भारत का बड़ा टेक लक्ष्य: 2032 तक 3-नैनोमीटर हाई-टेक चिप्स बनाएगी सरकार, अश्विनी वैष्णव का ऐलान

File photo of Union Minister Ashwini Vaishnaw.

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की फाइल फोटो।

फोटो क्रेडिट: ANI

नई दिल्ली | टेक्नोलॉजी डेस्क
भारत सेमीकंडक्टर तकनीक के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। केंद्रीय रेल, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार (27 जनवरी, 2026) को कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2032 तक 3-नैनोमीटर नोड के हाई-टेक छोटे चिप्स का निर्माण करना है, जिनका इस्तेमाल आधुनिक स्मार्टफोन, कंप्यूटर और अन्य अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में होता है। डिज़ाइन-लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) स्कीम के दूसरे चरण को लेकर 24 चयनित चिप डिज़ाइन कंपनियों के साथ बैठक के बाद मंत्री ने यह जानकारी दी।

 मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस

अश्विनी वैष्णव ने कहा, “2032 तक हमारा लक्ष्य 3-नैनोमीटर चिप्स के मैन्युफैक्चरिंग और डिज़ाइन लेवल तक पहुंचना है। डिज़ाइन का काम हम आज भी कर रहे हैं, लेकिन अब मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को भी उसी स्तर तक ले जाना जरूरी है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत पहले ही चिप डिज़ाइन के क्षेत्र में मजबूत स्थिति में है, लेकिन सरकार अब अत्याधुनिक निर्माण क्षमता विकसित करने पर विशेष जोर दे रही है।

सेमीकंडक्टर डिज़ाइन इकोसिस्टम को मिलेगी मजबूती

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य पूरे सेमीकंडक्टर डिज़ाइन इकोसिस्टम को बड़े पैमाने पर विकसित करना है। इसके लिए एकेडेमिया और इंडस्ट्री को नए आइडिया, नई सोच और नए समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे हम 2029 की ओर बढ़ेंगे, हमारे पास चिप्स को डिजाइन और मैन्युफैक्चर करने की ऐसी क्षमता होगी, जिसकी ज़रूरत भारत के लगभग 70–75 प्रतिशत एप्लीकेशनों में होती है।”

केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि भविष्य में हर सेक्टर—चाहे वह टेलीकॉम हो, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस या आईटी—इन छह तरह के चिप्स के अलग-अलग संयोजन पर निर्भर करेगा। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार दीर्घकालिक रणनीति के तहत सेमीकंडक्टर सेक्टर को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम कदम

विशेषज्ञों के अनुसार, 3-नैनोमीटर चिप्स के निर्माण की दिशा में यह घोषणा भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने की महत्वाकांक्षा को मजबूती देती है। इससे न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि देश में बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This will close in 0 seconds

error: Content is protected !!