Mp Weather Report : मध्यप्रदेश के छह जिलों में घने कोहरे का येलो अलर्ट, न्यूनतम तापमान में गिरावट का अनुमान


MP Weather Report Yellow alert of dense fog in six districts of Madhya Pradesh minimum temperature falls

सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : सोशल मीडिया

मध्यप्रदेश के अधिकांश इलाकों में सुबह घना कोहरा छाया रहा, जिसके चलते विजुअलिटी कम रही है। इसके साथ ही तापमान में गिरावट आने से ठंड ने अपना असर दिखाया। लोग दिन में गर्म कपड़े पहने नजर आए। सुबह और रात में अलाव का सहारा लेते दिखे। बदल छटने से मौसम साफ रहा।

हालांकि, शहडोल एवं रीवा संभागों के जिलों में कहीं-कहीं वर्षा दर्ज की गई। उमरिया संभाग के जिलों में अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई। जबकि उज्जैन, रीवा और जबलपुर संभागों के जिलों में यह काफी बढ़ा। वहीं, इंदौर और जबलपुर संभाग के जिलों में यह सामान्य से काफी कम रहे। रीवा सागर एवं नर्मदापुरम संभाग के जिलों में सामान्य से कम रहा। न्यूनतम तापमान उमरिया संभाग के जिलों में विशेष रूप से गिरा। जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग के जिलों में कहीं-कहीं गिरा। सिंगरौली में एक अनूपपुर में 0.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई।कोहरे का येलो अलर्ट

  • मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, सिंगरौली और सीधी जिले में घना कोहरा छाएगा। इसके लिए यहां येलो अलर्ट किया गया है

  • वहीं, शहडोल संभाग के जिलों के साथ रायसेन, हरदा, नर्मदापुरम, रीवा, कटनी, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, जबलपुर, गुना, अशोकनगर और शिवपुरी जिले में हल्का कोहरा छाएगा

  • प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 27.5 डिग्री सेंटीग्रेड उज्जैन में दर्ज किया गया

  • सबसे कम न्यूनतम तापमान 11.3 डिग्री सेंटीग्रेड उमरिया में दर्ज किया गया

  • अगले 72 घंटे के दौरान धीरे-धीरे न्यूनतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेंटीग्रेड की गिरावट आएगी




Bhopal Express : ह. निजामुद्दीन से भोपाल के लिए निकली शान ए भोपाल ट्रेन में आधे घंटे बजा फायर अलार्म, लोग चौंके

Bhopal Express: Fire alarm kept ringing for half an hour in Shaan-e-Bhopal train from New Delhi to Bhopal.

भोपाल एक्सप्रेस
– फोटो : सोशल मीडिया

नई दिल्ली से भोपाल चलने वाली शान-ए-भोपाल एक्सप्रेस फायर अलार्म बजने का मामला सामने आया है। एहतियात बतौर गाड़ी चेक की गई, पर आग लगने जैसी कोई घटना नहीं हुई। तकनीकी दिक्कत से अलार्म बजता रहा।

बता दें कि भोपाल एक्सप्रेस शनिवार रात नई दिल्ली से भोपाल के लिए निकली थी। ग्वालियर से पहले उसके एम-2 डिब्बे में रात करीब साढ़े दस बजे अचानक फायर अलार्म बजने लगा। ट्रेन में बैठे मुसाफिरों में कुछ देर के लिए घबराहट का माहौल बन गया। गाड़ी के अंदर रहने वाला रेलवे स्टाफ ने गाड़ी चेक की तो पता चला कि फायर अलार्म तकनीकी दिक्कत से बजने लगा। आग लगने जैसी कोई घटना नहीं हुई, तब यात्रियों ने राहत की सांस ली। ग्वालियर से पहले कुछ देर के लिए ट्रेन को रोक दिया गया था।




Bhopal News : महिलाओं-किसानों का भरोसा, मोदी की गारंटी जीती, उम्मीद से बेहतर रहा पार्टी का प्रदर्शन

