जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला आदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी मृत सरकारी कर्मचारी की शादीशुदा बेटी ही उसकी एकमात्र कानूनी वारिस है, तो उसे अनुग्रह राशि (ग्रेच्युटी) और अवकाश नकदीकरण (लीव एनकैशमेंट) से वंचित नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट की युगलपीठ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल ने संबंधित विभाग को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता को देय राशि का भुगतान 60 दिनों के भीतर किया जाए।
क्या है पूरा मामला
नरसिंहपुर निवासी प्रसन्ना नामदेव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने पिता प्रभात कुमार नामदेव की मृत्यु के बाद अनुग्रह राशि और अवकाश नकदीकरण का भुगतान न किए जाने को चुनौती दी थी। प्रभात कुमार नामदेव जिला न्यायालय नरसिंहपुर में ड्राइवर के पद पर कार्यरत थे और 4 मई 2024 को सेवा के दौरान उनका निधन हो गया था।
याचिका में बताया गया कि प्रसन्ना नामदेव अपने पिता की एकमात्र जीवित कानूनी वारिस हैं और सेवा अभिलेखों में उन्हें नॉमिनी भी बनाया गया था। पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने सभी सेवा लाभों के लिए आवेदन किया, जिनमें से अन्य भुगतान तो कर दिए गए, लेकिन अनुग्रह राशि और अवकाश नकदीकरण का भुगतान केवल इस आधार पर रोक दिया गया कि वह शादीशुदा बेटी हैं।
राज्य सरकार का तर्क
अनावेदक राज्य सरकार की ओर से एक नोटिफिकेशन का हवाला देते हुए तर्क दिया गया कि अनुग्रह और अवकाश नकदीकरण का भुगतान मृत कर्मचारी की पत्नी या पति को किया जाएगा। यदि एक से अधिक पत्नी हों तो राशि बराबर बांटी जाएगी। इसके अतिरिक्त मृत कर्मचारी का सबसे बड़ा बेटा या सबसे बड़ी अविवाहित बेटी ही इसका हकदार होगा। इसी आधार पर याचिकाकर्ता का दावा खारिज कर दिया गया था।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित नोटिफिकेशन में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यदि मृतक कर्मचारी की शादीशुदा बेटी के अलावा कोई अन्य वारिस मौजूद न हो, तो अनुग्रह राशि और अवकाश नकदीकरण किसे दिया जाएगा।
अदालत ने कहा—
“यदि शादीशुदा बेटी ही मृतक की एकमात्र कानूनी वारिस है, तो उसे केवल विवाह के आधार पर इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।”
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुग्रह राशि का उद्देश्य कर्मचारी की मृत्यु के बाद तत्काल सहायता प्रदान करना होता है, विशेष रूप से अंतिम संस्कार और आकस्मिक खर्चों के लिए। ऐसे में यह मान लेना कि शादीशुदा बेटी इस राशि की हकदार नहीं हो सकती, कानूनी और तार्किक दोनों रूप से गलत है।
अनुच्छेद 14 का उल्लंघन
हाईकोर्ट ने माना कि केवल वैवाहिक स्थिति के आधार पर अधिकार से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
अदालत ने साफ कहा कि मृत कर्मचारी की अनुग्रह राशि और अवकाश नकदीकरण उसके कानूनी वारिसों को दिया जाना चाहिए, चाहे वे शादीशुदा हों या अविवाहित।