार सब्जियां, चुकंदर, मूंग दाल, बेसन या ओट्स का चीला, अंडा और भुना चना जैसे खाद्य पदार्थ बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार माने जाते हैं।

1 से 3 साल के बच्चों के लिए क्या खिलाएं?

विशेषज्ञों के अनुसार, एक वर्ष की उम्र के बाद बच्चों को अंडा, दूध से बने उत्पाद, खिचड़ी, दाल-चावल, पनीर पराठा और नरम रोटी रोल दिए जा सकते हैं। यह भोजन पौष्टिक होने के साथ-साथ छोटे बच्चों के लिए आसानी से खाने योग्य भी होता है।

खानपान के साथ शारीरिक गतिविधि भी जरूरी

संतुलित आहार के साथ बच्चों की नियमित शारीरिक गतिविधियां भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। रोजाना खेलना, दौड़ना और सक्रिय रहना बच्चों की सेहत और इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह और सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पर आधारित है। किसी भी बच्चे की विशेष स्वास्थ्य स्थिति या आहार संबंधी समस्या के लिए बाल रोग विशेषज्ञ या योग्य पोषण विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।




Tips And Tricks: मानसून में दालों को ऐसे करें स्टोर, नहीं लगेगी फफूंद और कीड़े; अपनाएं ये आसान टिप्स

लाइफस्टाइल डेस्क। बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं रसोई में रखी खाद्य सामग्री की देखभाल भी चुनौती बन जाती है। हवा में बढ़ी नमी के कारण दालें, मसाले और अनाज जल्दी खराब होने लगते हैं। यदि दालों को सही तरीके से स्टोर नहीं किया जाए तो उनमें फफूंद लग सकती है या कीड़े पड़ सकते हैं। ऐसी दालों का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। हालांकि, कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर आप दालों को लंबे समय तक सुरक्षित और ताज़ा रख सकते हैं।

एयरटाइट कंटेनर का करें इस्तेमाल

दालों को हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले एयरटाइट कंटेनर में रखें ताकि उनमें नमी प्रवेश न कर सके। प्लास्टिक की बजाय कांच या स्टील के कंटेनर अधिक सुरक्षित और टिकाऊ माने जाते हैं।

धूप दिखाना न भूलें

मानसून के दौरान जब भी धूप निकले, दालों को 2 से 3 घंटे के लिए हल्की धूप में फैला दें। इससे अतिरिक्त नमी निकल जाती है और फफूंद या कीड़े लगने की संभावना काफी कम हो जाती है।

तेजपत्ता या नीम की सूखी पत्तियां रखें

दाल के डिब्बे में 2–3 सूखे तेजपत्ते या नीम की सूखी पत्तियां रखने से कीड़ों का खतरा कम हो सकता है। यह एक पारंपरिक घरेलू उपाय है जिसे आज भी कई परिवार अपनाते हैं।

हमेशा सूखे हाथ या चम्मच का करें उपयोग

दाल निकालते समय गीले हाथ या गीले चम्मच का इस्तेमाल न करें। कंटेनर में थोड़ी-सी भी नमी पहुंचने पर दाल जल्दी खराब हो सकती है।

जरूरत के अनुसार ही खरीदें

बारिश के मौसम में बहुत अधिक मात्रा में दाल खरीदकर स्टोर करने से बचें। कम मात्रा में खरीदें और आवश्यकता अनुसार स्टॉक भरते रहें। इससे दाल ताज़ा भी रहेगी और खराब होने की संभावना भी कम होगी।

फफूंद लगी दाल का न करें सेवन

यदि दाल में फफूंद, बदबू या रंग में बदलाव दिखाई दे, तो उसका सेवन बिल्कुल न करें। ऐसी दाल खाने से पेट संबंधी समस्याएं और फूड पॉइज़निंग का खतरा बढ़ सकता है। सुरक्षा की दृष्टि से ऐसी दाल को फेंक देना ही बेहतर विकल्प है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य घरेलू उपायों और उपलब्ध विशेषज्ञ सलाह पर आधारित है। इसे चिकित्सकीय या व्यक्तिगत सलाह का विकल्प न मानें। यदि खाद्य सुरक्षा या स्वास्थ्य से जुड़ी कोई विशेष समस्या हो, तो संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। इस जानकारी के आधार पर उठाए गए किसी भी कदम के लिए DenvaPost उत्तरदायी नहीं होगा।




