Mp News: दलबदल मामले में नया मोड़, बीना विधायक निर्मला सप्रे बोलीं—अब भी कांग्रेस में हूं, हाईकोर्ट में सुनवाई जारी

भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों एक दिलचस्प और संवेदनशील मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है। बीना से विधायक निर्मला सप्रे ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में दायर याचिका की सुनवाई के दौरान दावा किया है कि वे अब भी कांग्रेस पार्टी की सदस्य हैं। यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब उनके खिलाफ दलबदल से जुड़ा मामला न्यायिक प्रक्रिया में है।

मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ के समक्ष इस मामले पर सुनवाई हुई। यह याचिका नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा दायर की गई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सवाल पर सप्रे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी मुवक्किल अभी भी कांग्रेस पार्टी का हिस्सा हैं।

ये भी पढ़ें- Gwalior: शादी में शराब न देने पर बवाल, दुल्हन सहित पूरे परिवार से मारपीट, घर से सामान और नकदी भी ले गए

इस मामले में हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता उमंग सिंघार को निर्देश दिया है कि वे 9 अप्रैल को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष अपना पक्ष रखें। इसके बाद इस प्रकरण की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को निर्धारित की गई है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

दरअसल, उमंग सिंघार ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि निर्मला सप्रे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो चुकी हैं, लेकिन उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया, जो दलबदल विरोधी कानून का उल्लंघन है। याचिका में उनके निर्वाचन को निरस्त करने की मांग भी की गई है।

ये भी पढ़ें- Indore News: इंदौर में गौवंश तस्करी पर बड़ी कार्रवाई,आयशर वाहन से 7 मवेशी मुक्त, आरोपी फरार

याचिका के अनुसार, इस मामले में 30 जून 2024 को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया गया था, लेकिन निर्धारित 90 दिनों की समयसीमा के भीतर कोई निर्णय नहीं लिया गया। इसके बाद मामला न्यायालय की शरण में पहुंचा। सप्रे पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप भी लगाए गए हैं। बताया गया है कि लोकसभा चुनाव के दौरान 5 मई 2024 को राहतगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम में वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंच पर नजर आई थीं और उन्होंने भाजपा का पट्टा भी धारण किया था।

वहीं, राज्य शासन की ओर से अदालत में यह तर्क दिया गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, जब तक विधानसभा अध्यक्ष किसी याचिका पर निर्णय नहीं लेते, तब तक हाई कोर्ट को इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में निर्णय लेना विधानसभा अध्यक्ष का विशेषाधिकार होता है।

ये भी पढ़ें- Anuppur News: जंगल में मिली महिला की लाश का खुलासा: आत्महत्या नहीं, प्रेमी ने की थी हत्या, आरोपी गिरफ्तार

अब इस पूरे मामले में आगे क्या फैसला आता है, यह विधानसभा अध्यक्ष की कार्रवाई और 20 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई पर निर्भर करेगा। फिलहाल यह मामला मध्य प्रदेश की राजनीति में दलबदल कानून और संवैधानिक प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनता जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!