Betul News : बैतूल में स्कूल वैन–जीप की टक्कर, KG की छात्रा की मौत, 11 बच्चे घायल
written by Denva Post Bureau | 22/01/2026
परिवार का आरोप: जर्जर वैन और क्षमता से अधिक बच्चों की अनदेखी बनी हादसे की वजह
बैतूल | मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में बुधवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में किंडरगार्टन की एक छात्रा की मौत हो गई, जबकि 11 अन्य स्कूली बच्चे घायल हो गए। हादसा जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर गुड़गांव गांव में सुबह करीब 9 बजे हुआ।
भैंसदेही सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर (SDOP) भूपेंद्र सिंह मौर्य के अनुसार, पूर्णा नदी के पास स्थित एक गैस गोदाम के सामने सामने से आ रही एक जीप ने एक निजी स्कूल की वैन को टक्कर मार दी। इस हादसे में KG-2 में पढ़ने वाली पांच वर्षीय छात्रा हर्षिता पाटनकर की मौके पर ही मौत हो गई।
उन्होंने बताया कि हादसे में गंभीर रूप से घायल चार बच्चों और स्कूल वैन के चालक को बैतूल जिला अस्पताल रेफर किया गया है, जबकि अन्य घायल बच्चों को भैंसदेही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। सभी घायलों का इलाज जारी है।
स्कूल वैन में सवार बच्चे रजनी, थेमगांव और गुड़गांव गांवों के निवासी बताए जा रहे हैं।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी जिला अस्पताल पहुंचे और घायलों की स्थिति की जानकारी लेकर उपचार व्यवस्था का जायजा लिया।
परिवार का गंभीर आरोप
मृत छात्रा के परिजन राजेश वरवाडे ने स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि स्कूल वैन की हालत काफी खराब थी और इसकी जानकारी पहले भी स्कूल मैनेजमेंट व शिक्षा विभाग को दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि वैन में उसकी निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया गया था, जिससे हादसे की गंभीरता बढ़ी।
कार्रवाई की मांग
पीड़ित परिवार ने स्कूल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हादसे के कारणों की विस्तृत पड़ताल की जा रही है।
यह हादसा एक बार फिर स्कूल वाहनों की सुरक्षा, फिटनेस और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
शहडोल–बुढ़ार हाईवे पर कोयला लदे ट्रक में भीषण आग, चालक ने कूदकर बचाई जान
written by Denva Post Bureau | 22/01/2026
शहडोल। शहडोल जिले के सोहागपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत शहडोल–बुढ़ार राष्ट्रीय राजमार्ग पर देर रात एक बड़ा हादसा सामने आया। धुरवार टोल प्लाजा के पास कोयले से भरे एक ट्रक की आगे चल रहे ट्रक से टक्कर हो गई। टक्कर के तुरंत बाद ट्रक के इंजन में आग लग गई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
बताया गया कि हादसे के समय ट्रक बुढ़ार से कटनी की ओर जा रहा था। टक्कर के बाद इंजन से उठती आग की लपटें देखकर चालक ने सूझबूझ का परिचय देते हुए तुरंत ट्रक से कूदकर अपनी जान बचा ली। इस घटना में ट्रक का इंजन पूरी तरह जल गया, हालांकि राहत की बात यह रही कि आग ट्रक में लदे कोयले तक नहीं पहुंच सकी।
टोल कर्मियों की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस और दमकल
घटना की जानकारी मिलते ही धुरवार टोल प्लाजा के कर्मचारियों ने पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी। इसके बाद पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया जाता तो कोयले में आग लगने से बड़ा हादसा हो सकता था।
कुछ समय तक बाधित रहा यातायात