Modi's guarantee won in Madhya Pradesh BJP performance was better than expected

नरेंद्र मोदी-शिवराज सिंह चौहान

मध्य प्रदेश विधानसभा के चुनाव की घोषणा से पहले कई वजहों से भाजपा कमजोर आंकी जा रही थी। लेकिन, सत्ता विरोधी लहर को थामने से लेकर प्रत्याशी चयन और चुनावी वादों से लेकर वोटर को बूथ पहुंचाने तक…हर रणनीति अचूक साबित हुई। नतीजा यह हुआ कि चुनाव के तीन महीने पहले तक बाजी हारती नजर आ रही भाजपा ने एक बार फिर जबर्दस्त जीत दर्ज कर सरकार बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।

मध्य प्रदेश में चुनावों की घोषणा से पहले तीन मुद्दे मुख्य तौर पर भाजपा के खिलाफ नजर आ रहे थे। पहला, जगह-जगह लोग एक ही चेहरे से ऊबने की बात कर रहे थे। दूसरा, तमाम विधायकों के खिलाफ नाराजगी। तीसरा, पुराने नेताओं द्वारा अपने खास लोगों को आगे बढ़ाने की वजह से काडर का आक्रोश। भाजपा ने इन सभी पर एक साथ तेजी से काम किया और चुनाव में वापसी को लेकर तगड़ी रणनीति तैयार की। रणनीति पर कारगर अमल ने सरकार की पटकथा लिख दी। कांग्रेस ने जातीय जनगणना, महिला आरक्षण कानून लागू करने में 2029 तक इंतजार को लेकर भाजपा पर सवाल उठाए और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे से जुड़े वीडियो को मुद्दा बनाने की कोशिश की। मगर, कोई दांव नहीं चला।

भोपाल के एक वरिष्ठ पत्रकार अश्विनी मिश्र बताते हैं कि भाजपा ने चुनाव के दिन के लिए खास रणनीति बनाई। इसमें भाजपा के कई केंद्रीय नेताओं ने राज्य के जिम्मेदार नेताओं को चुनाव के दिन सुबह साढ़े पांच बजे जगाने का काम किया। इन जिम्मेदार नेताओं को 20-20 अन्य लोगों के नाम दिए गए, जिन्हें फोन कर जगाना था। सात बजे वोट डालकर बाहर आने पर एक साथ वोट की सेल्फी भेजनी थी। इसके बाद इन सभी को एक चेन के रूप में अपने लक्षित 20-20 वोटर को बूथ तक पहुंचाना था। यह फॉलोअप पूरे दिन चला।

इसलिए हारी कांग्रेस

शुभ मुहूर्त के इंतजार में प्रत्याशी चयन में देरी। खराब टिकट वितरण से उपजा असंतोष। कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के बीच सार्वजनिक हुए मतभेद ने चुनावी माहौल को और खराब किया। अयोध्या में श्रीराम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह से जुड़ी होर्डिंग पर सवाल कर भाजपा को इस भावनात्मक मुद्दे को ज्यादा ताकत से प्रचारित करने व ध्रुवीकरण का मौका दिया।

हर सीट पर दूसरे राज्यों के नेताओं से फीडबैक

चुनाव से पहले भाजपा ने यूपी, गुजरात सहित कई अन्य राज्यों के विधायकों व नेताओं को प्रदेश की सीटवार जिम्मेदारी दी। उनके फीडबैक पर चुनाव से पहले लाभार्थीपरक योजनाओं को तय करने से लेकर प्रत्याशी चयन तक में अमल हुआ।

प्रत्याशी एलान में परंपरा बदली शुभ मुहूर्त व चुनाव की घोषणा तक प्रत्याशियों का एलान करने वाली भाजपा ने काफी पहले ही हारी सीटों पर प्रत्याशियों का एलान कर दिया। इससे इन सीटों पर घोषित प्रत्याशियों को मतदाताओं तक पहुंचने के लिए पर्याप्त समय मिला। बड़ी संख्या में ऐसी सीटें पार्टी जीतने में सफल रही।

केंद्रीय मंत्रियों-सांसदों को चुनाव लड़ाने का प्रयोग

पहली कतार के जो नेता हर चुनाव में अहम भूमिका निभाते थे, उन सभी को चुनाव में उतार दिया। तीन केंद्रीय मंत्रियों-नरेंद्र सिंह तोमर, प्रहलाद सिंह पटेल, फग्गन सिंह कुलस्ते व राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के साथ सतना, सीधी, होशंगाबाद व जबलपुर सांसद का मैदान में उतारने की रणनीति कामयाब रही। ज्यादातर जीते।

