Madhya Pradesh News:बांधवगढ़ में बाघ की मौत बनी रहस्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुए चौंकाने वाले खुलासे

उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पनपथा बफर क्षेत्र स्थित खेरवा टोला में एक घर के भीतर मृत मिले नर बाघ की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरे मामले को और अधिक रहस्यमय बना दिया है। 24 मई 2026 को मिले इस बाघ का पोस्टमार्टम 25 मई को तीन वन्यजीव चिकित्सकों के विशेष पैनल द्वारा किया गया। इस दौरान राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के प्रतिनिधि, एसडब्ल्यूएफएच जबलपुर के डायरेक्टर तथा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार बाघ की शारीरिक स्थिति मौत से पहले ही बेहद खराब हो चुकी थी। जांच में उसकी मांसपेशियां पीली और सूखी मिलीं, त्वचा खुरदरी और बेजान दिखाई दी तथा पाचन तंत्र पूरी तरह खाली पाया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि ये संकेत लंबे समय से भूख, कमजोरी अथवा किसी गंभीर आंतरिक बीमारी की ओर इशारा करते हैं।

डार्ट को लेकर उठे नए सवाल

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण और चौंकाने वाला पहलू बाघ के शरीर पर मिले डार्ट के निशान को लेकर सामने आया है। चिकित्सकों ने बाघ के दाहिने कंधे पर डार्ट का निशान मिलने की पुष्टि की, लेकिन वहां किसी प्रकार का रक्तस्राव नहीं पाया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति इस बात का संकेत हो सकती है कि डार्ट बाघ की मृत्यु के बाद लगाया गया था। इस खुलासे के बाद पूरे घटनाक्रम को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। अब यह चर्चा का विषय बन गया है कि बाघ की मौत पहले हुई या रेस्क्यू प्रक्रिया बाद में शुरू की गई।

कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेल्योर से मौत की आशंका

पोस्टमार्टम के दौरान बाघ के विभिन्न महत्वपूर्ण अंगों में कंजेस्टिव और हेमरेजिक परिवर्तन पाए गए, जो रक्त संचार प्रणाली में गंभीर गड़बड़ी की ओर संकेत करते हैं। चिकित्सकों और विशेषज्ञों की प्रारंभिक राय के अनुसार बाघ की मौत कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेल्योर यानी हृदय और श्वसन तंत्र के अचानक काम करना बंद कर देने के कारण हुई हो सकती है।
हालांकि यह केवल प्रारंभिक निष्कर्ष है और अंतिम कारणों की पुष्टि अभी बाकी है।

अंतिम रिपोर्ट का इंतजार

वन विभाग ने अभी तक बाघ की मौत को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष जारी नहीं किया है। पोस्टमार्टम के दौरान लिए गए विभिन्न जैविक नमूनों को बीमारी, आंतरिक संक्रमण, विषाक्तता, तनाव अथवा अन्य संभावित कारणों की जांच के लिए मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में भेजा गया है।

अधिकारियों का कहना है कि प्रयोगशाला रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट रूप से सामने आ सकेगी।

ग्रामीणों में दहशत, सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज

खेरवा टोला में बाघ की मौत के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों में अब भी दहशत का माहौल बना हुआ है। वहीं सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं और अटकलें लगाई जा रही हैं।
वन विभाग ने बताया कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पोस्टमार्टम से लेकर अंतिम संस्कार तक की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई गई है, ताकि भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में प्रमाण उपलब्ध रह सकें।

बड़ा सवाल: आखिर बस्ती तक कैसे पहुंचा जंगल का राजा?

बांधवगढ़ में हुई यह घटना अब केवल एक बाघ की मौत का मामला नहीं रह गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जंगल का राजा कही जाने वाली यह दुर्लभ प्रजाति इतनी कमजोर और बदहाल स्थिति में इंसानी बस्ती तक कैसे पहुंच गई। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना की गहन जांच से जंगल में बाघों के स्वास्थ्य, भोजन उपलब्धता और उनके व्यवहार से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर रोशनी पड़ सकती है।
फिलहाल सभी की निगाहें प्रयोगशाला रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस रहस्यमयी मौत के पीछे की सच्चाई उजागर कर सकती है।




Umariya News : घुनघुटी में हाई स्कूल बस्ती तक पहुंचा बाघ, ग्रामीणों में दहशत

वन विभाग ने दी सतर्कता की सलाह, ग्रामीणों ने उठाई निगरानी और स्थायी समाधान की मांग

