जीएसटी 2.0 : अगली पीढ़ी के सुधार और “GST Savings Mahotsav”

नई दिल्ली। सोमवार (22 सितंबर, 2025) से देश में लागू होने जा रहे घटित जीएसटी दरों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक “ऐतिहासिक और अगली पीढ़ी का सुधार” बताया है। नवरात्रि के पहले दिन से लागू होने वाले इन नए कर प्रावधानों को उन्होंने “जीएसटी सेविंग्स महोत्सव” GST Savings Mahotsav का नाम दिया और कहा कि यह गरीबों, मध्यम वर्ग और नए मध्यम वर्ग के जीवन पर सीधा सकारात्मक असर डालेगा।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत आज विकास की नई गाथा लिखने जा रहा है, जहां कर सुधार न केवल वस्तुओं और सेवाओं को सस्ता बनाएंगे बल्कि आर्थिक विकास को गति भी देंगे। उन्होंने “मेड इन इंडिया” वस्तुओं की खरीद पर बल देते हुए कहा कि भारत की समृद्धि स्वदेशी मंत्र से ही अपनी ताकत हासिल करेगी।


जीएसटी परिषद का ऐतिहासिक निर्णय

जीएसटी परिषद, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों शामिल हैं, ने 22 सितंबर से सामान और सेवाओं पर कर की दरों को घटाने का निर्णय लिया। यह फैसला नवरात्रि जैसे शुभ अवसर से जुड़ा हुआ है, जिससे सरकार नागरिकों तक “बचत और विकास” का संदेश पहुँचाना चाहती है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन (GST Savings Mahotsav) में बताया कि अब देश में केवल दो कर स्लैब रहेंगे – 5% और 18%। इससे कर संरचना सरल होगी और नागरिकों को राहत मिलेगी। खासकर 12% पर टैक्स लगने वाली 99% वस्तुएँ अब 5% के दायरे में आ गई हैं। इसका सीधा मतलब है कि दैनिक उपभोग की वस्तुएँ सस्ती होंगी और सामान्य परिवारों के मासिक खर्च में कमी आएगी।


“बचत महोत्सव” से बढ़ेगी खुशहाली

मोदी ने कहा कि इस सुधार से हर वर्ग को लाभ मिलेगा – गरीब, मध्यवर्ग, नया मध्यवर्ग, युवा, महिलाएँ और किसान।

  • दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली वस्तुएँ जैसे कपड़े, जूते, घरेलू सामान और छोटे उपकरण अब सस्ते मिलेंगे।
  • उपभोक्ताओं की बचत बढ़ेगी, जिससे उनकी क्रय शक्ति मजबूत होगी।
  • कारोबारी माहौल और भी आसान होगा और निवेश आकर्षक बनेगा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सुधार “देश की विकास यात्रा को तेज करेगा और प्रत्येक राज्य को इस दौड़ में समान भागीदार बनाएगा।”


जीएसटी 2.0 : अगली पीढ़ी के सुधार और “GST Savings Mahotsav

मोदी ने स्मरण कराया कि जब 2014 में उनकी सरकार आई, तब से ही जीएसटी को प्राथमिकता दी गई। 2017 में भारत ने जीएसटी लागू करके एक “कर क्रांति” की शुरुआत की। पहले स्थिति यह थी कि हर राज्य की अपनी कर व्यवस्था थी, चेकपोस्ट पर रुकावटें थीं और कारोबारियों को कई प्रकार के फॉर्म भरने पड़ते थे।

जीएसटी ने इन बाधाओं को खत्म किया और “एक राष्ट्र, एक टैक्स” की अवधारणा को साकार किया। अब 2025 में इसे और सरल बनाते हुए अगली पीढ़ी के सुधार लागू किए जा रहे हैं।


GST Savings Mahotsav” का असर आम नागरिकों पर

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए और नया मध्यम वर्ग बनकर उभरे। इस वर्ग की अपनी आकांक्षाएँ और अपेक्षाएँ हैं।

  • इस वर्ष सरकार ने 12 लाख रुपये तक की आय को आयकर से मुक्त किया।
  • अब, घटित जीएसटी दरों के रूप में गरीब, मध्यवर्ग और नया मध्यवर्ग को डबल बोनस मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि इस सुधार में “ग्राहक भगवान है” की मानसिकता का प्रतिबिंब झलकता है। दुकानदार और व्यापारी भी उत्साहित हैं और ग्राहक तक लाभ पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं।

मोदी ने दावा किया कि नई जीएसटी (GST Savings Mahotsav)दरों और कर छूट को मिलाकर 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत भारतीय नागरिकों तक पहुँचेगी।

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एमएसएमई और आत्मनिर्भर भारत

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों) पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि देश को आत्मनिर्भर बनाने की बड़ी जिम्मेदारी इन्हीं उद्योगों पर है।

जीएसटी दरों में कटौती से:

  • एमएसएमई की बिक्री बढ़ेगी।
  • टैक्स का बोझ घटेगा।
  • रोजगार और उत्पादन दोनों को गति मिलेगी।

मोदी ने कहा कि “भारत को उस खोए हुए गौरव को फिर से प्राप्त करना है जब हम विनिर्माण के शिखर पर थे। हमें ऐसा उत्पादन करना होगा जो वैश्विक बाजार में भारत की पहचान बने।”


स्वदेशी मंत्र और “मेड इन इंडिया”

प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम के स्वदेशी आंदोलन की याद दिलाते हुए कहा कि जिस तरह उस समय स्वदेशी ने देश को शक्ति दी, उसी तरह आज भी भारत की समृद्धि का आधार यही मंत्र है।

उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे विदेशी उत्पादों की बजाय “मेड इन इंडिया” सामान को खरीदें। यह सिर्फ एक आर्थिक विकल्प नहीं बल्कि देशभक्ति का प्रतीक भी होना चाहिए।

मोदी ने राज्य सरकारों से भी आह्वान किया कि वे विनिर्माण को प्रोत्साहित करें और निवेश के लिए बेहतर वातावरण तैयार करें।


सुधारों का व्यापक असर

  1. उपभोक्ताओं के लिए लाभ – सस्ती वस्तुएँ और अधिक बचत।
  2. व्यवसाय के लिए सरलता – कर संरचना का सरलीकरण, अनुपालन आसान।
  3. निवेश में वृद्धि – आकर्षक कारोबारी माहौल।
  4. राज्यों की भागीदारी – केंद्र और राज्यों का साझा विकास।
  5. एमएसएमई को बढ़ावा – आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस संबोधन ने स्पष्ट कर दिया कि घटित जीएसटी दरें केवल कर सुधार नहीं बल्कि एक आर्थिक-सामाजिक क्रांति हैं। इसे “जीएसटी सेविंग्स महोत्सव” GST Savings Mahotsav का नाम देकर सरकार ने यह संदेश दिया है कि विकास केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि आम नागरिकों की जेब और जीवन पर इसका सीधा असर दिखेगा।

यह सुधार नवरात्रि जैसे शुभ समय पर (GST Savings Mahotsav) लागू हो रहा है, जो प्रतीक है नए आरंभ और सकारात्मक बदलाव का। यदि केंद्र और राज्य मिलकर इस दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो निश्चित रूप से भारत आत्मनिर्भरता और वैश्विक आर्थिक नेतृत्व की ओर तेज कदमों से बढ़ेगा।

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