बाल श्रम के खिलाफ श्रम विभाग की कार्रवाई: माखन नगर में 11 वर्षीय बालक को कराया मुक्त

फल-फ्रूट दुकान में कार्यरत मिला बालक, बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश; संचालक पर कानूनी कार्रवाई

माखन नगर : श्रम विभाग द्वारा बाल श्रम के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत गुरुवार को माखन नगर में बड़ी कार्रवाई की गई। यहाँ विनोद बघेल की फल-फ्रूट की दुकान में एक 11 वर्षीय बालक को कार्यरत पाया गया। श्रम विभाग की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बालक को बाल श्रम से मुक्त कराया और उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया।

संयुक्त टीम ने चलाया जागरूकता अभियान

बाल श्रम की पहचान और उन्मूलन के उद्देश्य से गुरुवार को माखन नगर में संयुक्त जन जागरूकता अभियान चलाया गया। श्रम विभाग के नेतृत्व में यह अभियान पुलिस विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। इसी दौरान टीम ने विनोद बघेल की दुकान का निरीक्षण किया, जहाँ एक नाबालिग बालक काम करता पाया गया।

कानूनी प्रक्रिया और कार्रवाई

श्रम निरीक्षक सरिता साहू ने बताया कि बालक को तत्काल श्रम से मुक्त कराकर बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। दुकान संचालक विनोद बघेल के खिलाफ बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

इस कार्रवाई में सीडीपीओ सुषमा चौरसिया, बीआरसी श्याम सिंह पटेल, सुपरवाइजर अनुराधा असवारे, माखन नगर थाने से उप निरीक्षक कमलेश ठाकुर, आरक्षक अनिल तुमराम और विशेष किशोर पुलिस इकाई से प्रधान आरक्षक भुजराम सिंह सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।

कानून का प्रावधान

बता दें कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत 14 वर्ष तक के बालकों का किसी भी प्रकार के कार्यों में नियोजन पूर्णतः प्रतिबंधित है। वहीं 14 से 18 वर्ष तक के किशोरों को खतरनाक श्रेणी के कार्यों जैसे खान, ज्वलनशील पदार्थ, विस्फोटक एवं अन्य जोखिम भरी प्रक्रियाओं में नियोजित करना कानूनन अपराध है।

उल्लंघन पाए जाने पर दोषी नियोजक को न्यूनतम 6 माह से अधिकतम 2 वर्ष तक के कारावास अथवा न्यूनतम 20 हज़ार से अधिकतम 50 हज़ार रुपये तक के जुर्माने या दोनों दंडों का प्रावधान है।

जागरूकता जरूरी

श्रम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के संयुक्त अभियान और जागरूकता कार्यक्रम भविष्य में भी जारी रहेंगे। उन्होंने दुकानदारों और नियोजकों से अपील की है कि वे बाल श्रम कानूनों का पालन करें और बच्चों को उनके मौलिक अधिकार—शिक्षा और बाल्यावस्था—से वंचित न करें।

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