आग लगने की घटना के कारण शहडोल–बुढ़ार राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुछ समय के लिए यातायात बाधित रहा और जाम की स्थिति बन गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर यातायात को नियंत्रित किया और हालात सामान्य कराए।
जांच में जुटी पुलिस
पुलिस के अनुसार, हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। फिलहाल इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। आग पर काबू पाने के बाद क्षतिग्रस्त ट्रक को सड़क से हटाया गया, जिसके बाद यातायात सुचारु रूप से बहाल हो सका।
तेज रफ्तार ट्रक ने ली महिला की जान, 12 वर्षीय बच्ची गंभीर — मुआवजा और कार्रवाई की मांग पर 7 घंटे ठप रहा शहर का यातायात
written by Denva Post Bureau | 22/01/2026
एक और सड़क हादसा, एक और जान गई—और उसके बाद वही परिचित दृश्य: रोते-बिलखते परिजन, आक्रोशित भीड़, घंटों तक बंद सड़क और अंत में प्रशासनिक आश्वासन। तेज रफ्तार ट्रक की टक्कर से महिला की मौत और 12 वर्षीय बच्ची सहित दो लोगों के घायल होने की यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि हमारे सड़क प्रबंधन, यातायात अनुशासन और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
हादसा अचानक नहीं था
जिस मार्ग पर यह दुर्घटना हुई, वह पहले से ही भारी वाहनों की आवाजाही और तेज रफ्तार के लिए कुख्यात रहा है। स्थानीय नागरिक लंबे समय से स्पीड ब्रेकर, चेतावनी संकेत और पुलिस निगरानी की मांग करते रहे हैं। इसके बावजूद सुरक्षा उपायों का अभाव बताता है कि प्रशासन तब तक सक्रिय नहीं होता, जब तक किसी की जान न चली जाए। यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि पहले ही आवश्यक कदम उठाए गए होते, तो क्या यह हादसा टल सकता था?
कानून का पालन नहीं
भारत में मोटर वाहन अधिनियम, ट्रैफिक नियम और भारी वाहनों के लिए अलग-अलग दिशा-निर्देश मौजूद हैं। फिर भी लापरवाही, ओवरस्पीडिंग और नियमों की अनदेखी आम बात बन चुकी है। ट्रक चालकों पर न तो प्रभावी निगरानी है और न ही नियमित प्रशिक्षण की सख्त व्यवस्था। कई मामलों में यह भी सामने आया है कि दुर्घटना के बाद चालक मौके से फरार हो जाते हैं, जिससे कानून की पकड़ और कमजोर नजर आती है।
चक्का जाम: मजबूरी या अराजकता?
मृतका के परिजनों द्वारा 7 घंटे तक किया गया चक्का जाम भी अपने आप में एक गंभीर सामाजिक संकेत है। यह दर्शाता है कि आम नागरिक को न्याय और मुआवजा पाने के लिए सड़क पर उतरना पड़ता है। सवाल यह नहीं कि चक्का जाम सही था या गलत, बल्कि यह है कि न्याय पाने का एकमात्र रास्ता विरोध प्रदर्शन क्यों बन गया है? यदि प्रशासनिक प्रक्रिया त्वरित और भरोसेमंद होती, तो शायद सड़क जाम जैसी स्थिति पैदा ही न होती।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
घटना के बाद पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचे, लेकिन घंटों तक लोगों को समझाने में असफल रहे। अंततः आश्वासन देकर ही स्थिति संभाली जा सकी। यह स्थिति बताती है कि प्रशासन की तैयारी केवल घटना के बाद प्रतिक्रिया तक सीमित है, न कि रोकथाम पर। हर बार मुआवजा और जांच का आश्वासन देकर मामला शांत कर दिया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव बहुत कम दिखाई देता है।
मासूमों पर सबसे बड़ा असर
इस हादसे में घायल 12 वर्षीय बच्ची का जिक्र सबसे ज्यादा पीड़ा देता है। सड़क हादसे सिर्फ आंकड़े नहीं होते, इनके पीछे टूटते परिवार और बचपन का छिन जाना होता है। गंभीर चोटों के बाद लंबा इलाज, मानसिक आघात और आर्थिक बोझ पूरे परिवार को वर्षों तक प्रभावित करता है। क्या हमारी व्यवस्था इन पीड़ितों के पुनर्वास के लिए पर्याप्त है? अक्सर जवाब नकारात्मक ही मिलता है।
समाधान क्या हो सकता है?