शाम की चाय के साथ बनाएं स्वादिष्ट और क्रिस्पी ‘आलू कतली’, मिनटों में तैयार होगी यह चटपटी रेसिपी

लाइफस्टाइल डेस्क। अगर आप शाम की चाय के साथ कुछ नया, कुरकुरा और स्वाद से भरपूर स्नैक बनाना चाहते हैं, तो आलू कतली एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। यह रेसिपी बाहर से क्रिस्पी और अंदर से मुलायम होती है। खास बात यह है कि इसे बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता और घर में मौजूद सामान्य सामग्री से ही इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है।

आलू कतली बनाने के लिए आवश्यक सामग्री

  • 500 ग्राम आलू
  • 2 चम्मच चावल का आटा
  • सरसों का तेल
  • एक चुटकी हींग
  • 1 चम्मच जीरा
  • आधा चम्मच हल्दी पाउडर
  • 1 चम्मच नमक
  • 4–5 बारीक कटी हरी मिर्च
  • 1 चम्मच धनिया पाउडर
  • 1 चम्मच लाल मिर्च पाउडर
  • 1 चम्मच चिली फ्लेक्स
  • आधा चम्मच काला नमक
  • आधा चम्मच गरम मसाला
  • आधा चम्मच पुदीना पाउडर

ऐसे बनाएं क्रिस्पी आलू कतली

स्टेप 1: सबसे पहले आलू को छीलकर अच्छी तरह धो लें। आलू को दो से तीन बार पानी से धोएं ताकि अतिरिक्त स्टार्च निकल जाए। इसके बाद सभी आलू को समान मोटाई में गोल (राउंड) स्लाइस में काट लें। बहुत पतले या बहुत मोटे स्लाइस न रखें। चाहें तो स्लाइसर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

स्टेप 2: कटे हुए आलू को एक बार फिर पानी से धो लें और छलनी में रखकर पूरा पानी निकलने दें। इसके बाद कॉटन के कपड़े या किचन टॉवल से अच्छी तरह सुखा लें। यदि आलू गीले रहेंगे तो पकाते समय कड़ाही में चिपक सकते हैं।

स्टेप 3: सूखे आलू में चावल का आटा मिलाकर अच्छी तरह कोट करें। अब कड़ाही में सरसों का तेल गर्म करें और उसमें जीरा व एक चुटकी हींग का तड़का लगाएं। जीरा चटकने लगे तो आलू डालकर तेज आंच पर चलाते हुए पकाएं। हल्दी डालें और बीच-बीच में चलाते रहें ताकि आलू कड़ाही में न चिपकें।

स्टेप 4: जब आलू अच्छी तरह पक जाएं और हल्के क्रिस्पी हो जाएं, तब नमक, हरी मिर्च, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, चिली फ्लेक्स, काला नमक, गरम मसाला और पुदीना पाउडर डालकर अच्छी तरह मिलाएं। 2–3 मिनट तक और पकाएं।

अब आपकी स्वादिष्ट, मसालेदार और कुरकुरी आलू कतली तैयार है। इसे गर्मागर्म चाय, हरी चटनी या टमाटर सॉस के साथ परोसें और परिवार के साथ इसके लाजवाब स्वाद का आनंद लें।

 




रात में चेहरे पर लगाएं बादाम का तेल, त्वचा को मिल सकते हैं कई फायदे

लाइफस्टाइल डेस्क। दिनभर धूल, प्रदूषण, धूप और तनाव का असर सबसे पहले हमारी त्वचा पर दिखाई देता है। ऐसे में त्वचा की सही देखभाल बेहद जरूरी हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार रात का समय स्किन के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि सोते समय त्वचा खुद को रिपेयर और रिन्यू करने का काम करती है। यदि नाइट स्किनकेयर रूटीन में बादाम के तेल को शामिल किया जाए तो यह त्वचा को गहराई से पोषण देने में मदद कर सकता है।

