भक्ति और कृपा की दो अंगुल दूरी पर है परमात्मा – पं. सदभव तिवारी


आमखेड़ी। ग्राम आमखेड़ी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर कथा व्यास पं. सदभव तिवारी जी ने नंदनंदन राधारमण श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति के गूढ़ रहस्य से परिचित कराया। उन्होंने ओखली लीला का उल्लेख करते हुए बताया कि जब माता यशोदा ने भगवान को औखली से बांधने का प्रयास किया, तब हर बार रस्सी दो अंगुल कम पड़ जाती थी। इसके पीछे का भाव यह है कि भगवान और भक्त के बीच केवल दो अंगुल की दूरी है—एक अंगुल भक्ति की और दूसरी कृपा की। जहां सच्ची भक्ति होती है, वहां कृपा स्वतः प्राप्त होती है।
कथा के दौरान पं. सदभव तिवारी ने पूतना वध, शक्तासुर वध, ओखली लीला, कालिया नाग उद्धार और गोवर्धन पूजन जैसी दिव्य लीलाओं का रसपूर्ण वर्णन किया। इन प्रसंगों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति-रस में सराबोर कर दिया। कथा श्रवण के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भगवान की महिमा का स्मरण करते रहे।
पंचम दिवस पर गोवर्धन पूजन का उत्सव विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन, नृत्य और जयघोष के साथ गोवर्धन पूजन को बड़े धूमधाम से मनाया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन एवं आसपास के क्षेत्रों से आए भक्त उपस्थित रहे।
कथा का समापन भक्ति, प्रेम और समर्पण के संदेश के साथ हुआ, जिसमें कथा व्यास ने सभी को अपने जीवन में भक्ति को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।