उमरिया (पाली)। पाली क्षेत्र अंतर्गत घुनघुटी गांव में उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक बाघ ने रिहायशी इलाके की ओर रुख कर लिया। मंगलवार सुबह हाई स्कूल बस्ती के पास बाघ को खुलेआम घूमते देखा गया, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग बाघ को देखने के लिए मौके पर पहुंच गए, जिससे कुछ समय के लिए स्थिति अराजक हो गई।

ग्रामीणों के अनुसार, हाई स्कूल के पास रहने वाले कुछ लोगों ने बाघ को सड़क पार करते हुए देखा। सूचना गांव में तेजी से फैली और दर्जनों लोग बस्ती के पास एकत्र हो गए। इस दौरान कई लोगों ने मोबाइल से वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। सौभाग्यवश, बाघ किसी को नुकसान पहुंचाए बिना जंगल की ओर लौट गया, लेकिन उसकी मौजूदगी ने ग्रामीणों के मन में भय गहरा कर दिया है।

घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। घुनघुटी के वन परिक्षेत्र अधिकारी अर्जुन सिंह ने बताया, “बाघ कुछ समय के लिए हाई स्कूल बस्ती के आसपास देखा गया था, लेकिन वह वापस जंगल की ओर लौट गया। यह क्षेत्र बाघों की नियमित आवाजाही वाला है और पूर्व में भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं।”

उन्होंने ग्रामीणों से अफवाहों पर ध्यान न देने और बाघ के पास जाने से बचने की अपील की। साथ ही विभाग ने गांव में मुनादी कराई कि लोग विशेष रूप से सुबह और शाम अकेले घरों से बाहर न निकलें। बच्चों को स्कूल भेजते समय सतर्कता बरतने के निर्देश भी दिए गए हैं।

घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से स्थायी समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि रिहायशी इलाकों के पास कैमरा ट्रैप लगाए जाएं ताकि बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। इसके अलावा, क्षेत्र में नियमित गश्त बढ़ाने और तत्काल अलर्ट सिस्टम स्थापित करने की भी मांग उठी है।

फिलहाल वन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है और बाघ की मूवमेंट पर नजर रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।




Bandhavgarh Tiger Reserve : बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघिन ने फिर मचाया उत्पात, महिला की मौत, ग्रामीण भयभीत

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के मानपुर बफर क्षेत्र में शुक्रवार सुबह एक बाघिन के हमले में 40 वर्षीय महिला की मौत हो गई। मृतका की पहचान राखी गांव निवासी गल्ली यादव के रूप में हुई है। बताया गया कि महिला शौच के लिए भितरी नाले की ओर गई थी, तभी झाड़ियों में छिपी बाघिन ने उस पर अचानक हमला कर दिया। ग्रामीणों के मौके पर पहुंचने तक महिला की मौत हो चुकी थी।

इलाके में फैली दहशत

घटना के बाद क्षेत्र में भारी दहशत का माहौल है। वन अमले ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। मानपुर रेंज के रेंजर मुकेश अहिरवार ने बताया कि पगमार्क से हमलावर बाघिन की पहचान की जा रही है। इसके लिए हाथी दल की मदद से सघन सर्च अभियान चलाया जा रहा है। इलाके में गश्त बढ़ा दी गई है और कई सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।

वन विभाग की सुरक्षा सलाह

ग्रामीणों को जंगल में अकेले न जाने की हिदायत वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अकेले जंगल की ओर न जाएं और शौच या लकड़ी काटने जैसी गतिविधियों के लिए समूह में ही निकलें। गांव के पास चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए हैं ताकि लोग सतर्क रहें।

इस साल बांधवगढ़ में 10वीं बार हुई टकराव की घटना

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में इस साल अब तक 10 बार मानव-वन्यजीव टकराव हो चुका है। 12 फरवरी से 6 जून के बीच 4 लोग मारे गए हैं और 8 लोग घायल हुए हैं। पनपथा रेंज में सबसे ज्यादा 4 हमले हुए हैं, पतौर में 3, धमोखर में 2 और मानपुर में यह पहली घटना है। यह हमला ताला कोर रेंज की सीमा के पास हुआ, जिससे बाघिन के कोर से बफर क्षेत्र में आने की आशंका जताई जा रही है।