योगी-हिमंत का ध्रुवीकरण के लिए उपयोग

भाजपा ने चुनाव में अन्य रणनीतियों के साथ ध्रुवीकरण पर भी ध्यान रखा। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ व असम के मुख्यमंत्री हिमंत विस्व सरमा के कार्यक्रम प्राथमिकता पर कराए। दोनों ही नेताओं ने युवाओं में जोश भरने के साथ हिंदुत्व के मुद्दे को भी भुनाने का प्रयास किया।

कांग्रेस की गारंटी पर भारी पड़े भाजपा के वादे

भाजपा ने न सिर्फ कांग्रेस के चुनावी वादों की काट में उनसे आकर्षक वादे किए, बल्कि कांग्रेस के चुनावी गारंटी के प्रचार के सामने मोदी की गारंटी का एलान भी किया। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने न सिर्फ 1250 रुपये नकद भुगतान वाली लाडली बहना योजना लागू की, बल्कि अगले पांच वर्ष में इसे 3000 रुपये तक पहुंचाने का एलान किया। कांग्रेस ने 500 रुपये में रसोई गैस देने के वादा किया तो शिवराज ने 450 रुपये में देना शुरू कर दिया। कांग्रेस ने अपने वचनपत्र में 2600 रुपये में गेहूं व 2500 रुपये में धान की खरीद का वादा किया तो भाजपा ने अपने संकल्प-पत्र में गेहूं 2700 रुपये और धान 3100 रुपये में खरीदने का एलान कर दिया। मोदी की गारंटी कांग्रेस की गारंटी पर भारी पड़ी।

मोदी बनाम कांग्रेस बनाया चुनाव

सत्ता विरोधी लहर को बेअसर करने के लिए सीएम चेहरा न घोषित कर ‘एमपी के मन में मोदी-मोदी के मन में एमपी’ कैंपेन चलाया। इससे चुनाव शिवराज बनाम कमलनाथ की जगह मोदी बनाम कांग्रेस पर केंद्रित हो गया। मोदी के कद के सामने कांग्रेस मैदान में ठहर नहीं सकी।

शिवराज के साथ महाराज का पूरा प्रयोग

एमपी का पिछला विधानसभा चुनाव शिवराज बनाम महराज के रूप में लड़ा गया था। लेकिन, कांग्रेस ने सत्ता में आने पर महराज यानी ज्योतिरादित्य सिंधिया की जगह कमलनाथ को मुख्यमंत्री बना दिया था। नतीजा यह हुआ कि ज्योतिरादित्य कांग्रेस छोड़ भाजपा में आ गए और कांग्रेस का सरकार गंवानी पड़ी। इस चुनाव में भाजपा ने शिवराज और ज्योतिरादित्य को एक साथ साधने का रणनीतिक प्रयास किया।




Bhopal News : दिग्विजय सिंह ने वित्त विभाग के दो Ias पर लगाया 250 करोड़ के घोटालों का आरोप, Eow से शिकायत

MP News: Digvijay Singh accuses two IAS of Finance Department of scams worth Rs 250 crore, complaint to EOW

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह
– फोटो : सोशल मीडिया

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की मतगणना के तीन दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने प्रदेश सरकार के दो आईएएस अधिकारियों पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने वित्त विभाग के अधिकारी आईएएस अजीत केसरी और ज्ञानेश्वर पाटिल की ईओडब्ल्यू से शिकायत की है। इसके साथ उन्होंने दोनों की वॉट्सएप चैट और आडियो सीडी भी उपलब्ध कराई है।

दिग्विजय सिंह बोले-प्राथमिकी दर्ज करें

पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने ईओडब्ल्यू के डीजी को दी शिकायत में लिखा कि उनको दो भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की शिकायत मिली है। एमपी में वित्त विभाग के दो आईएएस अधिकारियों ने 250 करोड़ का घोटाला किया है। उन्होंने शिकायत के साथ दिए दस्तावेज और ऑडियो सीडी के आधार पर दोनों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की।