अब सवाल यह है कि ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति कैसे रोकी जाए। सबसे पहले, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां त्वरित सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं। भारी वाहनों की गति सीमा का सख्ती से पालन, सीसीटीवी निगरानी, और रात के समय विशेष गश्त जरूरी है। ट्रक चालकों के लिए नियमित मेडिकल जांच और प्रशिक्षण भी अनिवार्य किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही दुर्घटना के बाद तत्काल मुआवजा और पारदर्शी जांच प्रणाली विकसित करनी होगी, ताकि पीड़ित परिवारों को सड़क पर उतरने की जरूरत न पड़े। प्रशासनिक संवेदनशीलता केवल फाइलों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर दिखाई दे।
यह हादसा हमें याद दिलाता है कि सड़क दुर्घटनाएं केवल संयोग नहीं होतीं, बल्कि अक्सर लापरवाही और व्यवस्था की विफलता का परिणाम होती हैं। जब तक प्रशासन, कानून और समाज मिलकर सड़क सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लेते, तब तक ऐसे हादसे दोहराते रहेंगे। सवाल सिर्फ एक महिला की मौत का नहीं है, बल्कि उस सिस्टम का है जो हर बार जान जाने के बाद जागता है—और फिर कुछ समय बाद सब भूल जाता है।
भोपाल सड़क हादसा: VIP रोड पर KIA सेल्टोस कार ट्रक से टकराई, एयरबैग खुलने के बाद भी चालक की मौत
written by Deepak Sharma | 22/01/2026
एयरबैग खुलने के बावजूद नहीं बच सकी जान, मौके पर ही तोड़ा दम
भोपाल। राजधानी में रविवार रात वीआईपी रोड पर तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला। एक KIA सेल्टोस कार खड़े ट्रक से जा टकराई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
एयरबैग खुलने के बावजूद नहीं बची जान
हादसे में एयरबैग खुलने के बावजूद चालक की मौत हो गई। चश्मदीदों के अनुसार, युवक टक्कर के बाद लंबे समय तक कार में फंसा रहा। राहगीरों ने पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। स्थानीय लोगों की मदद से काफी मशक्कत के बाद युवक को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक वह दम तोड़ चुका था।
मृतक की पहचान नहीं
पुलिस ने बताया कि मृतक की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए हमीदिया अस्पताल की मोर्चरी भेज दिया गया है।
Bhopal News: नशे में रिक्शा चालक ने पलटा ई-रिक्शा, दो छात्राएं घायल
written by Denva Post Bureau | 22/01/2026
भोपाल के हबीबगंज थाना क्षेत्र में बिट्टन मार्केट स्थित पेट्रोल पंप के पास सोमवार दोपहर बड़ा हादसा टल गया। एक तेज रफ्तार इलेक्ट्रिक रिक्शा अनियंत्रित होकर पलट गया, जिसमें सवार दो स्कूली छात्राएं गंभीर रूप से घायल हो गईं। जांच में खुलासा हुआ कि रिक्शा चालक शराब के नशे में था।
कैसे हुआ हादसा
श्याम नगर मल्टी निवासी 10वीं की छात्रा पेपर देकर सहेली के साथ सात नंबर बस स्टॉप से रिक्शे में बैठी थी। रिक्शा चलने के कुछ ही देर बाद दोनों को शक हुआ कि चालक नशे में है। उन्होंने रिक्शा रोकने की कोशिश भी की, लेकिन चालक ने उनकी बात अनसुनी कर दी और रफ्तार बढ़ा दी। बिट्टन मार्केट के पेट्रोल पंप के सामने रिक्शा अनियंत्रित होकर पलट गया। दोनों छात्राएं गंभीर रूप से घायल हो गईं।
परिजनों और पुलिस की कार्रवाई
सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और छात्राओं को अस्पताल ले गए। जयप्रकाश अस्पताल से एक छात्रा को छुट्टी दे दी गई, जबकि दूसरी को गंभीर चोटों के चलते दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने आरोपी चालक पर्वत सिंह को गिरफ्तार कर मेडिकल कराया, जिसमें उसके नशे में होने की पुष्टि हुई। आरोपी पर एक्सीडेंट समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है।
