
मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम संभाग में बरेली और पिपरिया के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण पुल सोमवार को मरम्मत कार्य के दौरान अचानक ढह गया। इस हादसे में चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि कई अन्य बाल-बाल बच गए। हादसे के तुरंत बाद प्रशासन और सरकार हरकत में आ गई। एक अफसर को निलंबित कर दिया गया है और कई वरिष्ठ अधिकारियों को शो-कॉज नोटिस जारी किए गए हैं। साथ ही, मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसे सात दिनों में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
मरम्मत के दौरान टूटा पुल, अफसर निलंबित
जानकारी के अनुसार, यह पुल मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) के तत्वावधान में मरम्मताधीन था। हाल के दिनों में इस पुल पर भारी वाहनों का दबाव बढ़ने और संरचनात्मक कमजोरियों के संकेत मिलने पर इसकी मरम्मत का कार्य शुरू किया गया था। मरम्मत कार्य के बीच सोमवार की सुबह अचानक पुल का बरेली की तरफ का हिस्सा भरभराकर ढह गया।
हादसे के समय पुल पर मजदूर और कुछ स्थानीय लोग मौजूद थे, जिससे चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।
घटना के बाद MPRDC ने बड़ी कार्रवाई करते हुए परियोजना से जुड़े प्रबंधक ए.ए. खान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके अलावा, पूर्व और वर्तमान संभागीय प्रबंधकों तथा सहायक महाप्रबंधकों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस में पुल की निगरानी, तकनीकी जांच तथा कार्य की गुणवत्ता संबंधी लापरवाही को लेकर जवाब तलब किया गया है।
जांच समिति गठित — सात दिन में रिपोर्ट
राज्य सरकार ने तेजी दिखाते हुए हादसे के कारणों की जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति गठित की है। इसमें इंजीनियरिंग, निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण के विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं। समिति को सात दिनों की समयसीमा दी गई है, जिसमें उसे पुल ढहने के तकनीकी कारण, जिम्मेदार अधिकारी, और लापरवाही के स्तर का विस्तृत आकलन प्रस्तुत करना होगा।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि रिपोर्ट आने के बाद जरूरत पड़ने पर और भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि “लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों को सख्त सजा दी जाएगी।”
विधानसभा में गूंजा मुद्दा
यह मामला राज्य विधानसभा में भी गूंज उठा। कांग्रेस ने पुल ढहने की घटना को गंभीर भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन का उदाहरण बताते हुए सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने मुद्दा उठाते हुए कहा कि
“यह घटना सरकारी भ्रष्टाचार का प्रत्यक्ष उदाहरण है। यह कथित सुशासन की पोल खोलती है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की भारी अनदेखी हो रही है, जिसका सीधा खामियाजा जनता भुगत रही है।
सरकार का पलटवार
इस आरोप पर प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री राकेश सिंह ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि
“आज जो पुल टूटा है, वह कांग्रेस सरकार के समय में बनाया गया था। इसकी मूल डिज़ाइन और निर्माण उसी दौरान हुआ था, इसलिए कांग्रेस की आलोचना हास्यास्पद है।”
मंत्री राकेश सिंह ने कांग्रेस पर मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार दोषियों पर कार्रवाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मंत्री मौके पर रवाना
उदयपुरा से विधायक और राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने भी सदन में जवाब देते हुए कहा कि लापरवाही के आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने जानकारी दी कि वे विधानसभा अध्यक्ष की अनुमति लेकर तात्कालिक रूप से घटनास्थल के निरीक्षण के लिए रवाना हो रहे हैं ताकि वास्तविक स्थिति का जायजा लेकर रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकें।
उनके अनुसार, प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि पुल पर भार क्षमता से अधिक दबाव पड़ रहा था और मरम्मत के दौरान कई तकनीकी समस्याएँ सामने आई थीं। हालांकि, वे घटनास्थल पर पहुंचकर और विस्तृत जानकारी जुटाकर ही अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने की बात कहते हैं।
स्थानीय लोगों में आक्रोश और दहशत
पुल ढहने की घटना ने स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश दोनों बढ़ा दिए हैं। यह पुल बरेली और पिपरिया के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, जिससे रोजाना हजारों लोग आवागमन करते हैं। पुल बंद होने से आम नागरिकों, छात्रों, व्यापारियों और ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि उन्होंने कई बार पुल की खराब हालत की शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन समय रहते गंभीरता नहीं बरती गई। अब हादसे के बाद वे जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
एक स्थानीय निवासी ने बताया—
“कुछ समय से पुल हिलता हुआ महसूस होता था। हमने कई बार अधिकारियों को सूचित किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आज यह हादसा उसी लापरवाही का नतीजा है।”
सड़क परिवहन पर असर
पुल टूटने के कारण बरेली से पिपरिया मार्ग पर यातायात पूरी तरह रोक दिया गया है। जिला प्रशासन ने वैकल्पिक मार्गों से वाहनों को डायवर्ट कर दिया है। भारी वाहनों को अन्य लंबी दूरी वाले मार्गों पर भेजा जा रहा है ताकि भीड़भाड़ और दुर्घटना की आशंका को रोका जा सके।
यह घटना राज्य में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। खासकर उन पुलों पर, जिन्हें लंबे समय तक उपयोग में रहना होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पुलों की समय-समय पर जांच, लोड परीक्षण और सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य है, लेकिन कई बार सरकारी प्रक्रियाओं में इन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है।
राजनीतिक पार्टियों ने इसे भ्रष्टाचार और गैर जिम्मेदाराना रवैये का परिणाम बताया है। वहीं प्रशासन का दावा है कि दोषियों को नहीं छोड़ा जाएगा।
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