यह है मामला

शिकायत के अनुसार राज्य मंत्रालय में लागू आईएफएमएस सिस्टम का काम एक चहेती फर्म को देने के लिए वित्त विभाग के अधिकारियों ने वित्त मंत्री को विश्वास में लेकर ढाई सौ करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। इसके लिए टेंडर में मनमानी शर्तें डालते हुए टीसीएस जैसी टाटा समूह की कंपनी को बाहर किया गया। इसके बाद टेरा टेक्नॉलाजी लिमिटेड गुडगांव को ठेका देने की कार्यवाही शुरू कर दी गई। शिकायत के अनुसार इस घोटाले में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के साथ-साथ अतिरिक्त मुख्य सचिव अजीत केसरी की भूमिका को भी संदिग्ध बताया गया है। इसके अलावा एक अन्य आईएएस ज्ञानेश्वर पाटिल पर कंपनी के प्रतिनिधियों से मिलीभगत कर घोटाले में शामिल होने का आरोप है। पहले यह टेंडर 200 करोड़ रुपये का था, जिसे एजेंसी तय होने के दौरान बढ़ाकर 247 करोड़ रुपये कर दिया गया।

50 करोड़ रुपये का लेन देन

पूरे टेंडर घोटाले में करीब 50 करोड़ रुपये का लेन-देन का आरोप है। शिकायत में रिश्वत की रकम विभिन्न माध्यमों से संबंधित अधिकारियों और मंत्री को देने की बात कही गई है। एसीएस वित्त अजीत केसरी, ज्ञानेश्वर पाटिल, आयुक्त कोष एवं लेखा और टेरा टेक्नॉलाजी लिमिटेड गुडगांव से काम लेने वाले आंध्र प्रदेश की कंपनी पिक्सल वाइड सॉल्यूशन के डायरेक्टर प्रित्युश रेड्डी के लिए काम करने वाले ग्वालियर निवासी देवेश अग्रवाल के बीच विभिन्न अवसरों पर वाट्सएप पर हुई चेटिंग पत्र शिकायत के साथ दिए गए हैं।

यह है ऑडियो में…

पत्र के साथ सीडी में संलग्न ऑडियो में वित्त विभाग के शीर्ष अधिकारी हैदराबाद स्थित कंपनी के डायरेक्टर से डील पूरी करने की चर्चा कर रहे हैं। इस बातचीत में डील पूरी न होने पर टाटा कंपनी की टीसीएस को आगे काम देने की बात भी कही जा रही है। चर्चा के दौरान किसी पवन नामक व्यक्ति का नाम लेनदेन में बार-बार आ रहा था। आरोप है कि करीब पचास करोड़ रुपये का लेन देन करने के बाद वित्त विभाग के अधिकारियों ने आचार संहिता लगने के कुछ दिन पूर्व गुडगांव की कंपनी को वर्क ऑर्डर दिया गया, जो बाद में हैदराबाद की कंपनी को सौंपा गया।

शर्तें कंपनी के अनुकूल बनाई

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वित्त विभाग के अधिकारियों ने इस टेंडर प्रक्रिया की शर्तों को इस कंपनी के अनुकूल बनाया था, ताकि अन्य कंपनी टेंडर में भाग ही न ले सके। चुनावी साल में और चुनाव घोषित होने के कुछ दिन पूर्व घटित इस हाई प्रोफाइल घोटाले में आर्थिक अनियमितता, भ्रष्टाचार का प्रकरण दर्ज कर समस्त संबंधित दस्तावेज जब्त किए जाना चाहिए और आरोपी अधिकारियों और कंपनी के प्रतिनिधियों और दलालों के बीच हुई बातचीत का रिकॉर्ड मोबाइल कंपनियों से लेकर कार्रवाई की जाना चाहिए।




Bhopal News : ias वीरा राणा प्रदेश की नई प्रशासनिक मुखिया, बैंस के सेवानिवृत्त होने पर कल मिलेगा अतिरिक्त प्रभार

MP News: IAS Veera Rana becomes the new administrative head of the state, gets additional charge of CS after B

वीरा राणा
– फोटो : social media

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की मतगणना के तीन दिन पहले प्रदेश की नई मुख्य सचिव आईएएस वीरा राणा होगी। वर्तमान मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस की दूसरी सेवावृद्धि 30 नवंबर को समाप्त हो रही हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने वीरा राणा को मुख्य सचिव का प्रभार देने के आदेश जारी कर दिए हैं।

