
भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार मार्च के प्रथम सप्ताह में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेगी। राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में लगभग 10 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर के आधार पर अगले वर्ष का बजट 4.65 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। हालाँकि, राज्य की वित्तीय स्थिति पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है, जो अब बजट के आकार से भी अधिक हो चुका है।
राजस्व बढ़ाने पर मजबूरन फोकस
जीएसटी लागू होने के बाद राज्य के पास कर लगाने के अपने अवसर सीमित हो गए हैं, ऐसे में आमदनी बढ़ाना सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने के लिए पहली बार रोलिंग बजट तैयार किया जा रहा है, जिसमें एक साथ अगले तीन वर्षों (2026-27 से 2028-29) की वित्तीय आवश्यकताओं का आकलन शामिल है।
पिछले बजट और वर्तमान हालात
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए राज्य सरकार ने 4.21 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया था, जिसमें केंद्रीय करों में हिस्से से 1,11,662 करोड़ और केंद्रीय सहायता अनुदान से 48,661 करोड़ रुपये प्राप्त होने का अनुमान था। राज्य के स्वयं के कर संग्रह का लक्ष्य 1,09,157 करोड़ रखा गया था, लेकिन जीएसटी हिस्सा पूरा न मिलने और सहायता अनुदान में कमी के कारण वास्तविक प्राप्ति पीछे चल रही है।
योजनाओं और अनुदान पर भारी व्यय
बजट पर लाड़ली बहना योजना और बिजली बिल अनुदान सबसे बड़े व्यय हैं। लाड़ली बहना पर अगले बजट में 20,000 करोड़ रुपये तक का प्रावधान हो सकता है, जबकि रियायती दर पर बिजली आपूर्ति पर सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 30,000 करोड़ रुपये का अनुदान देना पड़ रहा है। इस प्रकार केवल इन दो मदों पर 50,000 करोड़ रुपये से अधिक का वार्षिक भार है।
इसके अलावा, जल जीवन मिशन पर केंद्र से पर्याप्त सहायता न मिलने के कारण राज्य पर 8,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा है। सड़क, पुल और भवन निर्माण जैसे अवसंरचना कार्यों पर भी व्यय लगातार बढ़ रहा है।
वेतन, पेंशन और ब्याज का बढ़ता दबाव
राज्य के बजट पर वेतन, पेंशन और ब्याज अदायगी का बोझ तेजी से बढ़ रहा है:
वित्तीय वर्ष व्यय (करोड़ रुपये में)
2023-24 97,141
2024-25 1,13,328
2025-26 1,28,340
सरकार की कार्ययोजना
इन चुनौतियों से निपटने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मुख्य सचिव अनुराग जैन और अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी स्वयं निगरानी कर रहे हैं। प्रतिमाह राजस्व समीक्षा की जा रही है। आबकारी और खनिज क्षेत्र से राजस्व बढ़ाने, कृषि-आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देने और पूंजीगत व्यय को 90,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाकर अर्थव्यवस्था को गति देने पर कार्य चल रहा है।
अगले बजट में सरकार के सामने सबसे बड़ी परीक्षा राजस्व स्रोतों का विस्तार करते हुए विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं के बीच संतुलन बनाए रखने की होगी।