
ग्वालियर। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत अब शिक्षा जगत भी धीरे-धीरे स्वदेशी विकल्पों को अपना रहा है। इसी कड़ी में ग्वालियर स्थित राजा मानसिंह संगीत एवं कला विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध करीब 170 कॉलेजों में अब व्हाट्सएप की जगह ‘अरत्तई’ एप (arattai app) का उपयोग किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का यह निर्णय न केवल डिजिटल सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण है बल्कि यह भारतीय स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है।
आधिकारिक सूचना और दस्तावेज होंगे ‘अरत्तई’ पर
विश्वविद्यालय के कुलसचिव अरुण चौहान ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श के बाद आदेश जारी किया है कि संस्थान से जुड़े सभी आधिकारिक कार्य, सूचना का आदान-प्रदान, नोटिस, मीटिंग अपडेट्स और छात्रों से संवाद अब केवल अरत्तई एप (arattai app) के माध्यम से ही किया जाएगा।
- छात्रों और शिक्षकों के लिए अलग-अलग आधिकारिक ग्रुप बनाए जाएंगे।
- परीक्षा, प्रवेश और परिणाम से संबंधित जानकारी इसी एप पर साझा होगी।
- विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब किसी भी अन्य प्लेटफॉर्म (जैसे व्हाट्सएप, टेलीग्राम आदि) से साझा किए गए दस्तावेज मान्य नहीं होंगे।
छात्रों को मिलेगा नया डिजिटल अनुभव
राजा मानसिंह संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित 170 से अधिक महाविद्यालयों के हजारों छात्र-छात्राओं को अब इस स्वदेशी प्लेटफॉर्म (arattai app) पर लाया जाएगा। इससे न केवल सूचना साझा करने की प्रक्रिया अधिक संगठित होगी बल्कि छात्रों को भी भारतीय तकनीक पर भरोसा बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
क्या है ‘अरत्तई’ एप (arattai app)?
अरत्तई भारतीय आईटी कंपनी Zoho Corporation द्वारा वर्ष 2021 में लांच किया गया एक इंस्टेंट मैसेजिंग एप है।
- “अरत्तई” शब्द तमिल भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ है बातचीत या गपशप।
- यह एप व्हाट्सएप और टेलीग्राम का भारतीय विकल्प माना जाता है।
- इसमें टेक्स्ट मैसेजिंग, फोटो-वीडियो शेयरिंग, दस्तावेज भेजने, वॉइस और वीडियो कॉल की सुविधा उपलब्ध है।
- एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन फीचर इसे सुरक्षित और निजी संचार का भरोसा देता है।
- सबसे खास बात, अरत्तई (arattai app) का सर्वर भारत में स्थित है। इसका मतलब है कि उपयोगकर्ताओं का डेटा देश के बाहर नहीं जाता, जिससे साइबर सुरक्षा और प्राइवेसी को मजबूती मिलती है।
क्यों जरूरी है स्वदेशी मैसेजिंग (arattai app) एप?