सवालों के घेरे में व्यवस्था
यह हादसा केवल लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि भोपाल में ई-रिक्शा संचालन की अनियंत्रित व्यवस्था को भी उजागर करता है।
ई-रिक्शा चालकों की स्क्रीनिंग और लाइसेंसिंग पर सवाल : बिना पृष्ठभूमि जांच और नशे की मेडिकल जांच के लोग आसानी से रिक्शा चलाते दिखते हैं।
स्कूल बच्चों की सुरक्षा : नाबालिग छात्राओं का नशे में धुत चालक के हवाले होना अभिभावकों और पुलिस-प्रशासन दोनों के लिए गंभीर चेतावनी है।
नशे में वाहन चलाने की बढ़ती घटनाएं : राजधानी में शराबखोरी और सार्वजनिक परिवहन का मेल अब दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है।
एक ओर सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रदूषण मुक्त विकल्प के रूप में बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर उनके संचालन पर कोई कड़ा नियंत्रण न होना आमजन की सुरक्षा पर भारी पड़ रहा है। बिट्टन मार्केट का हादसा एक चेतावनी है कि यदि ई-रिक्शा चालकों की निगरानी, मेडिकल जांच और सख्त लाइसेंसिंग प्रणाली लागू नहीं की गई, तो अगली बार यह लापरवाही और बड़ी त्रासदी का रूप ले सकती है।
Nagpur News : पत्नी की सड़क हादसे में मौत, मदद न मिलने पर पति ने शव मोटरसाइकिल से घर ले गया
written by Denva Post Bureau | 22/01/2026
नागपुर-मध्य प्रदेश राजमार्ग पर देवलापार के पास एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। सड़क दुर्घटना में पत्नी की मौत के बाद, मदद न मिलने पर एक व्यक्ति को उसका शव मोटरसाइकिल पर बांधकर घर ले जाना पड़ा। यह घटना 10 अगस्त को हुई और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद व्यापक चर्चा का विषय बन गई।
पुलिस के अनुसार, नागपुर के पास लोनारा निवासी अमित बुमरा यादव (36) अपनी पत्नी ग्यार्शी यादव (35) के साथ मध्य प्रदेश के लखनादौन के करणपुर जा रहे थे। दोपहर करीब 2:30 से 3:00 बजे के बीच, देवलापार के पास एक अज्ञात वाहन ने उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। हादसे में ग्यार्शी की मौके पर ही मौत हो गई और अमित घायल हो गया।
तेज़ बारिश और आसपास से कोई मदद न मिलने के कारण, अमित ने अपनी पत्नी के शव को बाइक के पीछे बांधा और लोनारा लौटने लगा। रास्ते में पुलिस ने खुमारी टोल नाके पर उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन वह आगे बढ़ गया।
नागपुर शहर, ग्रामीण और राजमार्ग पुलिस के संयुक्त प्रयास से सवार को अंततः घर तक पहुंचाया गया। पुलिस ने मृतका के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। ग्रामीण एसपी हर्ष ए. पोद्दार के अनुसार, रिपोर्ट मिलने के बाद मामला दर्ज किया जाएगा। जांच की निगरानी अतिरिक्त एसपी अनिल म्हस्के कर रहे हैं।
यह घटना न केवल सड़क सुरक्षा, बल्कि दुर्घटना पीड़ितों को समय पर सहायता और आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
Indore News : मालवा मिल–पाटनीपुरा ब्रिज का काम अधूरा, सुरक्षा इंतज़ाम नदारद, हादसे में बाइक सवार घायल
written by Denva Post Bureau | 22/01/2026
इंदौर के व्यस्त मालवा मिल–पाटनीपुरा मार्ग पर निर्माणाधीन ब्रिज का काम तय समय से काफी पीछे चल रहा है। चार महीने में पूरा होने वाला यह पुल अभी तक 40% भी तैयार नहीं हुआ है। हालात इतने लापरवाह हैं कि ठेकेदार ने काम अधूरा छोड़ दिया है और मौके पर कोई सुरक्षा व्यवस्था भी नहीं की गई।