बादाम का तेल विटामिन ई, एंटीऑक्सीडेंट और हेल्दी फैटी एसिड से भरपूर होता है, जो त्वचा को मुलायम, स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में सहायक माना जाता है। आइए जानते हैं कि रात में चेहरे पर बादाम का तेल लगाने से क्या फायदे हो सकते हैं।

त्वचा को गहराई से करता है मॉइस्चराइज

बादाम का तेल प्राकृतिक मॉइस्चराइजर की तरह काम करता है। यह त्वचा की नमी को बनाए रखने में मदद करता है, जिससे ड्राई और बेजान त्वचा को राहत मिल सकती है। नियमित उपयोग से त्वचा अधिक मुलायम और हाइड्रेटेड महसूस हो सकती है।

चेहरे पर ला सकता है प्राकृतिक निखार

विटामिन ई से भरपूर बादाम का तेल त्वचा को पोषण प्रदान करता है। इसके नियमित इस्तेमाल से चेहरे की चमक बढ़ाने और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

झुर्रियों और फाइन लाइन्स को कम करने में सहायक

बादाम के तेल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद करते हैं। इससे समय से पहले दिखाई देने वाले उम्र बढ़ने के संकेत जैसे फाइन लाइन्स और झुर्रियां कम करने में सहायता मिल सकती है।

डार्क सर्कल्स की समस्या में भी लाभकारी

आंखों के नीचे हल्के हाथों से बादाम का तेल लगाने से त्वचा को पोषण मिलता है। इससे डार्क सर्कल्स की समस्या में कुछ हद तक सुधार देखने को मिल सकता है, हालांकि इसके लिए नियमित उपयोग जरूरी है।

त्वचा को बनाता है मुलायम और स्वस्थ

बादाम का तेल त्वचा की बनावट को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। इसका नियमित इस्तेमाल रूखेपन को कम कर त्वचा को मुलायम और स्वस्थ बनाए रखने में सहायक माना जाता है।

ऐसे करें बादाम के तेल का इस्तेमाल

रात में सोने से पहले सबसे पहले चेहरे को अच्छी तरह साफ कर लें। इसके बाद 2 से 3 बूंद बादाम का तेल हथेलियों पर लेकर चेहरे और गर्दन पर हल्के हाथों से मसाज करें। तेल को रातभर लगा रहने दें और सुबह सामान्य पानी से चेहरा धो लें।

उपयोग करते समय रखें ये सावधानियां

यदि आपकी त्वचा ऑयली या मुंहासे वाली है तो पहले पैच टेस्ट जरूर करें।

अधिक मात्रा में तेल लगाने से त्वचा चिपचिपी महसूस हो सकती है।

किसी भी प्रकार की एलर्जी या जलन होने पर तुरंत उपयोग बंद कर विशेषज्ञ की सलाह लें।

बेहतर परिणाम के लिए शुद्ध और अच्छी गुणवत्ता वाले बादाम के तेल का ही इस्तेमाल करें।

त्वचा विशेषज्ञों का मानना है कि सही स्किनकेयर रूटीन और संतुलित जीवनशैली के साथ बादाम का तेल त्वचा की देखभाल में एक अच्छा प्राकृतिक विकल्प साबित हो सकता है।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। Denvapost किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।



मिलावटी तेल से बचना है तो घर पर बनाएं शुद्ध मूंगफली का तेल, जानिए आसान तरीका

लाइफस्टाइल डेस्क। बाजार में मिलावटी खाद्य पदार्थों की बढ़ती शिकायतों के बीच अब लोग शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। फल, सब्जियों से लेकर खाद्य तेलों तक में मिलावट की आशंका के चलते कई लोग घर पर ही खाद्य सामग्री तैयार करने की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में प्रसिद्ध सेलिब्रिटी शेफ ने घर पर शुद्ध मूंगफली का तेल बनाने का एक आसान तरीका साझा किया है।