भारत में बीते कुछ वर्षों में डेटा प्राइवेसी और विदेशी कंपनियों पर निर्भरता को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। व्हाट्सएप जैसी विदेशी कंपनियां भारतीय उपयोगकर्ताओं का विशाल डेटा अपने सर्वर पर स्टोर करती हैं, जो भारत के बाहर स्थित हैं।
ऐसे में “अरत्तई” जैसे भारतीय एप (arattai app) कई मायनों में लाभकारी साबित हो सकते हैं –
- डेटा लोकलाइजेशन: सभी जानकारी भारत के सर्वर में ही सुरक्षित रहेगी।
- सरकारी और शैक्षणिक संस्थानों के लिए भरोसा: संवेदनशील जानकारी सुरक्षित रहेगी।
- आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा: भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा का मौका।
- यूजर-फ्रेंडली फीचर्स: व्हाट्सएप जैसे सभी फीचर्स के साथ ही भारतीय भाषाओं का सपोर्ट।
ग्वालियर विश्वविद्यालय के निर्णय का महत्व
ग्वालियर स्थित यह विश्वविद्यालय मध्यप्रदेश का एकमात्र संगीत और कला शिक्षा संस्थान है। यहां देशभर से हजारों छात्र शास्त्रीय संगीत, नृत्य, नाटक और ललित कला की शिक्षा लेने आते हैं। ऐसे में अरत्तई (arattai app) को अपनाने का फैसला कई मायनों में अहम है।
- शैक्षणिक संचार का नया माध्यम : प्रशासन, शिक्षक और छात्र एक ही सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर जुड़े रहेंगे।
- डिजिटल इंडिया को बढ़ावा : प्रधानमंत्री के डिजिटल और आत्मनिर्भर भारत अभियान को प्रत्यक्ष समर्थन।
- युवाओं में जागरूकता : छात्रों को स्वदेशी तकनीक अपनाने की प्रेरणा।
अन्य विश्वविद्यालय भी कर सकते हैं अनुकरण
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्वालियर विश्वविद्यालय का यह कदम दूसरे शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी उदाहरण बनेगा। यदि देश के बड़े विश्वविद्यालय और सरकारी विभाग इस तरह के स्वदेशी एप्स को प्राथमिकता देंगे तो इससे –
- विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम होगी।
- भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी।
- छात्रों और युवाओं को भारतीय तकनीक पर गर्व महसूस होगा।
छात्रों और शिक्षकों की प्रतिक्रिया
विश्वविद्यालय के छात्रों का कहना है कि शुरुआत में उन्हें व्हाट्सएप छोड़कर नए एप पर जाना थोड़ा चुनौतीपूर्ण लगेगा, लेकिन लंबे समय में यह बदलाव सकारात्मक परिणाम देगा।
- छात्रों की राय: “हमें गर्व है कि हम स्वदेशी एप (arattai app) का उपयोग करेंगे। अब हमारी जानकारी देश के बाहर नहीं जाएगी।”
- शिक्षकों की राय: “यह बदलाव शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल अनुशासन लाएगा और आधिकारिक दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे।”
तकनीकी विशेषताएं (Features of Arattai)
- एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन – संदेश केवल भेजने और प्राप्त करने वाले तक सीमित।
- फोटो, वीडियो, ऑडियो और डॉक्यूमेंट शेयरिंग।
- ग्रुप चैट और ब्रॉडकास्ट मैसेज की सुविधा।
- वॉइस और वीडियो कॉलिंग।
- भारतीय भाषाओं का सपोर्ट – हिंदी, तमिल समेत कई क्षेत्रीय भाषाएं।
- डाटा स्टोरेज भारत में – विदेशी कंपनियों की तरह बाहर डेटा नहीं जाता।
- स्टिकर्स और कस्टम इमोजी – बातचीत को रोचक बनाने के लिए।
राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से अहम
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए भारत को अपने एप (arattai app) और तकनीक को बढ़ावा देना चाहिए।
- कई बार विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर डेटा लीक की घटनाएं सामने आई हैं।
- स्वदेशी एप को अपनाने से साइबर अटैक की आशंका घटेगी।
- सरकारी विभागों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए यह बदलाव अत्यंत आवश्यक है।
भविष्य की संभावनाएं
यदि यह प्रयोग सफल होता है, तो आने वाले समय में –
- मध्यप्रदेश के अन्य विश्वविद्यालय और शैक्षणिक संस्थान भी “अरत्तई” (arattai app) को अपनाएंगे।
- सरकारी विभागों, पंचायतों और न्यायालयों में भी इसका उपयोग शुरू हो सकता है।
- भारत एक मजबूत डिजिटल संचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करेगा, जो पूरी तरह स्वदेशी होगा।
निष्कर्ष
राजा मानसिंह संगीत एवं कला विश्वविद्यालय द्वारा अरत्तई एप (arattai app) को व्हाट्सएप की जगह अपनाने का निर्णय केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है।
- यह कदम छात्रों को सुरक्षित डिजिटल वातावरण देगा।
- भारतीय स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन मिलेगा।
- डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित को मजबूती मिलेगी।
इस निर्णय से निश्चित रूप से अन्य संस्थान भी प्रेरित होंगे और आने वाले वर्षों में भारत का डिजिटल संचार क्षेत्र पूरी तरह स्वदेशी विकल्पों पर आधारित हो सकता है।