1988 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी वीरा राणा के पास माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल तथा कृषि उत्पादन आयुक्त मध्य प्रदेश (अतिरिक्त प्रभार) प्रभार है। सामान्य प्रशासन के आदेश के अनुसार उनको अपने वर्तमान कर्तव्यों के साथ मुख्य सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। राणा बैंस के बाद मध्य प्रदेश में पदस्थ सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं। वह 2024 में सेवानिवृत्त होगी। इससे पहले प्रदेश के आईएएस अधिकारी अजय तिर्की, संजय बंदोपाध्याय और अनुराग जैन का नाम भी मुख्य सचिव की रेस में था, लेकिन यह अधिकारी केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर है। इसमें अजय तिर्की दिसंबर 2023, संजय बंदोपाध्याय अगस्त 2024 और अनुराग जैन अगस्त 2025 में सेवानिवृत्त हो रहे हैं। वहीं, सीएस के दावेदारों में मो.सुलेमान, आशीष उपाध्याय, विनोद कुमार, राजीव रजन, राजेश राजौरा, एसएन मिश्रा और मलय श्रीवास्तव का नाम भी चल रहा था।

वर्तमान मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस को दो बार सरकार ने सेवावृद्धि दी। वह 30 नवंबर 2022 को सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन सरकार ने उनको 1 दिसंबर 2022 को 6 माह की सेवावृद्धि दे दी। इसके बाद 1 जून 2023 को दूसरी बार उनको सेवावृद्धि दी गई।

सीएस बनी तो होंगी दूसरी महिला मुख्य सचिव

अभी सरकार ने वीरा राणा को मुख्य सचिव का प्रभार दिया है। प्रदेश में तीन दिसंबर को मतगणना होनी है। इसके बाद नई सरकार बन जाएगी। नई सरकार अपने अनुसार नया मुख्य सचिव बनाएगी। यदि वीरा राणा को प्रदेश का मुख्य सचिव बनाया जाता है तो वे दूसरी महिला सीएस होंगी। इसके पहले निर्मला बुच प्रदेश की पहली महिला मुख्य सचिव थीं।




Bhopal News : हरियाली को नुकसान पहुंचाने वालों की खैर नहीं, अतिक्रमण पर चलेगा प्रशासन का बुलडोजर

Bhopal News: Those who harm greenery will not be spared, administration's bulldozer will run on encroachment

फाइल फोटो

राजधानी की हरियाली को नुकसान पहुंचाने वालों की अब खैर नहीं है। ग्रीन बेल्ट एरिया में अतिक्रमण करने वालों पर प्रशासन का बुलडोजर मंगलवार से फिर चलेगा। सोमवार को अवकाश होने के कारण अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं हो पाई थी। लेकिन 28 नवंबर को जिला प्रशासन की टीम बड़े पैमाने पर कार्रवाई करेगी। इस दौरान भोपाल नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, पुलिस और वन विभाग की टीमें भी पूरी तरह से सक्रिय रहेंगी। बता दें, यह अतिक्रमण सेंट्रल वर्ज से लेकर रोड साइड पर किया गया है। जिसने बीते पचास सालों में भोपाल की खूबसूरती और हरियाली को निगलने का काम किया है। इनमें कच्चे से लेकर पक्के निर्माण तक कर लिए गए हैं। झुग्गी, दुकान, मकान, पार्किंग बना ली है।

692 लोकेशन चिन्ह्वित

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश के बाद भोपाल के ग्रीन बेल्ट एरिया में 692 लोकेशन पर अतिक्रमण हटाए जाने हैं। एनजीटी के इन निर्देशों के बाद पिछले दो दिनों से इस पर एक्शन भी शुरू हो गया है। शनिवार और रविवार को दो दिनों में ही भोपाल में अलग अलग स्थानों पर 150 से अधिक अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं। लेकिन अभी भी 500 अधिक अतिक्रमण बाकी हैं जिन्हें हटाया जाना है। ये सभी ग्रीन बेल्ट एरिया में हैं।

प्रदूषण पर भी एक्शन

इधर, शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए आरटीओ का उड़नदस्ता एक बार फिर सक्रिय होगा। वाहनों का puc सर्टिफिकेट चैक किया जाएगा। अब तक 550 से अधिक वाहनों पर कार्रवाई की जा चुकी है। इनसे ढाई लाख का जुर्माना भी वसूला गया है।