शेफ के अनुसार इस प्रक्रिया में थोड़ा समय और मेहनत जरूर लगती है, लेकिन इसके बदले में आपको बिना किसी मिलावट वाला शुद्ध मूंगफली का तेल प्राप्त होता है। खास बात यह है कि इसके लिए किसी विशेष मशीन या तेल निकालने वाले उपकरण की आवश्यकता नहीं होती।

ऐसे बनाएं घर पर मूंगफली का तेल

1. मूंगफली को हल्का भूनें
सबसे पहले मूंगफली को धीमी आंच पर हल्का भून लें। जब छिलका सुनहरा होने लगे और आसानी से अलग होने लगे, तब गैस बंद कर दें।

2. छिलका हटाकर पीसें
मूंगफली को ठंडा होने दें और कपड़े से रगड़कर उसके छिलके निकाल लें। इसके बाद मिक्सर में पल्स मोड पर थोड़ी-थोड़ी देर के लिए पीसें। लगातार ज्यादा देर तक पीसने से बचें।

3. पेस्ट तैयार करें
पीसने के बाद मूंगफली पहले चूरे और फिर गाढ़े पेस्ट का रूप ले लेगी। इस पेस्ट को एक ट्रे या बर्तन में निकालकर आटे की तरह गूंथ लें।

4. गर्म पानी मिलाकर दबाएं
अब इस मिश्रण में थोड़ा-थोड़ा गर्म पानी मिलाते हुए लगातार दबाएं और गूंथते रहें। कुछ समय बाद मूंगफली का तेल अलग होकर बाहर निकलने लगेगा।

5. तेल को छानकर करें स्टोर
निकले हुए तेल को छानकर कांच की बोतल में भर लें।

इसे 2 से 3 घंटे तक स्थिर रहने दें और फिर मलमल के कपड़े से दोबारा छान लें। इससे तेल में मौजूद तलछट और अशुद्धियां अलग हो जाएंगी। इस तेल को ठंडी और सूखी जगह पर लगभग तीन महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

मूंगफली का बचा हुआ चूरा भी है उपयोगी

घर पर तेल बनाने की इस प्रक्रिया में कुछ भी बेकार नहीं जाता। तेल निकालने के बाद बचा हुआ मूंगफली का चूरा प्रोटीन से भरपूर होता है। इसका उपयोग मूंगफली के लड्डू, बर्गर पैटी, हेल्दी स्नैक्स या आटे में मिलाकर पौष्टिक पराठे बनाने में किया जा सकता है।

शुद्धता के साथ सेहत का भी लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि घर पर तैयार किया गया तेल मिलावट के जोखिम को कम करता है और उपभोक्ताओं को गुणवत्ता पर बेहतर नियंत्रण देता है। हालांकि, तेल को स्वच्छता के साथ तैयार करना और सही तरीके से संग्रहित करना बेहद जरूरी है, ताकि उसकी गुणवत्ता और स्वाद लंबे समय तक बरकरार रहे।

यदि आप बाजार में मिलने वाले तेल की शुद्धता को लेकर चिंतित हैं, तो यह घरेलू तरीका आपके लिए एक बेहतर और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प साबित हो सकता है।




गर्मियों में फ्रिज इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी, गलत स्टोरेज से बढ़ सकता है फूड पॉइजनिंग का खतरा

देशभर में भीषण गर्मी के बीच लोग खाने-पीने की चीजों को सुरक्षित रखने के लिए फ्रिज का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल खाना फ्रिज में रख देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे सही तरीके से स्टोर करना भी बेहद जरूरी है। गलत तरीके से रखा गया खाना फूड पॉइजनिंग और बैक्टीरियल संक्रमण का कारण बन सकता है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने लोगों को चेतावनी देते हुए कहा है कि गर्मियों में फ्रिज के अंदर कच्चे और पके हुए खाने को एक साथ रखने से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। संस्था ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा कर लोगों को सही फूड स्टोरेज के प्रति जागरूक किया।

