नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं से जुड़ी सबसे बड़ी संस्था नेशनल हाईवे बिल्डर्स फेडरेशन (NHBF) ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के उस फैसले पर कड़ा विरोध जताया है, जिसमें 10 करोड़ रुपये या उससे अधिक राशि के दावों वाले विवादों को आर्बिट्रेशन के दायरे से बाहर रखने का प्रावधान किया गया है। यह निर्णय न केवल नए, बल्कि चल रहे और पहले से अनुबंधित प्रोजेक्ट्स पर भी लागू किया गया है, जहां अभी तक आर्बिट्रेशन शुरू नहीं हुआ था।
NHBF ने इस फैसले को “निष्पक्ष कॉन्ट्रैक्टिंग के स्थापित सिद्धांतों के खिलाफ” बताते हुए चेतावनी दी है कि इससे हाईवे निर्माण कंपनियों और कर्ज देने वाले वित्तीय संस्थानों दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
वित्त मंत्री से हस्तक्षेप की मांग
फेडरेशन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से अनुरोध किया है कि वे वित्त मंत्रालय के 2024 के आदेश को लेकर सेक्टर-विशिष्ट स्पष्टीकरण या मार्गदर्शन जारी करें। NHBF का कहना है कि मौजूदा स्वरूप में यह आदेश निवेश को हतोत्साहित करता है और परियोजनाओं की वित्तीय स्थिरता को कमजोर करता है।
12 जनवरी को जारी संशोधित विवाद समाधान सर्कुलर में सड़क परिवहन मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा था कि 10 करोड़ रुपये या उससे अधिक मूल्य के किसी भी विवाद को आर्बिट्रेशन में नहीं भेजा जाएगा, बल्कि सुलह (Conciliation) के माध्यम से निपटाया जाएगा।
चल रहे प्रोजेक्ट्स पर असर को लेकर चिंता
सड़क परिवहन सचिव वी. उमाशंकर को लिखे पत्र में NHBF ने मांग की है कि चल रहे प्रोजेक्ट्स के लिए संशोधित प्रावधानों को वापस लिया जाए। फेडरेशन का कहना है कि इस फैसले से प्रोजेक्ट्स का कैश फ्लो प्रभावित होगा, कर्ज चुकाने की क्षमता कमजोर पड़ेगी और बैंकों व अन्य वित्तीय संस्थानों की चिंताएं बढ़ेंगी। इसके परिणामस्वरूप बैंकिंग सिस्टम पर वित्तीय दबाव भी बढ़ सकता है।
निवेश और बैंकिंग सिस्टम पर जोखिम
17 जनवरी को वित्त मंत्री को लिखे एक अलग पत्र में NHBF ने कहा है कि संशोधित विवाद समाधान ढांचा अपने मौजूदा रूप में निवेश को हतोत्साहित करता है, प्रोजेक्ट लागत बढ़ाता है, काम में देरी करता है और वित्तीय जोखिम को अंततः बैंकिंग सिस्टम पर डाल देता है।
फेडरेशन ने यह भी रेखांकित किया कि हाईवे प्रोजेक्ट्स आमतौर पर लंबी रियायती अवधि, उच्च लीवरेज और स्थिर कैश फ्लो पर निर्भर होते हैं। ऐसे में विवाद समाधान तंत्र को सेक्टर-विशिष्ट जरूरतों के अनुसार कैलिब्रेट करना आवश्यक है।
बैंकरों से भी किया संपर्क
NHBF ने इस मुद्दे पर बैंकों और वित्तीय कर्जदाताओं से भी संपर्क किया है। फेडरेशन ने उनसे आग्रह किया है कि वे चल रहे प्रोजेक्ट्स के लिए हाईवे लोन पोर्टफोलियो पर आर्बिट्रेशन खत्म करने के प्रभाव का आकलन करें। साथ ही, BOT, HAM और EPC मॉडल के तहत आने वाले भविष्य के प्रोजेक्ट्स की बैंक-योग्यता (Bankability) पर भी इस फैसले के असर का मूल्यांकन करने को कहा गया है।