Mp Election 2023 : ”बिग डील” के लिए तैयार बसपा, एमपी के परिणामों पर नजर

भोपाल : भाजपा और कांग्रेस के कई प्रभावशाली बागियों को टिकट देने वाली बसपा यह मानकर चल रही है कि वह लगभग दो दर्जन सीटें जीत सकती है। वह रणनीति बुनने में जुट भी गई है कि यदि वह राज्य में तीसरी ताकत बनी तो आगामी लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस-बसपा गठबंधन को समझौते के केंद्र में रखकर सत्ता में मजबूत भागीदारी का प्रस्ताव भी कांग्रेस को दे सकती है।

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में सीधी लड़ाई भाजपा और कांग्रेस के बीच ही नजर आ रही है, लेकिन गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ चुनाव में दलित-आदिवासी वोटबैंक के भरोसे ताल ठोंकने वाली बसपा को आस है कि इस बार सत्ता के गठन में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। भाजपा और कांग्रेस के कई प्रभावशाली बागियों को टिकट देने वाली बसपा यह मानकर चल रही है कि वह लगभग दो दर्जन सीटें जीत सकती है।

वह रणनीति बुनने में जुट गई है कि यदि वह राज्य में तीसरी ताकत बनी तो आगामी लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस-बसपा गठबंधन को समझौते के केंद्र में रखकर सत्ता में मजबूत भागीदारी का प्रस्ताव भी कांग्रेस को दे सकती है। दलित आबादी की पर्याप्त संख्या के चलते मध्य प्रदेश के विंध्य और उत्तर प्रदेश से सटे बुंदेलखंड क्षेत्र में बसपा का कुछ प्रभाव है।

बसपा के 183 तो गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के 45 प्रत्याशी मैदान में

इसके बलबूते वह पूर्व में यहां अधिकतम 11 प्रतिशत वोटों के साथ 11 विधायक भी बना चुकी है। बेशक, 2018 के विधानसभा चुनाव में उसका वोट प्रतिशत मात्र 6.42 प्रतिशत रहा और सिर्फ दो ही विधायक जीते, लेकिन इस बार उसने आदिवासियों में प्रभाव रखने वाली गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ मिलकर समीकरण बनाने का प्रयास किया है। बसपा के 183 तो गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के 45 प्रत्याशी मैदान में हैं।

सीधा मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि सीधा मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही है, लेकिन बसपा की उम्मीदों को दो कारणों से सांसें मिल रही हैं। पहली बात तो यह कि 2018 के विधानसभा चुनाव में दस हजार से कम वोटों के अंतर से हार-जीत वाली सीटों में से लगभग 90 ऐसी थीं, जिन पर बसपा और जीजीपी कई पर तीसरे और कुछ पर दूसरे स्थान पर रहीं। इसके अलावा इस बार बसपा ने भाजपा और कांग्रेस के कई ऐसे बागियों को प्रत्याशी बनाया है, जिनका क्षेत्रीय राजनीतिक प्रभाव भी है।

बसपा लगभग दो दर्जन सीटों पर जीत की आस लगाए बैठी

दलित-आदिवासी वोटों का गठजोड़ और इन क्षेत्रीय प्रभाव वाले नेताओं के अपने वोट से बसपा लगभग दो दर्जन सीटों पर जीत की आस लगाए बैठी है। इसी आस के साथ उसने रणनीति बुनना भी शुरू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, यदि भाजपा या कांग्रेस पूर्ण बहुमत प्राप्त नहीं करती हैं और बसपा दस-पंद्रह सीटें जीत लेती है तो उसके बिना सरकार नहीं बन सकेगी। ऐसे में बसपा दोस्ती का हाथ कांग्रेस की ओर बढ़ाएगी, जैसा कि वह पहले भी कर चुकी है। वह कांग्रेस के साथ डील कर सकती है कि उसे मध्य प्रदेश की सत्ता में मजबूत भागीदारी दी जाए तो वह लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ उत्तर प्रदेश के लिए गठबंधन कर सकती है।




Bhopal News : कोलार में लाल के बाद नीले निशान की दहशत, खौफ और डर में रहवासी, जानें क्या है मामला