लगातार हमलों से ग्रामीणों में डर और गुस्सा दोनों बढ़ गया है। वे वन विभाग से उचित मुआवजा और बेहतर सुरक्षा उपायों की मांग कर रहे हैं। साथ ही, क्षेत्र में शौचालय निर्माण और बाघों की निगरानी के लिए ट्रैकिंग डिवाइस लगाने की भी मांग उठ रही है। वन विभाग अब बाघिन को पहचानकर पकड़ने की चुनौती का सामना कर रहा है ताकि आगे की घटनाओं को रोका जा सके।




Bandhavgarh Tiger Reserve : बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में नियमों की धज्जियां उड़ाई

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में रविवार को पर्यावरण संरक्षण और पर्यटकों की सुरक्षा से जुड़ी गंभीर लापरवाही सामने आई। पनपथा जोन के पचपेड़ी गेट पर सफारी नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया गया। एक बिना अनुमति और पंजीकरण के जिप्सी वाहन ने न केवल निर्धारित रूट को छोड़ा, बल्कि पर्यटकों को जंगल के भीतर उतारकर घुमाया भी।

जानकारी के अनुसार यह जिप्सी अवैध रूप से बिरुहली की दिशा से पनपथा जोन के अंदर प्रवेश कर गई। न तो वाहन पर रोस्टर नंबर था और न ही कोई पंजीकरण विवरण अंकित था। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पचपेड़ी गेट पर वाहन की कोई एंट्री दर्ज नहीं पाई गई। जिससे स्पष्ट होता है कि यह गाड़ी नियमों को ताक पर रखकर भीतर लाई गई थी।

रिजर्व क्षेत्र में तीन कोर और दो बफर जोन हैं, जहां वन्यजीवों की नियमित आवाजाही होती है। खासकर बाघ और जंगली हाथी जैसे खतरनाक जानवर इन क्षेत्रों में अकसर देखे जाते हैं। ऐसे में इस तरह से पर्यटकों को बीच जंगल में उतारना उनकी जान को जोखिम में डालने जैसा है।

घटना के समय पनपथा बफर जोन की गश्ती टीम मौके पर मौजूद थी, फिर भी न तो उन्होंने वाहन को रोका और न ही किसी तरह की पूछताछ की। यह लापरवाही न सिर्फ प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। इस पूरी घटना का वीडियो मौजूद पर्यटकों ने अपने मोबाइल कैमरे से रिकॉर्ड किया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इससे न सिर्फ बांधवगढ़ की छवि धूमिल हो रही है, बल्कि यह भी जाहिर हो रहा है कि पर्यटकों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि जिप्सी के बारे में जानकारी मिल चुकी है और जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि दोषियों की पहचान होते ही सख्त कार्रवाई की जाएगी।




Umaria Bandhavgarh Tiger Reserve : गर्मियों में गिद्धों की संख्या बढ़ी, गिद्धों की संख्या 246, 124 घोंसले

उमरिया जिले में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की वादियों में इन दिनों गिद्धों की गूंज सुनाई दे रही है। मंगलवार को यहां ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना के दौरान कुल 246 गिद्धों की मौजूदगी दर्ज की गई, जो जैव विविधता के लिहाज से बेहद सकारात्मक खबर है। साथ ही कुल 124 गिद्धों के घोंसलों की पहचान भी हुई, जो यह दर्शाता है कि यह इलाका गिद्धों के सुरक्षित और अनुकूल आवास के रूप में विकसित हो रहा है।

यह गणना रिजर्व के नौ प्रमुख परिक्षेत्रों ताला, मगधी, खितौली, कल्लवाह, पतौर, पनपथा कोर, पनपथा बफर, मानपुर और धमोखर में की गई। इनमें ताला परिक्षेत्र सबसे खास रहा, जहां सर्वाधिक 139 देशी गिद्ध पाए गए। यहीं की पहाड़ियों में 121 घोंसलों की उपस्थिति ने इसे गिद्धों का मुख्य आश्रय क्षेत्र साबित कर दिया।

गणना के दौरान चार से अधिक गिद्ध प्रजातियों की पहचान की गई, जिनमें देशी गिद्ध, सफेद गिद्ध, सफेद पीठ गिद्ध, राज गिद्ध और चमर गिद्ध प्रमुख हैं। यह विविधता दर्शाती है कि बांधवगढ़ न केवल बाघों के लिए बल्कि संकटग्रस्त पक्षियों के लिए भी एक मजबूत शरण स्थली बनता जा रहा है। क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि इस बार की गणना में वयस्क और अवयस्क दोनों तरह के गिद्ध देखे गए हैं, जो उनकी जनसंख्या में प्राकृतिक वृद्धि का संकेत है। यह संकेत करता है कि यहां की पारिस्थितिकीय व्यवस्था गिद्धों के प्रजनन और जीवन चक्र के लिए उपयुक्त है।