एफएसएसएआई के अनुसार अधिकतर लोग कच्चा मांस, चिकन, मछली या सीफूड को फल, सब्जियों और पके हुए भोजन के साथ रख देते हैं। कच्चे मांस से निकलने वाला तरल पदार्थ अन्य खाद्य पदार्थों पर गिरकर बैक्टीरिया फैला सकता है। इस प्रक्रिया को “क्रॉस-कंटामिनेशन” कहा जाता है, जो फूड पॉइजनिंग की बड़ी वजह बन सकती है।

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि कच्चे मांस और सीफूड को हमेशा बंद कंटेनर में रखें और फ्रिज की निचली शेल्फ पर स्टोर करें। वहीं पका हुआ भोजन या खाने योग्य सामग्री को ऊपर की शेल्फ में रखा जाए। बाजार से सामान लाते समय मांस और सब्जियों के लिए अलग-अलग बैग का उपयोग करना भी जरूरी बताया गया है।

एफएसएसएआई ने यह भी कहा कि फ्रिज का तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे बनाए रखना चाहिए और रेफ्रिजरेटर की नियमित सफाई करनी चाहिए, ताकि बैक्टीरिया पनपने की संभावना कम हो सके।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मियों में थोड़ी सी लापरवाही भी स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। ऐसे में सही फूड स्टोरेज आदतें अपनाकर फूड पॉइजनिंग और संक्रमण से बचा जा सकता है।




मोबाइल देखकर खाना खाने की आदत बन सकती है खतरनाक, पाचन से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक पड़ता है असर

आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन और टीवी लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुके हैं। हालात ऐसे हैं कि अब कई लोग खाना खाते समय भी स्क्रीन से नजरें नहीं हटाते। बड़े ही नहीं, बच्चे भी मोबाइल या टीवी देखते हुए भोजन करने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत धीरे-धीरे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकती है।

आयुर्वेद के अनुसार भोजन केवल पेट भरने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि शरीर और मन दोनों को पोषण देने का माध्यम है। लेकिन जब व्यक्ति मोबाइल स्क्रीन में व्यस्त होकर खाना खाता है, तो उसका ध्यान भोजन से हट जाता है, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

स्वाद और भूख का एहसास होता है कम

विशेषज्ञों के मुताबिक मोबाइल देखते हुए खाना खाने पर व्यक्ति का ध्यान भोजन के स्वाद, मात्रा और गुणवत्ता पर नहीं रहता। धीरे-धीरे यह आदत बन जाती है और बिना स्क्रीन देखे खाना अधूरा लगने लगता है।

ऐसी स्थिति में लोगों को यह भी महसूस नहीं होता कि उन्होंने कितना भोजन कर लिया है। खासतौर पर बच्चों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है, जहां वे बिना ध्यान दिए खाना खाते रहते हैं।

पाचन शक्ति होती है कमजोर

डॉक्टरों का कहना है कि जब दिमाग किसी और चीज में व्यस्त रहता है और शरीर भोजन कर रहा होता है, तो इससे शरीर का प्राकृतिक संतुलन प्रभावित होता है। मोबाइल देखते हुए खाना खाने से भोजन ठीक से चबाया नहीं जाता, जिससे पाचन तंत्र पर दबाव बढ़ता है।

इस आदत के कारण भूख और पेट भरने के प्राकृतिक संकेत भी कमजोर पड़ जाते हैं। कई लोगों को खाना खाने के बाद भारीपन और सुस्ती महसूस होने लगती है।

ज्यादा या कम खाने की समस्या

मोबाइल में व्यस्त रहने के कारण व्यक्ति यह समझ नहीं पाता कि उसे कितनी भूख है और कब पेट भर चुका है। इससे कुछ लोग जरूरत से ज्यादा खाना खा लेते हैं, जबकि कुछ लोग पर्याप्त भोजन किए बिना ही खाना बंद कर देते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक ऐसा करने से वजन बढ़ने या शरीर में पोषण की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

गैस, एसिडिटी और अपच का खतरा

अधूरा पाचन गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है। खाना ठीक से न पचने के कारण पेट संबंधी परेशानियां बढ़ने लगती हैं। वहीं जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेने पर मोटापे का खतरा भी बढ़ जाता है।

