Mp News: पश्चिम मध्य रेलवे में गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल घोटाला उजागर, CBI ने दर्ज की FIR

जबलपुर/भोपाल, 31 मार्च 2026। पश्चिम मध्य रेलवे के लिए खरीदे गए गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल्स में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने इंदौर की एक निजी कंपनी सहित रेलवे और RITES Limited के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

49 लाख के मेडल, शुद्धता पर उठे सवाल

सीबीआई को मिली जानकारी के अनुसार, जबलपुर स्थित पश्चिम मध्य रेलवे और इंदौर की कंपनी M/s Viable Diamonds के बीच 23 जनवरी 2023 को 3,640 गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल्स की सप्लाई का अनुबंध हुआ था। इन मेडल्स की कुल कीमत करीब 49.68 लाख रुपए तय की गई थी।

अनुबंध के अनुसार, निरीक्षण की जिम्मेदारी RITES के इंजीनियरों को दी गई थी। सितंबर और अक्टूबर 2023 में किए गए निरीक्षण में रिपोर्ट दी गई कि मेडल्स 99.90 प्रतिशत शुद्ध चांदी के हैं।

ये भी पढ़ें- संकट में अन्नदाता: राज्यसभा में गूंजी ओलावृष्टि प्रभावित किसानों की आवाज

भोपाल डिपो में जमा हुए मेडल

19 अक्टूबर 2023 को 3,631 मेडल्स भोपाल स्थित कोच रिहैबिलिटेशन वर्कशॉप के जनरल स्टोर डिपो में जमा कर दिए गए, जबकि 9 मेडल्स परीक्षण में उपयोग किए गए।

विजिलेंस जांच में खुली पोल

मामला तब सामने आया जब 12 सितंबर 2025 को रेलवे के विजिलेंस विभाग ने दोबारा सैंपल जांच कराई। जांच के लिए नोएडा की NABL मान्यता प्राप्त लैब और कोलकाता के नेशनल टेस्टिंग हाउस को नमूने भेजे गए।

रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ—मेडल्स में चांदी की मात्रा मात्र 0.0023 प्रतिशत पाई गई, जबकि तांबा 99.80 प्रतिशत था। यानी सप्लाई किए गए मेडल्स टेंडर की शर्तों के पूरी तरह विपरीत पाए गए।

ये भी पढृें- Mp News:वाराणसी में “एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन 2026” में शामिल होंगे मुख्यमंत्री मोहन यादव, निवेश और पर्यटन को मिलेगी नई दिशा

CBI ने दर्ज किया मामला

प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद CBI ने 25 मार्च 2026 को मामला दर्ज किया। एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की धारा 120-B (षड्यंत्र), 420 (धोखाधड़ी), 468 (जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं शामिल की गई हैं।

जांच एएसपी को सौंपी

सीबीआई ने इस मामले की जांच एसीबी भोपाल के एएसपी आकाश कुमार मीणा को सौंपी है। एजेंसी अब यह पता लगाएगी कि घोटाले में किन-किन अधिकारियों और व्यक्तियों की भूमिका रही, और किस स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई।

यह मामला सरकारी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और गुणवत्ता नियंत्रण पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि इस घोटाले के पीछे किस स्तर तक जिम्मेदारी तय होती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!