गणना का मुख्य उद्देश्य गिद्धों की संख्या में मौसमी बदलाव को समझना था, ताकि यह जाना जा सके कि तापमान, वर्षा या अन्य मौसमी कारक इनके जीवन पर कोई नकारात्मक प्रभाव तो नहीं डाल रहे। खासकर गर्मी के मौसम में गिद्धों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि उनके लिए जल स्रोत, भोजन और घोंसले बनाने के लिए सुरक्षित स्थान पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।

ज्ञात हो कि गिद्धों की आबादी में विगत वर्षों में भारी गिरावट देखी गई थी, जिसका मुख्य कारण डाइक्लोफेनेक जैसी औषधियों का उपयोग था। ऐसे में बांधवगढ़ में इनकी संख्या में यह वृद्धि संरक्षण प्रयासों की सफलता का परिचायक है। बांधवगढ़ की यह गिद्ध गणना न केवल वैज्ञानिकों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए उत्साहजनक है, बल्कि जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणास्पद कदम भी मानी जा रही है।




Umaria News : बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में चीतल का शिकार करने वाले शिकारी गिरफ्तार, तीन आरोपी अभी भी फरार

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व अंतर्गत खितौली रेंज के छिपियाडॉड क्षेत्र में चीतल के शिकार की एक गंभीर घटना प्रकाश में आई है। वन विभाग की सक्रियता के चलते तीन आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि तीन अन्य आरोपी फरार हैं। विभाग ने उनके खिलाफ तलाश अभियान तेज कर दिया है।

यह घटना खितौली रेंज के आरएफ 380 क्षेत्र, बीट डोभा के जंगल में घटित हुई। पकड़े गए आरोपियों की पहचान गोरेलाल बैगा, राममिलन बैगा और दिनेश बैगा के रूप में हुई है, जो सभी गढ़पुरी गांव के निवासी हैं। आरोप है कि आरोपियों ने क्लच वायर से फंदा बनाकर एक चीतल का शिकार किया और उसे जंगल में ही काटकर उसके मांस को घर ले गए। इस जघन्य कृत्य से वन्यजीव संरक्षण कानून का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है।

वन विभाग को जब घटना की सूचना मिली तो तत्काल एक टीम घटनास्थल पर पहुंची। जांच के दौरान टीम को जंगल में रक्तरंजित ठूंठ, चीतल का सिर और शिकार में इस्तेमाल किया गया क्लच वायर का फंदा मिला। साक्ष्यों के आधार पर वन विभाग ने आरोपियों के खिलाफ वन अपराध प्रकरण क्रमांक 1674/25 के तहत मामला दर्ज किया। गिरफ्तार आरोपियों को 28 अप्रैल को न्यायालय उमरिया में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। फरार तीन अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए वन विभाग की टीम संभावित इलाकों में लगातार दबिश दे रही है। विभाग का कहना है कि जल्द ही शेष आरोपियों को भी पकड़ लिया जाएगा।

इस संपूर्ण कार्रवाई में परिक्षेत्र अधिकारी खितौली एवं पतौर, परिक्षेत्र सहायक गढ़पुरी, बीटगार्ड डोभा, रंछा, गढ़पुरी, उमरिया बकेली सहित अन्य वनकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विभागीय अधिकारियों ने जानकारी दी कि आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाया जा सके।




Umaria News : बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघिन के हमले से वनकर्मी घायल

उमरिया में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के आरएफ 428, बीट पनपथा, रेंज पतौर में रविवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई जब सामूहिक पैदल गश्त के दौरान एक बाघिन ने अचानक हमला कर दिया। झाड़ियों में छिपी बाघिन ने वनकर्मी रामसुहावन चौधरी पर झपट्टा मारा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। तत्काल घायल वनकर्मी को जिला अस्पताल उमरिया में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है।

