मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल, जो राज्य के विभिन्न शासकीय विभागों के लिए भर्ती प्रक्रिया संचालित करता है, इस समय खुद गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रहा है। मंडल में स्वीकृत 187 पदों के मुकाबले केवल 73 कर्मचारी ही कार्यरत हैं, जबकि 114 पद अब भी खाली पड़े हैं। यानी करीब 60 प्रतिशत पद रिक्त हैं, जिससे भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
अहम पदों पर खालीपन, काम प्रभावित
मंडल में अतिरिक्त संचालक, नियंत्रक, संयुक्त संचालक, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, प्रोग्रामर, सहायक संचालक, लेखा अधिकारी और अधीक्षक जैसे कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से खाली हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, डिप्टी कंट्रोलर के 5 में से 4 पद खाली हैं, जूनियर अकाउंट्स ऑफिसर के 2 में से 1 पद रिक्त है। सहायक ग्रेड-1 के 13 में से 10, सहायक ग्रेड-2 के 28 में से 15 और सहायक ग्रेड-3 के 41 में से 23 पद खाली पड़े हैं। डाटा एंट्री ऑपरेटर के 5 में से 2 पद भी रिक्त हैं, जबकि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के अधिकांश पद खाली हैं।
अतिरिक्त प्रभार से चल रही व्यवस्था
स्टाफ की कमी के चलते कई अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी देकर काम चलाया जा रहा है। सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय शुक्ला मंडल के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं, जबकि अजॉय कटेसरिया निदेशक का कार्य देख रहे हैं।
भर्ती परीक्षाओं पर भी पड़ रहा असर
कर्मचारियों की कमी का सीधा असर भर्ती परीक्षाओं की गुणवत्ता और समय-सीमा पर पड़ रहा है। पिछले वर्ष मंडल ने 16 परीक्षाएं आयोजित की थीं, जबकि इस वर्ष 22 परीक्षाएं कराने की योजना है।
स्टाफ की कमी के चलते कई कार्य आउटसोर्स कर्मचारियों से कराए जा रहे हैं, जिससे निगरानी व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। इसके अलावा भर्ती परीक्षाओं में पूर्व में सामने आई अनियमितताओं के कारण भी व्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं।
प्रश्नों के घेरे में व्यवस्था
भर्ती कराने वाली सबसे महत्वपूर्ण एजेंसी का खुद कर्मचारियों की कमी से जूझना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। ऐसे में जल्द भर्ती और संसाधनों की पूर्ति नहीं हुई, तो आने वाले समय में भर्ती प्रक्रिया और अधिक प्रभावित हो सकती है।