रविवार रात इसी लापरवाही के कारण एक दोपहिया वाहन चालक नाले में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय लोगों ने युवक को नाले से बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। दुर्घटना के समय ब्रिज के आसपास कोई बैरिकेड या चेतावनी संकेत नहीं लगे थे।
शहर के इस मार्ग का चौड़ीकरण चार साल पहले किया गया था, लेकिन उस समय जर्जर ब्रिज को नहीं बदला गया। सड़क 80 फीट चौड़ी हो गई, जबकि पुराना ब्रिज केवल 40 फीट का रहा। बढ़ते ट्रैफिक जाम के बाद नगर निगम ने ब्रिज को 100 फीट से अधिक चौड़ा बनाने का निर्णय लिया और ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया।
रहवासियों का कहना है कि पिछले दस दिनों से काम पूरी तरह बंद पड़ा है और अब तक केवल एक हिस्से की स्लैब डाली गई है। अनुमान है कि मौजूदा गति से काम पूरा होने में कम से कम आठ माह और लग सकते हैं। इस देरी से श्रमिक क्षेत्र, विजय नगर और सुखलिया की ओर जाने वाले यात्रियों को रोजाना जाम का सामना करना पड़ रहा है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का काफिला भी कई बार इसी कारण जाम में फंस चुका है।
झिरा घाटी में भीषण सड़क हादसा: कंटेनर की टक्कर से दो युवकों और दो गायों की मौके पर ही मौत, हाईवे पर मची अफरा-तफरी
written by Denva Post Bureau | 22/01/2026
सागर-नरसिंहपुर नेशनल हाईवे पर स्थित झिरा घाटी शनिवार को एक दिल दहला देने वाले हादसे की गवाह बनी। एक तेज़ रफ्तार कंटेनर ने सामने से आ रही मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी, जिससे बाइक सवार दो युवकों और पास में खड़ी दो गायों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि एक युवक का सिर धड़ से अलग हो गया और शवों को समेटने में पुलिस व राहगीरों को भारी मशक्कत करनी पड़ी।
हादसा सुबह करीब 11 बजे हुआ, जब कंटेनर सागर की ओर से नरसिंहपुर की ओर जा रहा था। झिरा घाटी के ढलान पर कंटेनर चालक ने वाहन पर से नियंत्रण खो दिया और सामने से आ रही बाइक को सीधी टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कंटेनर ने बाइक को करीब 15 फीट तक घसीटा और उसमें सवार युवक वाहन में फंस गए।
घटना के बाद हाईवे पर पीछे से आ रहे पांच अन्य वाहन — जिनमें एक हाईवा, एक पिकअप और दो कारें शामिल थीं — आपस में टकरा गए। इन टक्करों में एक महिला समेत दो लोग घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए तत्काल अस्पताल भेजा गया।
सूचना मिलते ही सुआतला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और यातायात नियंत्रित कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। थाना प्रभारी बीएल बनवारी ने बताया कि हादसे के बाद कंटेनर चालक वाहन लेकर भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उसे पकड़ लिया। फिलहाल चालक को हिरासत में लेकर आगे की पूछताछ की जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि झिरा घाटी में पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन अब तक न तो कोई चेतावनी संकेत लगाया गया है, न ही ट्रैफिक स्लो डिवाइस। लोगों ने प्रशासन से घाटी में स्पीड लिमिट और ट्रैफिक नियंत्रण के लिए ठोस उपायों की मांग की है।
Dehradun News : हरिद्वार: मनसा देवी मंदिर मार्ग पर भगदड़ में 8 श्रद्धालुओं की मौत, 35 घायल | मजिस्ट्रियल जांच के आदेश
