राजगढ़। जिले के रामगढ़ स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ा एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां बिना एक भी वास्तविक प्रसव के सैकड़ों जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने का मामला उजागर हुआ है। पुलिस ने मुख्य आरोपी समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर जांच तेज कर दी है।
फरवरी के रिकॉर्ड ने खोली पोल
मामले का खुलासा तब हुआ जब स्वास्थ्य विभाग ने फरवरी माह के रिकॉर्ड की समीक्षा की। छोटे से स्वास्थ्य केंद्र में एक ही महीने में 137 बच्चों का जन्म पंजीकरण दर्ज मिला, जबकि उस अवधि में एक भी प्रसव नहीं हुआ था। इस चौंकाने वाले अंतर ने अधिकारियों को तत्काल जांच के लिए मजबूर कर दिया।
डाटा एंट्री ऑपरेटर बना मास्टरमाइंड
जांच में सामने आया कि इस पूरे फर्जीवाड़े में कंप्यूटर डाटा एंट्री ऑपरेटर अर्जुन बैरागी की अहम भूमिका थी। उसने मिलीभगत कर CRS पोर्टल पर फर्जी दस्तावेज अपलोड कर जन्म प्रमाण पत्र जारी किए।
हैरानी की बात यह रही कि यह गड़बड़ी केवल हालिया समय तक सीमित नहीं थी। वर्ष 1950 से 1980 तक के भी कई फर्जी प्रमाण पत्र तैयार किए गए, जबकि उस समय वहां स्वास्थ्य केंद्र का अस्तित्व ही नहीं था।
कई राज्यों तक फैला नेटवर्क
जांच एजेंसियों को पता चला कि इस फर्जीवाड़े का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ था।
राजस्थान, सिक्किम, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों के नाम पर भी यहां से जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए। कुल मिलाकर 250 से अधिक फर्जी प्रमाण पत्र बनाए जाने की पुष्टि हुई है।
आधार में हेरफेर का जरिया बना फर्जी प्रमाण पत्र
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी इन फर्जी प्रमाण पत्रों का उपयोग आधार कार्ड में नाम और जन्मतिथि बदलवाने के लिए करते थे।
इसके लिए लोकसेवा केंद्र, आधार सेवा केंद्र और एमपी ऑनलाइन संचालकों के जरिए लोगों को जोड़ा जाता था और प्रति प्रमाण पत्र 500 से 1000 रुपये तक वसूले जाते थे।
पूछताछ में आरोपियों ने करीब 250 फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर लगभग 35 हजार रुपये की अवैध कमाई करना स्वीकार किया है।
6 आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी
पुलिस ने मुख्य आरोपी अर्जुन बैरागी सहित छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में केएल बंजारे ने जानकारी देते हुए बताया कि 6 अप्रैल को डॉ. सुनील चौरसिया (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर, जीरापुर) की शिकायत पर माचलपुर थाने में केस दर्ज किया गया।
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।
फॉरेंसिक जांच में जुटी पुलिस
पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन और स्वास्थ्य केंद्र का कंप्यूटर सिस्टम जब्त किया है। इनकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस गिरोह के तार और भी लोगों से जुड़े हो सकते हैं, जिससे आगे और बड़े खुलासे संभव हैं।
स्वास्थ्य विभाग सख्त, आंतरिक जांच शुरू
घटना को गंभीर मानते हुए स्वास्थ्य विभाग ने आंतरिक जांच भी शुरू कर दी है। साथ ही भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी और सिस्टम को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।