घटना के बाद गश्त कर रहे अन्य वनकर्मियों को तत्काल उस क्षेत्र से हटा लिया गया। वर्तमान में बाघिन की निगरानी के लिए हाथियों की मदद ली जा रही है, ताकि किसी और अप्रिय घटना को टाला जा सके। यह वही बाघिन है, जिसने कुछ दिन पहले कुशमाहा गांव के दो ग्रामीणों पर भी हमला किया था। उन हमलों के बाद ग्रामीणों ने आक्रोशित होकर पनपथा बैरियर पर जाम लगा दिया था और बाघिन को इलाके से हटाने की मांग की थी। प्रबंधन ने उस समय हाथियों की सहायता से बाघिन को अस्थायी तौर पर खदेड़ दिया था, लेकिन ग्रामीण बाघिन को स्थायी रूप से अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन प्रबंधन ने बाघिन को शिफ्ट करने की अनुमति पीसीसी वाइल्डलाइफ से मांगी थी। इसके साथ ही बाघिन को लगातार 2 से 3 दिनों तक ट्रैक भी किया जा रहा था, ताकि स्थानांतरण के दौरान गलती से किसी अन्य बाघ को न पकड़ा जाए। हालांकि, रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू होने से पहले ही बाघिन ने गश्ती दल पर हमला कर दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में एक बार फिर दहशत का माहौल बन गया है। घायल रामसुहावन चौधरी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के स्थाई वनकर्मी बताए जा रहे हैं, जिनकी स्थिति अभी स्थिर है।

प्रबंधन ने घटना के बाद प्रभावित क्षेत्र में गश्त पर रोक लगा दी है और स्थिति सामान्य होने तक हाथियों के माध्यम से निगरानी जारी रखने का निर्णय लिया है। साथ ही, बाघिन के स्थायी रेस्क्यू एवं सुरक्षित स्थानांतरण के लिए उच्च स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। ग्रामीणों की चिंता को देखते हुए जल्द ही बाघिन को सुरक्षित तरीके से शिफ्ट करने के प्रयास तेज किए जाएंगे, ताकि मानव-बाघ संघर्ष को रोका जा सके और दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।




Umaria News : बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघिन ने किया सांभर का शिकार

मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में स्थित विश्वप्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक बेहद रोमांचक और हैरान कर देने वाला दृश्य देखने को मिला, जिसने पर्यटकों को दांतों तले उंगलियां दबाने पर मजबूर कर दिया। रिजर्व के ताला जोन के चक्रधरा क्षेत्र में एक बाघिन ने झाड़ियों से निकलकर नाले में पानी पी रहे सांभर पर झपट्टा मारा और उसे शिकार बना जंगल की ओर चली गई। यह पूरा दृश्य पर्यटकों के कैमरे में कैद हो गया और अब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
बताया जा रहा है कि यह सिद्ध बाबा फीमेल बाघिन थी, जिसकी उम्र करीब सात वर्ष है। यह बाघिन ताला जोन के चक्रधरा क्षेत्र में अक्सर अपने शावकों के साथ देखी जाती है। पर्यटक जब जंगल सफारी के दौरान ताला जोन की प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों का दीदार कर रहे थे, उसी दौरान उन्होंने नाले के पास झाड़ियों में बाघिन को बैठा देखा। नाले में एक झुंड सांभरों का पानी पी रहा था। कुछ ही पलों में बाघिन ने झाड़ियों से छलांग लगाई और तेज रफ्तार से सांभर पर झपट पड़ी। उसने एक सांभर को अपने मजबूत जबड़ों में दबोच लिया और शिकार को लेकर जंगल की ओर रवाना हो गई।

इस अद्भुत और रोमांचक दृश्य को देखकर पर्यटक स्तब्ध रह गए। कई पर्यटकों ने इस घटना का वीडियो बनाया जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस दुर्लभ दृश्य को देखने का सौभाग्य बहुत कम पर्यटकों को मिलता है, और यह उनके लिए जीवनभर की अविस्मरणीय स्मृति बन गया।

गौरतलब है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 165 से अधिक बाघ और बाघिनें हैं। यहां का ताला जोन पर्यटकों के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय है, जहां अक्सर बाघ और अन्य वन्यजीवों की सीडिंग होती रहती हैं। बाघिनों की मौजूदगी और उनके शावकों का प्राकृतिक वातावरण में विचरण पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इस घटना से साफ है कि बांधवगढ़ की जैव विविधता और वन्यजीवों का स्वाभाविक व्यवहार पर्यटकों को रोमांच और आश्चर्य से भर देता है। ऐसी घटनाएं न सिर्फ वन्यजीव संरक्षण के महत्व को दर्शाती हैं, बल्कि लोगों को प्रकृति से जुड़ने का भी अवसर प्रदान करती हैं।