72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: ‘श्रीकांत’ बनी सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म, निर्देशक तुषार हीरानंदानी बोले- ‘अब भी यकीन नहीं हो रहा’

मुंबई। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में अभिनेता राजकुमार राव अभिनीत फिल्म ‘श्रीकांत’ ने बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म (Best Hindi Film) का राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम किया है। इस सम्मान के बाद फिल्म के निर्देशक तुषार हीरानंदानी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें अब भी विश्वास नहीं हो रहा कि उनकी फिल्म को देश का सर्वोच्च फिल्म सम्मान मिला है।

“यह सम्मान हमारी पूरी टीम की मेहनत का परिणाम”

राष्ट्रीय पुरस्कार की घोषणा के बाद तुषार हीरानंदानी ने कहा कि यह सम्मान पूरी टीम की मेहनत और समर्पण का परिणाम है।

उन्होंने कहा, “मुझे अभी भी यकीन नहीं हो रहा कि हमारी फिल्म को देश का सबसे बड़ा सम्मान मिला है। हमारी फिल्म दूसरे बड़े पुरस्कारों में भी ज्यादा चर्चा में नहीं थी, ऐसे में राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना हमारे लिए बेहद खास है। इससे लगता है कि हमारी मेहनत सफल हुई।”

राजकुमार राव ने कहा- जन्मदिन का सबसे बड़ा तोहफा

फिल्म के मुख्य अभिनेता राजकुमार राव ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पुरस्कार की यह खबर उनके लिए जन्मदिन का सबसे बड़ा उपहार है।

उन्होंने कहा, “मैं तो अभी से जश्न मना रहा हूं। दो दिन पहले ही मेरा जन्मदिन था और इससे बेहतर तोहफा मुझे नहीं मिल सकता।”

पत्नी और माता-पिता को दिया सफलता का श्रेय

तुषार हीरानंदानी ने इस उपलब्धि का श्रेय अपनी पत्नी निधि परमार को दिया। उन्होंने बताया कि जब फिल्म को निर्माता नहीं मिल रहा था, तब उनकी पत्नी ने उनका पूरा साथ दिया और फिल्म को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि यह पुरस्कार वह अपने माता-पिता को समर्पित करना चाहते हैं।

“अगर मेरी पत्नी ने साथ नहीं दिया होता तो शायद यह फिल्म बन ही नहीं पाती। मैं यह पुरस्कार अपने माता-पिता को समर्पित करता हूं। अफसोस है कि वे ‘श्रीकांत’ देखने से पहले ही इस दुनिया से चले गए।”

दृष्टिहीन उद्योगपति श्रीकांत बोला के जीवन पर आधारित है फिल्म

वर्ष 2024 में रिलीज हुई ‘श्रीकांत’ एक प्रेरणादायक बायोपिक है, जो दृष्टिहीन उद्योगपति और बोलेंट इंडस्ट्रीज के संस्थापक श्रीकांत बोला के जीवन पर आधारित है।

फिल्म में राजकुमार राव ने श्रीकांत बोला की भूमिका निभाई है। वहीं ज्योतिका उनकी शिक्षिका और अलाया एफ उनकी साथी के किरदार में नजर आई हैं।

निर्देशक का कहना है कि यह एक वास्तविक जीवन की कहानी है और राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना इस बात का प्रमाण है कि फिल्म दर्शकों तक अपना संदेश प्रभावी ढंग से पहुंचाने में सफल रही।

आगे भी प्रेरणादायक फिल्में बनाना चाहते हैं

तुषार हीरानंदानी ने कहा कि उन्हें ऐसी फिल्में बनाना पसंद है जो समाज को सकारात्मक संदेश दें और लोगों को प्रेरित करें।

उन्होंने बताया कि ‘श्रीकांत’ को रिलीज हुए करीब दो वर्ष हो चुके हैं और वह अभी अपनी अगली फिल्म की पटकथा पर काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूं कि लोग मुझे ‘सांड की आंख’ और ‘श्रीकांत’ जैसी प्रेरणादायक फिल्मों के लिए याद रखें। भविष्य में भी मैं ऐसी ही सार्थक और सकारात्मक फिल्में बनाना चाहता हूं।”