MP बीज निगम के फार्म पर उठे सवाल — क्या सरकारी संस्थाओं पर भी होगी कार्यवाही?

माखन नगर | क्षेत्र में पराली जलाने को लेकर इस समय प्रशासनिक सख़्ती चरम पर है। एक ओर जहां छोटे किसानों पर एफआईआर और जुर्माने की कार्रवाई लगातार हो रही है, वहीं दूसरी ओर सूत्रों से मिली जानकारी ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है — क्या सरकारी संस्थाएँ खुद नियमों का पालन कर रही हैं?

सूत्रों के अनुसार, मध्य प्रदेश बीज एवं फार्म विकास निगम (MP बीज निगम) माखन नगर यूनिट के फार्म पर बीते दिनों पराली को आग के हवाले किया गया। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि किसी अधिकारी ने मौके पर पहुँचकर स्थिति की जाँच तक नहीं की।

किसानों पर कार्रवाई, लेकिन सरकारी संस्था पर चुप्पी क्यों?

पिछले कुछ हफ्तों में पराली जलाने को लेकर माखन नगर, सिवनी मालवा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कई किसानों पर कार्रवाई की गई है। और कई मामलों में एफआईआर तक पर प्रशासन की यही सख़्ती सरकारी भूमि पर की गई कार्रवाई को लेकर नज़र क्यों नहीं आती, यह बड़ा सवाल है।

स्थानीय किसानों का कहना है—

“हम पर तो तुरंत नोटिस आ जाता है। मगर जब सरकारी फार्म पर धुआँ उठता है, तब कोई देखने नहीं आता। नियम सबके लिए बराबर क्यों नहीं?”

घटना सही है तो होगी कार्रवाई

इस मामले पर जब देनवापोस्ट ने माखन नगर तहसीलदार महेंद्र सिंह चौहान से बात की तो उन्होंने साफ कहा— “ऐसी कोई घटना हुई है तो अवश्य जांच कराई जाएगी और नियमों के अनुसार कार्रवाई होगी।”



तहसीलदार की यह प्रतिक्रिया संकेत देती है कि मामला प्रशासन तक पहुँच चुका है और सत्यापन के बाद कार्रवाई संभव है। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है।

पराली जलाना क्यों बन रहा बड़ा मुद्दा?

पराली जलाने से— वायु प्रदूषण अचानक बढ़ जाता है। आसपास के गाँवों में स्मॉग जैसी स्थिति बन जाती हैं।
बुजुर्गों और बच्चों में सांस लेने में दिक्कत होती है। मिट्टी की उपजाऊ क्षमता कम होने के साथ जैविक तत्व नष्ट हो जाते हैं।

सरकारी दिशानिर्देशों का उल्लंघन


इसी वजह से सरकार हर वर्ष किसानों को पराली न जलाने की अपील करती है और वैकल्पिक व्यवस्थाएँ जैसे मशीनरी सब्सिडी, रोटावेटर, हैप्पी सीडर आदि उपलब्ध कराती है।

लेकिन जब सरकारी संस्था खुद ही पराली जलाती दिखाई दे, तो संदेश गलत जाता है ।

MP बीज निगम की जिम्मेदारी सबसे अधिक

MP बीज निगम एक शासकीय संस्था होने के नाते अन्य किसानों से अनुकरणीय व्यवहार की अपेक्षा रखती है। सरकार की गाइडलाइन की पूर्ण जानकारी होने के साथ प्रशिक्षण और तकनीकी संसाधन होने के बाद ऐसे में पराली जलाने का आरोप और भी गंभीर हो जाता है।

ग्रामीणों के अनुसार— “बीज निगम के पास विकल्प हैं, फिर भी पराली जलाना समझ से परे है। अगर इन्हीं पर कार्रवाई नहीं हुई तो किसानों का भरोसा टूट जाएगा।”

क्या होगी कार्रवाई?


तहसीलदार के बयान के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि:

1. क्या राजस्व विभाग घटना की जाँच करेगा?


2. क्या MP बीज निगम के जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब-तलब होगा?


3. क्या वही दंडात्मक प्रावधान सरकारी संस्थाओं पर लागू होंगे जो किसानों पर होते हैं?

माखन नगर में MP बीज निगम के फार्म पर पराली जलाने का मामला अब चर्चा में आ चुका है। किसानों पर लगातार कार्रवाई के बीच इस घटना ने न्याय और समानता के सवाल खड़े कर दिए हैं।

तहसीलदार महेंद्र सिंह चौहान ने कार्रवाई का संकेत देकर उम्मीद जगाई है, पर अब ज़रूरत है तथ्यों की जाँच करने और दोषियों पर सख्ती दिखाने की, ताकि संदेश साफ जाए कि—नियम सबके लिए समान हैं, चाहे किसान हो या शासकीय संस्था।

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