शहीद दिवस पर गौरव यात्रा, पर शहादत का संदर्भ हुआ धुंधला

माखननगर | अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) द्वारा शहीद दिवस के अवसर पर नगर में महापुरुष गौरव यात्रा का आयोजन किया गया। इस दौरान नगर के प्रमुख मार्गों से तिरंगा यात्रा निकाली गई, जिसमें संगठन के कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थी भी शामिल रहे। हाथों में तिरंगा और नारों के साथ निकाली गई यह यात्रा प्रथम दृष्टया राष्ट्रप्रेम का संदेश देती दिखाई दी और इसे एक सराहनीय प्रयास माना गया।

लेकिन कार्यक्रम जैसे-जैसे आगे बढ़ा, वैसे-वैसे आयोजन की गंभीरता और उद्देश्य पर सवाल खड़े होने लगे। शहीद दिवस, जिसे 30 जनवरी को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के रूप में पूरे देश में मनाया जाता है, उसी दिन आयोजित इस कार्यक्रम में महात्मा गांधी का नाम लगभग पूरी तरह से नदारद रहा।

कार्यक्रम के दौरान मंच से दिए गए अधिकांश उद्बोधनों में वक्ता माखनलाल चतुर्वेदी की पुण्यतिथि का उल्लेख करते नजर आए। शहीद दिवस के ऐतिहासिक संदर्भ और उसके मूल उद्देश्य पर कोई स्पष्ट चर्चा नहीं की गई। यह स्थिति तब और चौंकाने वाली हो गई, जब मीडिया द्वारा एबीवीपी के विभाग संयोजक मृदुल चौहान से यह सवाल किया गया कि शहीद दिवस किसकी स्मृति में मनाया जाता है।
प्रश्न के उत्तर में उन्होंने प्रारंभ में माखनलाल चतुर्वेदी की पुण्यतिथि का जिक्र किया। बाद में जब इस उत्तर को लेकर सवाल उठे, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि कार्यक्रम में “समस्त महापुरुषों का स्मरण किया गया है” और किसी को जानबूझकर भुलाने का उद्देश्य नहीं था।

हालांकि इस बयान के बावजूद यह प्रश्न बना हुआ है कि शहीद दिवस जैसे राष्ट्रीय महत्व के दिन पर आयोजकों को ऐतिहासिक तथ्यों की स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं थी, या फिर यह एक गंभीर लापरवाही का परिणाम था।

इस पूरे मामले पर कांग्रेस नगर अध्यक्ष संजय गिल्ला ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि,
“यह या तो जानबूझकर किया गया कृत्य है या फिर यह एबीवीपी की अज्ञानता का परिचायक है। शहीद दिवस पर महात्मा गांधी को भुला देना केवल एक भूल नहीं, बल्कि देश के इतिहास और शहादत का अपमान है।”
उन्होंने यह भी कहा कि महात्मा गांधी किसी एक विचारधारा के नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की साझा विरासत हैं और उनकी शहादत को नजरअंदाज करना किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

https://youtu.be/02-LUva1KHU?si=Y9606O5mf0uTLELh

कार्यक्रम को लेकर एक और गंभीर पहलू सामने आया, जब यह देखा गया कि रैली में बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थी शामिल थे। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई विद्यार्थियों को यह तक नहीं बताया गया कि उन्हें रैली में क्यों भेजा जा रहा है और शहीद दिवस का वास्तविक महत्व क्या है।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बच्चों को केवल भीड़ बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, और क्या उन्हें राष्ट्रभक्ति के नाम पर सही ऐतिहासिक संदर्भ और मूल्य सिखाए जा रहे हैं।

बुद्धिजीवियों का मानना है कि राष्ट्रप्रेम केवल तिरंगा लहराने या नारों तक सीमित नहीं होना चाहिए। शहीद दिवस जैसे अवसर पर आयोजकों की यह जिम्मेदारी होती है कि वे नई पीढ़ी को देश के इतिहास, बलिदानों और महापुरुषों के योगदान की सही जानकारी दें।

एबीवीपी द्वारा आयोजित तिरंगा यात्रा भले ही बाहरी तौर पर भव्य और अनुशासित रही हो, लेकिन शहीद दिवस के मूल संदेश से भटकाव ने पूरे आयोजन की मंशा और गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना इस बात पर विचार करने को मजबूर करती है कि क्या हम राष्ट्रीय स्मृति दिवसों को केवल औपचारिक कार्यक्रम बनाकर उनकी आत्मा को खोते जा रहे हैं।

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