नगर कांग्रेस ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री जी की जयंती पर किया सादर नमन

माखननगर। नगर कांग्रेस कमेटी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती के अवसर पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन कर श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। इस दौरान कांग्रेसजनों ने गांधी जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए, साथ ही शास्त्री जी तथा कवि-चिंतक माखनलाल चतुर्वेदी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया।

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने गांधी जी और शास्त्री जी के जीवन मूल्यों को आत्मसात करने पर बल दिया। वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में सत्य, अहिंसा, सादगी और ईमानदारी जैसे सिद्धांतों को व्यवहार में उतारना ही उनकी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सम्मान

जयंती कार्यक्रम के उपरांत नगर कांग्रेसजनों ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवारों एवं वरिष्ठ नागरिकों का घर-घर जाकर सम्मान किया।

सर्वप्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय पन्नालाल मालवीय की धर्मपत्नी श्रीमती ललता बाई का शाल एवं श्रीफल से सम्मान किया गया।

तत्पश्चात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय मूलचंद सिंघई जी के पुत्र एवं वरिष्ठ कांग्रेसी मार्गदर्शक महेंद्र सिंघई का अभिनंदन किया गया।

इसी क्रम में नगर के सेवा-निवृत्त वरिष्ठ शिक्षक श्री राजेंद्र दीवान के घर पहुँचकर कांग्रेसजनों ने उनका सम्मान कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों का सम्मान करना हम सभी का कर्तव्य है, क्योंकि उन्होंने आज़ादी की लड़ाई में त्याग और बलिदान देकर आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्र जीवन जीने का अवसर प्रदान किया।

कांग्रेसजनों की गरिमामयी उपस्थिति

इस अवसर पर नगर कांग्रेस अध्यक्ष संजय गिल्ला के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता एवं स्थानीय नागरिक शामिल हुए। कार्यक्रम में विशेष रूप से अमृत बिंदु डेरिया, प्रकाश चौरासिया, राजू बड़गुज़ार, स्वदेश मालवीय, विजय मीना, हेमंत खंडेलवाल, मोहन सोनी, संजय अहिरवार, भगवानदास साहू, द्वारका चौधरी, सुनील मोदी, सुमित डेरिया, भवानी साहू, संतोष यादव, इरफ़ान ख़ान, बलराम अहिरवार, प्रदीप जैन ‘मुंटी चाचा’, शेखर राजपूत, उत्कर्ष आचार्य, राज चौरे, शेरबेग, अयान ख़ान, रमेश मेहरा, पुरुषोत्तम यादव सहित अनेक कांग्रेसजन मौजूद रहे।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर संकल्प लिया कि वे गांधी जी एवं शास्त्री जी के दिखाए मार्ग पर चलकर सामाजिक सद्भाव और राष्ट्र की प्रगति में योगदान देंगे।

गांधी और शास्त्री के आदर्शों पर बल

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि महात्मा गांधी ने विश्व को सत्य और अहिंसा का ऐसा मार्ग दिखाया, जिसकी प्रासंगिकता आज भी उतनी ही है जितनी स्वतंत्रता संग्राम के दौरान थी। वहीं लाल बहादुर शास्त्री ने अपने सादगीपूर्ण जीवन, ईमानदारी और “जय जवान, जय किसान” जैसे नारे से देश को नई दिशा दी।

वक्ताओं ने युवाओं से अपील की कि वे सोशल मीडिया और आधुनिक जीवनशैली के दबाव में अपने इतिहास और संस्कृति से दूर न हों, बल्कि गांधी-शास्त्री जैसे महान विभूतियों के जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएँ।

समाज सेवा और राष्ट्रीय एकता का संदेश

नगर कांग्रेस द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे समाज सेवा और राष्ट्रीय एकता का माध्यम भी बनाया गया। स्वतंत्रता सेनानी परिवारों का सम्मान कर संगठन ने यह संदेश दिया कि आज़ादी की लड़ाई में योगदान देने वाले परिवारों को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जिस प्रकार गांधी जी ने स्वदेशी, सत्याग्रह और अहिंसा के बल पर ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती दी, उसी तरह आज हमें भ्रष्टाचार, असमानता और सामाजिक विभाजन जैसी चुनौतियों से लड़ने के लिए उनके सिद्धांतों को अपनाना होगा।

नागरिकों की भागीदारी

स्थानीय नागरिकों ने भी इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अनेक लोगों ने गांधी जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि दी। बुज़ुर्गों का कहना था कि इस प्रकार के आयोजन नई पीढ़ी को अपने इतिहास से जोड़ने में सहायक होते हैं।

छात्र-छात्राओं ने गांधी जी के जीवन दर्शन, चरखा आंदोलन और शास्त्री जी की सादगी पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि हमें अपने दैनिक जीवन में छोटी-छोटी बातों से ही राष्ट्र के प्रति कर्तव्य निभाना चाहिए।

नगर कांग्रेस द्वारा आयोजित गांधी एवं शास्त्री जयंती के कार्यक्रम ने न केवल ऐतिहासिक स्मृतियों को जीवंत किया, बल्कि यह भी संदेश दिया कि सच्ची श्रद्धांजलि केवल पुष्प अर्पण से नहीं बल्कि उनके आदर्शों को अपनाने से मिलती है।

आज जब समाज अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है, तब गांधी और शास्त्री के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। ऐसे आयोजनों से आने वाली पीढ़ियाँ यह सीख पाती हैं कि त्याग, सेवा, सत्य और सादगी ही जीवन का वास्तविक मार्ग है।

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