Bhopal News: After the red mark in Kolar, residents are in panic, fear and fear after the blue mark

घरों और दुकानों के बाहर नीले रंग से लगाए गए निशान

भोपाल के कोलार क्षेत्र में लाल निशान के बाद नीले निशान से दहशत का माहौल बना है। घर और दुकानों के बाहर लगे इन नीले निशान को देखकर हर कोई खौफ और डर में है। दरअसल कोलार सिक्स लेन रोड की जद में आ रहे कई निर्माणों को तोड़ा जाना है। एक साल पहले इन्हें चिंह्नित कर यहां लाल निशान लगाए गए थे। अब एक बार फिर यहां नीले निशान लगाए जा रहे हैं। घर और दुकान के बाहर लगाए जा रहे इन नीले निशानों ने यहां के रहवासी और कारोबारियों को टेंशन में ला दिया है।

यहां लगे निशान

पीडब्ल्यूडी की टीम ने बीमाकुंज से लेकर अनुपम अस्पताल और अनुपम अस्पताल से लेकर ललिता नगर तक दर्जनों मकान, दुकान और व्यावसायिक संस्थानों पर नीले निशान लगाने का काम किया है। एक साइड की रोड का काम लगभग पूरा हो गया है। अब दूसरी साइड का काम किया जाना है। ऐसे में अतिक्रमण हटाने के लिए ये निशान लगाए जा रहे हैं।

कलेक्टर के दौरे के बाद आई तेजी

बता दें, कलेक्टर आशीष सिंह ने शुक्रवार को कोलार सिक्स लेन रोड के निर्माण कार्य का मुआयना किया था। उन्होंने कार्य में तेजी लाने के निर्देश भी दिए थे। उनके इस दौरे के बाद से ही यहां पर काम में गति देखने को मिल रही है। पीडब्ल्यूडी विभाग हरकत में आ गया है। विभाग ने ही कलेक्टर को यह जानकारी दी थी कि अवैध अतिक्रमण न हटाए जाने के कारण ही काम अपनी रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है।

तनाव में लोग

इधर, लोगों के चेहरे पर तनाव देखा जा रहा है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा बिना नोटिस के इस तरह संपत्तियों पर नीले निशान लगाना गलत है, इससे लोग भयभीत हो रहे हैं। एक साल पहले भी ऐसे ही बिना किसी जानकारी के लोगों के घर और दुकानों के बाहर लाल निशान लगा दिए गए थे। वहीं, लोक निर्माण विभाग इसे रूटीन कार्रवाई बता रहा है, विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हम अपना काम कर रहे हैं आगे अतिक्रमण हटाने को लेकर नगर निगम और प्रशासन कार्रवाई करेगा।

चुनाव में मिली थी राहत

बताया जा रहा है कि अतिक्रमण हटना पहले से तय था लेकिन विधानसभा चुनाव के चलते इस काम को टाल दिया गया था। ताकि माहौल न बिगड़े। अब चुनाव में मतदान होते ही रोड निर्माण के लिए प्रशासन ने सख्ती दिखाना शुरू कर दिया है। कांग्रेस बीजेपी भी रोड को लेकर राजनीति करते रहे हैं। लेकिन जनता को कोई परमानेंट सॉल्यूशन नहीं मिल पाया।

लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री अवनींद्र सिंह ने कहा कि करीब एक साल पहले सड़क के दायरे में आने वाले निर्माणों पर लाल निशान लगाए गए थे। अब लोक निर्माण विभाग ने कोलार सिक्स लेन निर्माण के लिए जरूरी जगह को लेकर नपती करके नीले रंग से निशान लगाए हैं। जल्द ही आगे की कार्रवाई नगर निगम और जिला प्रशासन करेगा।




Bhopal:एनजीटी की सख्ती के बाद हरकत में जिला प्रशासन, ग्रीन बेल्ट से एक दिन में हटाए 138 अतिक्रमण – Bhopal: 138 Encroachments Removed From Green Belt In One Day