written by Denva Post Bureau | 22/01/2026
हरिद्वार, उत्तराखंड | हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर की ओर जाने वाले पैदल मार्ग पर शनिवार सुबह एक दर्दनाक भगदड़ में आठ श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 35 लोग घायल हुए हैं। घायलों में 20 पुरुष, 8 महिलाएं और 7 बच्चे शामिल हैं। हादसा दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ अनियंत्रित होने के कारण हुआ।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मृतकों और घायलों की पहचान जारी कर दी है, हालांकि कुछ लोगों की पहचान अभी भी बाकी है।
मृतकों की सूची (पहचान किए गए नाम):
1. आरुष (12 वर्ष), पुत्र पंकज उर्फ प्रवेश, बरेली, उत्तर प्रदेश
2. शकल देव (18 वर्ष), पुत्र बेचन, अररिया, बिहार
3. विक्की (18 वर्ष), पुत्र रिक्का राम सैनी, रामपुर, उत्तर प्रदेश
4. विपिन सैनी (18 वर्ष), पुत्र रघुवीर सिंह सैनी, काशीपुर, उत्तराखंड
5. वकील, पुत्र भरत सिंह, बारांस्की, उत्तर प्रदेश
6. शांति, पत्नी रामभरोसे, बदायूँ, उत्तर प्रदेश
(अन्य दो मृतकों की पहचान जारी)
🏥 घायलों की प्रमुख सूची में शामिल हैं:
कृति (6 वर्ष), मोतिहारी, बिहार
आराधना (5.5 वर्ष), भागलपुर, बिहार
एकाक्षी (4 वर्ष), धामपुर, उत्तर प्रदेश
राज कुमार (14 वर्ष), मोतिहारी
निर्मला (30 वर्ष), बरेली
विनोद शाह (35 वर्ष), भागलपुर
सरकारी प्रतिक्रिया व राहत कार्य
उत्तराखंड सरकार ने हादसे पर दुख प्रकट किया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने:मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख घायलों को ₹50,000 की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।
मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने एम्स ऋषिकेश में भर्ती 14 गंभीर घायलों से मुलाकात की और कहा: “सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ पीड़ितों को सहायता दे रही है। विस्तृत जांच के बाद ही कोई निष्कर्ष निकाला जाएगा।”
हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में भगदड़, 6 श्रद्धालुओं की मौत, 15 घायल
written by Denva Post Bureau | 22/01/2026
भीड़ पर काबू न पाने से मचा हड़कंप, प्रशासन मौके पर मौजूद
हरिद्वार/उत्तराखंड। हरिद्वार के प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर में रविवार सुबह भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई। इस हृदयविदारक हादसे में 6 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 15 अन्य घायल हुए हैं। घटना उस समय हुई जब मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ एकत्र थी और व्यवस्थाएं चरमरा गईं।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मंदिर में रविवार सुबह दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ पर काबू नहीं पाया जा सका। अचानक धक्का-मुक्की शुरू हुई और देखते ही देखते स्थिति बेकाबू होकर भगदड़ में बदल गई।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है।
हरिद्वार जिला प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की है और हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। मंदिर प्रबंधन व सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि यह कोई पहला मौका नहीं है जब धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन को लेकर लापरवाही सामने आई हो।
फिलहाल, घायलों का इलाज चल रहा है और कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।