मानसिक थकान और चिड़चिड़ापन

लगातार स्क्रीन देखने से दिमाग को आराम नहीं मिल पाता, जिससे मानसिक थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। खासतौर पर बच्चों में भोजन के दौरान मोबाइल देखने की आदत उनके व्यवहार और मानसिक विकास पर असर डाल सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भोजन के समय स्क्रीन से दूरी बनाकर शांत माहौल में खाना खाना बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। इससे न केवल पाचन सुधरता है, बल्कि भोजन का स्वाद और संतुष्टि भी बेहतर तरीके से महसूस होती है।

 

 




आटा या मैदा? जानिए दोनों में क्या है बड़ा अंतर और सेहत के लिए कौन बेहतर

आजकल फास्ट फूड और बेकरी उत्पादों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। पिज्जा, बर्गर, केक, बिस्किट और समोसे जैसी कई लोकप्रिय चीजें मैदा से बनाई जाती हैं। वहीं भारतीय घरों में सदियों से गेहूं के आटे से बनी रोटियां और पराठे भोजन का अहम हिस्सा रहे हैं। हालांकि दोनों ही गेहूं से बनते हैं, लेकिन पोषण और स्वास्थ्य के लिहाज से आटा और मैदा में बड़ा अंतर माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार मैदा एक रिफाइंड उत्पाद है, जबकि आटा साबुत गेहूं से तैयार किया जाता है। यही वजह है कि आटे को सेहत के लिए बेहतर माना जाता है।

कैसे बनता है आटा और मैदा?

Kamini Sinha, नोएडा स्थित डाइट मंत्रा क्लीनिक की फाउंडर और डाइटिशियन के अनुसार, आटा साबुत गेहूं को पीसकर बनाया जाता है। इसमें गेहूं का छिलका और अंकुर भी शामिल रहते हैं, जिनमें फाइबर, विटामिन और मिनरल्स मौजूद होते हैं।

वहीं मैदा बनाने के दौरान गेहूं के छिलके और अंकुर को पूरी तरह हटा दिया जाता है। इसके बाद बचे हुए हिस्से को बारीक पीसकर प्रोसेस और ब्लीच किया जाता है, जिससे उसका रंग सफेद हो जाता है।

क्यों नुकसानदायक माना जाता है मैदा?

विशेषज्ञों का कहना है कि मैदा में फाइबर की मात्रा बेहद कम होती है। इसके कारण इसे खाने के बाद जल्दी भूख लग सकती है। मैदा तेजी से पचती है, जिससे ब्लड शुगर अचानक बढ़ सकता है।लगातार अधिक मात्रा में मैदा का सेवन करने से मोटापा, वजन बढ़ना और Type 2 Diabetes जैसी लाइफस्टाइल बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा ज्यादा मैदा खाने से कब्ज, गैस और पेट भारी होने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

आटे के क्या हैं फायदे?

साबुत गेहूं के आटे में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। यह पेट को लंबे समय तक भरा महसूस कराता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती। आटे में विटामिन, मिनरल्स और जरूरी पोषक तत्व भी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा और पोषण देने में मदद करते हैं।

क्या मैदा में पोषण बिल्कुल नहीं होता?

विशेषज्ञों के मुताबिक मैदा में कार्बोहाइड्रेट और ऊर्जा जरूर होती है, लेकिन प्रोसेसिंग के दौरान इसके अधिकांश पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। कई देशों में मैदा में बाद में आयरन और कुछ विटामिन मिलाए जाते हैं, लेकिन फिर भी इसे साबुत आटे जितना पौष्टिक नहीं माना जाता।

बच्चों और युवाओं में बढ़ रहा मैदा का सेवन

फास्ट फूड और पैकेज्ड फूड्स की बढ़ती लोकप्रियता के कारण बच्चे और युवा बड़ी मात्रा में मैदा का सेवन कर रहे हैं। कई पैकेज्ड उत्पादों में भी मैदा का इस्तेमाल होता है, जिसकी जानकारी लोगों को नहीं होती। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए रोजमर्रा के भोजन में साबुत आटे को प्राथमिकता देना और मैदा से बनी चीजों का सीमित सेवन करना जरूरी है।