
नर्मदापुरम।मध्य प्रदेश स्थापना दिवस (mp-sthapna-diwas)पर 1 नवंबर को नर्मदापुरम का ऐतिहासिक सेठानी घाट आस्था और रोशनी से भर उठेगा। इस अवसर पर श्री रामचंद्र पथ गमन न्यास द्वारा संस्कृति विभाग, मध्य प्रदेश शासन और जिला प्रशासन के सहयोग से विशाल दीप आराधना दीपोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में मां नर्मदा के पावन तट पर 51 हजार दीप प्रज्वलित किए जाएंगे।
शाम 6:30 बजे से शुरू होने वाले इस आयोजन में मां नर्मदा की महाआरती, दीप म्यूजिकल ग्रुप भोपाल की भक्ति संगीत प्रस्तुति और हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता से घाट पर आध्यात्मिक वातावरण बनेगा। आयोजन का उद्देश्य मध्य प्रदेश स्थापना दिवस (mp-sthapna-diwas)को धार्मिक, सांस्कृतिक और सामूहिक चेतना के रूप में मनाना है।
देव प्रबोधिनी एकादशी और स्थापना दिवस का संगम
इस वर्ष मध्य प्रदेश स्थापना दिवस(mp-sthapna-diwas) देव प्रबोधिनी एकादशी के पावन अवसर पर पड़ रहा है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु चार महीने के योगनिद्रा से जागते हैं, और सृष्टि में पुनः सृजन और शुभ कार्यों का प्रारंभ होता है।
ऐसे शुभ अवसर पर मां नर्मदा के तट पर दीपोत्सव का आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव होगा। सेठानी घाट पर जलते 51 हजार दीप केवल सौंदर्य का प्रतीक नहीं होंगे, बल्कि यह प्रकाश, शुद्धता और पुनर्जागरण का संदेश भी देंगे।
51 हजार दीपों से सजेगा घाट, हर दीप का होगा प्रतीकात्मक अर्थ
कार्यक्रम की तैयारी कई दिनों से चल रही है। जिला प्रशासन, राम पथ गमन न्यास और स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाएं इस आयोजन को भव्य बनाने में जुटी हैं। घाट के विभिन्न हिस्सों में दीपों की सजावट की विशेष रूपरेखा तैयार की गई है।
दीपों की कतारें मां नर्मदा की लहरों के साथ झिलमिलाती रोशनी का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करेंगी। आयोजन समिति के अनुसार, घाट के विभिन्न भागों—मुख्य आरती स्थल, सीढ़ियां, तटरेखा और नाव घाट—पर दीपों को इस तरह सजाया जाएगा कि ऊपर से देखने पर “जय नर्मदे” और “मध्य प्रदेश 2025” लिखा दिखाई देगा।
दीप आराधना के साथ मां नर्मदा की महाआरती भी होगी, जिसमें सैकड़ों पुजारी और श्रद्धालु एक साथ दीप लेकर आरती में भाग लेंगे। इस दौरान भोपाल के दीप म्यूजिकल ग्रुप द्वारा भक्ति संगीत की प्रस्तुति दी जाएगी। भक्ति गीतों और संगीत की धुनों के साथ नर्मदा तट का माहौल पूर्णत: आध्यात्मिक और भावनात्मक होगा।
संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम में पारंपरिक नर्मदा गीतों के साथ प्रदेश की लोकधुनों को भी शामिल किया गया है, जिससे यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बने।
प्रभारी मंत्री राकेश सिंह और जनप्रतिनिधियों का होगा आगमन
दीपोत्सव के इस आयोजन में प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री और नर्मदापुरम जिले के प्रभारी मंत्री राकेश सिंह के शामिल होने की संभावना है। उनके साथ क्षेत्र के सांसद, विधायक, नगर पालिका अध्यक्ष, गणमान्य अतिथि और आम नागरिक भी उपस्थित रहेंगे। जिला प्रशासन ने आयोजन की रूपरेखा तैयार कर अधिकारियों की ड्यूटी भी निर्धारित कर दी है, ताकि दीप आराधना का कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हो सके।
प्रदेशव्यापी उत्सव: अन्य जिलों में भी दीप आराधना
श्री रामचंद्र पथ गमन न्यास केवल नर्मदापुरम में ही नहीं, बल्कि अनूपपुर, सतना, पन्ना, कटनी, उमरिया और मैहर जिलों में भी इसी तरह के दीपोत्सव आयोजित कर रहा है। इन सभी स्थानों को रामायण काल में भगवान श्रीराम के पथ गमन से जोड़ा जाता है। न्यास का उद्देश्य इन स्थलों को धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विकसित करना है।
मध्य प्रदेश स्थापना दिवस (mp-sthapna-diwas) : इतिहास और महत्व
1 नवंबर 1956 को मध्य भारत, विंध्य प्रदेश, भोपाल और महाकौशल रियासतों को मिलाकर मध्य प्रदेश राज्य का गठन हुआ था। राज्य का गठन भाषाई पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों के बाद हुआ। इस दिन को हर वर्ष पूरे प्रदेश में स्थापना दिवस (mp-sthapna-diwas) के रूप में मनाया जाता है।
मध्य प्रदेश देश के भौगोलिक केंद्र में स्थित होने के कारण “भारत का हृदय प्रदेश” कहलाता है। इसकी नदियां, वन संपदा, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत देश की विविधता का प्रतिनिधित्व करती हैं। स्थापना दिवस के अवसर पर पूरे प्रदेश में सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियां और लोक कला प्रस्तुतियां आयोजित की जाती हैं।
नर्मदापुरम में होने वाला यह दीपोत्सव उसी परंपरा को आगे बढ़ाने वाला आयोजन है, जो यह दर्शाता है कि प्रदेश की पहचान केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गहराई से भी जुड़ी है।
नर्मदापुरम का सेठानी घाट : आस्था और इतिहास का संगम
सेठानी घाट नर्मदापुरम की पहचान है। यह वही स्थान है जहां हर वर्ष माघ पूर्णिमा और नर्मदा जयंती पर लाखों श्रद्धालु स्नान और पूजा के लिए पहुंचते हैं। ऐतिहासिक रूप से यह घाट 19वीं सदी में भोपाल की एक सेठानी—जिन्होंने नर्मदा में बार-बार होने वाली जल त्रासदी से लोगों की रक्षा के लिए यह घाट बनवाया था सेठानी घाट के नाम पर जाना जाता है।
आज यह घाट न केवल धार्मिक स्थल है बल्कि पर्यावरण, पर्यटन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का केंद्र भी बन चुका है। दीप आराधना के दौरान सेठानी घाट पर जलते दीप, नर्मदा की धारा पर तैरते प्रकाश और भक्तों की गूंज के साथ एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करते हैं।
नर्मदा तट से उठेगा संदेश—‘प्रकाश से प्रगति की ओर’
इस दीपोत्सव का थीम “प्रकाश से प्रगति की ओर” रखा गया है। आयोजकों का कहना है कि स्थापना दिवस (mp-sthapna-diwas)पर यह संदेश देना है कि जैसे दीप अंधकार को मिटाता है, वैसे ही सामूहिक प्रयासों से प्रदेश को नई दिशा मिल सकती है। दीप आराधना के इस आयोजन से नर्मदापुरम के साथ-साथ पूरा प्रदेश सांस्कृतिक एकता, आस्था और विकास की भावना से जुड़ता है। 51 हजार दीप केवल नर्मदा तट को नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के मन को रोशन करने का प्रतीक बनेंगे।