
नई दिल्ली। सड़कों पर बिना बीमा चलने वाले वाहनों और बढ़ती लापरवाह ड्राइविंग पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार मोटर वाहन अधिनियम में अहम संशोधन की तैयारी कर रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने ऐसे प्रस्ताव तैयार किए हैं, जिनसे न सिर्फ बिना बीमा वाहन जब्त किए जा सकेंगे, बल्कि ड्राइवर के व्यवहार को बीमा प्रीमियम और ड्राइविंग लाइसेंस से भी जोड़ा जाएगा।
मंत्रालय ने इस सप्ताह राज्यों के परिवहन मंत्रियों और परिवहन आयुक्तों के साथ बैठक में इन प्रस्तावित संशोधनों का मसौदा साझा किया है। इसका मकसद सड़क सुरक्षा को मजबूत करना और नियम तोड़ने वालों के लिए व्यवस्था को ज्यादा कड़ा बनाना है।
बिना बीमा वाहन होंगे जब्त
प्रस्ताव के तहत प्रवर्तन एजेंसियों को यह अधिकार देने की बात कही गई है कि वे बिना वैध बीमा चल रहे वाहनों को हिरासत में ले सकें। अधिकारियों का कहना है कि खासकर दोपहिया वाहनों में बिना बीमा चलने की प्रवृत्ति बेहद ज्यादा है, जो दुर्घटना की स्थिति में पीड़ितों के लिए गंभीर समस्या बनती है।
तीन साल में लाइसेंस रद्द तो नया नहीं मिलेगा
मंत्रालय ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि जिन लोगों का ड्राइविंग लाइसेंस पिछले तीन वर्षों में रद्द किया गया है, उन्हें नया लाइसेंस जारी नहीं किया जाए। यह कदम आदतन नियम तोड़ने वालों पर नकेल कसने के उद्देश्य से लाया जा रहा है।
ड्राइवर के व्यवहार से तय होगा बीमा प्रीमियम
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 147 में संशोधन का प्रस्ताव रखते हुए सरकार बीमा नियामक IRDAI को यह अधिकार देना चाहती है कि वह वाहन की उम्र और चालान इतिहास के आधार पर बीमा प्रीमियम और देनदारी तय कर सके।
एक अधिकारी के मुताबिक, चालान का रिकॉर्ड यह बताने के लिए काफी होता है कि वाहन किस तरह चलाया जा रहा है। प्रस्ताव का उद्देश्य यह है कि बार-बार नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों को ज्यादा प्रीमियम देना पड़े, जबकि जिम्मेदार ड्राइवरों को इसका लाभ मिल सके। फिलहाल थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का प्रीमियम और देनदारी केंद्र सरकार तय करती है, वह भी IRDAI से सलाह लेकर।
ड्राइविंग लाइसेंस नियम होंगे सख्त
ड्राइवर के व्यवहार को लाइसेंस प्रणाली से जोड़ने के लिए मंत्रालय ने धारा 9 में भी संशोधन का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत जिन आवेदकों के चालान रिकॉर्ड में असुरक्षित ड्राइविंग सामने आती है, उन्हें ड्राइविंग टेस्ट से छूट नहीं दी जाएगी।
अभी नियम यह है कि लाइसेंस की वैधता खत्म होने से एक साल पहले नवीनीकरण कराने पर ड्राइविंग टेस्ट जरूरी नहीं होता।
बीमा दायरा और मेडिकल नियमों में बदलाव
सरकार थर्ड पार्टी बीमा के दायरे को भी बढ़ाने पर विचार कर रही है। प्रस्ताव है कि निजी वाहनों में भी मालिक, ड्राइवर और वाहन में बैठे व्यक्ति को बीमा सुरक्षा मिले। अभी यह व्यवस्था केवल व्यावसायिक वाहनों के लिए लागू है।
इसके अलावा, ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने और नवीनीकरण के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करने की उम्र सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव है। फिलहाल 40 साल की उम्र के बाद मेडिकल सर्टिफिकेट जरूरी होता है, जिसे बढ़ाकर 60 साल करने की योजना है।