Bhopal: 138 encroachments removed from green belt in one day

भोपाल में ग्रीन बेल्ट से अतिक्रमण हटाए गए।
– फोटो : सोशल मीडिया

ग्रीन बेल्ट पर हुए अतिक्रमण पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है। जिला प्रशासन ने शनिवार को कार्रवाई करते हुए ग्रीन बेल्ट से एक ही दिन करीब 138 अतिक्रमण हटाए। इस कार्रवाई के अंतर्गत राजधानी में आशाराम बापू चौराहा से आईटी पार्क बैरागढ़, 11 मिल बाईपास , नीलबड़ बरखेड़ा नाथू रोड ,खजूरी बायपास और साकेत नगर सेक्टर में ग्रीन बेल्ट एरिया से अतिक्रमण हटाने का कार्य संबंधित एसडीएम, पुलिस एवं नगर निगम ने किया।

यहां से हटाया इतना अतिक्रमण

जिला प्रशासन ने आसाराम बापू से आईटी चौराहा से 70 अतिक्रमण हटाय गए। वहीं 11 मिल बाईपास पर 28 अतिक्रमण हटाय गए। नीलबड़ बरखेड़ा नाथू रोड पर लगभग 15 अतिक्रमण हटाए गए। खजूरी बायपास और साकेत नगर 2सी सेक्टर से लगभग 25 अतिक्रमण हटाय गए। इस दौरान कार्रवाई में संबंधित एसडीएम, नगर निगम अमला, पुलिस, पीडब्ल्यूडी एवं सीपीए के अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।

692 लोकेशन पर अतिक्रमण

एनजीटी ने भोपाल ग्रीन बेल्ट एरिया की 692 लोकेशनों से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। इस पर भोपाल कलेक्टर आशीष सिंह ने संबंधित विभागों की बैठक लेकर एनजीटी द्वारा निर्देशित लोकेशनों से अतिक्रमण हटाने के संबंध में चर्चा कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इस दौरान डीएफओ आलोक पाठक, नगर निगम आयुक्त फ़्रेंक नोबल ए, एडीएम हरेन्द्र नारायण सहित वनविभाग, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, सीपीए सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे थे।

ये भी दिए निर्देश

कलेक्टर आशीष सिंह ने नगर निगम को निर्देशित किया है कि पिछले पांच वर्षों में उनके द्वारा कमर्शियल निर्माण की जितनी अनुमति दी गई है एवं भविष्य में दी जानी है उनमें पार्किंग व्यवस्था का निरीक्षण करवाएं और यह सुनिश्चित किया जाए कि पार्किंग स्पेस पार्किंग के लिए ही उपयोग हो। साथ ही यह भी देखा जाये कि सभी कमर्शियल निर्माण में पार्किंग प्रोविजन अनिवार्य है इसी के बाद अनुमति दी जाए। उल्लंघन करने वालों पर नियमानुसार एक्शन लिया जाए।




Bhopal News : अब नहीं जलेगी तंदूर भट्टी, स्वच्छ हवा के लिए सड़क पर उतरे कलेक्टर

Collectors took to the streets of Bhopal for clean air

स्वच्छ हवा के लिए सड़क पर उतरे कलेक्टर

अगर आप तंदूरी रोटी के शौकीन हैं तो अब आप को इसका स्वाद चखने नहीं मिलेगा। भोपाल में बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। होटलों, रेस्टोरेंट, शादी फंगशन में जलने वाली तंदूर भट्टी के प्रयोग पर रोक लगा दी गई है। तन्दूर की भट्टी जलाने पर अब चालानी कार्रवाई की जायेगी। इसके लिए लगभग 18 स्थानों को चिन्हित भी किया है। जी हां, इतना ही नहीं वायु प्रदूषण को रोकने के लिए कलेक्टर आशीष सिंह ने सड़क पर खुद मोर्चा संभाल लिया है। बुधवार को उन्होंने PUC (प्रदोषण की जांच) करने वाली गाड़ियों की जांच की। गड़बड़ी मिलने पर उन्होंने सख्त कार्यवाही की बात कही है।

लगेगा 5 हजार का जुर्माना

कमर्शियल वाहन में अगर PUC सार्टिफिकेट नहीं होने पर 5 हज़ार रुपए का जुर्माना भरना होगा। इसके साथ खुले में कचरा जलाने पर भी स्पॉट फाइन लगाया जाएगा। निर्माण वाली जगहों पर ग्रीन नेट लगाना अनिवार्य किया गया है। नगर निगम को फॉगिंग के निर्देश दिए गए हैं। भोपाल में सभी पेट्रोल पंप पर PUC की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।