Jabalpur News: कानूनी अधिकार के तहत की गई आपराधिक शिकायत मानहानि नहीं: हाईकोर्ट

धारा 499 के अपवाद-8 के तहत संरक्षण, धारा 500 की कार्यवाही रद्द

जबलपुर | मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि कानूनी अधिकार के तहत सक्षम प्राधिकरण के समक्ष की गई आपराधिक शिकायत को मानहानि की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा कृत्य भारतीय दंड संहिता की धारा 499 के अपवाद-8 के अंतर्गत सुरक्षा कवच में आता है।

यह आदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति बी.पी. शर्मा की एकलपीठ ने पारित किया। न्यायालय ने इस फैसले के साथ तलाकशुदा पत्नी की शिकायत पर भोपाल न्यायालय द्वारा धारा 500 के तहत प्रारंभ की गई मानहानि की आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

यह है मामला

भोपाल निवासी सैयद राशिद अली द्वारा दायर याचिका में यह मांग की गई थी कि उनकी तलाकशुदा पत्नी द्वारा उनके खिलाफ मानहानि के तहत दर्ज आपराधिक प्रकरण को निरस्त किया जाए। याचिका में बताया गया कि विवाह के बाद विवाद उत्पन्न होने पर पत्नी ने उनके खिलाफ धारा 498-ए के तहत मामला दर्ज कराया था, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए एक वर्ष की सजा सुनाई थी। हालांकि, अपील में उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया, जिसकी चुनौती पत्नी द्वारा हाईकोर्ट में दी गई है और मामला अभी लंबित है।
तलाक के बाद आपराधिक शिकायत
याचिकाकर्ता ने बताया कि 498-ए का मामला दर्ज होने के बाद उन्होंने मुस्लिम कानून के तहत लिखित तलाक-ए-बैन दिया।

इसके बाद उन्होंने अपनी तलाकशुदा पत्नी और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471, 477, 494 एवं 149 के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में 14 अक्टूबर 2023 को न्यायालय ने पत्नी व अन्य आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया था।

मानहानि का आरोप

दोषमुक्ति के बाद तलाकशुदा पत्नी ने याचिकाकर्ता के खिलाफ धारा 499 एवं 500 के तहत मानहानि की शिकायत दर्ज कराई। आरोप लगाया गया कि झूठे और मनगढ़ंत आरोपों के जरिए उसके और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई कर मानसिक पीड़ा दी गई तथा समाज में बदनामी की गई। भोपाल के जेएफएमसी न्यायालय ने बयान के आधार पर याचिकाकर्ता के खिलाफ धारा 500 के तहत आपराधिक कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए थे।

हाईकोर्ट का स्पष्ट मत

हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि उन्होंने कानूनी अधिकार के तहत सक्षम प्राधिकरण के समक्ष शिकायत की थी। न्यायालय ने इस तर्क से सहमति जताते हुए कहा कि धारा 499 के अपवाद-8 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अच्छी नीयत से और कानूनी अधिकार का प्रयोग करते हुए शिकायत करता है, तो वह मानहानि नहीं मानी जाएगी।

एकलपीठ ने माना कि मामला धारा 499 के अपवाद-8 के अंतर्गत आता है, इसलिए याचिकाकर्ता के खिलाफ मानहानि का कोई अपराध नहीं बनता। इसी आधार पर भोपाल की अदालत में धारा 500 के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया गया।

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